मुर्गी, बकरी और सूअर पालनNLM
ग्रामीण मुर्गी पालन पैरेंट फ़ार्म, हैचरी और मदर यूनिट की आधी लागत, अधिकतम ₹25 लाख।
निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
छोटे पशुओं की इकाइयाँ और प्रजनन फ़ार्म।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनग्रामीण मुर्गी पालन पैरेंट फ़ार्म, हैचरी और मदर यूनिट की आधी लागत, अधिकतम ₹25 लाख।
डेयरी और पशुपालनऋण के ब्याज में 3% प्रति वर्ष की छूट, अधिकतम 8 वर्ष।
फसल और किसान बीमापशुओं का उनके बाज़ार मूल्य पर मृत्यु बीमा कराने में प्रीमियम का 85% सरकार देती है; आप 15% देते हैं। यह सहायता प्रति परिवार 10 कैटल यूनिट तक है (सूअर और खरगोश के लिए 5; 10 भेड़, बकरी, सूअर या खरगोश = 1 कैटल यूनिट)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनपैकेज लागत का 75% सरकार (केंद्र + राज्य) देती है — अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% — जैसे 250 डीएफ़एल शहतूत इकाई के ₹7,50,000 पैकेज में ₹5,62,500।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धनगाँव में नई इकाई: परियोजना लागत का 25% (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला और अन्य विशेष श्रेणी के लिए 35%), ₹50 लाख तक की लागत पर।
डेयरी और पशुपालनआपकी गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर को हर छह महीने खुरपका-मुँहपका का टीका, और 4 से 8 महीने की मादा बछियों को एक बार ब्रुसेलोसिस का टीका लगता है; टीका, कान का टैग और टीका लगाने वाले का ख़र्च केंद्र देता है।
ऋण और ब्याज सहायताडेयरी, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन या दूसरे संबद्ध या ग़ैर-कृषि कारोबार के लिए ₹20 लाख तक का बिना गिरवी ऋण; यह चुकाना होता है, सब्सिडी नहीं है।
आय सहायताहर ग्रामीण छोटे या सीमांत किसान परिवार को, बटाईदारों सहित, ₹4,000 सालाना (₹2,000 खरीफ़ से पहले और ₹2,000 रबी से पहले)।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धननए व्यावसायिक कृषि उद्यम की स्थायी पूँजी लागत (ज़मीन छोड़कर) का 40% (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए 50%), प्रति परिवार अधिकतम ₹1 करोड़।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹1.50 लाख की 15 बकरियों वाली इकाई पर: सामान्य वर्ग को 25% (अधिकतम ₹37,500), अनुसूचित जाति और जनजाति को 33.3% (अधिकतम ₹50,000)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनकम से कम तीन प्रजनन योग्य सूअर (50 किलो से अधिक, 5 महीने से अधिक उम्र) पालने वाले ग्रामीण परिवार को एक बार ₹15,000, सूअरों के बीमा सहित।
डेयरी और पशुपालनचुने जाने पर ₹6,000 डीबीटी से, अगर आपके पास कम से कम एक संकर गाय, 10 वयस्क मादा बकरियाँ या एक संकर सूअरी है।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालननवजात पश्मीना मेमनों को सर्दी से बचाने वाले बाड़े का 90%।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनसूअर, मुर्गी, बकरी या डेयरी इकाई की लागत का 50% सब्सिडी, बाक़ी के लिए बैंक ऋण।
डेयरी और पशुपालन6 महीने से बड़ी बिना बीमे वाली गाय, भैंस या बैल की दुर्घटना में मृत्यु पर मालिक को ₹15,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनअनुसूचित जाति या जनजाति के लाभार्थी को 10 भेड़/बकरी + 1 नर की ₹90,000 इकाई लागत का 25% — ₹22,500।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनपाँच बकरियाँ या भेड़ें, मुफ़्त।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन250 पक्षियों की एक देसी मुर्गी इकाई के लिए ₹1.60 लाख बैक-एंडेड सब्सिडी (50%)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनमुफ़्त कड़कनाथ या टर्की चूज़े, और 20 अंडा देने वाली मुर्गियों, दाने और पिंजरे की मुफ़्त किट।
डेयरी और पशुपालनअधिकतम 2 दुधारू गाय या भैंस का एक साल का निःशुल्क बीमा; मूल्य प्रतिदिन के हर लीटर दूध पर ₹3,000 (गाय) या ₹4,000 (भैंस), प्रति पशु अधिकतम ₹40,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनआपकी ऊँटनी से जन्मे हर टोडिये पर ₹20,000 (2026-27 की राशि), 0–2 माह की आयु में पंजीकृत होने पर।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनअनुसूचित जनजाति लाभार्थी: बकरी इकाई (10 बकरियाँ, 1 बकरा और रखरखाव) की लागत का 50%, ₹1,20,000 तक गिनी जाती है, यानी अधिकतम ₹60,000।
डेयरी और पशुपालनइकाई 1 — पशु आहार (दाना): पूरी लागत, अधिकतम ₹4,000 (लगभग 150 किलो)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनअनुसूचित जाति: 1,000 ब्रॉयलर का फ़ार्म (1,500 वर्ग फ़ुट शेड, साधन, तीन बैच के चूज़े और आहार) — ₹9,06,000 का 90%, अधिकतम ₹8,15,000 (₹3,60,000 पूँजी + ₹4,55,000 चालू ख़र्च), जीवन में एक बार।
डेयरी और पशुपालनदुधारू गाय, भैंस या ऊँट: ₹37,500 प्रति पशु, परिवार को अधिकतम 3।
डेयरी और पशुपालन3 साल बीमे सहित 5 दुधारू गाय या भैंस (₹5,60,180), शेड (₹3,00,000) और 3 किलोवाट सोलर सहित उपकरण (₹2,75,000): ₹11,35,180 का 50% (₹5,67,590), अनुसूचित जाति/जनजाति 75% (₹8,51,385)।
डेयरी और पशुपालनचारा बीज या ठोंबे: व्यक्तिगत किसान को 1 हेक्टेयर के लिए ₹4,000 तक 100% (किसान समूह 5 हेक्टेयर और ₹20,000 तक), सामग्री के रूप में।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनढाँचे सहित 20 भेड़ + 1 मेढ़ा: ₹3,33,000 (स्थायी, ₹2,49,750) या ₹2,02,500 (घुमंतू, ₹1,51,875) का 75%।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनपरियोजना गाँवों के भूमिहीन परिवार के सदस्य और विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाएँ: 4 बकरी + 1 बकरे की इकाई (3 साल बीमा सहित) की मंज़ूर लागत का 75% — अधिकतम ₹36,239 (उस्मानाबादी/संगमनेरी) या ₹27,610 (अन्य स्थानीय नस्ल)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनशहतूत रोपण: ₹60,000 प्रति एकड़ का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — ₹45,000 या ₹54,000 प्रति एकड़।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनकम से कम 20 भेड़ और 1 मेढ़े वाले चरवाहा परिवार को जून–सितंबर के चार महीनों के लिए ₹6,000 प्रति माह — कुल ₹24,000 — चराई अनुदान।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनएकमुश्त अनुदान: ज़मीन (कम से कम 1 गुंठा) की क़ीमत या कम से कम 30 साल के पट्टे के किराए का 75%, अधिकतम ₹50,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन100 चार सप्ताह के उन्नत देसी पक्षी (₹60 प्रति) और दो महीने का 200 किलो आहार (₹30 प्रति किलो): ₹12,000 का 75% = ₹9,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन10 उस्मानाबादी / संगमनेरी बकरी + 1 बकरे की इकाई: ₹87,857 का 75% (छपा हुआ ₹65,893)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹77,456 इकाई लागत का 40% (₹30,982), अनुसूचित जाति/जनजाति को 60% (₹46,474)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनअ.जा. और अ.ज.जा.: बकरे की ख़रीद कीमत का 90%, अधिकतम ₹4,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनसूकरत्रयी (1 नर + 2 मादा): कीमत का 90%, अधिकतम ₹9,000 — केवल अ.जा. और अ.ज.जा.।
मत्स्य पालनएक मछली-सह-बत्तख इकाई (0.4 हे. तालाब, 160 बत्तख चूज़े) ₹1,53,350: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹1,22,680), अन्य को 70% (₹1,07,345)।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹1,02,000 इकाई लागत का 50% (सामान्य पुरुष) या 60% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग) — ₹51,000 या ₹61,200।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹4,00,000 इकाई लागत का 50% (सामान्य पुरुष) या 60% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग) — ₹2,00,000 या ₹2,40,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनलेयर फ़ार्म, प्रति 1,000 पक्षी (5,000 तक): शेड सहित ₹8.225 लाख का 60% / 50% (₹4.935 लाख / ₹4.1125 लाख), या बिना शेड ₹6.245 लाख (केज) / ₹4.825 लाख (डीप लिटर) का।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹2,30,000 इकाई लागत का 60% (महिला समूह, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति) या 50% (सामान्य पुरुष) — ₹1,38,000 या ₹1,15,000।
डेयरी और पशुपालनइकाई लागत का 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही: ₹5 लाख की डेयरी, सूअर या मुर्गी इकाई पर ₹2.25 लाख, ₹6 लाख की मिथुन इकाई पर ₹2.70 लाख, ₹15 लाख की मुर्गी उद्यम इकाई पर ₹6.75 लाख।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनज़िला परिषद या स्वायत्त ज़िला परिषद के ज़रिए चुने गए हर परिवार को आँगन में पालने के लिए 25 से 30 चूज़े (2–3 हफ़्ते के)।
डेयरी और पशुपालनजंगली जानवर के मारे हर पशु पर तय राशि: गाय या बैल ₹24,000, भैंस ₹25,000, बछड़ा ₹10,000, बकरी ₹12,000, भेड़ ₹20,000, सूअर ₹12,000, टट्टू ₹15,000, याक या ज़ो ₹30,000, मुर्गी ₹350 प्रति किलो।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनहर चुनी गई महिला को 20 मुर्गियाँ और 42 बत्तख के चूज़े।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनसरकारी कोया बाज़ार में बेचे गए हर किलो बाइवोल्टीन कोया पर ₹30, अगर आपकी उपज 100 रोग-मुक्त अंडों पर 60 किलो से ज़्यादा है।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनउत्तर कर्नाटक के ज़िले के बाइवोल्टीन कोया को किसी भी सरकारी कोया बाज़ार में बेचने पर हर किलो पर ₹10।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनग्रामीण किसान महिला या महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य को 5 सप्ताह की 20 देसी मुर्गियाँ।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनभेड़ एवं ऊन उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य को 20+1 भेड़/बकरी इकाई की ₹1,75,000 लागत पर 25% राज्य अनुदान — ₹43,750।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन10 मादा और 1 नर सूअर की इकाई: लागत का 25%, अधिकतम ₹1,00,000 तक गिनी जाएगी — अधिकतम ₹25,000।
डेयरी और पशुपालन15 मादा और 1 नर की भेड़ या बकरी इकाई: लागत का 90%, अधिकतम ₹98,000 तक — अधिकतम ₹88,200।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन₹70,000 की 10 मादा और 1 नर की भेड़ या बकरी इकाई, पूरा पैसा सरकार का: ₹52,500 विक्रेता को और ₹17,500 आपको वापस।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालन50 चूज़े (10 दिन के), दो पानी के बर्तन और दो दाना बर्तन, मुफ़्त आपके घर पर।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनपर्वतीय क्षेत्र में व्यवसायिक लेयर फार्म (15,000 पक्षी): परियोजना लागत का 40%, लागत अधिकतम ₹1.20 करोड़ तक — अधिकतम ₹48 लाख।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनब्रायलर फार्म (हर बैच 500 पक्षी): 6 बैच तक ₹15 प्रति पक्षी (₹45,000) और बाड़े के लिए एक बार ₹15,000 — प्रति फार्म ₹60,000।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनपरित्यक्त, विधवा, बेसहारा, अकेली या आपदा प्रभावित महिलाएँ: ₹35,000 की बकरी इकाई (3 मादा + 1 नर), पूरा ख़र्च राज्य देता है।
डेयरी और पशुपालनसूची में दी गई डेयरी, खच्चर, भेड़-बकरी, सूकर या मुर्गी इकाई के बैंक ऋण के ब्याज का 90% राज्य देता है।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनऊन ₹100 प्रति किलो से कम में बिके तो अंतर की राशि राज्य देगा।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनकारगिल के गाँव के झुंड (शहर में 300–400, गाँव में 500–600 पशु) पारंपरिक चरागाह में: गर्मियों के अधिकतम 5 महीने चरवाहे के मासिक मानदेय का 90% विभाग देता है; 10% गाँव वाले।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनभेड़/बकरी प्रजनन फ़ार्म (कम से कम 500 मादा + 25 नर) की पूँजी लागत का 50%, अधिकतम ₹50 लाख, दो किस्तों में।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
