निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।

योजना चालू है

परंपरागत कृषि विकास योजना (जैविक खेती क्लस्टर)

2026-27 के केंद्रीय बजट में राशि: आउटपुट-आउटकम निगरानी ढाँचा 2026-27 (केंद्रीय बजट) (तिथि नहीं छपी, 4. Rashtriya Krishi Vikas Yojana (CSS), financial outlay 2026-27 ₹8,550 crore; component d. Green Revolution: Paramparagat Krishi Vikas Yojana (CSS), outputs and outcomes 2026-27 (targets "Target not amenable", footnote 8 "On demand basis"))

PKVY · कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय · केंद्रीय योजना, सभी राज्य

पीकेवीवाई क्लस्टर में मिलकर जैविक खेती करने वाले किसानों को पीजीएस-इंडिया प्रमाणन के साथ सहायता। इसका एक हिस्सा डीबीटी से सीधे किसान को मिलता है।

मुख्य लाभ
₹15,000प्रति हेक्टेयर (3 साल में), अधिकतम
घटक
3हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
कौन ले सकता है
5तरह के आवेदक
अंतिम तिथि
कोई नहींकभी भी आवेदन

क्या मिलता है

₹15,000प्रति हेक्टेयर (3 साल में), अधिकतम

तीन साल में ₹15,000 प्रति हेक्टेयर (₹5,000 प्रति वर्ष), डीबीटी से, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक।

स्रोत पीएम-आरकेवीवाई परिचालन दिशानिर्देश (भाग B.5: पीकेवीवाई) · धारा B.5.9; table "Components and Financial break up", row 2.2 "Incentive to farmers as DBT" (p.108); B.5.7(b) (p.105) · पृ. 107 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

तालिका में पहले, दूसरे और तीसरे साल ₹5,000-₹5,000 छपे हैं — कुल ₹15,000 प्रति हेक्टेयर। अक्सर बताए जाने वाले ₹31,500 प्रति हेक्टेयर पूरे क्लस्टर का बजट है; बाकी पैसा क्लस्टर बनाने, कर्मचारियों, प्रमाणन और विपणन पर खर्च होता है, किसान को नकद नहीं मिलता। एक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए लाभ ले सकता है (B.5.7(b))। आपको पीकेवीवाई क्लस्टर समूह में होना ज़रूरी है।

“Financial assistance to farmers shall be provided as incentive for eco-system service and for procurement/ management of organic inputs. Necessary funds under the head shall be released directly to the farmer beneficiaries as Direct Benefit Transfer (DBT) in their bank accounts.”
मुफ़्त3 साल तक ₹1,000 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष (कुल ₹3,000 प्रति हेक्टेयर) का समूह जैविक प्रमाणन, पीजीएस-इंडिया क्षेत्रीय परिषद के माध्यम से; हर किसान सदस्य को सालाना जैविक प्रमाणपत्र छापकर दिया जाता है।

आपके पीकेवीवाई समूह का जैविक प्रमाणन (पीजीएस-इंडिया या एनपीओपी) तीन साल तक योजना के ख़र्च पर।

स्रोत पीएम-आरकेवीवाई परिचालन दिशानिर्देश (भाग B.5: पीकेवीवाई) · धारा B.5.10 table "Components and Financial break up", row 2.1 Certification (PGS or NPOP); B.5.7(b); Annexure-XLXI · पृ. 108 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

यह पैसा समूह को प्रमाणित करने वाली क्षेत्रीय परिषद को जाता है, आपको नहीं। योजना प्रति किसान अधिकतम दो हेक्टेयर तक ही ख़र्च देती है; आपकी बाकी ज़मीन भी क्लस्टर में रहकर बिना अतिरिक्त ख़र्च समूह के साथ प्रमाणित हो सकती है (B.5.7(b))।

“Certification (PGS or NPOP) 1000 1000 1000 3000”
मुफ़्तआपके प्रमाणन का ख़र्च (क्षेत्रीय परिषद से पीजीएस, या तीसरे पक्ष से एनपीओपी प्रमाणन) योजना सीधे क्षेत्रीय परिषद या प्रमाणन संस्था को लौटाती है; 1 हेक्टेयर से कम पर अनुपात में गिना जाता है।

