मत्स्य पालनPMMSY
नए ग्रो-आउट तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹2.80 लाख तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4.20 लाख), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
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तालाब, केज, हैचरी और मछली परिवहन।
मत्स्य पालननए ग्रो-आउट तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹2.80 लाख तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4.20 लाख), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
मत्स्य पालनयदि आप पूर्णकालिक सक्रिय मछुआरे हैं, बीपीएल हैं, उम्र 18–60 साल है और मछुआरा सहकारी समिति के सदस्य हैं, तो मछली पकड़ने पर रोक/मंदी के मौसम में ₹4,500 मिलते हैं (3 महीने ₹1,500 प्रति माह): आपकी बचत के ₹1,500 में सरकार ₹3,000 जोड़ती है।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धनगाँव में नई इकाई: परियोजना लागत का 25% (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला और अन्य विशेष श्रेणी के लिए 35%), ₹50 लाख तक की लागत पर।
मत्स्य पालनएक फसल चक्र के जलकृषि बीमा के प्रीमियम का 40%, जल क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹25,000 और कुल अधिकतम ₹1 लाख, 4 हेक्टेयर तक के फ़ार्म के लिए।
मत्स्य पालनमत्स्य अवसंरचना परियोजना की लागत का 80% तक ऋण, जिस पर ब्याज 5% प्रति वर्ष तक कम हो सकता है क्योंकि सरकार ऋणदाता को हर साल 3% तक देती है; 2 साल की मोहलत सहित 12 साल तक में चुकाएँ।
मत्स्य पालनसुधारे गए पट्टे के तालाब में प्रथम वर्ष के मत्स्य पालन निवेश पर ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
मत्स्य पालन15–18 फ़ीट की लकड़ी या एफ.आर.पी. नाव, जाल, लाइफ जैकेट और आइसबॉक्स की लागत का 40%; गिनी जाने वाली लागत उस वर्ष की इकाई लागत तक सीमित।
मत्स्य पालनमछली बेचने के लिए हैवी ड्यूटी मोपेड (₹56,000) और 50 लीटर आइसबॉक्स (₹4,000) की लागत का 40% — अधिकतम ₹24,000।
मत्स्य पालनमछली पालन इकाई की परियोजना लागत का 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही, 45% बैंक ऋण; आपको 10% लगाना होता है।
आय सहायताहर ग्रामीण छोटे या सीमांत किसान परिवार को, बटाईदारों सहित, ₹4,000 सालाना (₹2,000 खरीफ़ से पहले और ₹2,000 रबी से पहले)।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धननए व्यावसायिक कृषि उद्यम की स्थायी पूँजी लागत (ज़मीन छोड़कर) का 40% (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए 50%), प्रति परिवार अधिकतम ₹1 करोड़।
मत्स्य पालनपहाड़ में क्लस्टर मछली तालाब: ₹500 प्रति घन मीटर (महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति को ₹600), व्यक्तिगत अधिकतम 500 घन मीटर।
मत्स्य पालनअगर आप 5 साल से ज़्यादा मछली पालन कर रहे हैं, तो तालाब के जीर्णोद्धार के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ तक।
मत्स्य पालनउन्नत मत्स्य अंगुलिका तैयार करने के लिए ₹1,00,000 प्रति 0.5 एकड़ इकाई का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/अति पिछड़ी जाति को 70%), अधिकतम 1 एकड़ (2 इकाई) तक।
मत्स्य पालनमशीनी, मोटर या बिना मोटर की नाव चलाने वाले पात्र समुद्री मछुआरे के परिवार को 15 अप्रैल – 14 जून की रोक अवधि के लिए हर साल ₹20,000।
मत्स्य पालनहर पारंपरिक मछुआरा परिवार को मंदी के मौसम के लिए ₹7,000।
मत्स्य पालनसालाना मछली पकड़ने की रोक के लिए हर समुद्री मछुआरा परिवार को ₹8,000।
मत्स्य पालनआपकी अपनी ₹1,500 बचत के ऊपर राज्य से ₹3,000 — मंदी के महीनों में कुल ₹4,500।
मत्स्य पालनबिक्री-कर के बिना डीज़ल: हर मशीनी नाव को साल में 19,000 लीटर तक, हर मोटर वाली देसी नाव को 4,400 लीटर तक।
मत्स्य पालनआपके एक्वा फ़ार्म के लिए पूरी दर की जगह ₹1.50 प्रति यूनिट पर बिजली।
मत्स्य पालनपंजीकृत ट्रॉलर मालिक को ऑटर बोर्ड की ₹70,000 इकाई लागत का 50% — ₹35,000।
मत्स्य पालनFFDA में पंजीकृत मछली पालक को ₹12,000 के ड्रैग नेट का 50% — ₹6,000।
मत्स्य पालनव्यक्तिगत केज किसान: केज जाल के ₹300 प्रति घन मीटर का 50% (₹150 प्रति घन मीटर), या असली ख़र्च कम हो तो उसका 50%, अधिकतम 1,800 घन मीटर या 18 केज, जो कम हो।
मत्स्य पालनअनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाएँ: इंजन वाली फ़ाइबर नाव की लागत का 60%, ₹2,00,000 इकाई लागत तक गिना जाता है (अधिकतम ₹1,20,000)।
मत्स्य पालनमछली जाल या हुक-लाइन (हेड रोप, फ़ुट रोप, फ़्लोटर, सिंकर आदि सहित) के असली ख़र्च का 50%, अधिकतम ₹4,00,000।
मत्स्य पालननई नाव बनवाने की लागत का 50% (केवल नाव, इंजन नहीं), अधिकतम ₹2,50,000।
मत्स्य पालनइंसुलेटेड कोल्ड-रूम की लागत का 50%, ₹4,00,000 तक गिनी जाती है — अधिकतम ₹2,00,000।
मत्स्य पालननई नाव की लागत का 50%, अधिकतम ₹15 लाख (12–14 मीटर), ₹17.5 लाख (14–16 मीटर), ₹20 लाख (16–18 मीटर) या ₹22.5 लाख (18–20 मीटर)।
मत्स्य पालनपरियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक वाले खेत-तालाब मालिक: अपने तालाब के आकार की छपी लागत, या कम हो तो वास्तविक लागत, का 60% (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला) या 40% (अन्य)।
मत्स्य पालनखारे पानी का तालाब: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹6,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹7,200), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
मत्स्य पालनपेन केकड़ा कल्चर इकाई: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹1 लाख (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹1.2 लाख), अधिकतम 0.5 हेक्टेयर।
मत्स्य पालनमछली बेचने की किट का 90%, ₹10,000 तक की लागत पर (यानी अधिकतम ₹9,000), हर वर्ग के लिए।
मत्स्य पालननाव की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
मत्स्य पालननामांकित मछुआरे की किसी भी कारण से मृत्यु पर परिवार को ₹50,000 तक।
मत्स्य पालनस्टेक नेट की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
मत्स्य पालनबैरियर नेट की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
मत्स्य पालनमोटर की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
मत्स्य पालनमछुआरिन महिलाओं के लिए बर्फ़ का बक्सा: ₹10,000 तक की लागत का 75%, अधिकतम ₹7,500।
मत्स्य पालनआपदा, आग या समुद्र/खाड़ी में दुर्घटना में मरे सक्रिय मछुआरे के कानूनी वारिस को एक बार ₹5 लाख।
मत्स्य पालनपाकिस्तान द्वारा पकड़ी गई नाव की जगह नई मछली पकड़ने की नाव का 25%, ₹10 लाख तक, पाँच साल की प्रतीक्षा के बाद।
मत्स्य पालन₹2,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% — ₹80,000 प्रति हेक्टेयर — ग्रामीण तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन पर, समूह को 2 हेक्टेयर तक।
मत्स्य पालनप्रति हेक्टेयर 10,000 फिंगरलिंग के लिए पाँच साल तक हर साल अधिकतम ₹2,000 प्रति हेक्टेयर — मछली बीज के रूप में।
मत्स्य पालनहर मछुआ सहकारी समिति को ₹3 लाख, तीन साल में, मत्स्य बीज, नाव-जाल और लीज़ राशि के लिए।
मत्स्य पालनएक 1-हेक्टेयर चौर मॉडल की छपी लागत का 50% (उद्यमी को 40%): ₹8.88 लाख (दो तालाब), ₹7.32 लाख (चार तालाब) या ₹9.69 लाख (एक तालाब + भूमि विकास), मत्स्य इनपुट सहित।
मत्स्य पालनपठारी क्षेत्र तालाब योजना, दक्षिण बिहार के चिन्हित पठारी जिलों के अनु0 जाति/जनजाति कृषकों के लिए: इकाई लागत का 80% — 1 एकड़ तालाब (₹16.70 लाख) पर ₹13,36,000 या 0.4 एकड़ यूनिट (₹10.34 लाख) पर ₹8,27,200।
मत्स्य पालनप्रशिक्षित मत्स्य बीज उत्पादकों को स्पॉन मिलता है, जिसकी कीमत का 90% सरकार देती है (अनुमानित दर अधिकतम ₹550 प्रति लाख स्पॉन); उत्पादक 10% देता है।
मत्स्य पालनफैक्ट्री में बने फ्लोटिंग फीड (2 mm या छोटा) की कीमत का 50%, अधिकतम ₹25 प्रति कि.ग्रा., 700 कि.ग्रा. तक — अधिकतम ₹17,500।
मत्स्य पालनकेज बैटरी (एक 12×8×5 मी. केज या दो 8×6×5 मी. केज) ₹3,58,000 पर 90% — ₹3,22,200।
मत्स्य पालनएक मछली-सह-बत्तख इकाई (0.4 हे. तालाब, 160 बत्तख चूज़े) ₹1,53,350: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹1,22,680), अन्य को 70% (₹1,07,345)।
मत्स्य पालनइनपुट सहित एक 0.1 हे. बायोफ्लॉक तालाब, इकाई लागत ₹14,00,000: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹11,20,000), अन्य को 70% (₹9,80,000); एक व्यक्ति को एक इकाई।
मत्स्य पालननिजी तालाब में महाझींगा पालन, इकाई लागत ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹3,20,000/हे.), अन्य को 70% (₹2,80,000/हे.)।
मत्स्य पालनसड़क किनारे, चौक या हाट में मछली बेचने वाले खुदरा विक्रेता को ₹15,000 की मछली बिक्री किट पर 95% — अधिकतम ₹14,250।
मत्स्य पालननया तालाब (घटक-I): ₹11 लाख इकाई लागत (₹7 लाख खुदाई + ₹4 लाख आदान) का 40% — ₹4.40 लाख प्रति हेक्टेयर — या 50% — ₹5.50 लाख प्रति हेक्टेयर, 0.1 से 5 हेक्टेयर जल क्षेत्र पर।
मत्स्य पालनआपके खेत तालाब की छपी आदान लागत का 40% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग को 60%): ₹16,000 (20×20 मी), ₹9,000 (15×15 मी) या ₹4,000 (10×10 मी)।
मत्स्य पालन2, 4 या 6 टैंक की बायोफ्लॉक इकाई के ₹2, ₹4 या ₹6 लाख का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग को 60%) — अधिकतम ₹3 लाख (₹3.60 लाख)।
मत्स्य पालनसीएम-एलिवेट के तहत मछली पालन इकाई की लागत का 50% सब्सिडी।
मत्स्य पालनआपकी परमिट वाली मोटर मछली नाव को मिलने वाले हर लीटर औद्योगिक केरोसिन पर ₹35 की छूट।
मत्स्य पालनमछली पकड़ने के सामान की मुफ़्त किट, 2026-27 के बजट के अनुसार ₹20,000 की (पहले ₹10,000)।
मत्स्य पालनआउटबोर्ड मोटर वाली मछली पकड़ने की नावों के लिए रियायती सफ़ेद केरोसिन; सब्सिडी अब ₹75 है (मत्स्यफ़ेड का पृष्ठ अभी पुराने ₹25 प्रति लीटर दिखाता है)।
मत्स्य पालनमत्स्य पालन के लिए सोलर बिजली: ₹50,000 प्रति किलोवाट का 60%, अधिकतम 30 किलोवाट — अधिकतम ₹9,00,000।
मत्स्य पालनतालाब इनपुट: ₹1,50,000 प्रति हेक्टेयर का 60% (₹90,000/हेक्टेयर), अधिकतम 4 हेक्टेयर — अधिकतम ₹3,60,000।
मत्स्य पालनजलाशय की मछली नीलामी में ₹100/किलो से कम बिके तो अंतर का ₹20/किलो तक राज्य देगा।
मत्स्य पालन₹50,000 का एरेटर: 50% अनुदान (₹25,000), अनुसूचित जाति के मत्स्य पालकों को 60% (₹30,000); अधिकतम दो एरेटर।
मत्स्य पालनछपी इकाई लागत का 50% (एससी, एसटी और महिलाओं को 60%), जैसे ₹3 लाख का ट्राउट रेसवे → ₹1.50 लाख (₹1.80 लाख); ₹50 लाख की ट्राउट हैचरी → ₹25 लाख (₹30 लाख)।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
नए ग्रो-आउट तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹2.80 लाख तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4.20 लाख), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹7.00 लाख प्रति हेक्टेयर। तालाब में कम से कम 1.5 मीटर पानी की गहराई हो। सहायता प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों (स्वयं सहायता समूह, जेएलजी, सहकारी समिति) के लिए 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर प्रति समूह — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं (मद 1.4(vi)–(vii))।
“1.4 Construction of New Grow-out ponds (Ha) 7.00 2.80 4.20”नए बने तालाब में पहली फ़सल के इनपुट पर प्रति हेक्टेयर ₹1.60 लाख तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹2.40 लाख)।