ग्रामीण मुर्गी पालन पैरेंट फ़ार्म, हैचरी और मदर यूनिट की आधी लागत, अधिकतम ₹25 लाख।
इकाई में कम लागत तकनीक वाली कम से कम 1000 पैरेंट लेयर मुर्गियाँ हों (मद 2)। कार्यशील पूँजी, निजी वाहन, ज़मीन ख़रीद या ज़मीन के किराये/पट्टे पर सब्सिडी नहीं। सब्सिडी सिडबी के ज़रिये आपके ऋण देने वाले बैंक को दो बराबर किस्तों में आती है — पहली, बैंक की पहली ऋण किस्त जारी होने पर (या अपने हिस्से से 25% ख़र्च करने पर), दूसरी परियोजना पूरी होने पर।
“One Time 50% capital subsidy of the total project cost will be provided with maximum subsidy up to Rs. 25 lakhs for each unit.”भेड़ या बकरी प्रजनन इकाई की आधी लागत, पशुओं की संख्या के हिसाब से अधिकतम सीमा।
कार्यशील पूँजी, निजी वाहन, ज़मीन ख़रीद या ज़मीन के किराये/पट्टे पर सब्सिडी नहीं। सब्सिडी सिडबी के ज़रिये आपके ऋण देने वाले बैंक को दो बराबर किस्तों में आती है — पहली, बैंक की पहली ऋण किस्त जारी होने पर (या अपने हिस्से से 25% ख़र्च करने पर), दूसरी परियोजना पूरी होने पर।
“50% capital subsidy up to ₹. 50 lakhs in two instalments.”सूअर प्रजनन फ़ार्म की आधी लागत, आकार के हिसाब से अधिकतम ₹15 लाख या ₹30 लाख।
कार्यशील पूँजी, निजी वाहन, ज़मीन ख़रीद या ज़मीन के किराये/पट्टे पर सब्सिडी नहीं। सब्सिडी सिडबी के ज़रिये आपके ऋण देने वाले बैंक को दो बराबर किस्तों में आती है — पहली, बैंक की पहली ऋण किस्त जारी होने पर (या अपने हिस्से से 25% ख़र्च करने पर), दूसरी परियोजना पूरी होने पर।
“One time 50% capital subsidy of the total project cost will be provided with a maximum subsidy up to Rs. 30 lakhs for each unit subject to the scheme guidelines.”देसी घोड़ा, गधा या ऊँट प्रजनन फ़ार्म की आधी लागत, पशुओं की संख्या के हिसाब से अधिकतम सीमा (₹3 लाख से ₹50 लाख)।
केवल देसी नस्लें — थोरोब्रेड घोड़ों के फ़ार्म को सहायता नहीं। आवास, प्रजनन पशु, बीमा, चारे के लिए ज़मीन तैयारी और उपकरण शामिल (अनुलग्नक IV–VI)। कार्यशील पूँजी, निजी वाहन, ज़मीन ख़रीद या ज़मीन के किराये/पट्टे पर सब्सिडी नहीं। सब्सिडी सिडबी के ज़रिये आपके ऋण देने वाले बैंक को दो बराबर किस्तों में आती है — पहली, बैंक की पहली ऋण किस्त जारी होने पर (या अपने हिस्से से 25% ख़र्च करने पर), दूसरी परियोजना पूरी होने पर।
“One Time 50% capital subsidy of the total project cost will be provided with maximum subsidy up to ₹ 50 lakh for each unit.”वन अधिकार (एफ़आरए पट्टा) वाले अनुसूचित जनजाति परिवारों के लिए: बकरी/भेड़, अंडा देने वाली मुर्गी या सूअर इकाई का 90%, ज़्यादातर पशु और सामान के रूप में — इकाई के हिसाब से ₹25,000 से ₹1,00,000 तक।
केवल वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा वाले अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों के लिए, पीएम-जुगा गाँवों में (500+ आबादी और कम से कम 50% जनजाति, या आकांक्षी ज़िलों के 50+ जनजाति वाले गाँव), जिन्होंने बकरी/भेड़, घरेलू मुर्गी या सूअर पालन का प्रशिक्षण लिया हो और 10% हिस्सा दे सकें। इकाई में पशु, रात का आश्रय, छह महीने का चारा, पशु चिकित्सा और एक साल का बीमा शामिल। जनजातीय कार्य विभाग की अगुवाई वाली ज़िला समिति लाभार्थी चुनती है; राज्य को पशु और सामान वस्तु रूप में देने की सलाह है, केवल आश्रय की लागत आपके जन धन खाते में। मद 1 के शीर्षक में "10 बकरी/भेड़ और एक नर" पर पाठ में "दो नर" छपा है; मद iv में ₹25,000 सीमा के साथ "₹50,000" भी छपा है — हम कम सीमा दिखाते हैं।
“a) Rearing of goat: The Central Government will provide 90% subsidy up to ₹100000 … i. Establishment of Breeding unit of 10 doe or ewe and one buck or ram … ii. Establishment of Breeding unit of5 doe and one buck: Subsidy will be provided up to 90% limited Rs 50000 … iii. Establishment of Poultry Unit for laying of eggs (200 birds’ unit): The Central Government will provide up to 90% subsidy limited to Rs. 50000/- … iv. Establishment of Poultry Unit for laying of eggs (100 birds’ unit): The Central Government will provide up to 90% subsidy limited to Rs. 25000/- … v. Establishment of Breeding unit of 5 sow and one boar unit: Subsidy will be provided upto 90% limited Rs 60000”आधुनिक भेड़/बकरी या सूअर प्रजनन फ़ार्म, या नियंत्रित वातावरण वाली हैचरी, लेयर या ब्रॉयलर-ब्रीडर मुर्गी फ़ार्म के ऋण के ब्याज में 3% प्रति वर्ष छूट, अधिकतम 8 साल।
तकनीक-उन्नत भेड़-बकरी प्रजनन फ़ार्म (पारंपरिक पालन नहीं), बकरी फ़्रोज़न-वीर्य और भेड़ वीर्य केंद्र; सूअर प्रजनन और फ़ैटनिंग फ़ार्म व वीर्य केंद्र; पैरेंट/ग्रैंड-पैरेंट स्टॉक वाले तकनीक-आधारित मुर्गी फ़ार्म — नियंत्रित वातावरण वाली हैचरी, लेयर और ब्रॉयलर-ब्रीडर फ़ार्म, और मुर्गी फ़ार्म-सह-आहार की एकीकृत परियोजनाएँ (दिशानिर्देश 3.0, धारा 6.4.2–6.4.4)। हर एएचआईडीएफ़ गतिविधि जैसा ही लाभ: 8 साल तक (2 साल की मोहलत सहित) ब्याज में 3% प्रति वर्ष छूट, खाता एनपीए न होने तक ऋणदाता को; परियोजना लागत का 90% तक ऋण (दिशानिर्देश 3.0, धारा 8.1, 13.2)। ज़मीन, कार्यशील पूँजी, पूर्व-परिचालन ख़र्च, निर्माण अवधि का ब्याज, पुरानी संपत्ति या निजी वाहन पर नहीं। एक परियोजना यह एक ही बार ले सकती है, और किसी दूसरी केंद्र/राज्य ब्याज छूट के साथ नहीं (धारा 14)।
“(iv) Breed Improvement technology and Breed Multiplication Farm … 6.4.4 (d): Integrated projects for poultry farm and poultry feed with related activities … 9.1.2 … Henceforth new sanction made after 1.04.2024 will avail 3% Interest Subvention under the new realigned AHIDF Scheme.”पैकेज लागत का 75% सरकार (केंद्र + राज्य) देती है — अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% — जैसे 250 डीएफ़एल शहतूत इकाई के ₹7,50,000 पैकेज में ₹5,62,500।
आपका 75% (या 90%) केंद्रीय रेशम बोर्ड और राज्य के हिस्से को मिलाकर है; यह राज्य के अपना हिस्सा देने पर निर्भर है। विशेष दर्जे वाले राज्यों में सभी को 90% मिलता है; केवल राज्य से हम यह तय नहीं कर सकते, इसलिए 75% दिखाते हैं। यह पैटर्न पूर्वोत्तर से बाहर के राज्यों का है — पूर्वोत्तर में परियोजना-आधारित अलग वित्तपोषण है। पैकेज में पौधारोपण, सिंचाई, पालन घर, उपकरण और कीटाणुनाशक शामिल हैं; पैकेज सीमा के भीतर घटकों में बदलाव हो सकता है (32)।
“The fund sharing pattern (%) for individual beneficiary-oriented Silk Samagra-2 components other than States in NE region: Category (Small and Marginal Farmers) — General States GOI (CSB) 50% State 25% Beneficiary 25%; General States – For SCSP & TSP 65% 25% 10%; Special Status States (for General, SCSP & TSP Category) 80% 10% 10%”आपकी भेड़-बकरियों (घुमंतू रेवड़ सहित) को पीपीआर और सूअरों को क्लासिकल स्वाइन फ़ीवर का टीका लगता है; टीका और टीका लगाने वाले का ख़र्च केंद्र देता है।
भेड़, बकरी और सूअर के झुंड का पंजीकरण भारत पशुधन पर झुंड पर एक कान टैग से होता है (खंड 2.4.5, 3.1.4 iv)।
“3.1.2. Salient features — Under this component Government of India, centrally procure and supply PPR and CSF vaccines and small animal ear tags to States & UTs after quality control testing to ensure uniform quality. … 3.1.3. Funding pattern — For CADCP 100% funding is provided by the Central Government. 3.1.4 … ii. Vaccine Administration: Under PPR-EP, entire sheep and goat population of India, including migrant flocks are vaccinated … iii. Under CSF, entire pig population is vaccinated by CSF vaccine”बर्ड फ़्लू, अफ़्रीकन स्वाइन फ़ीवर या ग्लैंडर्स रोकने के लिए आपकी मुर्गियाँ, सूअर या घोड़े मारे जाएँ, या मुर्गी दाना और अंडे नष्ट किए जाएँ, तो राज्य आपको मुआवज़ा देता है, जिसका आधा केंद्र देता है।
दिशानिर्देशों में प्रति पक्षी या पशु कोई रुपया दर नहीं छपी है — अनुलग्नक-6 कहता है मुआवज़ा “माँग और रिपोर्ट जमा करने के अनुसार” दिया जाता है। मारने की कार्रवाई के बाद राज्य पशुपालन विभाग इसका भुगतान करता है।
“3.2.4 … b. … Assistance shall also be given for ring vaccination to inhibit the spread of the diseases (in cases of disease outbreaks) as well as towards payment of compensation to farmers for culling of poultry birds, elimination of infected animals, destruction of poultry feed /eggs, including operational costs. … Annexure-6: PAYMENT FOR COMPENSATION TO FARMER FOR CULLING (50:50) i ASF (African Swine Fever) ii AI (Avian Influenza) iii Glanders — Given as per demand & report submission in 50:50”ग्रामीण भूमिहीन कृषि परिवार को अपनी पसंद की एक आजीविका इकाई शुरू करने के लिए एक बार ₹12,500, तीन किस्तों में।
उन ग्रामीण भूमिहीन मज़दूरों के लिए जिनकी मुख्य आजीविका खेती है और जो ओडिशा के स्थायी निवासी हैं (“Eligibility criteria”, पृ. 2)। मनरेगा जॉब कार्ड के साथ आवेदन करें।
“Under Livelihood support for Landless Agricultural Households, financial assistance of Rs. 12,500/- to be provided in three installments for enhancing the income and overall wellbeing of rural landless agricultural households.”₹1.50 लाख की 15 बकरियों वाली इकाई पर: सामान्य वर्ग को 25% (अधिकतम ₹37,500), अनुसूचित जाति और जनजाति को 33.3% (अधिकतम ₹50,000)।
इकाई लागत ₹1.50 लाख (क्रम 2): 2 बकरे ₹12,000 और 13 बकरियाँ ₹7,500 के भाव से, साथ में बर्तन, एक साल का बीमा और 3 महीने का आहार (क्रम 1)। घटकवार तालिका में अनुसूचित जाति/जनजाति को कुल ₹50,000 और अन्य को ₹37,500 है; ₹1.50 लाख का 33.3% ₹49,950 बनता है। बकरी शेड का पैसा नहीं मिलता — ख़ुद या मनरेगा से बनाएँ। गौठानों में काम करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता (क्रम 4, बिंदु 4)। संयुक्त परिवार से एक ही व्यक्ति; 5 साल तक दोबारा लाभ नहीं (क्रम 4, बिंदु 8–10)।
“सामान्य श्रेणी हितग्राही हेतु इकाई लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम रू. 37500.00 अ.जा./अ.ज.जा. हितग्राही हेतु कुल वित्तीय लागत का 33.3 प्रतिशत, अधिकतम रू. 50000.00”कम से कम तीन प्रजनन योग्य सूअर (50 किलो से अधिक, 5 महीने से अधिक उम्र) पालने वाले ग्रामीण परिवार को एक बार ₹15,000, सूअरों के बीमा सहित।
केवल ग्रामीण क्षेत्र, शहरी या नगरपालिका क्षेत्र नहीं (A.2)। सूअर फ़ार्म का पहले ज़िला समिति से पंजीकरण ज़रूरी है (A.3)। हर घर से एक व्यक्ति, एकमुश्त प्रोत्साहन (A.4)। गिने जाने वाले सूअर 50 किलो से अधिक वज़न और 5 महीने से अधिक उम्र के हों, और तीन प्रजनन योग्य सूअरों में एक से अधिक नर न हो; हर सूअर पर स्थायी टैग या टैटू लगता है (A.5, A.7, A.11)। तीन प्रजनन योग्य सूअरों का एक साल का बीमा ₹12,000 प्रति सूअर बाज़ार मूल्य के 4% पर ज़रूरी है, और बीमा अवधि में या पहली बार ब्याने तक इन्हें बेचा नहीं जा सकता; प्रीमियम प्रोत्साहन राशि में से बीमा कंपनी को जाता है (A.6, A.14)। सूअरों का स्वाइन फ़ीवर और खुरपका-मुँहपका का टीकाकरण ज़रूरी है (C.1)। दिशानिर्देश 2022 के हैं और हमें 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश नहीं मिला जो पुष्टि करे कि योजना अब भी खुली है — अपने पशु चिकित्सा कार्यालय से पूछें।
