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योजना चालू है

धनगर व अन्य एनटी-सी परिवारों के लिए आँगन मुर्गी पालन — 75% अनुदान पर 100 उन्नत देसी पक्षी और आहार

चालू होने का आधार: महाराष्ट्र शासन निर्णय 9 मार्च 2026: मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना (राज्य स्तर) (9 मार्च 2026, प्रस्तावना para 6: “मेंढपाळ कुटुंबांना चराई अनुदान, बंदिस्त मेंढीपालनांकरिता जागा खरेदी आणि कुक्कुट पालन याकरिता … शासन निर्णयान्वये मंजूर योजनांतर्गत अनुदान दिले जाते. सदर योजनाकरिता इतर मागास व विशेष मागासवर्ग प्रवर्ग कल्याण विभागाव्दारे निधी अर्थसंकल्पित करण्यात येत असल्याने …” (the paragraph’s reference numbers are offset by one from the GR’s own reference list))

100 backyard birds for NT-C families (75%, ₹9,000) · कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास व मत्स्य व्यवसाय विभाग, महाराष्ट्र सरकार · राज्य योजना

ग्रामीण क्षेत्र के एनटी-सी (धनगर व समान) परिवार को 100 चार सप्ताह के उन्नत देसी पक्षी (₹6,000) और 200 किलो आहार (₹6,000) की ₹12,000 लागत का 75% — ₹9,000 डीबीटी से मिलता है; हर ज़िले में 1,000 लाभार्थी।

मुख्य लाभ
75%लागत का, अधिकतम
घटक
1हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
कौन ले सकता है
सभीआवेदक
अंतिम तिथि
कोई नहींकभी भी आवेदन

क्या मिलता है

75%लागत का, अधिकतम

100 चार सप्ताह के उन्नत देसी पक्षी (₹60 प्रति) और दो महीने का 200 किलो आहार (₹30 प्रति किलो): ₹12,000 का 75% = ₹9,000।

स्रोत महाराष्ट्र शासन निर्णय 16 सितंबर 2019: एनटी-सी परिवारों को 75% पर 100 देसी मुर्गियाँ · धारा योजनेचे स्वरूप; योजनेचे आर्थिक निकष table rows 1–2 (feed read as 2 kg a bird per the corrigendum of 18.11.2019) · पृ. 1–2 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

केवल ग्रामीण क्षेत्र — महानगरपालिका, नगरपालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत या छावनी क्षेत्र नहीं (कार्यक्षेत्र)। उम्र 18–60, परिवार में एक व्यक्ति, पक्षियों के लिए अपनी जगह; 30% प्राथमिकता महिलाओं और 3% दिव्यांगों को (चयन मानदंड 1–4)। पक्षी या आहार की क़ीमत बढ़ने पर अतिरिक्त ख़र्च लाभार्थी का। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।

“४ आठवडे वयाच्या सुधारीत देशी प्रजातीच्या पक्ष्यांची खरेदी किंमत (प्रती पक्षी रु. ६०/- प्रमाणे) १०० रु. ६,०००/- … दोन महिन्याचे कुक्कुट पक्षी खाद्य … २०० कि.ग्रॅ. रु. ६,०००/- … एकूण प्रकल्प किंमत रु. १२,०००/- लाभार्थी हिस्सा रु. ३,०००/- शासन अनुदान रु. ९,०००/-”

मुझे कितना मिल सकता है?

आँकड़ा देखने के लिए परियोजना लागत भरें।

स्रोत महाराष्ट्र शासन निर्णय 16 सितंबर 2019: एनटी-सी परिवारों को 75% पर 100 देसी मुर्गियाँ · धारा योजनेचे स्वरूप; योजनेचे आर्थिक निकष table rows 1–2 (feed read as 2 kg a bird per the corrigendum of 18.11.2019) · पृ. 1–2 · हमारी प्रति (PDF)

केवल ग्रामीण क्षेत्र — महानगरपालिका, नगरपालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत या छावनी क्षेत्र नहीं (कार्यक्षेत्र)। उम्र 18–60, परिवार में एक व्यक्ति, पक्षियों के लिए अपनी जगह; 30% प्राथमिकता महिलाओं और 3% दिव्यांगों को (चयन मानदंड 1–4)। पक्षी या आहार की क़ीमत बढ़ने पर अतिरिक्त ख़र्च लाभार्थी का। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।

कौन आवेदन कर सकता है

  • सभी आवेदक

ज़रूरी काग़ज़

  • एनटी-सी (धनगर या समान) जाति प्रमाणपत्र (चयन मानदंड 1)

आवेदन कैसे करें

  1. पंचायत समिति के पशुधन विकास अधिकारी (विस्तार) से फ़ॉर्म लेकर तय अवधि में आवेदन करें (चयन मानदंड 5–6)।
  2. ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) की अध्यक्षता वाली ज़िला समिति तालुकावार लॉटरी से लाभार्थी चुनती है (समिति के कार्य)।
  3. एक दिन का मुर्गी पालन प्रशिक्षण लें, अपने ख़र्च से पक्षियों का आश्रय बनाएँ और पक्षी व आहार ख़रीदें (समिति के कार्य 1–4)।
  4. स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी और पशुधन विकास अधिकारी की संयुक्त जाँच के बाद ज़िला उपायुक्त अनुदान डीबीटी से देते हैं (समिति के कार्य 4)।

आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।

कब आवेदन करें

दिशानिर्देशों में कोई अंतिम तिथि नहीं है।

दूसरी योजनाओं के साथ

दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।