उत्तराखण्ड कुक्कुट विकास नीति-2025 — व्यवसायिक लेयर एवं ब्रॉयलर पैरेंट फार्म
चालू होने का आधार: उत्तराखण्ड कुक्कुट विकास नीति-2025 — मानक संचालन प्रक्रिया शासनादेश (10 अक्टूबर 2025) (10 अक्टू॰ 2025, para 2: “यह नीति 09 जून 2025 से 31 दिसंबर, 2030 तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।”)
बड़े मुर्गी फार्म के लिए पूँजी सब्सिडी: मैदानी क्षेत्र में परियोजना लागत का 30% और पर्वतीय क्षेत्र में 40% — व्यवसायिक लेयर फार्म पर अधिकतम ₹54 लाख (मैदानी) या ₹48 लाख (पर्वतीय), ब्रॉयलर पैरेंट फार्म पर ₹63 लाख या ₹56 लाख।
- मुख्य लाभ
- 40%लागत का, अधिकतम
- घटक
- 4हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
- कौन ले सकता है
- सभीआवेदक
- अंतिम तिथि
- कोई नहींकभी भी आवेदन
क्या मिलता है
मैदानी क्षेत्र में व्यवसायिक लेयर फार्म (30,000 पक्षी): परियोजना लागत का 30%, लागत अधिकतम ₹1.80 करोड़ तक गिनी जाएगी — अधिकतम ₹54 लाख।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“व्यवसायिक लेयर फार्म की स्थापना — मैदानी क्षेत्र — 30000 कुक्कुट पक्षी — 2.5 एकड़ — कुल स्वीकृत परियोजना लागत 1.80 (रू0 करोड़ में) — अधिकतम स्वीकार्य सब्सिडी 54.00 (रू0 लाख में) … सब्सिडी: मैदानी क्षेत्रों के लिए कुल परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तथा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है।”पर्वतीय क्षेत्र में व्यवसायिक लेयर फार्म (15,000 पक्षी): परियोजना लागत का 40%, लागत अधिकतम ₹1.20 करोड़ तक — अधिकतम ₹48 लाख।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“व्यवसायिक लेयर फार्म की स्थापना — पर्वतीय क्षेत्र — 15000 कुक्कुट पक्षी — 1.5 एकड़ — कुल स्वीकृत परियोजना लागत 1.20 (रू0 करोड़ में) — अधिकतम स्वीकार्य सब्सिडी 48.00 (रू0 लाख में)”मैदानी क्षेत्र में ब्रॉयलर पैरेंट फार्म (10,000 पक्षी): परियोजना लागत का 30%, लागत अधिकतम ₹2.10 करोड़ तक — अधिकतम ₹63 लाख।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“ब्रायलर पेरेन्ट फार्म की स्थापना — मैदानी क्षेत्र — 10000 कुक्कुट पक्षी — 4.0 एकड़ — 2.10 (रू0 करोड़ में) — 63.00 (रू0 लाख में)”पर्वतीय क्षेत्र में ब्रॉयलर पैरेंट फार्म (5,000 पक्षी): परियोजना लागत का 40%, लागत अधिकतम ₹1.40 करोड़ तक — अधिकतम ₹56 लाख।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
“ब्रायलर पेरेन्ट फार्म की स्थापना — पर्वतीय क्षेत्र — 5000 कुक्कुट पक्षी — 2.0 एकड़ — 1.40 (रू0 करोड़ में) — 56.00 (रू0 लाख में)”मुझे कितना मिल सकता है?
आँकड़ा देखने के लिए परियोजना लागत भरें।
मैदानी क्षेत्र: देहरादून सदर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर तहसीलें, नैनीताल की मैदानी तहसीलें, और पूरा हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर। पर्वतीय क्षेत्र: बाक़ी नौ ज़िले और देहरादून-नैनीताल की पहाड़ी तहसीलें। एसओपी में 70% बैंक ऋण माना गया है; सब्सिडी ऋण खाते में तीन किस्तों में आती है (ढाँचा बनने पर 50%, उत्पादन शुरू होने पर 40%, दो साल बाद 10%), और हर साल कितनी इकाइयों को पैसा मिलेगा इसकी सीमा तय है। छोटी इकाइयाँ एमएसएमई नीति से लाभ ले सकती हैं।
कौन आवेदन कर सकता है
- सभी आवेदक
ज़रूरी काग़ज़
- ज़मीन के स्वामित्व के काग़ज़ या कम से कम 10 साल का पंजीकृत पट्टा
- बैंक का सहमति पत्र (नीति का अनुलग्नक-C)
आवेदन कैसे करें
- उत्तराखण्ड में अपने नाम की ज़मीन या कम से कम 10 साल का पंजीकृत पट्टा रखें (एसओपी, पात्रता)।
- बैंक से ऋण का सहमति पत्र (नीति का अनुलग्नक-C) लें और पशुपालन विभाग में आवेदन करें।
- हर साल की सीमा तक इकाइयाँ “पहले आओ, पहले पाओ” से स्वीकृत होती हैं; सब्सिडी तीन किस्तों में ऋण खाते में आती है।
आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।
कब आवेदन करें
दिशानिर्देशों में कोई अंतिम तिथि नहीं है।
दूसरी योजनाओं के साथ
दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।