“The household shall rear at least three breedable pigs in which the male shall not be more than one and each pig shall have live body weight of more than 50 kg and shall be above 5 months of age in order to be eligible to receive incentive under the scheme. Such household shall receive an incentive of Rs. 15,000/- including the cost of insurance of 3 breedable pigs.”50 किलो और 5 महीने से बड़े सूअरों का झुंड बढ़ने पर कुल प्रोत्साहन ₹25,000 (4–10 सूअर), ₹35,000 (11–20 सूअर) या ₹50,000 (21 या अधिक सूअर) तक जाता है।
केवल ग्रामीण क्षेत्र, शहरी या नगरपालिका क्षेत्र नहीं (A.2)। सूअर फ़ार्म का पहले ज़िला समिति से पंजीकरण ज़रूरी है (A.3)। हर घर से एक व्यक्ति, एकमुश्त प्रोत्साहन (A.4)। गिने जाने वाले सूअर 50 किलो से अधिक वज़न और 5 महीने से अधिक उम्र के हों, और तीन प्रजनन योग्य सूअरों में एक से अधिक नर न हो; हर सूअर पर स्थायी टैग या टैटू लगता है (A.5, A.7, A.11)। तीन प्रजनन योग्य सूअरों का एक साल का बीमा ₹12,000 प्रति सूअर बाज़ार मूल्य के 4% पर ज़रूरी है, और बीमा अवधि में या पहली बार ब्याने तक इन्हें बेचा नहीं जा सकता; प्रीमियम प्रोत्साहन राशि में से बीमा कंपनी को जाता है (A.6, A.14)। सूअरों का स्वाइन फ़ीवर और खुरपका-मुँहपका का टीकाकरण ज़रूरी है (C.1)। दिशानिर्देश 2022 के हैं और हमें 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश नहीं मिला जो पुष्टि करे कि योजना अब भी खुली है — अपने पशु चिकित्सा कार्यालय से पूछें।
“Once the number of pigs having live body weight of more than 50 kg with a minimum age of 5 months in the farm under the same household reaches the range of 4-10 pigs, the farmer shall be eligible to receive a total incentive of Rs. 25,000/- therefore, additional Rs. 10,000 as an incentive will be paid. … reaches the range of 11-20 pigs, the farmer shall be eligible to receive a total incentive of Rs. 35,000/- therefore, additional Rs. 10,000 as an incentive will be paid. … reaches 21 pigs and above, the farmer shall be eligible to receive a total incentive of Rs. 50,000/- therefore, additional Rs. 15000 as an incentive will be paid.”चुने जाने पर ₹6,000 डीबीटी से, अगर आपके पास कम से कम एक संकर गाय, 10 वयस्क मादा बकरियाँ या एक संकर सूअरी है।
चयन सीमित है: तालिका में एक साल में 5,000 पशुपालकों को सम्मानित करने और उन परिवारों को चुनने की बात है जिन्हें पिछले दौर में यह राशि नहीं मिली, इसलिए यह हर किसान का अधिकार नहीं है। लाभ तालिका में “Yearly” लिखा है, पर हर दौर में नए परिवार चुने जाते हैं; इसलिए हम इसे एकमुश्त सम्मान राशि के रूप में दिखा रहे हैं। यह तालिका बीएमएस योजना एसओपी में दी गई है, अलग से प्रकाशित किसी आदेश में नहीं।
“Selected livestock farmers having at least one crossbreed cow /10 female adult goats/ one crossbreed sow will be provided an honorarium of Rs 6,000 /- 2)Honorarium will be provided through DBT mode.”पश्मीना, दुधारू बकरी या मेरिनो की शुरुआती इकाई (5 मादा + 1 नर, या 9 + 1) का 75%।
केवल लेह ज़िला। जंगली जानवरों या कुत्तों के हमले में पशु खोने वालों को प्राथमिकता; चयन विभाग के अधिकारी करते हैं, पार्षद मंज़ूरी देते हैं।
“Provision of Subsidy for establishment of 10 units of 5 Nos. of (5F+1M)/05 Nos. of (9F+1M) units of Pashmina/Dairy goat/ Merino in Leh district @ 75% subsidy Mode: 75% Govt share, 25 % beneficiary share.”कुत्तों और जंगली जानवरों से बचाने वाले पशु बाड़े या चेन-लिंक घेरे का 75%।
केवल लेह ज़िला। कुत्तों या जंगली जानवरों के हमले वाले इलाक़े में कम से कम 30 भेड़-बकरियाँ होनी चाहिए; चबूतरा आप स्वयं बनाते हैं।
“Provision of subsidy for establishment of livestock shed I Chain link in Leh district @ 75% subsidy. Mode: 75% Govt share; 25% beneficiary share.”कुत्तों के हमले रोकने वाली सौर बिजली बाड़ का 75%।
लेह ज़िले में पायलट। कम से कम 30 भेड़-बकरियाँ; भेड़-बकरी पालक सहकारी समितियों को वरीयता।
“Pilot project on provision of subsidy on electric fencing to curb dog attacks on 75% subsidy (Leh District). Mode: 75% Govt share, 25% beneficiary share.”प्रशिक्षण के बाद दी जाने वाली पोर्टेबल ऊन कतरने की मशीन का 75%।
केवल लेह ज़िला। कम से कम 30 भेड़; झुंड के आकार के घटते क्रम में चयन, पार्षद की सिफ़ारिश पर।
“Subsidy on wool shearing machine @ 75% subsidy to progressive sheep rearers of Leh district (Leh District). . Mode: 75% Govt. share, 25% subsidy share.”पशुपालकों के लिए ऊन और पश्मीना कताई मशीन का 75%।
केवल लेह ज़िला। कम से कम 30 भेड़-बकरियाँ होनी चाहिए; लाभार्थी विभाग चुनता है और क्षेत्र के पार्षद (काउंसलर) मंज़ूरी देते हैं।
“Provision of spinning unit @75% subsidy to progressive sheep rearers of Leh district(Leh District).”भेड़-बकरी की खाद से बिकाऊ जैव-उर्वरक बनाने वाले 2 टन क्षमता के संयंत्र का 75%।
केवल लेह ज़िला। कम से कम 50 भेड़-बकरियाँ; सामुदायिक पालक भी आवेदन कर सकते हैं; 2025-26 के लिए केवल 10 इकाइयाँ।
“Subsidy on Organic bio fertilizer plant with 2 tonnes capacity @ 75% subsidy to Sheep and Goat rearers with more than 50 no of sheep/goat holdings(Leh District). Mode: 75% Govt.share, 25% beneficiary share.”नवजात पश्मीना मेमनों को सर्दी से बचाने वाले बाड़े का 90%।
लेह ज़िला (चांगथांग)। 200–300 पशु: 1 बाड़ा; 300–500: 2 बाड़े; 500 और अधिक: 3 बाड़े।
“Construction and installation of kid pen/Shed for pashmina goats @ 90 % subsidy (Leh District).”सूअर, मुर्गी, बकरी या डेयरी इकाई की लागत का 50% सब्सिडी, बाक़ी के लिए बैंक ऋण।
2025-26 के भाषण के अनुसार सूअर पालन के लिए 1,357 लोगों को 50% ऋण-आधारित सब्सिडी मंज़ूर हुई (पैरा 6.1)। 2026-27 का भाषण 2026-27 से मछली पालकों को भी सीएम-एलिवेट में जोड़ता है (पैरा 3.2.4) और पॉलीहाउस, संग्रह केंद्र, कोल्ड स्टोरेज और मछली तालाब के लिए 50% से 75% की नई योजनाएँ बताता है (पैरा 3.6.2) — इनकी अलग-अलग दरें नहीं छपीं, इसलिए यहाँ नहीं दिखाई गईं।
“To boost productivity, the State is scaling up livestock entrepreneurship under CM-Elevate by providing subsidies and credit support across piggery, poultry, goatery and dairy sectors. About 2,000 entrepreneurs have been supported with 50% credit linked subsidy.”दुर्घटना में मरी 6 महीने से बड़ी भेड़ या बकरी पर ₹7,500, या 3–6 महीने वाली पर ₹5,000।
“Ex-gratia for accidental death of small animals (Karnataka Sheep & Wool Development Corporation): For accidental death, an amount of Rs.7500/- for sheep/goats above 6 months and Rs. 5000/- for sheep/goats aged 3-6 months, compensation will be distributed to their owners.”अनुसूचित जाति या जनजाति के लाभार्थी को 10 भेड़/बकरी + 1 नर की ₹90,000 इकाई लागत का 25% — ₹22,500।
केवल अनुसूचित जाति और जनजाति के लाभार्थियों के लिए। पृष्ठ लाभार्थी के 75% (₹67,500) हिस्से को “स्वैच्छिक” लिखता है; इसके लिए बैंक ऋण मिलेगा या नहीं, यह नहीं बताता।
“Distribution of 10+1 Sheep/Goat Unit under Special component program /Tribal Sub plan (Karnataka Sheep & Wool Development Corporation): Unit | Unit Cost | Subsidy 25% Percent | Beneficiary Voluntary 75% — 10+1 sheep/goat unit distribution to Scheduled caste and scheduled tribe beneficiaries | Rs:90,000/- | Rs:22500/- | Rs.67500/-”पाँच बकरियाँ या भेड़ें, मुफ़्त।
केवल गाँवों में रहने वाली बेसहारा विधवाओं, परित्यक्त महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और दिव्यांगजनों के लिए — हमारी आवेदक श्रेणियाँ यह नहीं दिखा सकतीं, इसलिए शर्त ख़ुद जाँचें।
“under the ‘Vetri Magalir Goat Rearing Scheme’, five goats or sheep will be provided with a 100 per cent subsidy to destitute widows, deserted women, transgender persons and persons with disabilities living in rural areas, benefiting about 30,000 eligible persons.”250 पक्षियों की एक देसी मुर्गी इकाई के लिए ₹1.60 लाख बैक-एंडेड सब्सिडी (50%)।
₹1.60 लाख सब्सिडी की राशि है (इकाई का 50%); नीति नोट 2025-26 का तरीक़ा बताता है और इस साल उसी 50% बैक-एंडेड सब्सिडी पर 100 और इकाइयों की घोषणा करता है। एक लाभार्थी को एक इकाई।
“Under this scheme, each beneficiary was provided 50% back ended subsidy of Rs.1.60 lakh for the establishment of the unit including poultry shed, purchase of equipment like feeder and waterer, besides feed cost for 4 months. 250 numbers of 4-week-old Native chicks are provided to each beneficiary through Departmental Farms.”मुफ़्त कड़कनाथ या टर्की चूज़े, और 20 अंडा देने वाली मुर्गियों, दाने और पिंजरे की मुफ़्त किट।
भाषण यह नहीं बताता कि हर परिवार को कितने कड़कनाथ या टर्की चूज़े मिलेंगे।
“To tap backyard poultry and to enhance rural economy by selling meat and egg, 6 weeks grown 12,000 Kadaknath birds, 25,000 Turkey poults will be distributed free of cost. Further, a kit of 20 egg laying hens, feed and cage will be distributed free of cost to 2,500 beneficiaries.”अधिकतम 10 मादा भेड़ या 10 मादा बकरी का एक साल का निःशुल्क बीमा, प्रति पशु अधिकतम ₹4,000।
बीमा योग्य आयु 1–6 वर्ष। 10 भेड़ या बकरी एक कैटल यूनिट हैं; 10 से कम हों तो जितनी हैं उनका बीमा हो सकता है।
“बकरी (मादा): अधिकतम राशि रू. 4000 प्रति पशु; भेड़ (मादा): अधिकतम राशि रू. 4000 प्रति पशु”अधिकतम 10 ऊँट (नर या मादा) का एक साल का निःशुल्क बीमा, प्रति पशु अधिकतम ₹40,000।
बीमा योग्य आयु 2–15 वर्ष।
“ऊंट (नर एवं मादा): अधिकतम राशि रू. 40000 प्रति पशु”आपकी ऊँटनी से जन्मे हर टोडिये पर ₹20,000 (2026-27 की राशि), 0–2 माह की आयु में पंजीकृत होने पर।
2023 के योजना विवरण में प्रति टोडिया ₹10,000 दो किस्तों (₹5,000 प्रत्येक) में थे; 2026-27 के आउटपुट-आउटकम बजट में ₹20,000 छपा है। राशि बढ़ाने वाला आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए ₹20,000 की किस्तें नहीं दिखाई गईं। यहाँ 100% का अर्थ केवल प्रति टोडिया तय राशि है।
“Financial assistance to camel breeders with an incentive amount of Rs 20,000”अनुसूचित जनजाति लाभार्थी: बकरी इकाई (10 बकरियाँ, 1 बकरा और रखरखाव) की लागत का 50%, ₹1,20,000 तक गिनी जाती है, यानी अधिकतम ₹60,000।
इकाई लागत: 10 बकरियाँ ₹5,000 प्रति और 1 बकरा ₹10,000 (₹60,000) और रखरखाव ₹60,000 — खाने-पानी के बर्तन, आवास व बाड़, चारा, दवा और अन्य ख़र्च (पृ.4)। खाना, पानी, चारा, आवास और दाने का 50% ख़र्च आपको उठाना है (शर्त 17) और इकाई 3 साल रखनी है (शर्त 18)। 25% लाभ महिलाओं के लिए; परिवार को जीवन में एक बार (शर्त 2–3)।
“સહાયની વિગત : રૂ. ૧,૨૦,૦૦૦/- યુનિટ કિંમતના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૬૦,૦૦૦/- અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચ, બે માંથી જે ઓછુ હોય તે”इकाई 2 — 5 बकरियों और 1 बकरे की इकाई: लागत का 90%, ₹56,000 तक गिनी जाती है, यानी अधिकतम ₹50,400।
इकाई लागत ₹56,000: 5 बकरियाँ ₹5,000 प्रति, 1 बकरा ₹10,000, चारा-दाना ₹15,400, अन्य ₹5,600; 10% (₹5,600) आपका हिस्सा। इकाई 3 साल रखनी है (शर्त 4–6)।
“સહાયની વિગત : એક બકરાં એકમ ખર્ચ ₹.૫૬,૦૦૦/-ના ૯૦% મુજબ મહત્તમ ₹.૫૦,૪૦૦/- અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચ, બે માંથી જે ઓછુ હોય તે.”इकाई 3 — 100 ब्रॉयलर मुर्गियों की इकाई: लागत का 75%, अधिकतम ₹36,000 (एक इकाई लगभग ₹48,000 की), साथ में ₹2,000 मुर्गी-पालन प्रशिक्षण वज़ीफ़ा।