इकाई लागत ₹4.00 लाख प्रति हेक्टेयर, केवल पहली फ़सल के लिए, नए बने तालाब/टैंक में। मद 1.5 में अलग क्षेत्र-सीमा नहीं छपी; हम मद 1.4 में नए तालाब की 2 हेक्टेयर सीमा लगाते हैं।
“1.5 Inputs for fresh water Aquaculture including Composite fish culture, Scampi, Pangasius, Tilapia etc. (Ha) 4.00 1.60 2.40”हर 0.1 हेक्टेयर बायोफ़्लॉक इकाई पर ₹5.6 लाख तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹8.4 लाख), अधिकतम 2 इकाई।
इकाई लागत ₹14 लाख प्रति 0.1 हेक्टेयर, इनपुट सहित। प्रति व्यक्ति 0.1 हेक्टेयर की 2 इकाइयाँ; समूहों को 2 इकाई × सदस्य, अधिकतम 20 इकाई — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं (मद 1.12(ix))।
“1.12 Construction of Biofloc ponds for Freshwater areas including inputs of Rs 4 lakhs/Ha 0.1 Ha 14 5.6 8.4”नई मीठे पानी की फ़िनफ़िश हैचरी पर ₹10,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹15,00,000)।
इकाई लागत ₹25 लाख। कम से कम 0.5 हेक्टेयर पर सालाना 1.5 करोड़ फ़्राई या 6 करोड़ स्पॉन की क्षमता; डीपीआर और ज़मीन (अपनी, या कम से कम 10 साल का पंजीकृत पट्टा) ज़रूरी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.1 Establishment of New Freshwater Finfish Hatcheries (No) 25.00 10.00 15.00”नई मीठे पानी की स्कैम्पी (झींगा) हैचरी पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। कम से कम 0.5 हेक्टेयर पर सालाना 3 करोड़ पीएल की क्षमता; हैचरी का प्रशिक्षण या अनुभव ज़रूरी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.2 Establishment of New Freshwater Scampi Hatcheries (No) 50.00 20.00 30.00”नए नर्सरी / बीज-पालन तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹2,80,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,20,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹7.00 लाख प्रति हेक्टेयर; तालाब में कम से कम 1.5 मीटर पानी हो। प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों को 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.3 Construction of New Rearing ponds (nursery/seed rearing ponds) (Ha) 7.00 2.80 4.20”नई खारे पानी की हैचरी (शेलफ़िश या फ़िनफ़िश) पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। कम से कम 0.4 हेक्टेयर पर सालाना 5 लाख फ़्राई (फ़िनफ़िश) या 1 करोड़ पीएल (झींगा); जहाँ लागू हो, तटीय जलकृषि प्राधिकरण की मंज़ूरी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.6 Establishment of need based New Brackish Hatcheries (shell fish and fin fish) (No) 50.00 20.00 30.00”नए खारे पानी के जलकृषि तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹3,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,80,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹8.00 लाख प्रति हेक्टेयर। प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों को 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं। अगर तालाब में मत्स्य विभाग के मानक की पॉलीथीन लाइनिंग हो, तो हर वर्ग को प्रति हेक्टेयर ₹2 लाख तक अतिरिक्त मिल सकता है (मद 1.7(iv)) — यह यहाँ नहीं जोड़ा गया। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.7 Construction of New ponds for Brackish Water Aquaculture (Ha) 8.00 3.20 4.80”खारी / क्षारीय ज़मीन में नए तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹3,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,80,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹8.00 लाख प्रति हेक्टेयर। प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों को 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं। अगर तालाब में मत्स्य विभाग के मानक की पॉलीथीन लाइनिंग हो, तो हर वर्ग को प्रति हेक्टेयर ₹2 लाख तक अतिरिक्त मिल सकता है (मद 1.7(iv)) — यह यहाँ नहीं जोड़ा गया। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.8 Construction of New ponds for Saline /Alkaline areas (Ha) 8.00 3.20 4.80”नए खारे पानी के तालाब में पहली फ़सल के इनपुट पर प्रति हेक्टेयर ₹2,40,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹3,60,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹6.00 लाख प्रति हेक्टेयर, केवल नए बने तालाब की पहली फ़सल के लिए, तालाब तैयार होने पर। इनपुट की अलग क्षेत्र-सीमा नहीं छपी; हम तालाब की 2 हेक्टेयर सीमा लगाते हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.9 Inputs for Brackish Water Aquaculture (Ha) 6.00 2.40 3.60”नए खारे / क्षारीय तालाब में पहली फ़सल के इनपुट पर प्रति हेक्टेयर ₹2,40,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹3,60,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹6.00 लाख प्रति हेक्टेयर, केवल नए बने तालाब की पहली फ़सल के लिए। इनपुट की अलग क्षेत्र-सीमा नहीं छपी; हम तालाब की 2 हेक्टेयर सीमा लगाते हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.10 Inputs for Saline /Alkaline Water Aquaculture (Ha) 6.00 2.40 3.60”खारे / क्षारीय पानी के बायोफ़्लॉक तालाब पर प्रति 0.1 हेक्टेयर इकाई ₹7,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹10,80,000), अधिकतम 2 0.1 हेक्टेयर इकाई।
इकाई लागत ₹18 लाख प्रति 0.1 हेक्टेयर, इनपुट सहित। प्रति व्यक्ति 0.1 हेक्टेयर की 2 इकाइयाँ; समूहों को 2 × सदस्य, अधिकतम 20 इकाइयाँ। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.11 Construction of Biofloc ponds for Brackish water/Saline/ Alkaline areas including inputs of Rs 8 lakhs/Ha 0.1 Ha 18 7.2 10.8”जलाशय में प्रति हेक्टेयर 1,000 फ़िंगरलिंग डालने वाले मछुआरा समूहों को: प्रति फ़िंगरलिंग ₹1.20 (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1.80)।
इकाई लागत ₹3 प्रति फ़िंगरलिंग। केवल समूह गतिविधि के रूप में, जलाशय में मछली पकड़ने की अनुमति के साथ; राशि मत्स्य विभाग तय करता है। समूहों के लिए यहाँ सामान्य 40% दिखाया है; अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों का समूह या महिला स्वयं सहायता समूह पैरा 5.2.2 के तहत 60% का हक़दार हो सकता है — राज्य मत्स्य विभाग से पूछें। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.13 Stocking of Fingerlings in Reservoirs @1000FL/ha (3.0/1lakh FL) (Ha) Rs 3/Fingerling Rs 1.2/Fingerling Rs 1.8/Fingerling”आर्द्रभूमि में प्रति हेक्टेयर 1,000 फ़िंगरलिंग डालने वाले मछुआरा समूहों को: प्रति फ़िंगरलिंग ₹1.20 (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1.80)।
इकाई लागत ₹3 प्रति फ़िंगरलिंग। केवल समूह गतिविधि के रूप में, आर्द्रभूमि में मछली पकड़ने की अनुमति के साथ। समूहों के लिए यहाँ सामान्य 40% दिखाया है; अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों का समूह या महिला स्वयं सहायता समूह पैरा 5.2.2 के तहत 60% का हक़दार हो सकता है — राज्य मत्स्य विभाग से पूछें। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“1.14 Stocking of Fingerlings in Wet lands @1000FL/ha (3.0/1lakh /FL) (Ha) Rs 3/Fingerling Rs 1.2/Fingerling Rs 1.8/Fingerling”छोटी समुद्री फ़िनफ़िश हैचरी पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। कम से कम 0.4 हेक्टेयर पर सालाना 5 लाख फ़्राई या 1 करोड़ पीएल; ज़मीन अपनी या कम से कम 10 साल का पंजीकृत पट्टा। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.1 Establishment of Small Marine Finfish Hatcheries (No) 50.00 20.00 30.00”बड़ी समुद्री फ़िनफ़िश हैचरी पर ₹1,00,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,50,00,000)।
इकाई लागत ₹250 लाख। कम से कम 1 हेक्टेयर पर सालाना 20–30 लाख फ़्राई या 10 करोड़ पीएल। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.2 Construction of large Marine Finfish Hatcheries (No) 250.00 100.00 150.00”समुद्री फ़िनफ़िश नर्सरी पर ₹6,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹9,00,000)।
इकाई लागत ₹15 लाख। प्रति व्यक्ति, सहकारी समिति या स्वयं सहायता समूह 500 वर्ग मीटर पर सालाना कम से कम 2 लाख फ़िंगरलिंग की एक नर्सरी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.3 Marine Finfish Nurseries (No) 15.00 6.00 9.00”खुले समुद्र के केज पर प्रति केज ₹2,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹3,00,000), अधिकतम 5 केज।
इकाई लागत ₹5 लाख प्रति केज, पूँजी और एक बार के चालू ख़र्च सहित। प्रति व्यक्ति अधिकतम 5 केज; समूहों को 2 × सदस्य, अधिकतम 50। समुद्री क्षेत्र राज्य आवंटित करता है। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.4 Establishment of Open Sea cages (100-120 cubic meter volume) (No) 5.00 2.00 3.00”समुद्री शैवाल खेती के राफ़्ट (मछुआरा सहकारी समिति और महिला स्वयं सहायता समूह) पर प्रति राफ़्ट ₹600 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹900), अधिकतम 500 राफ़्ट।
इकाई लागत ₹1,500 प्रति राफ़्ट, इनपुट सहित। केवल मछुआरा सहकारी समितियाँ, अनुसूचित जाति/जनजाति सहकारी समितियाँ, महिला स्वयं सहायता समूह आदि: प्रति सदस्य 15 राफ़्ट, समूह को अधिकतम 500। समूहों के लिए यहाँ सामान्य 40% दिखाया है; अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों का समूह या महिला स्वयं सहायता समूह पैरा 5.2.2 के तहत 60% का हक़दार हो सकता है — राज्य मत्स्य विभाग से पूछें। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.5 Establishment of Seaweed culture rafts including inputs (per raft). (No) 0.015 0.006 0.009”मोनोलाइन / ट्यूबनेट समुद्री शैवाल खेती (समूह) पर प्रति 15 रस्सियों की इकाई ₹3,200 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,800), अधिकतम 300 15 रस्सियों की इकाई।
इकाई लागत ₹8,000 प्रति इकाई। सामान्यतः कप्पाफ़ाइकस के लिए समूह को 100 और ग्रेसिलेरिया के लिए 300 इकाई तक — हम 300 की सीमा लगाते हैं। समूहों के लिए यहाँ सामान्य 40% दिखाया है; अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों का समूह या महिला स्वयं सहायता समूह पैरा 5.2.2 के तहत 60% का हक़दार हो सकता है — राज्य मत्स्य विभाग से पूछें। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.6 Establishment of Seaweed culture with Monoline/tubenet Method including inputs (one unit is approximately equal to 15 ropes of 25m length) No 0.08 0.032 0.048”सीपी पालन (मसल, क्लैम, मोती) पर प्रति इकाई ₹8,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹12,000), अधिकतम 5 इकाई।
इकाई लागत ₹20,000 प्रति इकाई। प्रति व्यक्ति 5 इकाई; कम से कम 10 सदस्यों वाली सहकारी समितियों और महिला समूहों को 50। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“2.7 Bivalve cultivation (mussels, clams, pearl etc.) (No) 0.20 0.08 0.12”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: ट्राउट हैचरी पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। कम से कम 0.4 हेक्टेयर पर सालाना 10 लाख फ़्राई या 15 लाख आईड ओवा, कम से कम 4 रेसवे के साथ। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.1 Establishment of Trout Fish Hatcheries. (No) 50.00 20.00 30.00”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: कम से कम 50 घन मीटर के ट्राउट रेसवे पर प्रति रेसवे ₹1,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,80,000), अधिकतम 4 रेसवे।