अगर आप किसी पीकेवीवाई क्लस्टर से दूर जैविक खेती करते हैं, तो योजना आपका जैविक प्रमाणन शुल्क सीधे प्रमाणन संस्था को दे सकती है।

स्रोत पीएम-आरकेवीवाई परिचालन दिशानिर्देश (भाग B.5: पीकेवीवाई) · धारा B.5.7(d); B.5.4; Annexure-XLXIII para 1(a)–(f) · पृ. 105–106, 353 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

किसी क्षेत्रीय परिषद या एनपीओपी प्रमाणन संस्था में पंजीकरण कराएँ, फिर आईसी-1 स्थिति वाला स्कोप प्रमाणपत्र मिलने पर जैविक खेती पोर्टल पर; राज्य सूची सत्यापित करता है और पैसा प्रमाणन संस्था को जाता है (अनुलग्नक-XLXIII 1(a)–(c))। सीमा “घटक 14-B (3 और 4)” वाली बताई गई है, पर इस दिशानिर्देश में ऐसा कोई घटक या राशि नहीं छपी, इसलिए हम कोई राशि नहीं दिखाते। बड़े, लगातार फैले पारंपरिक/स्वाभाविक जैविक क्षेत्रों को केवल प्रमाणन के लिए ₹900 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष, 3 साल तक, ग्राम पंचायत या राज्य को मिलता है (B.5.7(e); अनुलग्नक-XLXIII 2(h))।

“In cases where individual willing farmers or small farmer groups are interested to join the scheme and are located at distance from new/ existing PKVY clusters or large farmers that have not been included in the groups, then such farmers will also be considered as an extension of the group/ clusters and will be supported only for certification under component 14-B (3 & 4) PGS Certification through Regional Councils.”

मुझे कितना मिल सकता है?

आँकड़ा देखने के लिए हेक्टेयर (3 साल में) की संख्या भरें।

स्रोत पीएम-आरकेवीवाई परिचालन दिशानिर्देश (भाग B.5: पीकेवीवाई) · धारा B.5.9; table "Components and Financial break up", row 2.2 "Incentive to farmers as DBT" (p.108); B.5.7(b) (p.105) · पृ. 107 · हमारी प्रति (PDF)

तालिका में पहले, दूसरे और तीसरे साल ₹5,000-₹5,000 छपे हैं — कुल ₹15,000 प्रति हेक्टेयर। अक्सर बताए जाने वाले ₹31,500 प्रति हेक्टेयर पूरे क्लस्टर का बजट है; बाकी पैसा क्लस्टर बनाने, कर्मचारियों, प्रमाणन और विपणन पर खर्च होता है, किसान को नकद नहीं मिलता। एक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए लाभ ले सकता है (B.5.7(b))। आपको पीकेवीवाई क्लस्टर समूह में होना ज़रूरी है।

कौन आवेदन कर सकता है

  • अन्य किसान
  • लघु या सीमांत किसान
  • अनुसूचित जाति किसान
  • अनुसूचित जनजाति किसान
  • महिला किसान

ज़रूरी काग़ज़

  • बैंक खाता — प्रोत्साहन राशि डीबीटी से मिलती है (B.5.9)

आवेदन कैसे करें

  1. क्लस्टर राज्य सरकार चुनती है, खासकर पहाड़ी, आदिवासी और वर्षा-आधारित इलाकों में (B.5.2)। ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें कि आपके पास पीकेवीवाई क्लस्टर बन रहा है या नहीं।
  2. किसी पीकेवीवाई/पीजीएस समूह से जुड़ें: एक गाँव या आसपास के गाँवों में कम से कम 20 किसान, लगभग 20 हेक्टेयर ज़मीन (B.5.7)।
  3. समूह के साथ पीजीएस-इंडिया जैविक मानकों का पालन करें; समूह का प्रमाणन क्षेत्रीय परिषद के माध्यम से होता है (B.5, B.5.1)।
  4. किसान प्रोत्साहन राशि डीबीटी से सीधे आपके बैंक खाते में आती है (B.5.9)।

आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।

कब आवेदन करें

दिशानिर्देशों में कोई अंतिम तिथि नहीं है।

दूसरी योजनाओं के साथ

दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।