₹2,000 वज़ीफ़ा प्रशिक्षण के लिए अलग से मिलता है (परिशिष्ट-3, शर्त 1, पृ.6), इस राशि में शामिल नहीं। इकाई कम से कम दो साल में चार बैच चलानी है; सहायता केवल पहले बैच पर (शर्त 8, पृ.7)।
“તાલીમ સ્ટાઈપેન્ડ રૂ.૨,૦૦૦/- તથા ૧૦૦ બ્રોઈલર પક્ષી યુનિટ કુલ ખર્ચનાં ૭૫% સહાય મહત્તમ રૂ.૩૬,૦૦૦/- કુલ રૂ.૩૮,૦૦૦/-”अनुसूचित जाति: 10 बकरी + 1 बकरा और रख-रखाव की इकाई — ₹1,20,000 का 50%, अधिकतम ₹60,000, परिवार को जीवन में एक बार।
1–2 साल की बकरियाँ और 2–3 साल का बकरा; आहार, चारा और रहने का 50% ख़र्च आपका; इकाई तीन साल रखनी होगी (शर्त 8–10)। अनुसूचित जनजाति परिवारों के लिए अलग 10+1 बकरी योजना है (gj-st-bakra-ekam-10-plus-1)।
“સહાયની વિગત રૂ. ૧,૨૦,૦૦૦/- યુનિટની કિંમતના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ.૬૦,૦૦૦/- અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછુ હોય તે.”अनुसूचित जाति: 25 आरआईआर/कड़कनाथ पक्षी (6–8 हफ़्ते) और आहार की इकाई — ₹8,000 का 75% = ₹6,000, पक्षी और आहार के रूप में; रात का दड़बा और दाना-पानी के बर्तन (₹2,000) आप लाएँ।
केवल उनके लिए जिन्होंने इसी साल मुर्गी-पालन प्रशिक्षण लिया; परिवार को जीवन में एक बार; इकाई 2 साल रखनी होगी।
“આમ આ યોજના હેઠળ કુલ એકમ ખર્ચ રૂ. ૮૦૦૦/-ના ૭૫% લેખે રૂ. ૬૦૦૦/- સહાય આપવાની રહેશે જ્યારે એકમનો ૨૫% ખર્ચ રૂ. ૨૦૦૦/- લાભાર્થીએ પોતાના ફાળા તરીકે ભોગવવાનો રહેશે.”अनुसूचित जनजाति: 25 आरआईआर/कड़कनाथ पक्षी (6–8 हफ़्ते) और आहार की इकाई — ₹8,000 का 75% = ₹6,000, पक्षी और आहार के रूप में; रात का दड़बा और दाना-पानी के बर्तन (₹2,000) आप लाएँ।
केवल उनके लिए जिन्होंने इसी साल मुर्गी-पालन प्रशिक्षण लिया; परिवार को जीवन में एक बार; इकाई 2 साल रखनी होगी।
“આમ આ યોજના હેઠળ કુલ એકમ ખર્ચ રૂ. ૮૦૦૦/-ના ૭૫% લેખે રૂ. ૬૦૦૦/- સહાય આપવાની રહેશે જ્યારે એકમનો ૨૫% ખર્ચ રૂ. ૨૦૦૦/- લાભાર્થીએ પોતાના ફાળા તરીકે ભોગવવાનો રહેશે.”अनुसूचित जाति: 100 ब्रॉयलर का फ़ार्म (10×10 फ़ुट शेड, साधन, चूज़े, आहार) — ₹48,000 का 75%, अधिकतम ₹36,000, जीवन में एक बार।
मुर्गी-पालन प्रशिक्षण, अपनी (या 5 साल के पट्टे की) ज़मीन ज़रूरी; फ़ार्म कम से कम दो साल, हर साल दो बैच के साथ चलाना होगा।
“આમ, ૧૦૦ બ્રોઈલર પક્ષીના ફાર્મ માટે કુલ રૂ. ૪૮૦૦૦/-ના ખર્ચની સામે સહાયના ૭૫% ધોરણ અનુસાર લાભાર્થી દીઠ રૂ. ૩૬૦૦૦/-ની નાણાકીય સહાય ચુકવવામાં આવશે.”अनुसूचित जनजाति: 100 ब्रॉयलर का फ़ार्म (10×10 फ़ुट शेड, साधन, चूज़े, आहार) — ₹48,000 का 75%, अधिकतम ₹36,000, जीवन में एक बार।
मुर्गी-पालन प्रशिक्षण, अपनी (या 5 साल के पट्टे की) ज़मीन ज़रूरी; फ़ार्म कम से कम दो साल, हर साल दो बैच के साथ चलाना होगा।
“આમ, ૧૦૦ બ્રોઈલર પક્ષીના ફાર્મ માટે કુલ રૂ. ૪૮૦૦૦/-ના ખર્ચની સામે સહાયના ૭૫% ધોરણ અનુસાર લાભાર્થી દીઠ રૂ. ૩૬૦૦૦/-ની નાણાકીય સહાય ચુકવવામાં આવશે.”अनुसूचित जाति: 1,000 ब्रॉयलर का फ़ार्म (1,500 वर्ग फ़ुट शेड, साधन, तीन बैच के चूज़े और आहार) — ₹9,06,000 का 90%, अधिकतम ₹8,15,000 (₹3,60,000 पूँजी + ₹4,55,000 चालू ख़र्च), जीवन में एक बार।
केवल नए मुर्गी फ़ार्म; फ़ार्म बस्ती से कम से कम 500 मीटर और जल-स्रोतों से 100 मीटर दूर हो, और कम से कम तीन साल चले। जिस परिवार को किसी और योजना में ऐसी सहायता मिली, वह पात्र नहीं।
“આમ, ૧૦૦૦ બ્રોઇલર ફાર્મના એક એકમની સ્થાપના માટે થનાર ખર્ચ કુલ: રૂ. ૯,૦૬,૦૦૦/- ના ૯૦% લેખે મહત્તમ રૂ.૮,૧૫,૦૦૦/- સહાય મળવાપાત્ર રહેશે … અનાવર્તક ખર્ચ માટે મહત્તમ સહાય રૂ.૩,૬૦,૦૦૦/- અને આવર્તક ખર્ચ માટે મહત્તમ સહાય રૂ.૪,૫૫,૦૦૦/- મળવાપાત્ર રહેશે”अनुसूचित जनजाति: 1,000 ब्रॉयलर का फ़ार्म (1,500 वर्ग फ़ुट शेड, साधन, तीन बैच के चूज़े और आहार) — ₹9,06,000 का 90%, अधिकतम ₹8,15,000 (₹3,60,000 पूँजी + ₹4,55,000 चालू ख़र्च), जीवन में एक बार।
केवल नए मुर्गी फ़ार्म; फ़ार्म बस्ती से कम से कम 500 मीटर और जल-स्रोतों से 100 मीटर दूर हो, और कम से कम तीन साल चले। जिस परिवार को किसी और योजना में ऐसी सहायता मिली, वह पात्र नहीं।
“આમ, ૧૦૦૦ બ્રોઇલર ફાર્મના એક એકમની સ્થાપના માટે થનાર ખર્ચ કુલ: રૂ. ૯,૦૬,૦૦૦/- ના ૯૦% લેખે મહત્તમ રૂ.૮,૧૫,૦૦૦/- સહાય મળવાપાત્ર રહેશે … અનાવર્તક ખર્ચ માટે મહત્તમ સહાય રૂ.૩,૬૦,૦૦૦/- અને આવર્તક ખર્ચ માટે મહત્તમ સહાય રૂ.૪,૫૫,૦૦૦/- મળવાપાત્ર રહેશે”बड़ी मुर्गियाँ या बत्तख: ₹100 प्रति पक्षी, अधिकतम 100 पक्षी (₹10,000)।
एंथ्रेक्स, रेबीज़, बर्ड फ़्लू, ज़हर (खाना, रसायन, साँप का काटना) और दूसरी बीमारियों से मौत पर — बाढ़, सूखा, भूकंप या तूफ़ान में सामूहिक मौत पर नहीं, उसका मुआवज़ा राजस्व विभाग देता है (प्रस्तावना, शर्त 24)। पशु का बीमा हो या मालिक की साफ़ लापरवाही से मौत हो तो नहीं मिलता; पशु गाँव के रजिस्टर में मालिक के नाम हो (शर्त 21–23)। पोस्टमार्टम रिपोर्ट (रेबीज़ छोड़कर) और पंचनामा ज़रूरी (शर्त 25–26)।
“(પુખ્ત વયના) મરઘાં/બતકાં — ૧૦૦/- પ્રતિ પક્ષી દીઠ, વધુમાં વધુ રૂ. ૧૦,૦૦૦/- — ૧૦૦ પક્ષી”3 साल बीमे सहित 50 बकरी/भेड़ + 5 बकरे/मेढ़े, शेड (₹2,00,000), कुट्टी मशीन (₹30,000) और 3 किलोवाट सोलर (₹1,32,000): ₹11,38,554 का 50% (₹5,69,277), अनुसूचित जाति/जनजाति 75% (₹8,53,915)।
बकरी/भेड़ ₹12,000 और बकरा/मेढ़ा ₹15,000 प्रति, उम्र 1–3 साल, पहले पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी भेड़-बकरी विकास महामंडल से (उपलब्ध न होने के प्रमाणपत्र पर अन्यत्र से)। ज़मीन और प्रशिक्षण की शर्तें डेयरी इकाई जैसी। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। चयन ज़िला समिति द्वारा ऑनलाइन, “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 5); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति; पिछले 3 साल में ऐसी ही केंद्र/राज्य सहायता ली हो तो पात्र नहीं। मानक से अधिक ख़र्च लाभार्थी देगा। मुंबई और मुंबई उपनगर ज़िलों में लागू नहीं (सामान्य सूचना 1–4)।
“शेळी मेंढी पालन प्रकल्पाद्वारे उद्योजकता विकास योजना — ५०+५ शेळी /मेंढी … प्रकल्पाची एकूण किंमत - रु.११,३८,५५४/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - ५० टक्के (रु. ५,६९,२७७/-) ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी - ७५ टक्के (रु. ८,५३,९१५/-)”5,000 एक दिन के अंडा देने वाले चूज़े (साल में 200+ अंडे), एक महीने का दाना, ₹15 लाख तक का शेड, उपकरण और 3 किलोवाट सोलर: ₹30,00,000 का 50% (₹15,00,000), अनुसूचित जाति/जनजाति 75% (₹22,50,000)।
सभी वर्गों के लिए — सीमांत व लघु किसान, वन अधिकार धारक, शिक्षित बेरोज़गार और महिला समूह — कम से कम 20 गुंठा ज़मीन (अपनी या 5 साल का पट्टा) और 2 साल का मुर्गी पालन अनुभव या प्रशिक्षण। पहली किस्त के लिए बैंक का ऋण स्वीकृति आदेश ज़रूरी। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। चयन ज़िला समिति द्वारा ऑनलाइन, “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 5); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति; पिछले 3 साल में ऐसी ही केंद्र/राज्य सहायता ली हो तो पात्र नहीं। मानक से अधिक ख़र्च लाभार्थी देगा। मुंबई और मुंबई उपनगर ज़िलों में लागू नहीं (सामान्य सूचना 1–4)।
“अंडी देणाऱ्या सुधारित कुक्कुट / देशी पक्षांचे वाटप … प्रकल्प एकूण किंमत - रु.३०,००,०००/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - ५० टक्के (रु. १५,००,०००/-) ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी- ७५ टक्के (रु. २२,५०,०००/-)”ब्रॉयलर इकाई (प्रति पक्षी 1.2 वर्ग फ़ुट शेड ₹250 प्रति वर्ग फ़ुट, बर्तन ₹50 प्रति पक्षी, सोलर): 3,000 पक्षी ₹12,00,000 या 5,000 पक्षी ₹19,00,000 — 50% (₹6,00,000 / ₹9,50,000), अनुसूचित जाति/जनजाति 75% (₹9,00,000 / ₹14,25,000)।
पात्रता अंडा इकाई जैसी (20 गुंठा, अनुभव या प्रशिक्षण, बैंक ऋण सहमति)। किसी अन्य योजना से सोलर सहायता ली हो तो सोलर मद नहीं मिलेगा। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। चयन ज़िला समिति द्वारा ऑनलाइन, “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 5); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति; पिछले 3 साल में ऐसी ही केंद्र/राज्य सहायता ली हो तो पात्र नहीं। मानक से अधिक ख़र्च लाभार्थी देगा। मुंबई और मुंबई उपनगर ज़िलों में लागू नहीं (सामान्य सूचना 1–4)।
“पशुपालक/शेतकऱ्यांना देशी/ सुधारित मासंल कुक्कुट 3000 ते 5000 पर्यंत पक्षांच्या संगोपनाद्वारे उद्योजकता विकास — प्रकल्पाची एकूण किंमत-३००० पक्षी- रु. १२,००,०००/- ; ५००० पक्षी- रु. १९,००,०००/-”हर हफ़्ते 1,000 अंडे सेने वाला इनक्यूबेटर व हैचर (₹2,08,000) और 3 किलोवाट सोलर (₹1,32,000): ₹3,40,000 का 50% (₹1,70,000), अनुसूचित जाति/जनजाति 75% (₹2,55,000)।
भूमिहीन, सीमांत व लघु किसान, शिक्षित बेरोज़गार और महिला समूह, जिनके पास 2 साल का मुर्गी पालन अनुभव या प्रशिक्षण हो; चयन के दो महीने में हैचरी शुरू करनी होगी। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। चयन ज़िला समिति द्वारा ऑनलाइन, “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 5); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति; पिछले 3 साल में ऐसी ही केंद्र/राज्य सहायता ली हो तो पात्र नहीं। मानक से अधिक ख़र्च लाभार्थी देगा। मुंबई और मुंबई उपनगर ज़िलों में लागू नहीं (सामान्य सूचना 1–4)।
“१००० प्रति आठवडा अंडी उबवणी क्षमतेच्या संयंत्राचा (Incubator, Hatcher) पुरवठा — एकूण किंमत ३,४०,०००/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - ५० टक्के (रु.१,७०,०००/-) ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी - ७५ टक्के (रु. २,५५,०००/-)”5 मादा सूअर + 1 नर (₹22,500 / ₹25,000) 3 साल बीमा व जीएसटी सहित (₹1,58,187) और शेड व उपकरण (₹50,000): ₹2,08,187 का 50%, अनुसूचित जाति/जनजाति 75%।
पूरक शासन निर्णय 13.04.2026 से जोड़ा गया — बीपीएल, भूमिहीन, सीमांत व लघु किसान, वन अधिकार धारक, शिक्षित बेरोज़गार और महिला समूहों के लिए; 1–2 साल की उन्नत या विदेशी नस्लें (यॉर्कशायर, हैम्पशायर, लैंड्रेस); सूअर खुले नहीं छोड़े जा सकते। 4% ब्याज राहत सूअर पालन ऋण पर भी लागू (परिच्छेद 6)। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। चयन ज़िला समिति द्वारा ऑनलाइन, “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 5); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति; पिछले 3 साल में ऐसी ही केंद्र/राज्य सहायता ली हो तो पात्र नहीं। मानक से अधिक ख़र्च लाभार्थी देगा। मुंबई और मुंबई उपनगर ज़िलों में लागू नहीं (सामान्य सूचना 1–4)।
“५+१ वराह गट वाटप … एकूण प्रकल्प किंमत रु. 2,08,187/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - 50 टक्के ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी - 75 टक्के”5 + 1 बकरी/भेड़ (₹86,284) या 10 + 1 (₹1,55,311), 12.75% बीमा और 18% कर सहित: 50%, अनुसूचित जाति/जनजाति 75%।
भूमिहीन परिवार केवल 5 + 1 इकाई के पात्र (ज़मीन की शर्त नहीं); 10 + 1 इकाई के लिए कम से कम 1 एकड़ (अपनी या 5 साल का पट्टा) और प्रशिक्षण या 2 साल का अनुभव। बकरी/भेड़ ₹12,000, बकरा/मेढ़ा ₹15,000, उम्र 1–3 साल, पहले पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महामंडल से। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। ज़िला वार्षिक योजना, ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) द्वारा; ऑनलाइन आवेदन, ज़िला समिति द्वारा “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर चयन (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 2); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति। मुंबई और मुंबई उपनगर में लागू नहीं।