इकाई लागत ₹3 लाख प्रति रेसवे। प्रति व्यक्ति 4 रेसवे; कम से कम 10 सदस्यों वाली सहकारी समितियों और समूहों को 20। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.2 Construction of Raceways of minimum of 50 cubic meter (No) 3.00 1.20 1.80”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: ट्राउट पालन की पहली फ़सल के इनपुट पर प्रति रेसवे ₹1,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,50,000), अधिकतम 4 रेसवे।
इकाई लागत ₹2.50 लाख, केवल पहली फ़सल के लिए, पालन इकाई तैयार होने पर; प्रति व्यक्ति 4 रेसवे। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.3 Inputs for Trout Rearing Units. (No) 2.50 1.00 1.50”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: नए मछली तालाब पर प्रति हेक्टेयर ₹3,36,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹5,04,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹8.40 लाख प्रति हेक्टेयर। इनपुट मद 1.5 से ₹4.0 लाख प्रति हेक्टेयर पर। प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों को 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.4 Construction of New Ponds. (Ha) 8.40 3.36 5.04”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: मध्यम शीत-जल आरएएस (4 टैंक, 4 टन प्रति फ़सल) पर ₹8,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹12,00,000)।
इकाई लागत ₹20 लाख। प्रति व्यक्ति एक इकाई; कम से कम 10 सदस्यों के समूह को 2 इकाई। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.5 Establishment of Medium RAS for Cold water Fisheries. (with 4 tank of minimum 50 m3/tank capacity and fish production capacity of 4 ton/crop) (No) 20.00 8.00 12.00”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: बड़ी शीत-जल आरएएस (10 टैंक, 10 टन प्रति फ़सल) पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। प्रति व्यक्ति एक इकाई (10 टैंक); कम से कम 10 सदस्यों के समूह को 2 इकाई। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.6 Establishment of large RAS for cold water fisheries (with 10 tanks of minimum 50 m3/tank capacity and fish production capacity of 10 ton/crop) (No) 50.00 20.00 30.00”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: एकीकृत मछली पालन के इनपुट (धान के साथ मछली, पशु के साथ मछली) पर प्रति हेक्टेयर ₹40,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹60,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹1.00 लाख प्रति हेक्टेयर; तालाब में कम से कम 1 मीटर पानी, और धान-मछली में 10–20% क्षेत्र में कम से कम 1 मीटर गहरी खाई। प्रति व्यक्ति अधिकतम 2 हेक्टेयर। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.7 Input support for Integrated fish farming (paddy cum fish cultivation, livestock cum fish, etc). (Ha) 1.00 0.40 0.60”उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में: शीत-जल क्षेत्रों में केज पर प्रति केज ₹2,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹3,00,000), अधिकतम 5 केज।
इकाई लागत ₹5 लाख प्रति केज, इनपुट सहित। प्रति व्यक्ति अधिकतम 5 केज; समूहों को 2 × सदस्य, अधिकतम 50। उप-घटक 3 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए है; दूरी और कठिन भू-भाग इन इकाई लागतों में पहले से जुड़े हैं, इसलिए 20% अतिरिक्त नहीं जुड़ता (पैरा 19.5)।
“3.8 Establishment of Cages in cold water regions. No 5.00 2.00 3.00”घर के पिछवाड़े सजावटी मछली पालन इकाई पर ₹1,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,80,000)।
इकाई लागत ₹3 लाख (शेड और टैंक)। अपना घर और कम से कम 300 वर्ग फ़ुट ख़ाली ज़मीन व पानी, या घर के पास ऐसी ज़मीन 7 साल के पट्टे पर ज़रूरी। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.1 Backyard Ornamental fish Rearing unit (both Marine and Fresh water) (No) 3.00 1.20 1.80”मध्यम आकार की सजावटी मछली पालन इकाई पर ₹3,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,80,000)।
इकाई लागत ₹8 लाख। पानी सहित कम से कम 150 वर्ग मीटर ज़मीन, अपनी या 7 साल के पट्टे पर। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.2 Medium Scale Ornamental fish Rearing Unit (Marine and Freshwater Fish) (No) 8.00 3.20 4.80”एकीकृत मीठे पानी की सजावटी मछली इकाई (प्रजनन और पालन) पर ₹10,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹15,00,000)।
इकाई लागत ₹25 लाख। कम से कम 500 वर्ग मीटर ज़मीन और सालाना 1 लाख फ़्राई की क्षमता। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.3 Integrated Ornamental fish unit (breeding and rearing for fresh water fish ) (No) 25.00 10.00 15.00”एकीकृत समुद्री सजावटी मछली इकाई (प्रजनन और पालन) पर ₹12,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹18,00,000)।
इकाई लागत ₹30 लाख। कम से कम 500 वर्ग मीटर ज़मीन और सालाना 1 लाख फ़्राई की क्षमता। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.4 Integrated Ornamental fish unit (breeding and rearing for marine fish ) (No) 30.00 12.00 18.00”मीठे पानी की सजावटी मछली ब्रूड बैंक पर ₹40,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹60,00,000)।
इकाई लागत ₹100 लाख, मौजूदा दर-अनुसूची पर आधारित। प्रति व्यक्ति एक इकाई; समूह को अधिकतम 2। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.5 Establishment of Fresh water Ornamental Fish Brood Bank. (No) 100.00 40.00 60.00”मनोरंजक मत्स्य (एंगलिंग/पर्यटन) परियोजना पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
लागत हर मामले में अलग, प्रति परियोजना ₹50 लाख की सीमा तक, खुले जल (समुद्र, नदी, झील, जलाशय) में; पारंपरिक समुद्री मछुआरा युवाओं को प्राथमिकता। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“4.6 Promotion of Recreational Fisheries. No 50.00 20.00 30.00”बड़ी आरएएस (8 टैंक, 40 टन प्रति फ़सल) या बायोफ़्लॉक प्रणाली (50 टैंक) पर ₹20,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,00,000)।
इकाई लागत ₹50 लाख। प्रति व्यक्ति एक आरएएस/बायोफ़्लॉक इकाई (बड़ी, मध्यम, छोटी या मिनी); समूहों को अधिकतम 2 बड़ी, 3 मध्यम या 4 छोटी इकाइयाँ (मद 5.4(viii)–(ix))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.1 Establishment of large RAS (with 8 tanks of minimum 90 m3/tank capacity 40 ton/crop)/ Biofloc (50 tanks of 4m dia and 1.5 high) culture system. No. 50 20 30”मध्यम आरएएस (6 टैंक, 10 टन प्रति फ़सल) या बायोफ़्लॉक प्रणाली (25 टैंक) पर ₹10,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹15,00,000)।
इकाई लागत ₹25 लाख। प्रति व्यक्ति एक आरएएस/बायोफ़्लॉक इकाई (बड़ी, मध्यम, छोटी या मिनी); समूहों को अधिकतम 2 बड़ी, 3 मध्यम या 4 छोटी इकाइयाँ (मद 5.4(viii)–(ix))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.2 Establishment of Medium RAS (with 6 tank of minimum 30m3/tank capacity 10ton/crop)/ Biofloc culture system(25 tanks of 4m dia and 1.m high) (No) 25.00 10.00 15.00”छोटी आरएएस (100 घन मीटर का 1 टैंक) या बायोफ़्लॉक प्रणाली (7 टैंक) पर ₹3,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹4,50,000)।
इकाई लागत ₹7.50 लाख। प्रति व्यक्ति एक आरएएस/बायोफ़्लॉक इकाई (बड़ी, मध्यम, छोटी या मिनी); समूहों को अधिकतम 2 बड़ी, 3 मध्यम या 4 छोटी इकाइयाँ (मद 5.4(viii)–(ix))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.3 Establishment of small RAS (with 1 tank of 100m3 capacity/Biofloc (7 tanks of 4m dia and 1.5 high) culture system No 7.50 3.00 4.50”पिछवाड़े की मिनी आरएएस इकाई पर ₹20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,000)।
इकाई लागत ₹50,000। सदस्यों के पिछवाड़े में करने वाले समूहों को 1 इकाई × सदस्य, अधिकतम 20। प्रति व्यक्ति एक आरएएस/बायोफ़्लॉक इकाई (बड़ी, मध्यम, छोटी या मिनी); समूहों को अधिकतम 2 बड़ी, 3 मध्यम या 4 छोटी इकाइयाँ (मद 5.4(viii)–(ix))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.4 Establishment of Backyard mini RAS units No. 0.50 0.20 0.30”जलाशय में केज पर प्रति केज ₹1,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,80,000), अधिकतम 5 केज।
इकाई लागत ₹3 लाख प्रति केज। केज वाली जगह पर जलाशय में साल भर लगभग 8 मीटर पानी रहे। प्रति व्यक्ति अधिकतम 5 केज; कम से कम 10 सदस्यों के समूह को 20। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.5 Installation of Cages in Reservoirs No. 3.00 1.20 1.80”खुले जल में पेन कल्चर पर प्रति हेक्टेयर ₹1,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,80,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इकाई लागत ₹3 लाख प्रति हेक्टेयर, जलाशय के लिए राज्य की अनुमति के साथ। प्रति व्यक्ति 2 हेक्टेयर तक; समूहों को 2 हेक्टेयर × सदस्य, अधिकतम 20 हेक्टेयर — हम व्यक्तिगत सीमा दिखाते हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“5.6 Pen culture in open water bodies Ha. 3.00 1.20 1.80”मछली बेचने के लिए आइस बॉक्स वाली मोटरसाइकिल पर ₹30,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹45,000)।
इकाई लागत ₹75,000। वाहन केवल मछली और मत्स्य सामग्री ढोने के लिए; दूसरे काम में लेने पर केंद्रीय सहायता ब्याज सहित वसूली जाएगी (मद 6.3–6.8 (vi)–(vii))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“6.5 Motor cycle with Ice Box No 0.75 0.30 0.45”मछली बेचने के लिए आइस बॉक्स वाली साइकिल पर ₹4,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹6,000)।
इकाई लागत ₹10,000। वाहन केवल मछली और मत्स्य सामग्री ढोने के लिए; दूसरे काम में लेने पर केंद्रीय सहायता ब्याज सहित वसूली जाएगी (मद 6.3–6.8 (vi)–(vii))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“6.6 Cycle with Ice Boxes No 0.10 0.04 0.06”मछली बेचने के लिए आइस बॉक्स वाला तिपहिया या ई-रिक्शा पर ₹1,20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹1,80,000)।
इकाई लागत ₹3 लाख। वाहन केवल मछली और मत्स्य सामग्री ढोने के लिए; दूसरे काम में लेने पर केंद्रीय सहायता ब्याज सहित वसूली जाएगी (मद 6.3–6.8 (vi)–(vii))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“6.7 Three wheeler with Ice Box including e-rickshaws for fish vending No 3.00 1.20 1.80”ज़िंदा मछली बिक्री केंद्र (स्थायी, चलता-फिरता या दोनों) पर ₹8,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹12,00,000)।
इकाई लागत ₹20 लाख। केंद्र स्थायी, चलता-फिरता वाहन या दोनों हो सकता है (मद 6.8(ix))। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“6.8 Live fish vending Centres (No) 20.00 8.00 12.00”मछली खुदरा बाज़ार (सजावटी मछली / एक्वेरियम बाज़ार सहित) पर ₹40,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹60,00,000)।
