नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी (पोकरा) चरण-2 — खेत-तालाब में मीठे पानी का मत्स्य पालन
चालू होने का आधार: महाराष्ट्र शासन निर्णय 06.10.2026 — पोकरा चरण-2 को 2026-27 के लिए ₹192.30 करोड़ (6 अक्टू॰ 2026, शासन निर्णय: ₹192,30,41,200 released to the Project Director for phase 2 in 2026-27 (budget provision 2026-27 ₹474 crore; project runs six years from 2025-26 in 7,201 villages of 21 districts — प्रस्तावना))
पोकरा परियोजना गाँवों के जिन किसानों के पास पहले से खेत-तालाब है, उन्हें एक बार मछली पालन के लिए जाल, पक्षी जाल, मछली बीज, चूना, खाद और दाने में मदद: अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला किसानों को छपी लागत का 60%, अन्य को 40% (तालाब के आकार के अनुसार ₹6,602 से ₹45,305)।
- मुख्य लाभ
- 60%लागत का, अधिकतम
- घटक
- 1हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
- कौन ले सकता है
- 5तरह के आवेदक
- अंतिम तिथि
- मौसमी“कब आवेदन करें” देखें
क्या मिलता है
परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक वाले खेत-तालाब मालिक: अपने तालाब के आकार की छपी लागत, या कम हो तो वास्तविक लागत, का 60% (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला) या 40% (अन्य)।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। प्राथमिकता क्रम अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, दिव्यांग, अन्य; तालाब में कम से कम 8–10 महीने पानी रहना चाहिए; किसी और योजना से मत्स्य पालन सहायता ली हो तो पात्र नहीं (मानदंड 1–4)। छपे अनुदान कॉलम में पूरे रुपये तक गोलाई है (जैसे ₹9,655); हम नीचे की ओर गिनते हैं, इसलिए राशि ₹1 कम दिख सकती है। लागत आधार: सहायक आयुक्त मत्स्यव्यवसाय का पत्र 12/08/2025।
“अनुसूचित जाती व जमाती प्रवर्गातील शेतकरी आणि महिला — आर्थिक मापदंडाच्या ६० टक्के अथवा प्रत्यक्ष खर्चाच्या ६० टक्के यापैकी जे कमी असेल ते; सर्वसाधारण प्रवर्गातील शेतकरी — आर्थिक मापदंडाच्या ४० टक्के अथवा प्रत्यक्ष खर्चाच्या ४० टक्के यापैकी जे कमी असेल ते”मुझे कितना मिल सकता है?
आँकड़ा देखने के लिए खेत-तालाब का आकार और अस्तरीकरण भरें।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। प्राथमिकता क्रम अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, दिव्यांग, अन्य; तालाब में कम से कम 8–10 महीने पानी रहना चाहिए; किसी और योजना से मत्स्य पालन सहायता ली हो तो पात्र नहीं (मानदंड 1–4)। छपे अनुदान कॉलम में पूरे रुपये तक गोलाई है (जैसे ₹9,655); हम नीचे की ओर गिनते हैं, इसलिए राशि ₹1 कम दिख सकती है। लागत आधार: सहायक आयुक्त मत्स्यव्यवसाय का पत्र 12/08/2025।
कौन आवेदन कर सकता है
- अन्य किसान
- लघु या सीमांत किसान
- अनुसूचित जाति किसान
- अनुसूचित जनजाति किसान
- महिला किसान
ज़रूरी काग़ज़
- मछली बीज, दाना, खाद और सामग्री के स्व-सत्यापित मूल बिल (लाभार्थी 8)
आवेदन कैसे करें
- पोकरा डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण कर दस्तावेज़ों के साथ आवेदन करें (लाभार्थी 1)।
- आपके पास पहले से खेत-तालाब और पंप होना ज़रूरी है; इनका पैसा इसमें नहीं मिलता (लाभार्थी 2)।
- पूर्व-स्वीकृति के 30 दिन में मछली बीज (सरकारी मत्स्य बीज केंद्र या अपनी ज़िम्मेदारी पर निजी केंद्र से), दाना और सामग्री ख़रीदकर मूल बिलों के साथ डीबीटी पोर्टल पर माँग करें, वरना पूर्व-स्वीकृति रद्द हो जाएगी (लाभार्थी 5, 7–8)।
आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।
कब आवेदन करें
परियोजना चलने तक (2025-26 से 2030-31) पोकरा डीबीटी पोर्टल पर कभी भी आवेदन करें; पूर्व-स्वीकृति के बाद तय दिनों में काम पूरा कर अनुदान की माँग करनी होती है।
दूसरी योजनाओं के साथ
दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।