“शेळी/मेंढी गट वाटप योजना — ५+१ शेळी /मेंढी गटाची एकूण किंमत रु. ८६,२८४/- ; १०+१ शेळी /मेंढी गटाची एकूण किंमत रु. १,५५,३११/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - ५० टक्के ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी - ७५ टक्के”16–18 हफ़्ते की 500 अंडा देने वाली मुर्गियाँ (₹350 प्रति), 2 महीने का दाना, अर्ध-बंद/पिंजरा/गद्दी पद्धति आवास (₹100 प्रति पक्षी) और उपकरण: ₹3,32,200 का 50%, अनुसूचित जाति/जनजाति 75%।
सभी वर्ग, प्राथमिकता क्रम भूमिहीन, सीमांत, लघु और महिला समूह, मुर्गी पालन प्रशिक्षण (या वचन-पत्र) या 2 साल के अनुभव के साथ; मुर्गियाँ साल में 180–200 अंडे देने वाली हों। सामान्य लाभार्थी 50%, अनुसूचित जाति व जनजाति लाभार्थी 75%। ज़िला वार्षिक योजना, ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) द्वारा; ऑनलाइन आवेदन, ज़िला समिति द्वारा “पहले आओ पहले पाओ” आधार पर चयन (शुद्धिपत्र 27.08.2026, बिंदु 2); 5% स्थान दिव्यांगों और 30–50% महिलाओं के लिए। एक परिवार से एक व्यक्ति। मुंबई और मुंबई उपनगर में लागू नहीं।
“अंडी देणाऱ्या सुधारित कुक्कुट / देशी पक्षांचे वाटप — अंडी देणाऱ्या १६ -१८आठवडे वयाच्या ५०० सुधारित / देशी कुक्कुट पक्षी … एकूण किंमत रु. ३,३२,२००/- ; सर्वसाधारण लाभार्थी - ५० टक्के ; अनुसुचित जाती जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी - ७५ टक्के”ढाँचे सहित 20 भेड़ + 1 मेढ़ा: ₹3,33,000 (स्थायी, ₹2,49,750) या ₹2,02,500 (घुमंतू, ₹1,51,875) का 75%।
₹8,000 प्रति भेड़ / ₹10,000 प्रति मेढ़े से ऊपर की क़ीमत ख़रीदार की (7(अ)(5))। भेड़ों का बीमा अनिवार्य (सामान्य 13)। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“20 मेंढ्या + 1 मेंढानर या स्थायी मेंढी गटाची एकूण किंमत रु. 3,33,000 - आणि स्थलांतरीत मेंढी गटाची एकूण किंमत रु. 2,02,500 - राहील. … उर्वरित 75 टक्के रक्कम स्थायी गटासाठी रु. 2,49,750 - आणि स्थलांतरीत गटासाठी रु. 1,51,875 - एवढे शासनाचे अनुदान अनुज्ञेय असेल.”उन्नत नस्ल के मेढ़े: ₹10,000 प्रति का 75% (₹7,500) — 20–39 अपनी भेड़ों पर 1 मेढ़ा, 100 या अधिक पर अधिकतम 5।
जिन्हें भेड़ इकाई नहीं मिली उनके लिए: 20–39 भेड़ों पर 1 मेढ़ा, 40–59 पर 2, 60–79 पर 3, 80–99 पर 4 और 100+ पर 5 (7(ब)(3))। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“सुधारीत प्रजातीच्या एका नर मेंढ्याची किंमत रु. 10,000 - एवढी असेल. सदर किंमतीमधील 25 टक्के हिस्सा म्हणजे रु. 2,500 - एवढी रक्कम स्वहिस्सा म्हणून लाभधारकाने भरावयाची आहे, आणि उर्वरित 75 टक्के हिस्सा म्हणजे रु. 7,500 - एवढ्या रकमेचे शासनाचे अनुदान अनुज्ञेय असेल.”जिनके पास पहले से भेड़ें हैं उनके लिए शेड, बाड़, बर्तन, तंबू और अन्य उपकरण: 75% — 21–39 भेड़ों पर ₹1,22,250 / ₹24,375 (स्थायी / घुमंतू) और 42 या अधिक पर ₹2,37,750 / ₹36,000।
स्थायी इकाई को शेड, बाड़, आहार/पानी की नाँद, बाल्टियाँ, कृमिनाशक, खनिज ईंटें, बीमा और चारा बीज; घुमंतू इकाई को नाँद, तंबू, सूती कपड़ा, सामान ढोने के लिए खोगीर, बाल्टियाँ, दवाइयाँ, बीमा और चारा ख़रीद या चराई किराया (सामान्य 4–5)। जिन्हें भेड़ इकाई मिली उनके लिए नहीं। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“मेंढीपालनासाठी पायाभूत सोई-सुविधा उपलब्ध करुन देण्यासाठी अनुदान वाटप … 75 टक्के अनुदान तत्वावर”संतुलित आहार (100 ग्राम प्रति भेड़ प्रति दिन; घुमंतू झुंड को जून–जुलाई, स्थायी को अप्रैल–जुलाई): ₹25 प्रति किलो का 75%, यानी ₹18.75 प्रति किलो।
अनुदान आपके वास्तव में लिए गए आहार के अनुसार (7(ड)(7))। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“प्रति किलो पशुखाद्याची किंमत रु. 25 - एवढी असून, त्यापैकी 25 टक्के लाभार्थी हिस्सा म्हणजे रु. 6.25 - आणि 75 टक्के शासनाचा हिस्सा म्हणजे रु. 18.75 - एवढा राहील.”मिनी साइलेज बेलर कम रैपर: क़ीमत का 50%, अधिकतम ₹4,00,000 (राज्य भर में 25 मशीनें)।
चयन पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य समिति द्वारा (खंड 11); एनटी-सी स्वयं सहायता समूहों और पशुपालक उत्पादक कंपनियों को प्राथमिकता (सामान्य 3)। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“कुट्टी केलेल्या हिरव्या चाऱ्याचा मूरघास बनविण्याकरीता गासड्या बांधण्याचे यंत्र (Mini Silage Baler cum Wrapper) … रु. 8.00 लक्ष … त्यापैकी 50 टक्के म्हणजेच रु. 4.00 लक्ष इतक्या मर्यादेपर्यंत किंवा प्रत्यक्ष यंत्राच्या किमतीच्या 50 टक्के यापैकी जे कमी असेल”छोटा पशुआहार कारख़ाना: लागत का 50%, अधिकतम ₹5,00,000 (राज्य भर में 5 कारख़ाने)।
चयन राज्य समिति द्वारा (खंड 11)। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के चरवाहों — धनगर व समान समुदाय — के लिए, उम्र 18–60 साल; 30% स्थान महिलाओं और 3% दिव्यांगों के लिए (खंड 7, 9(1)–(3))। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल, पुणे द्वारा, मुंबई और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में; लाभ महामंडल के वार्षिक बजट की सीमा में (शासन निर्णय 05.08.2024, निर्णय 2)।
“पशुखाद्य कारखाने उभारण्यासाठी अनुदान वाटप … रु. 10.00 लक्ष एवढा खर्च ग्राह्य धरुन, त्यापैकी 50 टक्के म्हणजेच रु. 5.00 लक्ष मर्यादेपर्यंत”परियोजना गाँवों के भूमिहीन परिवार के सदस्य और विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाएँ: 4 बकरी + 1 बकरे की इकाई (3 साल बीमा सहित) की मंज़ूर लागत का 75% — अधिकतम ₹36,239 (उस्मानाबादी/संगमनेरी) या ₹27,610 (अन्य स्थानीय नस्ल)।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। ख़रीद, बीमा और ढुलाई का पैसा पहले लाभार्थी देता है (सामान्य सूचना 5); बकरियाँ दूसरे-तीसरे ब्यांत की और बकरा कम से कम 1 साल का हो। एक परिवार से एक व्यक्ति; जिसने किसी और सरकारी योजना से बकरियाँ ली हों वह पात्र नहीं (मानदंड 2–3)। परियोजना के 16 फ़रवरी 2026 के पत्र के अनुसार “भूमिहीन परिवार” पात्रता के निर्देश आने तक स्वयं भूमिहीन व्यक्तियों के आवेदन बिना पूर्व-स्वीकृति लौटाए जाएँगे — आवेदन से पहले तालुका कृषि कार्यालय से पूछें।
“सदर घटकांतर्गत ४ शेळ्या व १ बोकड असा शेळी गट खरेदी करणे अनिवार्य आहे. … सदर घटकासाठी मंजूर मापदंडाच्या ७५% अनुदान अनुज्ञेय राहील.”रेशम कीट पालन गृह: ₹3,25,000 मानक का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — अधिकतम ₹2,43,750 या ₹2,92,500।
तालिका में इकाई 1,100 वर्ग फ़ुट लिखी है, जबकि सामान्य सूचना 4 में 60 × 22 फ़ुट (1,320 वर्ग फ़ुट) का गृह, कम से कम 10 × 8 फ़ुट का पत्ती भंडार और 5 × 4 × 3 फ़ुट की कीटाणुनाशन टंकी माँगी गई है (सूचना 4–5)। शहतूत लगाने के बाद ही। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।
“किटक संगोपनगृह बांधकाम — ११०० चौ.फुट — ३,२५,००० — २,४३,७५० (७५%) — २,९२,५०० (९०%)”कीट पालन व कीटाणुनाशन उपकरण: ₹48,500 मानक का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — अधिकतम ₹36,375 या ₹43,650।
शहतूत और पालन गृह पूरे होने के बाद ही। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।
“किटक संगोपन व निर्जंतुकीकरण साहित्य — प्रति लाभार्थी — ४८,५०० — ३६,३७५ (७५%) — ४३,६५० (९०%)”कम से कम 20 भेड़ और 1 मेढ़े वाले चरवाहा परिवार को जून–सितंबर के चार महीनों के लिए ₹6,000 प्रति माह — कुल ₹24,000 — चराई अनुदान।
परिवार के पास कम से कम 20 भेड़ और 1 मेढ़ा होना चाहिए (खंड 4(2)); हर ज़िले में अधिकतम 2,000 लाभार्थी (खंड 4(4))। इस शासन निर्णय ने 16.09.2019 की 9 ज़िलों वाली प्रायोगिक योजना की जगह लेकर इसे 34 ज़िलों में बढ़ाया (खंड 4)। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।
“सदर योजनेमध्ये पात्र मेंढपाळ कुटुंबांना प्रतिमाह रु. ६०००/- याप्रमाणे माहे जून ते सप्टेंबर या ४ महिन्याच्या कालावधीसाठी एकूण रु. २४०००/- एवढे चराई अनुदान वाटप करण्यात यावे.”एकमुश्त अनुदान: ज़मीन (कम से कम 1 गुंठा) की क़ीमत या कम से कम 30 साल के पट्टे के किराए का 75%, अधिकतम ₹50,000।
केवल भूमिहीन परिवार के लिए — महाराष्ट्र में कहीं भी किसी प्रकार की खेती की ज़मीन न हो — और परिवार के एक सदस्य (पुरुष या महिला) को (खंड 4(ii)); बाक़ी 25% परिवार देता है (6(3))। 20 + 1 झुंड के शेड और बाड़े के लिए लगभग 1 गुंठा (1,000 वर्ग फ़ुट) काफ़ी है (6(4)–(5))। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।
“या योजनेंतर्गत भूमीहीन मेंढपाळ कुटुंबासाठी अर्ध बंदिस्त, बंदिस्त मेंढीपालन करण्याकरीता किमान १ गुंठा जागा खरेदी करण्यासाठी, जागेच्या किंमतीच्या ७५ टक्के अथवा किमान ३० वर्षासाठी भाडेकरारावर जागा घेण्यासाठी भाड्यापोटी द्यावयाच्या रकमेच्या ७५ टक्के रक्कम एकवेळचे एकरकमी अर्थसहाय्य म्हणून कमाल रु. ५००००/- मर्यादेत अनुदान देण्यात यावे.”100 चार सप्ताह के उन्नत देसी पक्षी (₹60 प्रति) और दो महीने का 200 किलो आहार (₹30 प्रति किलो): ₹12,000 का 75% = ₹9,000।
केवल ग्रामीण क्षेत्र — महानगरपालिका, नगरपालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत या छावनी क्षेत्र नहीं (कार्यक्षेत्र)। उम्र 18–60, परिवार में एक व्यक्ति, पक्षियों के लिए अपनी जगह; 30% प्राथमिकता महिलाओं और 3% दिव्यांगों को (चयन मानदंड 1–4)। पक्षी या आहार की क़ीमत बढ़ने पर अतिरिक्त ख़र्च लाभार्थी का। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।
“४ आठवडे वयाच्या सुधारीत देशी प्रजातीच्या पक्ष्यांची खरेदी किंमत (प्रती पक्षी रु. ६०/- प्रमाणे) १०० रु. ६,०००/- … दोन महिन्याचे कुक्कुट पक्षी खाद्य … २०० कि.ग्रॅ. रु. ६,०००/- … एकूण प्रकल्प किंमत रु. १२,०००/- लाभार्थी हिस्सा रु. ३,०००/- शासन अनुदान रु. ९,०००/-”10 उस्मानाबादी / संगमनेरी बकरी + 1 बकरे की इकाई: ₹87,857 का 75% (छपा हुआ ₹65,893)।
शासन निर्णय अनुदान को ₹65,893 तक पूर्णांकित करता है; हमारा कैलकुलेटर ₹65,892 दिखाता है। 18–55 साल की उन सदस्यों के लिए जिनकी पंजीकृत महिला सहकारी संस्था में 20–30 एनटी-सी महिलाएँ (या कम से कम 90% एनटी-सी सदस्य) हों; परिवार में एक महिला; पिछले 5 साल में पशुपालन विभाग की व्यक्तिगत योजना का लाभ लेने वाली पात्र नहीं; 3% दिव्यांगों के लिए आरक्षित (6(2)–(3), 6(12), 13)। पहला चरण: 125 सहकारी संस्थाएँ (6(4))। स्थिति अज्ञात: 09.03.2026 का शासन निर्णय चराई, ज़मीन और मुर्गी पालन को चालू बताता है पर इस बकरी योजना का ज़िक्र नहीं करता, और बाद का कोई आदेश नहीं मिला। केवल घुमंतू जनजाति (एनटी-सी) वर्ग के परिवारों — राज्य द्वारा अधिसूचित धनगर व समान समुदायों — के लिए, मुंबई शहर और मुंबई उपनगर को छोड़ सभी ज़िलों में। पैसा वीजेएनटी / ओबीसी कल्याण विभाग देता है; पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़-बकरी विकास महामंडल या ज़िला उपायुक्त (पशुपालन) इसे चलाते हैं।
“उस्मानाबाद / संगमनेरी जातीच्या 10 शेळ्या + 1 बोकड या शेळी गटाची एकूण किंमत रु.87,857/- एवढी राहील. त्यापैकी 75% हिस्सा म्हणजेच रु. 65,893/- एवढे शासनाचे अनुदान अनुज्ञेय असेल.”₹77,456 इकाई लागत का 40% (₹30,982), अनुसूचित जाति/जनजाति को 60% (₹46,474)।
इकाई: ₹6,000 की 10 देशी बकरी, ₹7,500 का एक जमुनापारी/बारबरी/सिरोही/बीटल बकरा, 5 वर्ष का बीमा ₹6,986 और 3 माह का आहार ₹2,970। पृष्ठ पर अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए ₹46,474 छपा है; हम नीचे की ओर ₹46,473 गिनते हैं। पृष्ठ पर तारीख़ नहीं है (अंतिम नवीनीकरण 27-06-2022) और 2026-27 का कोई आदेश इस योजना का नाम नहीं लेता, इसलिए आवेदन से पहले ज़िला कार्यालय से पुष्टि करें।