इकाई लागत ₹100 लाख। अपनी या 10 साल के पट्टे वाली दुकान का आधुनिकीकरण भी हो सकता है; लागत का 10% तक ई-मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“7.1 Construction of fish retail markets including ornamental fish/aquarium markets. No 100.00 40.00 60.00”मछली कियोस्क (एक्वेरियम / सजावटी मछली कियोस्क सहित) पर ₹4,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹6,00,000)।
इकाई लागत ₹10 लाख; कियोस्क के लिए स्व-निहित प्रस्ताव काफ़ी है। प्रति व्यक्ति लाभार्थी एक इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“7.2 Construction of fish kiosks including kiosks of aquarium/ornamental fish No 10.00 4.00 6.00”पारंपरिक मछुआरों के लिए गहरे समुद्र की मछली पकड़ने वाली नाव पर ₹48,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹72,00,000)।
इकाई लागत ₹120 लाख। केवल पारंपरिक मछुआरे और उनकी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह और एफ़एफ़पीओ; प्रति व्यक्ति 1 नाव, 10 सदस्यों के समूह को 2। यह पुराने बॉटम ट्रॉलर की जगह लेती है, जिसका निपटान करना होगा। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“8.1 Support for acquisition of Deep-sea fishing vessels for traditional fishermen No 120.00 48.00 72.00”मौजूदा मछली नाव को निर्यात योग्य बनाने (इंसुलेटेड फ़िश होल्ड, आरएसडब्ल्यू, बायो-टॉयलेट, एफ़आरपी परत) पर ₹6,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹9,00,000)।
इकाई लागत ₹15 लाख। किसी योजना में पहले अपग्रेड हुई नाव पात्र नहीं, और 5 साल तक नाव बेची नहीं जा सकती। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“8.2 Up gradation of existing fishing vessels for export Competency No 15.00 6.00 9.00”मशीनी मछली नाव पर बायो-टॉयलेट पर ₹20,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹30,000)।
इकाई लागत ₹50,000। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“8.3 Establishment of Bio-toilets in mechanised fishing vessels No 0.50 0.20 0.30”मछली रोग निदान और गुणवत्ता जाँच प्रयोगशाला पर ₹10,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹15,00,000)।
इकाई लागत ₹25 लाख — एलाइज़ा और आरटी-पीसीआर मशीन हों तो ₹40 लाख (मद 9.1(iv)); हम ₹25 लाख गिनते हैं। मत्स्य विज्ञान, जीव विज्ञान, समुद्री जीव विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, प्राणी विज्ञान या जैव-रसायन के युवा स्नातकों के लिए, कम से कम 1,000 वर्ग फ़ुट जगह के साथ; लैब 5 साल चलानी होगी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“9.1 Establishment of Disease diagnostic and quality testing labs No 25.00 10.00 15.00”चलती-फिरती मछली रोग निदान और जाँच प्रयोगशाला / क्लिनिक पर ₹14,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹21,00,000)।
इकाई लागत ₹35 लाख। मत्स्य या जीव विज्ञान के युवा स्नातकों के लिए; लैब 5 साल चलानी और हर तिमाही जाँचे गए नमूनों की रिपोर्ट देनी होगी। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“9.2 Disease diagnostic and quality testing Mobile labs/clinics No 35.00 14.00 21.00”मछली नाव पर संचार / ट्रैकिंग उपकरण (वीएचएफ़, डैट, नाविक, ट्रांसपोंडर) पर ₹14,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹21,000)।
इकाई लागत ₹35,000: पारंपरिक नाव पर एक उपकरण, मोटर नाव पर इसी लागत में अधिकतम दो (डैट और एक और)। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“10.1 Communication and /or Tracking Devices for traditional and motorised vessels like VHF/DAT/NAVIC/Transponders etc. No. 0.35 0.14 0.21”मछली नाव के लिए सुरक्षा किट (लाइफ़ जैकेट, लाइफ़बॉय, जीपीएस, फ़्लेयर, प्राथमिक चिकित्सा, बीकन) पर ₹40,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹60,000)।
इकाई लागत ₹1 लाख; हर पात्र चालू नाव को केवल एक बार, और सामान बेचा या दिया नहीं जा सकता। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“11.1 Support for providing safety kits for fishermen of Traditional and motorized fishing vessels (other than Communication and/or Tracking Device mentioned at 10.1 above) 1.00 0.40 0.60”पारंपरिक मछुआरों के लिए बदली नाव और जाल पर ₹2,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹3,00,000)।
इकाई लागत ₹5 लाख। सक्रिय पारंपरिक (कारीगर सहित) मछुआरों के लिए; क्यूआर-कोड आधार अनिवार्य, और समुद्री मछुआरों को नाव का स्वामित्व, रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और लाइसेंस भी चाहिए। पुरानी नाव का सुरक्षित निपटान करना होगा। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“11.2 Providing boats (replacement) and nets for traditional fishermen No. 5.00 2.00 3.00”संभावित मत्स्य क्षेत्र (पीएफ़ज़ेड) उपकरण, 5 साल के रखरखाव सहित पर ₹4,400 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹6,600)।
इकाई लागत ₹11,000, लगाने और 5 साल के सालाना रखरखाव सहित; प्रति लाभार्थी केवल एक उपकरण। नाव का रियलक्राफ़्ट पंजीकरण और मछली पकड़ने का लाइसेंस, और मालिक व चालक दल के बायोमेट्रिक/क्यूआर-कोड आधार पहचान पत्र ज़रूरी हैं। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“11.3 Support to Fishermen for PFZ devices and network including the cost of installation and maintenance etc. No 0.11 0.044 0.066”मत्स्य सेवा केंद्र (मत्स्य विस्तार और सेवा केंद्र) पर ₹10,00,000 तक (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को ₹15,00,000)।
इकाई लागत ₹25 लाख। मत्स्य या जीव विज्ञान के युवा स्नातकों के लिए, कम से कम 1,000 वर्ग फ़ुट जगह के साथ; केंद्र शुल्क ले सकता है और 5 साल चलाना होगा। समूह (कंसोर्टियम) को अधिकतम 2 इकाई। द्वीपों, हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इकाई लागत 20% तक अधिक मानी जा सकती है (पैरा 19.5)।
“12.1 Extension and support Services. No 25 10 15”यदि आप पूर्णकालिक सक्रिय मछुआरे हैं, बीपीएल हैं, उम्र 18–60 साल है और मछुआरा सहकारी समिति के सदस्य हैं, तो मछली पकड़ने पर रोक/मंदी के मौसम में ₹4,500 मिलते हैं (3 महीने ₹1,500 प्रति माह): आपकी बचत के ₹1,500 में सरकार ₹3,000 जोड़ती है।
₹4,500 सालाना में ₹3,000 सरकारी राशि है (सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य ₹1,500-₹1,500; पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में ₹2,400 और ₹600; केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्र ₹3,000) और ₹1,500 आपका अपना अंशदान है (मद 13.1(a))। राज्य नकद या सस्ता राशन, ईंधन जैसी अतिरिक्त मदद दे सकते हैं (मद 13.1(b)(v))।
“The accumulated amount of Rs. 4500/- indicated above would be disbursed to enrolled beneficiary by the respective states/UTs at the rate of Rs. 1500/- per month.”सामान्य श्रेणी के मत्स्य सूक्ष्म उद्यम को निवेश का 25% तक, अधिकतम ₹35 लाख, प्रदर्शन अनुदान।
यह प्रदर्शन-आधारित अनुदान है: एक हिस्सा हर बनाए और टिकाए गए रोज़गार पर (हर महिला पर ₹15,000 प्रति वर्ष, हर पुरुष पर ₹10,000, अनुदान का आधा तक) और एक हिस्सा निवेश पूरा होने के बाद (अनुदान का आधा तक)।
“Performance Grant for a Micro enterprise shall not exceed 25% of the total investment or ₹ 35 lakhs, whichever is lower, for General Category”अनुसूचित जाति, जनजाति या महिलाओं के स्वामित्व वाले मत्स्य सूक्ष्म उद्यम को निवेश का 35% तक, अधिकतम ₹45 लाख, प्रदर्शन अनुदान।
यह प्रदर्शन-आधारित अनुदान है: एक हिस्सा हर बनाए और टिकाए गए रोज़गार पर (हर महिला पर ₹15,000 प्रति वर्ष, हर पुरुष पर ₹10,000, अनुदान का आधा तक) और एक हिस्सा निवेश पूरा होने के बाद (अनुदान का आधा तक)।
“35% of total investment or ₹ 45 lakhs, whichever is lower, for SC, ST and Women owned microenterprises.”ग्राम संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के संघों, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को निवेश का 35% तक, अधिकतम ₹2 करोड़, प्रदर्शन अनुदान।
यह प्रदर्शन-आधारित अनुदान है: एक हिस्सा हर बनाए और टिकाए गए रोज़गार पर (हर महिला पर ₹15,000 प्रति वर्ष, हर पुरुष पर ₹10,000, अनुदान का आधा तक) और एक हिस्सा निवेश पूरा होने के बाद (अनुदान का आधा तक)।
“Performance Grant for Village Level Organizations and Federations of SHGs, FFPOs and Cooperatives shall not exceed 35% of total investment or ₹ 200 lakhs, whichever is lower.”मत्स्य अवसंरचना परियोजना की लागत का 80% तक ऋण, जिस पर ब्याज 5% प्रति वर्ष तक कम हो सकता है क्योंकि सरकार ऋणदाता को हर साल 3% तक देती है; 2 साल की मोहलत सहित 12 साल तक में चुकाएँ।
हम इसे “आपके ब्याज में 3% छूट” के रूप में नहीं दिखाते: 3% तक की राशि में ऋणदाता का 0.6% प्रबंधन मार्जिन भी शामिल है (11.3), और यह केवल तालिका-1 की इकाई लागत के भीतर की लागत पर मिलती है — उससे ऊपर की लागत आपकी (21.3)। आदेश में सीमांत किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएँ, उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ और मत्स्य किसान समूह शामिल हैं; उद्यमियों, व्यक्तिगत किसानों और सहकारी समितियों की परियोजनाओं के लिए पशुपालन विभाग के अवसंरचना विकास कोष से ऋण गारंटी भी है (खंड 23)।
“10.1 The project under the FIDF shall continue to be eligible for loan up to 80% of the estimated/actual project cost. Beneficiaries are required to contribute at least 20% of the project cost as margin money. … 11. Interest Subvention and Lending Rate of Interest — Interest Subvention : Up to 3% per annum for all EEs for development of identified fisheries based infrastructure facilities. Lending Rate of Interest : Not lower than 5% per annum for all EEs for development of identified fisheries based infrastructure facilities. The interest subvention as at 11.1 above also includes cost of reduction of interest rate and uniform margin of 0.6% towards funds management charge and risk coverage costs to the NLEs.”सुधारे गए पट्टे के तालाब में प्रथम वर्ष के मत्स्य पालन निवेश पर ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
केवल ग्राम सभा या अन्य पट्टे के ऐसे तालाब जिनका सुधार मनरेगा कन्वर्जेन्स या पट्टाधारक ने कराया हो और पट्टे के कम से कम 4 वर्ष बचे हों; प्रति लाभार्थी अधिकतम 2.0 हेक्टेयर और पूरी पट्टा अवधि में एक ही परियोजना (प्रस्तर 6(3)–6(5))। 4 वर्ष के भीतर मत्स्य पालन बंद करने पर अनुदान 12% ब्याज सहित वसूला जाएगा (प्रस्तर 6(11))।
“मनरेगा कनवर्जेन्स अथवा पट्टाधारक स्वयं तथा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में प्रथम वर्ष निवेश पर अनुदान हेतु इकाई लागत धनराशि रू0 4.00 लाख प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा(कंपोनेंट-A)”सुधारे गए पट्टे के तालाब में मत्स्य बीज बैंक बनाने पर ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