“अनुदान प्रति इकाई अनुसूचित जनजाति / अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 60 प्रतिशत् अनुदान रु.46474.00 सामान्य वर्ग के लिये 40 प्रतिशत् अनुदान रु. 30982.00 इकाई लागत का 10 प्रतिशत् हितग्राही अंशदान , शेष बैंक ऋण”अ.जा. और अ.ज.जा.: बकरे की ख़रीद कीमत का 90%, अधिकतम ₹4,000।
दर विभाग की वेबसाइट पर राज्य योजनाओं में दिए बिना तारीख़ के डीबीटी संशोधन से है; 2026-27 का बजट योजना को राशि देता है पर दर नहीं छापता — मौजूदा सीमा ज़िला कार्यालय से पक्की करें।
“इकाई लागत (क्रय मूल्य) का 90% या अधिकतम रू. 4000.00 का अनुदान, जो भी कम हो (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये)”सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग: बकरे की ख़रीद कीमत का 75%, अधिकतम ₹3,500।
“इकाई लागत (क्रय मूल्य) का 75% या अधिकतम रू. 3500.00 का अनुदान, जो भी कम हो (सामान्य/अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों के लिये)”सूकरत्रयी (1 नर + 2 मादा): कीमत का 90%, अधिकतम ₹9,000 — केवल अ.जा. और अ.ज.जा.।
दर विभाग की वेबसाइट पर राज्य योजनाओं में दिए बिना तारीख़ के डीबीटी संशोधन से है; 2026-27 का बजट योजना को राशि देता है पर दर नहीं छापता — मौजूदा सीमा ज़िला कार्यालय से पक्की करें।
“इकाई लागत का 90% या अधिकतम रू. 9000.00 का अनुदान, जो भी कम हो (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये)”एक प्रजनन योग्य नर सूकर: ख़रीद कीमत का 90%, अधिकतम ₹3,500 — केवल अ.जा. और अ.ज.जा.।
“इकाई लागत (क्रय मूल्य) का 90% या अधिकतम रू. 3500.00 का अनुदान, जो भी कम हो (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिये)”₹1,02,000 इकाई लागत का 50% (सामान्य पुरुष) या 60% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग) — ₹51,000 या ₹61,200।
इकाई लागत (पृ.5): शेड ₹36,000, 10 मादा ₹5,000 + 1 नर ₹6,000 = ₹56,000, बीमा ₹8,000, अन्य ₹2,000। नया शेड न बनाकर पुराना शेड हो तो शेड का हिस्सा कटता है: ₹39,600 (60%) या ₹33,000 (50%)। पहले ऐसा अनुदान ले चुके व्यक्ति के लिए नहीं।
“The SC, ST, Women, Transgender, differently-abled categories beneficiary will be provided with 60% subsidy of Rs. 61,200/- per Goatery / Sheepery unit & General (Male) beneficiary will be provided with 50% subsidy of Rs. 51,000/- per Goatery / / Sheepery unit.”₹4,00,000 इकाई लागत का 50% (सामान्य पुरुष) या 60% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग) — ₹2,00,000 या ₹2,40,000।
“एक (10+1) सूअर इकाई की इकाई लागत ₹4,00,000 है” (योजना परिव्यय, पृ.10)। बाकी राशि किसान बैंक ऋण या अपने पैसे से लगाते हैं।
“The SC,ST , Women, Transgender, differently-abled beneficiary will be provided 60% subsidy of Rs. 2.40 lakh per unit and General Male beneficiary will be provided with 50% subsidy of Rs. 2.00 lakh per unit.”लेयर फ़ार्म, प्रति 1,000 पक्षी (5,000 तक): शेड सहित ₹8.225 लाख का 60% / 50% (₹4.935 लाख / ₹4.1125 लाख), या बिना शेड ₹6.245 लाख (केज) / ₹4.825 लाख (डीप लिटर) का।
किसी भी मान्य लेयर नस्ल के 14 सप्ताह के पुलेट। महिला स्वयं सहायता समूह कोई भी क्षमता लगा सकते हैं। ट्रांसजेंडर (ज़िलाधिकारी का प्रमाण पत्र) और दिव्यांग (40% या अधिक) आवेदकों को भी 60% मिलता है। इस योजना में एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले तीन वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो परिवार पात्र नहीं। ₹20,000 या अधिक की चीज़ों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
“Layer farms with a capacity of 1000 birds in deep litter / cage system with unit cost of Rs 8.225 lakh is considered as one unit … Subsidy to SC, ST, women, Transgender & PWD (min. 40% disability) category @60% of the unit cost … Subsidy to General male @50% of the unit cost”ब्रॉयलर फ़ार्म, प्रति 500 पक्षी (3,000 तक): शेड सहित ₹1.80 लाख का 60% / 50% (₹1.08 लाख / ₹90,000), या बिना शेड ₹80,000 चालू लागत का (₹48,000 / ₹40,000)।
व्यक्ति: 500 से 3,000 पक्षी; महिला स्वयं सहायता समूह: 2,000, 2,500 या 3,000 पक्षी (कम से कम 500 की 4 इकाइयाँ)। ट्रांसजेंडर (ज़िलाधिकारी का प्रमाण पत्र) और दिव्यांग (40% या अधिक) आवेदकों को भी 60% मिलता है। इस योजना में एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले तीन वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो परिवार पात्र नहीं। ₹20,000 या अधिक की चीज़ों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
“Broiler farms with a capacity of 500 birds in individual mode in deep litter system with Rs 1.8 lakh as unit cost is taken as one unit … Subsidy to SC, ST, women, Transgender & PWD (min. 40% disability) category @60% of the unit cost … Subsidy to General male @50% of the unit cost”1,000 बत्तख के बच्चों की इकाई: शेड सहित ₹4.40 लाख का 60% / 50% (₹2.64 लाख / ₹2.20 लाख), या बिना शेड ₹2.40 लाख का (₹1.44 लाख / ₹1.20 लाख)।
ट्रांसजेंडर (ज़िलाधिकारी का प्रमाण पत्र) और दिव्यांग (40% या अधिक) आवेदकों को भी 60% मिलता है। इस योजना में एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले तीन वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो परिवार पात्र नहीं। ₹20,000 या अधिक की चीज़ों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
“Unit cost: Rs 4.4 Lakh … Subsidy to SC, ST, women, Transgender & PWD (min. 40% disability) category @60% of the unit cost Rs 2.64 … Subsidy to General male @50% of the unit cost Rs 2.2”चूज़ा पालन इकाई (हर बैच 1,000 चूज़े, साल में 7 बैच): शेड सहित ₹2.54 लाख का 60% / 50% (₹1.524 लाख / ₹1.27 लाख), या बिना शेड ₹74,000 का (₹44,400 / ₹37,000)।
इकाई उन्नत देसी नस्लों (वनराजा, कुरॉयलर, रेनबो रूस्टर, कलिंगा ब्राउन, RIR…) के चूज़ों को 28 दिन तक पालकर किसानों को बेचती है। ट्रांसजेंडर (ज़िलाधिकारी का प्रमाण पत्र) और दिव्यांग (40% या अधिक) आवेदकों को भी 60% मिलता है। इस योजना में एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले तीन वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो परिवार पात्र नहीं। ₹20,000 या अधिक की चीज़ों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
“Unit cost: Rs 2.54 Lakh … Subsidy to SC, ST , women, Transgender & PWD (min. 40% disability) category @60% of the unit cost Rs 1.524 … Subsidy to General male @50% of the unit cost Rs 1.27”मिनी मुर्गी दाना मिल (50 किलो प्रति घंटा): भवन सहित ₹2.80 लाख का 60% / 50% (₹1.68 लाख / ₹1.40 लाख), या केवल मशीनरी ₹2.05 लाख का (₹1.23 लाख / ₹1.025 लाख)।
पृ.2 पर दोनों तालिकाओं के शीर्षक उलटे छपे हैं (₹2.80 लाख वाली तालिका पर “शेड न लेने पर” लिखा है, पर पहली किस्त “भवन बनने के बाद” है); हमने किस्त के शब्दों को माना है। ट्रांसजेंडर (ज़िलाधिकारी का प्रमाण पत्र) और दिव्यांग (40% या अधिक) आवेदकों को भी 60% मिलता है। इस योजना में एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले तीन वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो परिवार पात्र नहीं। ₹20,000 या अधिक की चीज़ों का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
“Unit cost: Rs 2.80 Lakh … Subsidy to SC, ST, women, Transgender & PWD (min. 40% disability) category @60% of the unit cost Rs 1.68 … Subsidy to General male @50% of the unit cost Rs 1.4 … Recurring cost- Rs. 2.05 lakh”₹2,30,000 इकाई लागत का 60% (महिला समूह, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति) या 50% (सामान्य पुरुष) — ₹1,38,000 या ₹1,15,000।
इकाई लागत (पृ.5): 450 वर्ग फ़ुट शेड ₹120 प्रति = ₹54,000; 30 मादा ₹5,000 + 2 नर ₹6,000 = ₹1,62,000; बीमा ₹11,340; अन्य ₹2,660। पहले ऐसा केंद्र या राज्य अनुदान ले चुके के लिए नहीं (कार्यान्वयन 15)। 10+1 की अलग इकाई `or-pssy-small-scale-goat-sheep` पर है।
“The WSHGs, Individual Female, SC, ST farmers will be provided a maximum of 60% subsidy of the unit cost i.e. Rs 1.38 Lakh per unit and Individual male general farmers will be provided a maximum of 50% subsidy of the unit cost i.e. Rs 1.15 Lakh per unit .”इकाई लागत का 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही: ₹5 लाख की डेयरी, सूअर या मुर्गी इकाई पर ₹2.25 लाख, ₹6 लाख की मिथुन इकाई पर ₹2.70 लाख, ₹15 लाख की मुर्गी उद्यम इकाई पर ₹6.75 लाख।
इकाई लागत लोहित ज़िले के परिपत्र से है; दूसरे ज़िले अलग से आवेदन माँगते हैं और उनकी इकाइयाँ अलग हो सकती हैं। व्यक्तिगत आवेदक बेरोज़गार एपीएसटी हों (पात्रता 4); एआरएसआरएलएम के स्वयं सहायता समूह, किसान क्लब, डेयरी सहकारी समितियाँ, पंजीकृत सहकारी समितियाँ और एफपीओ भी आवेदन कर सकते हैं (पात्रता 1)। ₹15 लाख की मुर्गी उद्यम इकाई में 10% लाभार्थी हिस्सा (₹1.50 लाख) पहले बैंक में जमा करना होता है (पात्रता 9)। जिन्हें किसी दूसरी आत्मनिर्भर योजना में मदद मिल चुकी है, उन्हें प्राथमिकता नहीं मिलती और अनापत्ति प्रमाणपत्र चाहिए (पात्रता 5)।
“Name of the Unit / Unit cost / Govt. Subsidy (45%) / Bank Loan (45%) / Beneficiary Share (10%): 1. Dairy Unit 5 lakh 2.25 lakh 2.25 lakh 0.50 lakh; 2. Mithun Unit 6 lakh 2.70 lakh 2.70 lakh 0.60 lakh; 3. Piggery Unit 5 lakh 2.25 lakh 2.25 lakh 0.50 lakh; 4. Poultry Unit 5 lakh 2.25 lakh 2.25 lakh 0.50 lakh; 5. Entrepreneurship Development (ED)- Poultry unit 15 lakh 6.75 lakh 6.75 lakh 1.50 lakh”ज़िला परिषद या स्वायत्त ज़िला परिषद के ज़रिए चुने गए हर परिवार को आँगन में पालने के लिए 25 से 30 चूज़े (2–3 हफ़्ते के)।
रिपोर्ट यह नहीं बताती कि चूज़े मुफ़्त हैं या नहीं, और ज़िला परिषद/स्वायत्त ज़िला परिषद के रास्ते और महिलाओं के 30% हिस्से के अलावा चयन कैसे होता है; यह योजना कमज़ोर वर्गों के लिए है। इसी रिपोर्ट के अनुसार विभाग के सूअर फ़ार्म उन्नत नस्ल के सूअर के बच्चे “रियायती दर” पर देते हैं, पर दर नहीं छपी।
“Under this scheme, there is provision for distribution of 2-3 weeks old Low Input Technology Birds to the 600 beneficiaries selected through Zilla Parishad and 900 beneficiaries selected through Autonomous District Council of the State every year. The beneficiaries will consist of 30% women and will be provided with 25- 30 chicks for each selected beneficiaries with an aim to generate income and support weaker section of the society.”जंगली जानवर के मारे हर पशु पर तय राशि: गाय या बैल ₹24,000, भैंस ₹25,000, बछड़ा ₹10,000, बकरी ₹12,000, भेड़ ₹20,000, सूअर ₹12,000, टट्टू ₹15,000, याक या ज़ो ₹30,000, मुर्गी ₹350 प्रति किलो।
स्थिति अज्ञात: 2023 की अधिसूचना की कोई अंतिम तारीख़ नहीं है और इसके अनुसार 1 जनवरी 2024 से दरें हर साल 5% बढ़ती हैं, पर भुगतान की पुष्टि करने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। हम 2023 की मूल दरें दिखाते हैं, जो अभी मिलने वाली राशि से कम हो सकती हैं।
“I. The rates of ex-gratia for livestock killed: (i) Cow ₹ 24,000/- (ii) Bull ₹ 24,000/- (iii) Buffalo ₹ 25,000/- (iv) Calf ₹ 10,000/- (v) Goat ₹ 12,000/- (vi) Sheep ₹ 20,000/- (vii) Pig ₹ 12,000/- (viii) Pony ₹ 15,000/- (ix) Yak/Dzo ₹ 30,000/- (x) Chicken ₹ 350/-kg”हर चुनी गई महिला को 20 मुर्गियाँ और 42 बत्तख के चूज़े।