केवल ग्राम सभा या अन्य पट्टे के ऐसे तालाब जिनका सुधार मनरेगा कन्वर्जेन्स या पट्टाधारक ने कराया हो और पट्टे के कम से कम 4 वर्ष बचे हों; प्रति लाभार्थी अधिकतम 2.0 हेक्टेयर और पूरी पट्टा अवधि में एक ही परियोजना (प्रस्तर 6(3)–6(5))। 4 वर्ष के भीतर मत्स्य पालन बंद करने पर अनुदान 12% ब्याज सहित वसूला जाएगा (प्रस्तर 6(11))।
“मनरेगा कनवर्जेन्स अथवा पट्टाधारक स्वयं तथा अन्य विभागों के माध्यम से सुधारे गये ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना योजना हेतु इकाई लागत रू0 4.00 लाख प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा(कंपोनेंट-B)।”15–18 फ़ीट की लकड़ी या एफ.आर.पी. नाव, जाल, लाइफ जैकेट और आइसबॉक्स की लागत का 40%; गिनी जाने वाली लागत उस वर्ष की इकाई लागत तक सीमित।
पात्र: 0.4 हेक्टेयर या बड़े मत्स्य तालाब के पट्टाधारक, निजी तालाब के मालिक, और नौकायन के साथ मत्स्य आखेट करने वाले मछुआ समुदाय के लोग, जिनके पास पहले से नाव न हो और जिन्होंने किसी दूसरी योजना में नाव न ली हो (प्रस्तर 2(5)3–5)। राजस्व संहिता 2016 में दर्ज 12 मछुआ समुदायों को प्राथमिकता — पहले अन्त्योदय कार्डधारक, फिर पक्का आवास विहीन (प्रस्तर 2(5)7)। योजना पाँच वर्ष, 2022-23 से 2026-27 तक है (प्रस्तर 3)।
“1. " निषादराज बोट सब्सिडी योजना ’’ के अन्तर्गत रु0 0.67 लाख की अधिकतम सीमा तक की वुडेन फिशिंग बोट अथवा फाइबर रिइनफोर्स्ड प्लास्टिक बोट (एफ.आर.पी.बोट), जाल, लाइफ जैकेट एवं आइसबाक्स आदि पर 40 प्रतिशत अनुदान की सुविधा प्रदान की जायेगी।”मछली बेचने के लिए हैवी ड्यूटी मोपेड (₹56,000) और 50 लीटर आइसबॉक्स (₹4,000) की लागत का 40% — अधिकतम ₹24,000।
परंपरागत मछुआ समुदाय (केवट, मल्लाह, निषाद, बिन्द, धीमर, कश्यप आदि, प्रस्तर 1.2) या एक वर्ष या अधिक से मत्स्य पालन से आजीविका चलाने वाले उत्तर प्रदेश निवासी के लिए। जिसने पहले निषादराज बोट योजना या पीएमएमएसवाई मत्स्य विपणन जैसी किसी योजना में ऐसा अनुदान लिया हो, वह पात्र नहीं (प्रस्तर 1.1, 1.4)। कम से कम 5 वर्ष मत्स्य कार्य में उपयोग ज़रूरी, नहीं तो राशि वसूली जाएगी (प्रस्तर 1.5(3))।
“1.मछली पकड़ने के जाल /उपकरणों की सुविधा की व्यवस्था करना और मछली विक्रय हेतु मोपेड आइस बॉक्स आदि उपलब्ध कराना: … आइस बॉक्स (न्यूनतम क्षमता 50 ली0) 01 — 4000 — 2400 — 1600; हैवी ड्यूटी मोपेड 01 — 56000 — 33600 — 22400; योग 60000 — 36000 — 24000 [परियोजना धनराशि (₹) — लाभार्थी अंश (%60) — अनुदान (%40)]”मछली तालाब या हैचरी में पानी भरने वाले नलकूप के व्यावसायिक कनेक्शन के चुकाए गए बिजली बिल का 40%, 0.2 से 2 हेक्टेयर तक के तालाबों के लिए।
कनेक्शन व्यावसायिक (एलएमवी5) और केवल मात्स्यिकी के लिए हो, पट्टाधारक/मत्स्य पालक के नाम पर; तालाब 0.2–2.0 हेक्टेयर (आर.ए.एस./बायोफ्लॉक/हैचरी में परियोजना ही इकाई) (प्रस्तर 2.2)।
“(द) आवेदक द्वारा भुगतान किए गए बीजक एवं भुगतान रसीद के साथ आवेदन प्रस्तुत करने पर संबंधित मत्स्य पालक/मछुआ को उसके द्वारा विद्युत विभाग को कुल भुगतान की गई धनराशि का 40% धनराशि अनुदान सहायता के रूप में उ.प्र. मत्स्य पालक कल्याण कोष से प्रदान किया जाएगा ।”मछली पालन इकाई की परियोजना लागत का 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही, 45% बैंक ऋण; आपको 10% लगाना होता है।
चांगलांग की 2025-26 सूचना के अनुसार योजना केवल अरुणाचल प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों (एपीएसटी) के लिए है; आवेदक कम से कम 18 साल का हो, मछली पालन लायक ज़मीन हो, बैंक का बकायेदार न हो और मछली पालन का अनुभव हो; एसएचजी ArSRLM या NERCOMP से जुड़ा हो और एफ़पीओ के कम से कम 100 शेयरधारक और एक ऑडिट की हुई बैलेंस शीट हो (पात्रता i–viii)। अंजॉ में आयु सीमा 18–60 वर्ष है और सरकारी कर्मचारी पात्र नहीं।
“ANMPY Anjaw District is credit linked Front Ended Subsidy Scheme with a funding pattern of 45% subsidy,45% Bank loan and 10% beneficiary contributions.”पहाड़ में क्लस्टर मछली तालाब: ₹500 प्रति घन मीटर (महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति को ₹600), व्यक्तिगत अधिकतम 500 घन मीटर।
सामान्य वर्ग को इकाई लागत का 50%; महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति को 60%। ज़मीन और पानी का स्रोत होना चाहिए, या आप पहले से मछली पालन कर रहे हों।
“पर्वतीय क्षेत्रों में कलस्टर आधारित मत्स्य पालन (तालाब निर्माण) — 1 हजार प्रति धन मी0 — रू0 500 प्रति धन मी0 — रू0 600 प्रति धन मी0 — अधिकतम 500 धन मी0 व्यक्तिगत एवं 1000 धन मी0 समिति/समूह आदि”मैदान में नया मछली तालाब: ₹5,50,000 प्रति हेक्टेयर (महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति को ₹6,60,000), व्यक्तिगत अधिकतम 2 हेक्टेयर।
सामान्य वर्ग को इकाई लागत का 50%; महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति को 60%। ज़मीन और पानी का स्रोत होना चाहिए, या आप पहले से मछली पालन कर रहे हों।
“मैदानी क्षेत्र में तालाब निर्माण — 11 लाख प्रति हैक्टेयर — 5 लाख 50 हजार — 6 लाख 60 हजार — अधिकतम 2 हैक्टेयर व्यक्तिगत एवं 10 हैक्टेयर समिति/समूह आदि”ट्राउट पालन इकाई: ₹45,000 प्रति इकाई (महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति को ₹54,000), व्यक्तिगत अधिकतम 2 इकाई।
सामान्य वर्ग को इकाई लागत का 50%; महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति को 60%। ज़मीन और पानी का स्रोत होना चाहिए, या आप पहले से मछली पालन कर रहे हों।
“ट्राउट रियरिंग यूनिट — 90 हजार प्रति यूनिट — 45 हजार — 54 हजार — अधिकतम 2 यूनिट व्यक्तिगत एवं 4 अथवा 6 यूनिट समिति/समूह आदि”छोटी आरएएस या बायोफ्लॉक इकाई: ₹2,25,000 प्रति इकाई (महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति को ₹2,70,000), व्यक्तिगत अधिकतम 2 इकाई।
सामान्य वर्ग को इकाई लागत का 50%; महिला, अनुसूचित जाति और जनजाति को 60%। ज़मीन और पानी का स्रोत होना चाहिए, या आप पहले से मछली पालन कर रहे हों।
“लद्यु आर॰ए॰एस॰ यूनिट की स्थापना (50 वर्ग मीटर का 1 टैक)/बायोफ्लाॅक कल्चर सिस्टम (4 मीटर डायामीटर एवं 1.5 मीटर ऊॅचाई के 3 टैंक) — 4 लाख 50 हजार प्रति यूनिट — 2 लाख 25 हजार — 2 लाख 70 हजार — अधिकतम 2 यूनिट व्यक्तिगत एवं 4 यूनिट समिति/समूह आदि”अगर आप 5 साल से ज़्यादा मछली पालन कर रहे हैं, तो तालाब के जीर्णोद्धार के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ तक।
भाषण में केवल अधिकतम राशि दी गई है; यह नहीं बताया कि यह लागत का कितना हिस्सा है। हम इसे सीमा के रूप में दिखाते हैं, पक्की राशि के रूप में नहीं।
“To augment Inland fish production in Union Territory of Puducherry, it is proposed to provide a maximum of ₹ 50,000 per acre for the fishermen who are fish farming for over 5 years, to renovate the fishing ponds.”उन्नत मत्स्य अंगुलिका तैयार करने के लिए ₹1,00,000 प्रति 0.5 एकड़ इकाई का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/अति पिछड़ी जाति को 70%), अधिकतम 1 एकड़ (2 इकाई) तक।
इकाई लागत से अधिक ख़र्च लाभुक को खुद उठाना होगा (कंडिका 5(I)(vii))। बीज उत्पादक उन्नत बीज ₹200 प्रति किलो (लगभग 25 ग्राम) या ₹250 प्रति किलो (लगभग 50 ग्राम) पर बेचेंगे (कंडिका 5(I)(ix))। अति पिछड़ी जाति के लाभुकों को भी 70% मिलता है (कंडिका 5) — कैलकुलेटर में यह विकल्प नहीं है, इसलिए 70% खुद पढ़ लें।
“योजना में उन्नत बीज उत्पादन हेतु ₹ 1.00 लाख (एक लाख रूपये)/0.5 एकड़ (प्रति इकाई) की दर से आवर्ती व्यय आंकलित की गयी है … एक व्यक्ति/परिवार को अधिकतम एक एकड़ जलक्षेत्र तक के तालाब में मत्स्य बीज उत्पादन के लिए सब्सिडी देय होगा।”कम-से-कम 0.25 एकड़ के तालाब पर ₹80,000 के ट्यूबवेल और ₹40,000 के पंपसेट या समरसेबुल (5 एचपी तक) की लागत — या असल ख़र्च, जो कम हो — का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/अति पिछड़ी जाति को 70%)।
0.25 से 2.5 एकड़ के तालाब पर एक ट्यूबवेल और एक पंपसेट; 2.5 से 5 एकड़ पर दो-दो तक; मत्स्यजीवी सहयोग समिति को पाँच तक (कंडिका 5(II)(vii)–(viii))। तालाब पर पहले से बोरिंग पंपसेट हो तो दोबारा नहीं मिलेगा, पर जो अवयव नहीं है वह मिल सकता है (कंडिका 5(II)(v))। अति पिछड़ी जाति के लाभुकों को भी 70% मिलता है (कंडिका 5) — कैलकुलेटर में यह विकल्प नहीं है, इसलिए 70% खुद पढ़ लें।
“प्रति ट्यूबवेल तथा पम्पसेट (समरसेबुल सहित) का इकाई लागत क्रमशः ₹ 80000 (अस्सी हजार) रुपये एवं ₹ 40000 (चालीस हजार) रुपये इकाई लागत निर्धारित है।”2 एचपी पैडल-व्हील एरेटर की ₹50,000 लागत का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/अति पिछड़ी जाति को 70%), प्रति एकड़ तालाब दो एरेटर; तालाब कम-से-कम 0.40 एकड़ का हो।
आदेश में प्रति एकड़ दो एरेटर की अनुमति है; कैलकुलेटर अधिकतम दो (एक एकड़) गिनता है ताकि राशि ज़्यादा न दिखे — बड़े तालाब को अधिक मिल सकते हैं। एनएफडीबी या बिहार विभाग से सूचीबद्ध एजेंसी से ख़रीदें; बिजली या स्टैंडबाय जनरेटर ज़रूरी है। पहले लाभ ले चुके तालाब दोबारा पात्र नहीं (कंडिका 5(III)(v)–(viii))। अति पिछड़ी जाति के लाभुकों को भी 70% मिलता है (कंडिका 5) — कैलकुलेटर में यह विकल्प नहीं है, इसलिए 70% खुद पढ़ लें।
“"यांत्रिक एरेटर" (पैडल व्हील) का इकाई लागत ₹ 50000 (पचास हजार रुपये) (अधिकतम अधिष्ठापन व्यय सहित) निर्धारित है … योजना के तहत एक लाभुक/परिवार को अधिकतम दो एरेटर/एकड़ की अनुमान्यता होगी।”मशीनी, मोटर या बिना मोटर की नाव चलाने वाले पात्र समुद्री मछुआरे के परिवार को 15 अप्रैल – 14 जून की रोक अवधि के लिए हर साल ₹20,000।
केवल समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरा परिवारों के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 से (पैरा 4)। पात्रता G.O.Rt.No.139, 22.04.2025 के संशोधन के अनुसार: सभी समुद्री नावें पात्र हैं, चाहे उन्होंने डीज़ल (HSD) सब्सिडी ली हो या नहीं; परिवार एनटीआर भरोसा (मछुआरा) पेंशन में शामिल न हो; आय सीमा सरकार की छह-स्तरीय जाँच के अनुसार।
“Government after careful examination, hereby order to enhance the marine fishing ban relief from Rs.10,000/- to Rs.20,000/- per family to all the eligible fishermen who are operating Mechanized, Motorized and Non-Motorized fishing crafts during the Marine Ban period/Lean period from 15th April to 14th June”हर पारंपरिक मछुआरा परिवार को मंदी के मौसम के लिए ₹7,000।
केवल पारंपरिक मछली पकड़ने वाले परिवारों के लिए। भाषण यह नहीं बताता कि पैसा एक किस्त में आता है या कई में; हम एक दिखाते हैं।
“The State Government has been providing lean-period fishing assistance of Rs.6,000 per family to fishermen engaged in traditional fishing activity. This Government will now increase this assistance from Rs.6,000 to Rs.7,000 per family, benefiting 1.93 lakh traditional fishermen families”सालाना मछली पकड़ने की रोक के लिए हर समुद्री मछुआरा परिवार को ₹8,000।
₹8,000 में केंद्र का ₹1,500 पीएमएमएसवाई हिस्सा पहले से शामिल है — यह उसके ऊपर नहीं मिलता। नीति नोट किस्तों की संख्या नहीं बताता; हम एक दिखाते हैं।
“To support fishing families during this mandatory closure, the Government provides Rs.8,000/- as Ban Period Relief Assistance, of which Rs.1,500/- is contributed by the Government of India under Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY). For beneficiaries above 60 years of age, the entire assistance is borne by the Government of Tamil Nadu.”आपकी अपनी ₹1,500 बचत के ऊपर राज्य से ₹3,000 — मंदी के महीनों में कुल ₹4,500।
दिखाई राशि केवल राज्य का हिस्सा है; आपके अपने ₹1,500 भी ₹4,500 के हिस्से के रूप में लौटते हैं। मछुआरिनों पर भी यही तरीक़ा है (6.1.4)।
“Under the scheme, each beneficiary contributes Rs.1,500/- which, along with the assistance of Rs.3,000/- from the State Government provides a relief of Rs.4,500/- during these challenging periods.”बिक्री-कर के बिना डीज़ल: हर मशीनी नाव को साल में 19,000 लीटर तक, हर मोटर वाली देसी नाव को 4,400 लीटर तक।
“To reduce operational costs of fishing vessels, the Government supplies sales tax-exempted diesel at the rate of 19,000 litres per mechanised fishing boat and 4,400 litres per motorised country craft annually.”औद्योगिक केरोसिन ₹25 प्रति लीटर, हर पंजीकृत मोटर वाली पारंपरिक नाव को साल में 3,700 लीटर तक (तीन दक्षिणी ज़िले)।
₹25 वह दाम है जो आप देते हैं, सब्सिडी की राशि नहीं। केवल तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी ज़िले।
“Registered motorised traditional fishing crafts in Thoothukudi, Tirunelveli and Kanniyakumari districts are supplied with industrial kerosene at a subsidised rate of Rs.25 per litre, subject to an annual entitlement of 3,700 litres per craft.”आपके एक्वा फ़ार्म के लिए पूरी दर की जगह ₹1.50 प्रति यूनिट पर बिजली।
आदेश बताता है कि पहले की रियायत (2022 का G.O.Rt.No.92) अधिसूचित एक्वा ज़ोन में 10 एकड़ तक के फ़ार्म के लिए है (अनुच्छेद 5); अनुच्छेद 7 इसे 1 जून 2026 से नए ज़ोन और सभी APSADA/CAA-पंजीकृत फ़ार्म तक बढ़ाता है। 2019 के आदेश में तब अनुदान ₹2.36 प्रति यूनिट था (अनुच्छेद 3)।
“Government hereby order for extension of concessional power tariff @Rs.1.50 per unit to the following categories of aquaculture farms with effect from 1.6.2026 subject to condition that the power factor of 0.9 to 0.95 shall be achieved by the beneficiary before March 2027. Else they will not be eligible for subsidy: 1. All eligible aquaculture farms located in newly declared Aqua Zones notified under re-survey as per Government orders and 2. All aquaculture farms registered under the APSADA Act and CAA Act up to date, estimated at about 6,500 farms, and all other eligible aquaculture farms that obtain APSADA/CAA registration in future, from the date of such registration.”पंजीकृत ट्रॉलर मालिक को ऑटर बोर्ड की ₹70,000 इकाई लागत का 50% — ₹35,000।
केवल पंजीकृत मशीनी मछली नौकाओं (ट्रॉलर) के मालिकों के लिए।
“Otter Boards (fishing device) with a unit cost of 70,000 will be provided to owners of registered mechanized fishing boats (Trawlers) at 50% subsidized rate.”₹7,500 का पोर्टेबल मछली रखने का (आइस) बक्सा, मुफ़्त।
“Further, Portable fish holding box (Ice Box) with a unit cost of 7,500 will be supplied at free of cost.”FFDA में पंजीकृत मछली पालक को ₹12,000 के ड्रैग नेट का 50% — ₹6,000।
“For procurement of Drag net 12,000 per unit will be provided on 50% subsidy rate to 100 fish farmers who have registered in Fish Farmers Development Agency ( FFDA ).”गहरे समुद्र की मछली नौका की लागत का 20%।
“Fish farmers will be provided 20% subsidy to procure Deep Sea Fishing Vessel.”व्यक्तिगत केज किसान: केज जाल के ₹300 प्रति घन मीटर का 50% (₹150 प्रति घन मीटर), या असली ख़र्च कम हो तो उसका 50%, अधिकतम 1,800 घन मीटर या 18 केज, जो कम हो।
केज का आयतन घन मीटर में भरें। 18 केज की सीमा भी लागू है; अगर 18 केज का आयतन 1,800 घन मीटर से कम है तो उतना ही गिनें। प्रस्तावना (पृ.2) के अनुसार यह सहायता PMMSY से बने केज यूनिटों के लिए है। पिछली सहायता के दो साल बाद फिर से (शर्त 2)।
“આંતરદેશીય મત્સ્યોદ્યોગ કેજમાં વપરાતી જાળ ઉપર યુનિટ કોસ્ટ રૂ.૩૦૦/- પ્રતિ કયુબીક મી.ના ૫૦% સહાય અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચ પૈકી જે ઓછું હશે તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે. સહાયની ટોચ મર્યાદા વ્યક્તિગત લાભાર્થીઓ માટે ૧૮૦૦ ઘનમીટર ઘનફળ ધરાવતા અથવા ૧૮ યુનિટ ફીશકેજ બે માંથી જે ઓછું હોય તેની મર્યાદામાં ચુકવવાનુ રહેશે.”मत्स्य मंडलियाँ और मत्स्य सहकारी संघ: वही ₹150 प्रति घन मीटर (₹300 का 50%), अधिकतम 7,200 घन मीटर या 72 केज, जो कम हो।
मूल संकल्प की शर्त 1 के अनुसार मंडली, संघ और एफ.एफ.पी.ओ. आवेदन कर सकते हैं; शर्त 10 संस्थागत आवेदकों के लिए 7,200 घन मीटर / 72 केज की सीमा तय करती है।
“આંતરદેશીય મત્સ્યોદ્યોગ કેજમાં વપરાતી જાળ ઉપર યુનિટ કોસ્ટ રૂ.૩૦૦/- પ્રતિ કયુબીક મી.ના ૫૦% સહાય અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચ પૈકી જે ઓછું હશે તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે. જયારે સંસ્થાકીય અરજદાર જેવા કે મત્સ્યોધોગ મંડળીઓ અને મત્સ્યોધોગ સહકારી સંઘ માટે ૭૨૦૦ ઘનમીટર ઘનફળ ધરાવતા અથવા ૭૨ યુનિટ ફીશકેજ બે માંથી જે ઓછું હોય તેની મર્યાદામાં ચુકવવાનુ રહેશે.”अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाएँ: इंजन वाली फ़ाइबर नाव की लागत का 60%, ₹2,00,000 इकाई लागत तक गिना जाता है (अधिकतम ₹1,20,000)।
नाव केवल मत्स्य काम के लिए, सवारी या सैर के लिए नहीं, और उस पर “મત્સ્યોધોગ ખાતાની સહાયથી” और ख़रीद का साल लिखा होना चाहिए (शर्त 7, 10)। 3 साल बाद फिर से (शर्त 14)।
“સહાય માટે SC/ST/women માટે યુનિટ કોસ્ટના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે યુનિટ કોસ્ટના ૪૦% અથવા SC/ST/women માટે કરેલ ખર્ચના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે કરેલ ખર્ચના ૪૦% બન્નેમાંથી જે ઓછુ હોય તે તથા મત્સ્યોધોગ સહકારી મંડળી/FFPO/સ્વસહાય જુથને યુનિટ કોસ્ટના ૫૦% મળવાપાત્ર રહેશે.”सामान्य श्रेणी: लागत का 40%, ₹2,00,000 इकाई लागत तक गिना जाता है (अधिकतम ₹80,000)।
“સહાય માટે SC/ST/women માટે યુનિટ કોસ્ટના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે યુનિટ કોસ્ટના ૪૦% અથવા SC/ST/women માટે કરેલ ખર્ચના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે કરેલ ખર્ચના ૪૦% બન્નેમાંથી જે ઓછુ હોય તે તથા મત્સ્યોધોગ સહકારી મંડળી/FFPO/સ્વસહાય જુથને યુનિટ કોસ્ટના ૫૦% મળવાપાત્ર રહેશે.”मत्स्य सहकारी मंडली, एफ़एफ़पीओ और स्वयं सहायता समूह: ₹2,00,000 इकाई लागत का 50% (अधिकतम ₹1,00,000)।
इन समूहों के लिए संकल्प में केवल “इकाई लागत का 50%” छपा है, व्यक्तियों वाला “या असली ख़र्च, जो कम हो” नहीं; फिर भी हम आपकी लागत और ₹2,00,000 में से कम को गिनते हैं ताकि राशि कभी ज़्यादा न दिखे।
“સહાય માટે SC/ST/women માટે યુનિટ કોસ્ટના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે યુનિટ કોસ્ટના ૪૦% અથવા SC/ST/women માટે કરેલ ખર્ચના ૬૦% અને General કેટેગરી માટે કરેલ ખર્ચના ૪૦% બન્નેમાંથી જે ઓછુ હોય તે તથા મત્સ્યોધોગ સહકારી મંડળી/FFPO/સ્વસહાય જુથને યુનિટ કોસ્ટના ૫૦% મળવાપાત્ર રહેશે.”मछली जाल या हुक-लाइन (हेड रोप, फ़ुट रोप, फ़्लोटर, सिंकर आदि सहित) के असली ख़र्च का 50%, अधिकतम ₹4,00,000।
केवल समुद्र में मछली पकड़ने वाली ट्रॉल-नेट, डोल-नेट और गिल-नेट आईबीएम नावों के मालिकों के लिए (शर्त 4), जो गुजरात के निवासी हों (शर्त 16)। ट्रॉल जाल में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TED) ज़रूरी (शर्त 12)। दो साल बाद ही दोबारा (शर्त 6)।
“આ યોજના તળે યુનિટ કોસ્ટ રૂ. ૮.૦૦ લાખ લાખના ૫૦% એટલે કે રુ. ૪.૦૦ લાખ મહત્તમ સહાય અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચના ૫૦% બન્ને માંથી જે ઓછુ હોય તે સહાય મળવાપાત્ર થશે.”नई नाव बनवाने की लागत का 50% (केवल नाव, इंजन नहीं), अधिकतम ₹2,50,000।
केवल 5 साल या ज़्यादा पुरानी पंजीकृत ओबीएम नावों के लिए (शर्त 6); 2020-21 से आपदा में पूरी तरह नष्ट नावें छूट में (शर्त 13, 16)। सहायता केवल नाव बनाने के लिए, इंजन के लिए नहीं (शर्त 2)। नई नाव 5 साल तक नहीं बेची जा सकती (शर्त 10)। उसी नाव के लिए तौकते पैकेज लेने वाले बाहर (शर्त 16)। केवल गुजरात के निवासी (शर्त 20)।
“સદર પ્રોજેક્ટની યુનિટ કોસ્ટ રૂ. ૫.૦૦ લાખના ૫૦% એટલે કે રુ. ૨.૫૦ લાખ મહત્તમ સહાય અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચના ૫૦% બન્ને માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર થશે.”इंसुलेटेड कोल्ड-रूम की लागत का 50%, ₹4,00,000 तक गिनी जाती है — अधिकतम ₹2,00,000।
केवल ट्रॉलर, डोलनेटर और गिलनेटर नावों के लिए, जो रियल क्राफ़्ट पर पंजीकृत हों और जिनके पास वैध लाइसेंस हो (शर्त 2–3)। पाँच साल बाद ही दोबारा सहायता मिल सकती है (शर्त 7)। केवल गुजरात के निवासी (शर्त 11)।
“સદર પ્રોજેક્ટની યુનિટ કોસ્ટ રૂ. ૪.૦૦ લાખના ૫૦% એટલે કે રૂ. ૨.૦૦ લાખ મહત્તમ સહાય અથવા ખરેખર થયેલ ખર્ચના ૫૦% બન્ને માંથી જે ઓછુ હોય તે સહાય મળવાપાત્ર થશે.”नई नाव की लागत का 50%, अधिकतम ₹15 लाख (12–14 मीटर), ₹17.5 लाख (14–16 मीटर), ₹20 लाख (16–18 मीटर) या ₹22.5 लाख (18–20 मीटर)।
तालिका में इकाई लागत (₹30, 35, 40, 45 लाख) और अधिकतम सहायता (उसका आधा) छपी है; 22 मई 2025 का मूल संकल्प वास्तविक लागत का 50% या अधिकतम राशि, जो कम हो, देता है (शर्त 4, पृ.2)। केवल कम से कम 10 साल पुरानी IBM लकड़ी की नावें, जो योजना से पहले की मालिकी में हों; OBM नावें पात्र नहीं (शर्त 7–8)। सहायता केवल ढाँचे और कोल्ड-रूम पर, इंजन पर नहीं (शर्त 20)। जीवन में एक बार (शर्त 5)। नाव 7 साल तक बेची या गिरवी नहीं रखी जा सकती (शर्त 21)। PMMSY या नीली क्रांति से गहरे समुद्र की नाव की सहायता लेने वाले बाहर (शर्त 12)।
“(૪) સદર પ્રોજેક્ટની યુનિટ કોસ્ટ રૂ.૪૫.૦૦ લાખ ગણી નીચેના કોષ્ટક મુજબ લંબાઈ આધારિત મહત્તમ સહાય રૂ.૨૨.૫ લાખની મર્યાદામાં મળવા પાત્ર થશે.”परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक वाले खेत-तालाब मालिक: अपने तालाब के आकार की छपी लागत, या कम हो तो वास्तविक लागत, का 60% (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला) या 40% (अन्य)।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। प्राथमिकता क्रम अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, दिव्यांग, अन्य; तालाब में कम से कम 8–10 महीने पानी रहना चाहिए; किसी और योजना से मत्स्य पालन सहायता ली हो तो पात्र नहीं (मानदंड 1–4)। छपे अनुदान कॉलम में पूरे रुपये तक गोलाई है (जैसे ₹9,655); हम नीचे की ओर गिनते हैं, इसलिए राशि ₹1 कम दिख सकती है। लागत आधार: सहायक आयुक्त मत्स्यव्यवसाय का पत्र 12/08/2025।