हमें मिला एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज़ बजट भाषण 2026-27 है, जो 2025-26 में दी गई सहायता बताता है। इसमें चयन के नियम, इकाई का आकार या आवेदन फ़ॉर्म नहीं छपा, और 2026-27 के दौर के बारे में कुछ नहीं कहा गया — ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी या पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) कार्यालय से पूछें।
“Under Mukhyamantri Prani Sampad Bikash Yojana (MPSBY) a total number of 19,531-women beneficiaries was provided with 20 nos. of poultry birds and 42 nos. ducklings per beneficiary.”हर चुनी गई महिला को ₹6,000 की सूअर पालन सहायता।
हमें मिला एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज़ बजट भाषण 2026-27 है, जो 2025-26 में दी गई सहायता बताता है। इसमें चयन के नियम, इकाई का आकार या आवेदन फ़ॉर्म नहीं छपा, और 2026-27 के दौर के बारे में कुछ नहीं कहा गया — ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी या पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) कार्यालय से पूछें।
“Besides, a total number of 1,250 woman beneficiaries were given benefits @ Rs. 6,000 per beneficiary under piggery scheme”हर चुनी गई महिला को ₹6,000 की बकरियाँ।
हमें मिला एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज़ बजट भाषण 2026-27 है, जो 2025-26 में दी गई सहायता बताता है। इसमें चयन के नियम, इकाई का आकार या आवेदन फ़ॉर्म नहीं छपा, और 2026-27 के दौर के बारे में कुछ नहीं कहा गया — ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी या पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) कार्यालय से पूछें।
“1,250 woman beneficiaries were given goats @ Rs. 6,000 per beneficiary under Goatery scheme.”सरकारी कोया बाज़ार में बेचे गए हर किलो बाइवोल्टीन कोया पर ₹30, अगर आपकी उपज 100 रोग-मुक्त अंडों पर 60 किलो से ज़्यादा है।
केवल कर्नाटक के रेशम पालकों के लिए, केवल सरकारी बाज़ार में बिके बाइवोल्टीन (डबल हाइब्रिड) कोया पर, और केवल राज्य/केंद्र के बीज केंद्र या पंजीकृत निजी चॉकी केंद्र से लिए अंडों या चॉकी कीड़ों से। गिनी जाने वाली उपज 100 अंडों पर अधिकतम 90 किलो है; छेद वाले या ख़राब कोया पर कुछ नहीं मिलता। दरें रेशम विभाग के 2024-25 दिशानिर्देशों से हैं (31.05.2024 का परिपत्र, जो 22.04.2025 के आरटीआई 4(1)(बी) प्रकटीकरण में छपा है)। 2026-27 के बजट में इसी मूल्य स्थिरीकरण निधि शीर्ष में ₹2,800 लाख का अनुदान रखा है; बाद का कोई दर परिपत्र नहीं मिला।
“ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ : 4 — ಬೈವೋಲ್ಟೈನ್ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡುಗಳಿಗೆ ಪ್ರಸ್ತುತ ನೀಡುತ್ತಿರುವ ಪ್ರೋತ್ಸಾಹಧನವನ್ನು ಪ್ರತಿ ಕಿಲೋಗೆ 10 ರೂ.ನಿಂದ 30 ರೂ.ಗೆ ಹೆಚ್ಚಿಸಲು ಘೋಷಿಸಿದೆ. … ಸರ್ಕಾರದ ಆದೇಶದ ದಿನಾಂಕ : 04.06.2024ರಿಂದ ಸರ್ಕಾರಿ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡು ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗಳಲ್ಲಿ ಮಾರಾಟವಾಗುವ ದ್ವಿತಳಿ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡುಗಳಿಗೆ ಪ್ರತಿ ಕೆ.ಜಿಗೆ ರೂ.30/-ರಂತೆ ಪ್ರೋತ್ಸಾಹಧನ ನೀಡಲು ಅವಕಾಶವಿರುತ್ತದೆ.”पंजीकृत बीज उत्पादकों के उपज और गुणवत्ता सीमा पूरी करने वाले बीज कोया पर ₹120 प्रति किलो (शुद्ध मैसूर: 100 अंडों पर कम से कम 35 किलो; शुद्ध बाइवोल्टीन: 50 किलो से ज़्यादा)।
केवल केंद्रीय रेशम बोर्ड में पंजीकृत बीज उत्पादकों के लिए, जिन्होंने राज्य/केंद्र के बीज केंद्रों से रोग-मुक्त अंडे लिए हों; प्रति किलो कोया की गिनती 900 (मैसूर) या 700 (बाइवोल्टीन) से कम होनी चाहिए। दरें रेशम विभाग के 2024-25 दिशानिर्देशों से हैं (31.05.2024 का परिपत्र, जो 22.04.2025 के आरटीआई 4(1)(बी) प्रकटीकरण में छपा है)। 2026-27 के बजट में इसी मूल्य स्थिरीकरण निधि शीर्ष में ₹2,800 लाख का अनुदान रखा है; बाद का कोई दर परिपत्र नहीं मिला।
“ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ : 3 — ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಉತ್ಪಾದನೆಯಾಗಿ ಸರ್ಕಾರಿ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡಿನ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗಳ ಮೂಲಕ ವಹಿವಾಟಾಗುವ ರೇಷ್ಮೆ ಬಿತ್ತನೆ ಗೂಡುಗಳಿಗೆ ಉತ್ಪಾದಕತೆ ಮತ್ತು ಗುಣಮಟ್ಟ ಆಧರಿಸಿ ಪ್ರತಿ ಕೆ.ಜಿ.ಗೆ ರೂ.120/- ಪ್ರೋತ್ಸಾಹಧನ ನೀಡುವುದು.”बीज के लायक शुद्ध मैसूर बीज कोया का ख़रीदार न मिले और उसे धागा निकालने के लिए बेचना पड़े, तो ₹225 प्रति किलो बोनस (100 अंडों पर कम से कम 32 किलो उपज)।
केवल मैसूर बीज क्षेत्र के केंद्रीय रेशम बोर्ड में पंजीकृत बीज उत्पादकों के लिए; प्रति किलो 1,000 से ज़्यादा कोया नहीं होने चाहिए और कोया तुरंत सुखाने (स्टिफ़लिंग) होंगे। दरें रेशम विभाग के 2024-25 दिशानिर्देशों से हैं (31.05.2024 का परिपत्र, जो 22.04.2025 के आरटीआई 4(1)(बी) प्रकटीकरण में छपा है)। 2026-27 के बजट में इसी मूल्य स्थिरीकरण निधि शीर्ष में ₹2,800 लाख का अनुदान रखा है; बाद का कोई दर परिपत्र नहीं मिला।
“ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ : 1 — ಮೈಸೂರು ಬಿತ್ತನೆ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಬಿತ್ತನೆಗೆ ಯೋಗ್ಯವಾಗಿದ್ದು, ಬೇಡಿಕೆ ಇಲ್ಲದೆ ನೂಲು ಬಿಚ್ಚಾಣಿಕೆಗೆ ಮಾರಾಟವಾಗುವ ಶುದ್ಧ ಮೈಸೂರು ತಳಿ ಬಿತ್ತನೆ ಗೂಡಿಗೆ ಬೋನಸ್ ಪ್ರತಿ ಕೆ.ಜಿ.ಗೆ ರೂ.225/- ನೀಡುವುದು.”बीज के लायक बाइवोल्टीन बीज कोया का ख़रीदार न मिले और उसे धागा निकालने के लिए बेचना पड़े, तो ₹225 प्रति किलो बोनस (100 अंडों पर कम से कम 45 किलो उपज)।
केवल बाइवोल्टीन बीज क्षेत्र के केंद्रीय रेशम बोर्ड में पंजीकृत बीज उत्पादकों के लिए; प्रति किलो 700 से ज़्यादा कोया नहीं होने चाहिए। दरें रेशम विभाग के 2024-25 दिशानिर्देशों से हैं (31.05.2024 का परिपत्र, जो 22.04.2025 के आरटीआई 4(1)(बी) प्रकटीकरण में छपा है)। 2026-27 के बजट में इसी मूल्य स्थिरीकरण निधि शीर्ष में ₹2,800 लाख का अनुदान रखा है; बाद का कोई दर परिपत्र नहीं मिला।
“ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ : 2 — ದ್ವಿತಳಿ(ಬೈವೋಲ್ಟೈನ್) ಬಿತ್ತನೆ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಬಿತ್ತನೆಗೆ ಯೋಗ್ಯವಾಗಿದ್ದು, ಬೇಡಿಕೆ ಇಲ್ಲದೆ ನೂಲು ಬಿಚ್ಚಾಣಿಕೆಗೆ ವಿಲೇವಾರಿಯಾದಲ್ಲಿ ಅಂತಹ ಬಿತ್ತನೆ ಗೂಡಿಗೆ ಪ್ರತಿ ಕೆ.ಜಿ.ಗೆ ರೂ.225/-ಗಳ ಬೋನಸ್ ಪಾವತಿಸುವುದು.”उत्तर कर्नाटक के ज़िले के बाइवोल्टीन कोया को किसी भी सरकारी कोया बाज़ार में बेचने पर हर किलो पर ₹10।
शामिल ज़िले: बीदर, कलबुर्गी, यादगीर, रायचूर, कोप्पल, विजयपुरा, बागलकोट, बल्लारी, विजयनगर, गदग, बेलगावी, हावेरी, धारवाड़, उत्तर कन्नड़ और दक्षिण कन्नड़। 2026-27 के बजट भाषण (अनुच्छेद 61) के अनुसार दर ₹20 प्रति किलो होगी; नई दर का आदेश छपने तक हम दिशानिर्देशों में छपी ₹10 की दर दिखाते हैं।
“ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ: 7 — ಉತ್ತರ ಕರ್ನಾಟಕದ ಜಿಲ್ಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಉತ್ಪಾದನೆಯಾಗಿ ರಾಜ್ಯದ ಯಾವುದೇ ಸರ್ಕಾರಿ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡಿನ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗಳಲ್ಲಿ ವಹಿವಾಟಾದ ಪ್ರತಿ ಕೆ.ಜಿ. ದ್ವಿತಳಿ ರೇಷ್ಮೆ ಗೂಡಿಗೆ ರೂ.10/-ರಂತೆ ಸಾಗಾಣಿಕಾ ವೆಚ್ಚ ನೀಡಲಾಗುವುದು”ग्रामीण किसान महिला या महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य को 5 सप्ताह की 20 देसी मुर्गियाँ।
पृष्ठ यह नहीं बताता कि मुर्गियाँ मुफ़्त हैं या लाभार्थी को कितना देना है; पशु चिकित्सा कार्यालय से पूछें।
“Distribution of Poultry birds by Karnataka Cooperative Poultry Federation: Local poultry birds are reared for 5 weeks and 20 birds each will be distributed to rural farmer women/members of Mahila Self Help group”भेड़ एवं ऊन उत्पादक सहकारी समिति के सदस्य को 20+1 भेड़/बकरी इकाई की ₹1,75,000 लागत पर 25% राज्य अनुदान — ₹43,750।
पृष्ठ यह नहीं बताता कि एनसीडीसी का 50% ऋण है या अनुदान। योजना विभाग की 2025-26 सूची में है पर 2026-27 सूची में नहीं, और साइट पर एकमात्र आदेश (13.06.2024) 2024-25 का है, इसलिए स्थिति अज्ञात है।
“Amrita Swabhimani Kurigahi scheme: Under the Amrita Swabhimani Kurigahi scheme, 20+1 sheep/goat units will be provided to 10 thousand economically backward members of the sheep and wool producers cooperative societies at a unit cost of Rs.1,75,000/-. 50% of the unit cost will be provided by the National Cooperative Development Corporation,Department of Cooperation, Government of India, 25% grant from State Government and 25% contribution from the beneficiary.”10 मादा और 1 नर सूअर की इकाई: लागत का 25%, अधिकतम ₹1,00,000 तक गिनी जाएगी — अधिकतम ₹25,000।
“Piggery Unit — 10 Sows + 1 Boar (Yorkshire breed) — Cost of 10 Sows @ Rs. 9000/- each 90,000/- Cost of 1 Boar @ 10,000/- each 10,000/- Total 100,000/- Maximum subsidy for one piggery unit @25 % = Rs. 25000/-”15 मादा और 1 नर की भेड़ या बकरी इकाई: लागत का 25%, अधिकतम ₹98,000 तक — अधिकतम ₹24,500।
“Sheep Unit 15 Ewe+1Ram Cost of 15 Ewe @ Rs. 6,000/- each 90,000/- Cost of 1 Ram @ 8,000/- each 8,000/- Total 98,000/- Maximum subsidy for one Sheep unit @ 25 % = Rs. 24500/- … Goat Unit 15 Doe +1 Buck … Total 98,000/- Maximum subsidy for one Goat unit @ 25 % = Rs. 24500/-”10 मादा और 1 नर सूअर की इकाई: लागत का 50%, अधिकतम ₹1,00,000 तक — अधिकतम ₹50,000।
“Piggery Unit 10 Sows + 1 Boar Cost of 10 Sows @ Rs. 9000/- each 90,000/- (Yorkshire breed) Cost of 1 Boar @ 10000/- each 10,000/- Total 1,00,000/- Maximum subsidy for one piggery unit @ 50 % = Rs. 50000/-”15 मादा और 1 नर की भेड़ या बकरी इकाई: लागत का 90%, अधिकतम ₹98,000 तक — अधिकतम ₹88,200।
“Sheep Unit 15Ewe+1Ram … Total 98,000/- Maximum subsidy for one Sheep unit @ 90 % = Rs. 88200/- Goat Unit 15 Doe + 1 Buck … Total 98,000/- Maximum subsidy for one Goat unit @ 90 % = Rs. 88200/-”₹70,000 की 10 मादा और 1 नर की भेड़ या बकरी इकाई, पूरा पैसा सरकार का: ₹52,500 विक्रेता को और ₹17,500 आपको वापस।
आवेदक 18–55 वर्ष, हरियाणा निवासी, बेरोज़गार हो, और पहले किसी विभागीय योजना में भेड़/बकरी इकाई न ली हो। नस्लें: बीटल, जमुनापारी, सिरोही या अन्य देसी बकरी; गद्दी, नाली, मारवाड़ी, मुंजाल या अन्य देसी भेड़। 2026-27 में 571 इकाइयाँ।
“Incase of Scheduled Caste (BPL/Widow); SC Category and landless General, BC, Other Category, HLDB/Government will provide financial assistance to the tune of 75 % of the unit cost (Rs. 52500/- per unit) on the establishment of livestock unit after the purchase of livestock to the seller within 15 days … The financial assistance of balance 25% of unit cost (Rs. 17500/- per unit) in case of SC(BPL/Widow), SC and landless General, BC and Other Category Beneficiaries would be provided by the HLDB/Government in form of subsidy to beneficiary after two months of establishment of unit”50 चूज़े (10 दिन के), दो पानी के बर्तन और दो दाना बर्तन, मुफ़्त आपके घर पर।
आवेदक 18–60 वर्ष और हरियाणा निवासी हो; जिसे (या जिसके पति/पत्नी को) यह लाभ पहले मिल चुका है, वह दोबारा आवेदन नहीं कर सकता (पैरा 8)।
“There will be a target to setup 1500 backyard poultry units in the State in which each beneficiary will be provided 10 days old 50 chicks free of cost along with two drinkers and two feeders at their doorstep.”मैदानी क्षेत्र में व्यवसायिक लेयर फार्म (30,000 पक्षी): परियोजना लागत का 30%, लागत अधिकतम ₹1.80 करोड़ तक गिनी जाएगी — अधिकतम ₹54 लाख।