“अनुसूचित जाती व जमाती प्रवर्गातील शेतकरी आणि महिला — आर्थिक मापदंडाच्या ६० टक्के अथवा प्रत्यक्ष खर्चाच्या ६० टक्के यापैकी जे कमी असेल ते; सर्वसाधारण प्रवर्गातील शेतकरी — आर्थिक मापदंडाच्या ४० टक्के अथवा प्रत्यक्ष खर्चाच्या ४० टक्के यापैकी जे कमी असेल ते”खारे पानी का तालाब: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹6,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹7,200), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“a) Financial Assistance for purchase of Brackish water Fish seed — Ponds — Rs. 12,000/- per 0.1 ha — Gen (50%) Rs. 6,000/- — SC/ST/W (60%) Rs. 7,200/-”खारे पानी का केज: प्रति केज ₹25,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹30,000), अधिकतम 10 केज।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“a) … Cage — Rs. 50,000/- per cage — Gen (50%) Rs. 25,000/- — SC/ST/W (60%) Rs. 30,000/-”खारे पानी का बायोफ़्लॉक/आरएएस: प्रति 18 घन मीटर टैंक ₹5,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹6,000), अधिकतम 5 टैंक।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“a) … Biofloc/RAS — Rs. 10,000/- per tank (18 m3) — Gen (50%) Rs. 5,000/- — SC/ST/W (60%) Rs. 6,000/-”मीठे पानी का तालाब: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹1,500 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹1,800), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“b) Financial Assistance for purchase of Fresh water Fish seed — Ponds — Rs. 3,000/- per 0.1 ha — Gen (50%) Rs. 1,500/- — SC/ST/W (60%) Rs. 1,800/-”मीठे पानी का केज: प्रति केज ₹10,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹12,000), अधिकतम 10 केज।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“b) … Cages — Rs. 20,000/- per cage — Gen (50%) Rs. 10,000/- — SC/ST/W (60%) Rs. 12,000/-”मीठे पानी का बायोफ़्लॉक/आरएएस: प्रति 18 घन मीटर टैंक ₹3,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹3,600), अधिकतम 5 टैंक।
हर लाभार्थी को अधिकतम 2 हेक्टेयर तालाब, या 10 केज, या 5 बायोफ़्लॉक टैंक (18 घन मीटर) या एक आरएएस टैंक (100 घन मीटर) पर मदद मिलती है (तालिका के नीचे की टिप्पणी)। खारे पानी और समुद्री फ़ार्म का कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी में लाइसेंस ज़रूरी; इसी घटक के लिए कोई दूसरी राज्य या केंद्र सहायता नहीं (खंड 5(d), 7(a))।
“b) … Biofloc/RAS — Rs. 6,000/- per tank (18 m3) — Gen (50%) Rs. 3,000/- — SC/ST/W (60%) Rs. 3,600/-”पेन केकड़ा कल्चर इकाई: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹1 लाख (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹1.2 लाख), अधिकतम 0.5 हेक्टेयर।
जीवन में एक बार की सहायता; बाद की मरम्मत का ख़र्च मालिक का, और ज़मीन या पट्टे का ख़र्च शामिल नहीं (खंड 7, 8(a), 8(c))। सालाना आय ₹20 लाख से ज़्यादा न हो, और केकड़ा पालन का प्रशिक्षण ज़रूरी है (खंड 5(c), 5(d))। इकाई लगने के बाद पूरी राशि मिलती है (पृ. 542)।
“I. (a) Financial Assistance for setting up of Pen Crab Culture — 2.00 lakh per 0.1 ha. — 50% of unit cost — Eligible upto 0.5 ha. (Once in life time) … SC/ST/Woman Category … 60% subsidy limited to Rs. 1.20 lakh”पेन कल्चर इनपुट: प्रति 0.1 हेक्टेयर ₹75,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹90,000), अधिकतम 0.5 हेक्टेयर।
जीवन में एक बार की सहायता; बाद की मरम्मत का ख़र्च मालिक का, और ज़मीन या पट्टे का ख़र्च शामिल नहीं (खंड 7, 8(a), 8(c))। सालाना आय ₹20 लाख से ज़्यादा न हो, और केकड़ा पालन का प्रशिक्षण ज़रूरी है (खंड 5(c), 5(d))। इकाई लगने के बाद पूरी राशि मिलती है (पृ. 542)।
“I. (b) Financial Assistance for Input Cost — 1.50 lakh per 0.1 ha. — 50% of unit cost … limited to Rs. 75,000/- … SC/ST/Woman … 60% subsidy limited to Rs. 90,000/-”क्षैतिज केकड़ा-बक्सा इकाई: प्रति 1,000 बक्से ₹2 लाख (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹2.4 लाख), अधिकतम 2 इकाई।
जीवन में एक बार की सहायता; बाद की मरम्मत का ख़र्च मालिक का, और ज़मीन या पट्टे का ख़र्च शामिल नहीं (खंड 7, 8(a), 8(c))। सालाना आय ₹20 लाख से ज़्यादा न हो, और केकड़ा पालन का प्रशिक्षण ज़रूरी है (खंड 5(c), 5(d))। इकाई लगने के बाद पूरी राशि मिलती है (पृ. 542)।
“II. (a) Financial Assistance for Horizontal Crab Box Culture Unit — 4.00 lakh per 1000 boxes (1 unit) — 50% of unit cost — Eligible upto 2 units i.e. 2000 boxes (Once in life time)”ऊर्ध्वाधर केकड़ा-बक्सा इकाई (आरएएस सहित): प्रति 1,000 बक्से ₹4 लाख (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹4.8 लाख), अधिकतम 2 इकाई।
जीवन में एक बार की सहायता; बाद की मरम्मत का ख़र्च मालिक का, और ज़मीन या पट्टे का ख़र्च शामिल नहीं (खंड 7, 8(a), 8(c))। सालाना आय ₹20 लाख से ज़्यादा न हो, और केकड़ा पालन का प्रशिक्षण ज़रूरी है (खंड 5(c), 5(d))। इकाई लगने के बाद पूरी राशि मिलती है (पृ. 542)।
“II. (b) Financial Assistance for Vertical Crab Box Culture Unit — 8.00 lakh per 1000 boxes (1 unit) — 50% of unit cost — Eligible upto 2 units i.e. 2000 boxes (Once in life time)”बक्सा कल्चर इनपुट: प्रति 1,000 बक्से ₹75,000 (अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला को ₹90,000), अधिकतम 2 इकाई।
जीवन में एक बार की सहायता; बाद की मरम्मत का ख़र्च मालिक का, और ज़मीन या पट्टे का ख़र्च शामिल नहीं (खंड 7, 8(a), 8(c))। सालाना आय ₹20 लाख से ज़्यादा न हो, और केकड़ा पालन का प्रशिक्षण ज़रूरी है (खंड 5(c), 5(d))। इकाई लगने के बाद पूरी राशि मिलती है (पृ. 542)।
“II. (c) Financial Assistance for Input Cost — 1.50 lakh per 1000 boxes — 50% of unit cost … limited to Rs. 75,000/- … SC/ST/Woman … limited to Rs. 90,000/-”मछली बेचने की किट का 90%, ₹10,000 तक की लागत पर (यानी अधिकतम ₹9,000), हर वर्ग के लिए।
तीन साल में एक बार, मत्स्य विभाग के वैध पहचान-पत्र वाले विक्रेताओं के लिए (2021 योजना, खंड 3(a), 3(d))। 2026 के संशोधन ने पहले की 50% (₹10,000) / 60% (₹12,000) दरें बदल दीं।
“Pattern of Assistance: a. The beneficiary belonging to General/SC/ST/Women Category is eligible for the grant of 90% subsidy limited to Rs. 9,000/- on a unit cost of Rs. 10,000/-.”नाव की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
7 साल में एक बार, पुरानी नाव बदलने के लिए; 7 साल तक नाव बेची, पट्टे पर दी या हस्तांतरित नहीं की जा सकती (खंड 3(f), 4(a))। जुलाई 2025 से ओबीसी खारवी प्रमाण-पत्र, मामलतदार/नगरपालिका/पंचायत का पेशा प्रमाण-पत्र, या पंजीकृत जाल लाइसेंस से पात्रता मिलती है, और कैप्टन ऑफ़ पोर्ट्स में नाव पंजीकरण के छह महीने के भीतर आवेदन करना होगा (2025 संशोधन, खंड 3(a), 3(h))।
“a. The beneficiary belonging to General Category is eligible for the grant of 50% subsidy limited to Rs. 30,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST). b. The beneficiary belonging to SC/ST/Woman Category is eligible for the grant of 60% subsidy limited to Rs. 36,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST).”नामांकित मछुआरे की किसी भी कारण से मृत्यु पर परिवार को ₹50,000 तक।
हर साल ₹20 लाख के कोष से भुगतान; किसी साल दावे ज़्यादा हों तो प्रबंध समिति असल राशि तय करती है (खंड 4 D, 6 D.2)। अगर परिवार निदेशालय से कोई दूसरा बीमा मुआवज़ा लेता है तो यह नहीं मिलेगा (खंड 6 F)।
“A compensation not exceeding to ₹ 50,000/- will be given as a lump sum assistance to the next of kin of the deceased fisher who has enrolled under the scheme.”स्टेक नेट की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
आख़िरी बार मार्च 2023 में चालू दिखी, जब निदेशालय ने इस योजना के लिए आधार अधिसूचित किया (राजपत्र S-I No. 50, 16-03-2023, पृ. 1672–1673)। 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला, इसलिए ख़रीद से पहले निदेशालय से पूछ लें। 3 साल में एक बार; स्टेक आवंटन अनुमति और स्टेक नेट का पंजीकरण व लाइसेंस चाहिए, और 3 साल तक जाल बेच या पट्टे पर नहीं दे सकते (खंड 3(a)–(d), 4(a))।
“a. The beneficiary belonging to General Category is eligible for the grant of 50% subsidy limited to Rs. 30,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST). b. The beneficiary belonging to SC/ST/Woman Category is eligible for the grant of 60% subsidy limited to Rs. 36,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST).”बैरियर नेट की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
आख़िरी बार मार्च 2023 में चालू दिखी, जब निदेशालय ने इस योजना के लिए आधार अधिसूचित किया (राजपत्र S-I No. 50, 16-03-2023, पृ. 1674–1675)। 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला, इसलिए ख़रीद से पहले निदेशालय से पूछ लें। 4 साल में एक बार; बैरियर नेट का पंजीकरण प्रमाण-पत्र और लाइसेंस चाहिए, और 4 साल तक जाल बेच या पट्टे पर नहीं दे सकते (खंड 3(a)–(c), 4(a))।
“a. The beneficiary belonging to General Category is eligible for the grant of 50% subsidy limited to Rs. 30,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST). b. The beneficiary belonging to SC/ST/Woman Category is eligible for the grant of 60% subsidy limited to Rs. 36,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST).”मोटर की लागत (₹60,000 तक गिनी) का 50% (अधिकतम ₹30,000); अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को 60% (अधिकतम ₹36,000)।
आख़िरी बार मार्च 2023 में चालू दिखी, जब निदेशालय ने इस योजना के लिए आधार अधिसूचित किया (राजपत्र S-I No. 50, 16-03-2023, पृ. 1676–1677)। 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला, इसलिए ख़रीद से पहले निदेशालय से पूछ लें। 5 साल में एक बार और एक नाव पर एक ही मोटर; नाव कैप्टन ऑफ़ पोर्ट्स या निदेशालय में पंजीकृत हो, नदी गिल-नेट का पंजीकरण और लाइसेंस चाहिए, और 5 साल तक मोटर बेच या पट्टे पर नहीं दे सकते (खंड 3(a)–(f), 4(a))।
“a. The beneficiary belonging to General Category is eligible for the grant of 50% subsidy limited to Rs. 30,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST). b. The beneficiary belonging to SC/ST/Woman Category is eligible for the grant of 60% subsidy limited to Rs. 36,000/- on a unit cost of Rs. 60,000/- (excluding GST).”₹2 लाख तक की एफ़आरपी (फ़ाइबर) नाव: 20%, अधिकतम ₹40,000।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“FRP (Fibre) Boat. — Up to ₹. 2.00 — 20% — ₹. 0.40 (₹ in Lakhs)”₹2 लाख से ज़्यादा और ₹5 लाख तक की एफ़आरपी नाव: 15%, अधिकतम ₹75,000।