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“व्यवसायिक लेयर फार्म की स्थापना — मैदानी क्षेत्र — 30000 कुक्कुट पक्षी — 2.5 एकड़ — कुल स्वीकृत परियोजना लागत 1.80 (रू0 करोड़ में) — अधिकतम स्वीकार्य सब्सिडी 54.00 (रू0 लाख में) … सब्सिडी: मैदानी क्षेत्रों के लिए कुल परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तथा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है।”पर्वतीय क्षेत्र में व्यवसायिक लेयर फार्म (15,000 पक्षी): परियोजना लागत का 40%, लागत अधिकतम ₹1.20 करोड़ तक — अधिकतम ₹48 लाख।
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“व्यवसायिक लेयर फार्म की स्थापना — पर्वतीय क्षेत्र — 15000 कुक्कुट पक्षी — 1.5 एकड़ — कुल स्वीकृत परियोजना लागत 1.20 (रू0 करोड़ में) — अधिकतम स्वीकार्य सब्सिडी 48.00 (रू0 लाख में)”मैदानी क्षेत्र में ब्रॉयलर पैरेंट फार्म (10,000 पक्षी): परियोजना लागत का 30%, लागत अधिकतम ₹2.10 करोड़ तक — अधिकतम ₹63 लाख।
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“ब्रायलर पेरेन्ट फार्म की स्थापना — मैदानी क्षेत्र — 10000 कुक्कुट पक्षी — 4.0 एकड़ — 2.10 (रू0 करोड़ में) — 63.00 (रू0 लाख में)”पर्वतीय क्षेत्र में ब्रॉयलर पैरेंट फार्म (5,000 पक्षी): परियोजना लागत का 40%, लागत अधिकतम ₹1.40 करोड़ तक — अधिकतम ₹56 लाख।
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“ब्रायलर पेरेन्ट फार्म की स्थापना — पर्वतीय क्षेत्र — 5000 कुक्कुट पक्षी — 2.0 एकड़ — 1.40 (रू0 करोड़ में) — 56.00 (रू0 लाख में)”ब्रायलर फार्म (हर बैच 500 पक्षी): 6 बैच तक ₹15 प्रति पक्षी (₹45,000) और बाड़े के लिए एक बार ₹15,000 — प्रति फार्म ₹60,000।
एसओपी के अनुसार ब्रायलर फार्म की सब्सिडी शासनादेश 1631/XV-1/22-1(15) 2022, दिनांक 15 नवम्बर 2022 के अनुसार ही रहेगी। विभाग के पृष्ठ के अनुसार महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता है।
“योजनान्तर्गत प्रत्येक ब्रायलर फार्म को दी जाने वाली कुल सब्सिडी– रूपये 60000.00 (रूपये साठ हजार मात्र) 1. प्रथम– सब्सिडी @ रूपये 15/पक्षी, 1 बैच हेतु अनुदान (500 पक्षी)– रूपये 7500.00 6 बैच हेतु कुल सब्सिडी रूपये 45000.00 2. द्वितीय– बाड़ा निर्माण हेतु एक मुस्त रूपये 15000.00 का अनुदान कुल सब्सिडी रूपये 60,000 प्रति फार्म”पर्वतीय ज़िले में ब्रायलर फार्म: हर पाले गए पक्षी पर ₹10 आहार सब्सिडी, अधिकतम 3,000 पक्षी — अधिकतम ₹30,000।
आहार सब्सिडी केवल 9 पर्वतीय ज़िलों में मिलती है: अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी। यह 2025-26 से 3 साल चलेगी, फिर पशुपालन व वित्त विभाग तय करेंगे कि इसे आगे चलाना है या नहीं।
“प्रत्येक पक्षी (End Product) पर रूपये 10.00 (रूपये दस मात्र) की धनराशि आहार अनुदान के रूप में दी जायेगी। … प्रति लाभार्थी कुल कुक्कुट आहार सब्सिडी (अधिकतम 3000 पक्षी)–6 बैच x 500 पक्षी = रूपये 30,000.00 (रू0 5000.00 प्रति बैच)।”कुक्कुट वैली (एम-पैक्स सदस्य): ₹30 प्रति पक्षी, अधिकतम 500 पक्षी — ₹15,000।
केवल एम-पैक्स सहकारी समिति के सदस्य ही जुड़ सकते हैं। विभाग का पृष्ठ बताता है कि बाड़े और चूज़ों के लिए सहकारिता विभाग ब्याज-मुक्त ऋण देता है।
“राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्रों से 500 एकदिवसीय चूजे एक माह तक पालने हेतु सहकारी समिति एम.पैक्स को पशुपालन विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं … योजनान्तर्गत रूपये 30.00 प्रति पक्षी, कुल रूपये 15000.00 (रूपये पन्द्रह हजार मात्र) सब्सिडी देय है।”पर्वतीय ज़िले में कुक्कुट वैली फार्म: ₹10 प्रति पक्षी आहार सब्सिडी, अधिकतम 500 पक्षी — अधिकतम ₹5,000।
आहार सब्सिडी केवल 9 पर्वतीय ज़िलों में मिलती है: अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चम्पावत, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी। यह 2025-26 से 3 साल चलेगी, फिर पशुपालन व वित्त विभाग तय करेंगे कि इसे आगे चलाना है या नहीं।
“प्रति लाभार्थी कुल कुक्कुट आहार सब्सिडी (अधिकतम 500 पक्षी)– 2 बैच x 250 पक्षी = रूपये 5000.00 (रू0 2500.00 प्रति बैच)”10 मादा और 1 नर की बकरी इकाई: राज्य ₹70,000 का 90% — ₹63,000 देता है; आप ₹7,000 देते हैं।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ हाल का है (अंतिम अद्यतन 13 मई 2025) पर उस पर वर्ष नहीं लिखा; 2026-27 के बजट में पशुपालन विभाग की “स्वरोजगारपरक व लाभार्थीपरक योजना” के लिए ₹42.02 करोड़ हैं, पर इन इकाइयों का नाम नहीं है।
“Goat rearing … one unit of goat rearing (10 females and 1 male) for 10 to 14 months. Out of the total cost of the scheme of Rs. 70,000.00, 90 percent of the amount i.e. Rs. 63,000.00 is being borne by the State Government and 10 percent of the amount i.e. Rs. 7,000.00 is to be borne by the beneficiary.”10 भेड़ और 1 मेढ़े की इकाई: राज्य ₹70,000 का 90% — ₹63,000 देता है; आप ₹7,000 देते हैं।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ हाल का है (अंतिम अद्यतन 13 मई 2025) पर उस पर वर्ष नहीं लिखा; 2026-27 के बजट में पशुपालन विभाग की “स्वरोजगारपरक व लाभार्थीपरक योजना” के लिए ₹42.02 करोड़ हैं, पर इन इकाइयों का नाम नहीं है।
“Sheep rearing … providing a unit (10 females and 1 male) for sheep rearing for 10 to 14 months. Out of the total cost of the scheme of Rs. 70,000.00, 90 percent of the amount i.e. Rs. 63,000.00 is being borne by the State Government and 10 percent of the amount i.e. Rs. 7,000.00 is to be borne by the beneficiary.”परित्यक्त, विधवा, बेसहारा, अकेली या आपदा प्रभावित महिलाएँ: ₹35,000 की बकरी इकाई (3 मादा + 1 नर), पूरा ख़र्च राज्य देता है।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ हाल का है (अंतिम अद्यतन 13 मई 2025) पर उस पर वर्ष नहीं लिखा; 2026-27 के बजट में पशुपालन विभाग की “स्वरोजगारपरक व लाभार्थीपरक योजना” के लिए ₹42.02 करोड़ हैं, पर इन इकाइयों का नाम नहीं है।
“Women Goat Rearing Benefits A unit of goats (03 female and 01 male) of 12 to 18 months is provided to eligible women. The full cost of the scheme Rs. 35,000.00 is being borne by the State Government. Eligibility/Beneficiaries Abandoned, widowed, destitute, living alone and disaster affected women will be eligible”ऊन ₹100 प्रति किलो से कम में बिके तो अंतर की राशि राज्य देगा।
स्थिति अज्ञात: 2026-27 बजट में घोषणा; इसी पैरा में ऊन कतरन, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए ₹2 करोड़ रखे गए हैं। एकमात्र दस्तावेज़ 2026-27 का बजट भाषण है; विभाग की वेबसाइटों पर लागू करने की कोई अधिसूचना नहीं मिली।
“To stabilize the purchase price of wool, I also announce a Support Price of 100 rupees per kilogram for wool under the Market Stabilization Scheme. If sheep rearers get a market price lower than this value, then the Government will provide compensation for the difference between the sale price and 100 rupees through DBT.”कारगिल के गाँव के झुंड (शहर में 300–400, गाँव में 500–600 पशु) पारंपरिक चरागाह में: गर्मियों के अधिकतम 5 महीने चरवाहे के मासिक मानदेय का 90% विभाग देता है; 10% गाँव वाले।
पृष्ठ पर मासिक मानदेय की रक़म बिगड़ी हुई छपी है (“QO,OOO/-”), इसलिए नहीं दिखाई। स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ बिना तारीख़ का है (योजना सूची के ऊपर “2025-25” लिखा है) और इन मदों का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला भेड़ पालन अधिकारी (लेह या कारगिल) से पूछें।
“Rarzi System under Special Development Package (SDP) Component @ 90% subsidy to Sheep and Goat rearers(For Kargil District) … Flock Size Requirement: Urban Areas (within Municipal Council Limits): Flock size must be between 300-400 livestock. Rural Areas: Flock size must be between 500—600 livestock. … Monthly Honorarium: … 10% contribution from villagers. 90% subsidized by the department via DBT (Direct Benefit Transfer) to the Rarzi’s bank account. Engagement Period: Maximum of 5 months during the summer grazing season.”कारगिल में 400–700 पशुओं के गाँव के झुंड: समुदाय के अनुरोध पर विभाग गर्मियों के चरागाह शिविर में सामुदायिक शेड बनाता है।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ बिना तारीख़ का है (योजना सूची के ऊपर “2025-25” लिखा है) और इन मदों का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला भेड़ पालन अधिकारी (लेह या कारगिल) से पूछें।
“Construction of Livestock Shelter Sheds at Summer Grazing Camps under SDP and Capex(Kargil District) … Eligibility Criteria for village level flock: a. The livestock must consist of 400 to 700. b. The community shelter shed is constructed after survey of the concerned BVO / In-charge and as per demand of the public. c. A formal request letter must be submitted by the concerned community head.”लेह (चांगथांग): सर्दियों में पश्मीना मेमनों के लिए मिल्क रिप्लेसर 90% अनुदान पर, मेमनों की संख्या के अनुसार।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ बिना तारीख़ का है (योजना सूची के ऊपर “2025-25” लिखा है) और इन मदों का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला भेड़ पालन अधिकारी (लेह या कारगिल) से पूछें।
“G) Provision of milk replacer for Pashmina goat kids @ 90% subsidy(Leh District). … Distribution of milk replacer is based on kid/ lamb holding.”विभाग से पशु आहार 75% अनुदानित दर पर (एलएएचडीसी अनुदान)।
स्थिति अज्ञात: विभाग का पृष्ठ बिना तारीख़ का है (योजना सूची के ऊपर “2025-25” लिखा है) और इन मदों का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला भेड़ पालन अधिकारी (लेह या कारगिल) से पूछें।
“Distribution of feed under LAHDC Subsidy Department also provides feed at 75% subsidized rate”भेड़/बकरी प्रजनन फ़ार्म (कम से कम 500 मादा + 25 नर) की पूँजी लागत का 50%, अधिकतम ₹50 लाख, दो किस्तों में।
व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, किसान सहकारी समितियाँ, संयुक्त देयता समूह और धारा 8 कंपनियाँ आवेदन कर सकती हैं। कार्यशील पूँजी, निजी वाहन, ज़मीन ख़रीद, किराया या पट्टे पर सब्सिडी नहीं। काम पूरा होने के बाद तीन साल तक परियोजना की निगरानी होती है।
“Pattern of Assistance: 50% capital subsidy up to Rs. 50 lakh in two instalments. … The Entrepreneurs / Eligible Entities can establish sheep and goat breeding unit with minimum 500 females and 25 males.”50 भेड़/बकरी की इकाई की लागत का 50% (100, 150… पशुओं पर उसी गुणा में), उस अधिकतम सीमा तक जो दिशानिर्देशों में छपी नहीं है।
पशु 1.5–2 साल के हों, यूआईडी टैग लगे हों और कम से कम दो साल प्रजनन के लिए रखे जाएँ; 20% एससी/एसटी और 10% महिला लाभार्थियों को शामिल करने का प्रयास होता है।
“Once the beneficiary has established the unit of animals/shearing unit, 50% of the unit cost as subsidy amount or maximum ceiling, whichever is less, shall be released by the concerned District Sheep Husbandry Officer (DSHO)”भेड़ पालकों के एफपीओ/एफपीसी को पंजीकरण और साझा सुविधा केंद्र (प्रजनन, स्वास्थ्य, मशीन से ऊन कटाई, ऊन प्रसंस्करण) के लिए एक बार ₹18 लाख प्रोत्साहन।
“The FPO shall be eligible for one time incentive of Rs 18 lac per FPO/FPC for registration, establishment of CFC”