₹2 लाख से महँगी नाव के लिए यह पंक्ति; सस्ती नाव पर 20% वाली पंक्ति लागू। केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“FRP (Fibre) Boat. — Up to ₹. 5.00 — 15% — ₹. 0.75 (₹ in Lakhs)”इनबोर्ड (डीज़ल) इंजन: ₹10 लाख तक की लागत का 10%, अधिकतम ₹1 लाख; 7 साल बाद बदलने पर फिर।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“IBM Engines : (After 7 years, on replacement assistance can be considered, if required) — Up to ₹. 10.00 — 10% — ₹. 1.00 (₹ in Lakhs)”बिजली, सौर या बैटरी उपकरण: ₹50,000 तक की लागत का 50%, अधिकतम ₹25,000।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Electrical/Solar/Battery Equipments: — Up to ₹. 0.50 — 50% — ₹. 0.25 (₹ in Lakhs)”मछुआरिन महिलाओं के लिए बर्फ़ का बक्सा: ₹10,000 तक की लागत का 75%, अधिकतम ₹7,500।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Ice Boxes: a) for fisherwomen — Up to ₹. 0.10 — 75% — ₹. 0.075 (₹ in Lakhs)”नाव मालिकों के लिए बर्फ़ के बक्से: ₹1 लाख तक की लागत का 50%, अधिकतम ₹50,000।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Ice Boxes: b) for boat owners — Up to ₹. 1.00 — 50% — ₹. 0.50 (₹ in Lakhs)”मछली व्यापारियों के लिए बर्फ़ के बक्से: ₹2 लाख तक की लागत का 25%, अधिकतम ₹50,000।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Ice Boxes: c) for fish Merchant — Up to ₹. 2.00 — 25% — ₹. 0.50 (₹ in Lakhs)”₹2 लाख तक के जाल, रस्सी, फ़्लोट, धागा, विंच, फ़िश होल्ड, एफ़आरपी कोटिंग आदि: 20%, अधिकतम ₹40,000; हर दूसरे साल फिर।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Fisheries Requisites (Alternate year again assistance can be considered, if required) — Up to ₹.2.00 — 20% — ₹. 0.40 (₹ in Lakhs)”₹2 लाख से ज़्यादा और ₹5 लाख तक की मत्स्य सामग्री: 10%, अधिकतम ₹50,000।
सामग्री ₹2 लाख से महँगी हो तो यह पंक्ति लागू। केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Fisheries Requisites — Up to ₹.5.00 — 10% — ₹. 0.50 (₹ in Lakhs)”आपदा, आग या समुद्र/खाड़ी में दुर्घटना में मरे सक्रिय मछुआरे के कानूनी वारिस को एक बार ₹5 लाख।
मृत्यु या लापता (एक साल तक सूचित), या पाकिस्तानी जेल में बंदी रहते मृत्यु पर भी लागू (पैरा 2.1)। केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“₹. 5.00 lakhs one time assistance in case of death would be provided to the legal heir of the fisherman.”मछुआरे की मृत्यु या 6 महीने से ज़्यादा लापता होने पर हर बच्चे (अधिकतम 2) की स्नातक/स्नातकोत्तर तक पढ़ाई के लिए ₹1,000 महीना।
75% प्रमाणित हाज़िरी और 45% अंक ज़रूरी, और कोई दूसरी ऐसी छात्रवृत्ति न हो (पैरा 2.2)। केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“In case of death/missing (more then 6 months) of the fishermen of Daman & Diu, financial assistance to their children for the education @ ₹.1,000/- per month / per child (maximum up to 2 child) up to Graduation / Post Graduation”समुद्र, बाढ़, आग या आपदा में नाव नष्ट या क्षतिग्रस्त: आकलित लागत, ₹5 लाख तक (15 मीटर+ ट्रॉलर), ₹3 लाख (15 मीटर से छोटा) या ₹1 लाख (5 मीटर तक की मोटर नाव)।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“One time financial assistance to the boat owners in case of total lose/damage or for repair of boat due to accident in sea/flood/fire or natural calamity to the boat (actual cost or whichever is less) after ascertain and valued by the committee. * Trawler/Mechanised boat (15 mtr and above) …. ₹.5.00 lakhs. * Trawler/Mechanised boat ( below15 mtr) …. ₹.3.00 lakhs. * Motorised OBM/IBM (up to 5 mtr) boat …. ₹.1.00 lakh”पाकिस्तान द्वारा पकड़ी गई नाव की जगह नई मछली पकड़ने की नाव का 25%, ₹10 लाख तक, पाँच साल की प्रतीक्षा के बाद।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“One time financial Assistance in the form of back ended subsidy to the registered boat owner of Daman & Diu to re-construct/replace their fishing vessels by new fishing vessels @ 25% maximum up to ₹.10.00 lakh, with waiting period of five years.”मछुआरे के पहली बार पकड़े जाने पर बंदी रहने तक परिवार को संघ प्रदेश की अकुशल दैनिक मज़दूरी; रिहाई पर स्लीपर क्लास रेल किराया और ₹250 रोज़।
दमण, दीव या दादरा-नगर हवेली के वैध पहचान-पत्र वाले मछुआरों के लिए (पैरा 1.2)। केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। संघ प्रदेश के मत्स्य पृष्ठ पर यह 2017 की अधिसूचना ही सबसे नया योजना आदेश है; 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश, बजट मद या आवेदन सूचना नहीं मिली, इसलिए दमण/दीव मत्स्य कार्यालय से पूछें कि योजना अभी चालू है या नहीं।
“Unskilled daily wages rate as notified time to time by the U. T. Administration to the families of the Fishermen those are held 1st time captive/detained by Pakistani Marine Security Agency (PMSA) … T.A./D.A. to the fishermen during the repatriations from Pakistani Jail :– (i) T. A. 2nd class Sleeper of Railways Fair. (ii) D. A. ₹.250/- per day/ persons.”₹2,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% — ₹80,000 प्रति हेक्टेयर — ग्रामीण तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन पर, समूह को 2 हेक्टेयर तक।
प्रति हितग्राही 1 हेक्टेयर तक और समिति या समूह को 2 हेक्टेयर तक; कैलकुलेटर 2 हेक्टेयर केवल समूहों के लिए गिनता है। पृष्ठ पर दरें 2022-23 और 2023-24 के लिए बताई गई हैं; 2026-27 के बजट में योजना जारी है, इसलिए मौजूदा दर ज़िला मत्स्य कार्यालय से पुष्टि करें।
“इसकी इकाई लागत राशि रूपये 2.00 लाख प्रति हेक्टेयर निर्धारित है, उस पर 40 प्रतिशत अनुदान राशि रूपये 0.80 लाख डी.बी.टी. के माध्यम से हितग्राही को प्रदान की जाती है, योजना में प्रति हितग्राही 1 हेक्टेयर में अनुदान की पात्रता है, जबकि समिति / समूह की स्थिति में अधिकतम 2 हेक्टेयर जलक्षेत्र में अनुदान की पात्रता है।”₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर का 40% — ₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर — ग्रामीण तालाबों में झींगा पालन पर, समूह को 2 हेक्टेयर तक।
प्रति हितग्राही 1 हेक्टेयर तक और समिति या समूह को 2 हेक्टेयर तक; कैलकुलेटर 2 हेक्टेयर केवल समूहों के लिए गिनता है। पृष्ठ पर दरें 2022-23 और 2023-24 के लिए बताई गई हैं; 2026-27 के बजट में योजना जारी है, इसलिए मौजूदा दर ज़िला मत्स्य कार्यालय से पुष्टि करें।
“इस हेतु इकाई लागत राशि रूपये 4.00 लाख प्रति हेक्टेयर निर्धारित है, उस पर 40 प्रतिशत अनुदान राशि रूपये 1.60 लाख डी.बी.टी. के माध्यम से हितग्राही को प्रदान की जाती है। योजना में प्रति हितग्राही 1 हेक्टेयर मे अनुदान की पात्रता है, जबकि समिति / समूह की स्थिति में अधिकतम 2 हेक्टेयर जलक्षेत्र में अनुदान की पात्रता है।”प्रति हेक्टेयर 10,000 फिंगरलिंग के लिए पाँच साल तक हर साल अधिकतम ₹2,000 प्रति हेक्टेयर — मछली बीज के रूप में।
“मत्स्य कृषक को वस्तु विशेष के रूप में 10,000 नग मत्स्यबीज फिंगरलिंग प्रति हैक्टर संचयन हेतु पांच वर्ष तक आर्थिक सहायता का प्रावधान है। प्रत्येक वर्ष रूपये 2,000/– की सीमा तक प्रति हैक्टर सहायता दी जाती है।”तालाब की मछलियों के प्राकृतिक आहार के लिए प्लेंक्टन ग्रोवर सामग्री पर ₹7,500 प्रति हेक्टेयर।
“तालाबों में प्लेंक्टन विकसित करने हेतु प्लेंक्टन ग्रोवर सामग्री पर प्रति हेक्टेयर लागत रु 7500/– आर्थिक सहायता के रूप में अनुदान दिया जाना स्वीकृत किया गया है।”किसी भी वर्ग के फुटकर मछली विक्रेता को आईस बॉक्स, तराज़ू-बाट जैसे बिक्री उपकरण के लिए ₹6,000 तक।
“सभी संवर्ग के फुटकर मछुआ हितग्राहियों को आईस बाक्स, तराजू–बाट, आदि विक्रय उपकरण क्रय करने हेतु प्रति मछुआरा रूपये 6,000/– तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।”मछुआरे को ₹7,000 का जाल और ₹3,000 की नाव — या ₹10,000 का जाल — दिया जाता है।
“योजना अंतर्गत हितग्राहियों के लिए रूपये 7,000/– का जाल एवं रूपये 3,000/– की नाव अथवा रूपये 10,000 का जाल प्रदाय किये जाने का प्रावधान है।”अ.जा. और अ.ज.जा. मछली पालकों को 0.5 हेक्टेयर के मौसमी तालाब में स्पान संवर्धन के लिए ₹30,000 (शत-प्रतिशत अनुदान)।
“अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के 0.50 हैक्टर के मौसमी तालाबों में शत–प्रतिशत अनुदान पर स्पान संवर्धन … हितग्राही को तालाब की तैयारी, इनपुट्स एवं मत्स्य बीज आदि हेतु रुपये 30,000/– की सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।”अ.जा. और अ.ज.जा. मछुआरों को झींगा पालन के लिए तीन साल में ₹15,000 तक (₹7,500, ₹4,965 और ₹2,535) का झींगा बीज, मछली बीज, खाद और आहार।
“अनुसूचित जाति/जनजाति के मछुआरों को झींगा पालन … योजना अन्तर्गत कृषकों को झींगा बीज, मछली बीज क्रय करने तथा खाद एवं खाद्य पदार्थों हेतु तीन वर्ष में अधिकतम रूपये 15,000/– अनुदान का प्रावधान है (प्रथम वर्ष – 7500/–, द्वितीय वर्ष –4965/–, तृतीय वर्ष – 2535/–) योजना में मत्स्य पालकों को नगद भुगतान न किया जाकर सामग्री (वस्तु विशेष) के रूप में दिया जाता है।”हर मछुआ सहकारी समिति को ₹3 लाख, तीन साल में, मत्स्य बीज, नाव-जाल और लीज़ राशि के लिए।
वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 143 समितियों को लाभ मिला (3.1.10 तालिका)।
“मत्स्य सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रति समिति रूपये तीन लाख का अनुदान, मत्स्य बीज, नाव जाल, लीज राशि जमा आदि कार्यों के लिए तीन वर्षों में प्रदाय किया जाता है।”एक 1-हेक्टेयर चौर मॉडल की छपी लागत का 50% (उद्यमी को 40%): ₹8.88 लाख (दो तालाब), ₹7.32 लाख (चार तालाब) या ₹9.69 लाख (एक तालाब + भूमि विकास), मत्स्य इनपुट सहित।
मॉडलवार लागत: तालाब ₹6.52 / ₹5.04 / ₹8.09 लाख + मत्स्य इनपुट ₹2.36 / ₹2.28 / ₹1.60 लाख (₹4 लाख प्रति हेक्टेयर जलक्षेत्र)। अनुदान तालाब की वास्तविक औसत गहराई और डिज़ाइन के अनुसार मिलेगा; मानक से अधिक ख़र्च आपका होगा (कंडिका 5(xix))। कंडिका 5(xviii) में लिखी प्रति लाभुक अधिकतम सीमा प्रकाशित स्कैन के छूटे पन्नों (मुहर पृ. 327–330) पर है, इसलिए कैलकुलेटर एक मॉडल हेक्टेयर दिखाता है। बाँध पर वैकल्पिक फसलें (केला, पपीता, आम, अमरूद आदि) पर अन्य विभागों से 40–50% (तालिका, PDF पृ. 12)।
“चौर विकास हेतु अनुशंसित मॉडलों के इकाई लागत का लाभुक आधारित (व्यक्तिगत/परिवार/समूह) चौर विकास हेतु सब्सिडी की राशि सभी वर्ग के लाभुकों को 50 प्रतिशत देय होगा। वहीं उद्यमी आधारित चौर विकास में निर्धारित इकाई लागत का 40 प्रतिशत राशि सब्सिडी के रूप में अनुमान्य होगा।”तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता (सभी जिले): इकाई लागत का 70% — 1 एकड़ तालाब (₹10.10 लाख) पर ₹7,07,000 या 0.4 एकड़ यूनिट (₹5.72 लाख) पर ₹4,00,400।
अति पिछड़ा वर्ग के मत्स्य कृषकों को भी यही 70% — हमारे कैलकुलेटर में अति पिछड़ा श्रेणी नहीं है। यहाँ केवल दो छपे आकार दिए गए हैं। 0.4 से 1 एकड़ के बीच के तालाब पर आदेश समानुपातिक लागत दर से भुगतान करता है (कंडिका 9(iii), PDF पृ. 7); 0.4 एकड़ से छोटे तालाब पर विचार नहीं होगा (कंडिका 10(घ), PDF पृ. 8)। भुगतान दो किस्तों में — तालाब निर्माण के बाद 60%, इकाइयों और इनपुट के बाद 40% (कंडिका 9(ii))।
“योजनान्तर्गत समेकित रूप से तालाब के निर्माण एवं संबद्ध इकाईयों के अधिष्ठापन/निर्माण पर अधिकतम 10.10 लाख प्रति एकड़ जलक्षेत्र तथा न्यूनतम 5.72 लाख प्रति युनिट (एक युनिट = 0.4 एकड़ जलक्षेत्र) इकाई लागत आकलित है … जिसपर 70 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडि) राशि की अनुमान्यता होगी।”पठारी क्षेत्र तालाब योजना, दक्षिण बिहार के चिन्हित पठारी जिलों के अनु0 जाति/जनजाति कृषकों के लिए: इकाई लागत का 80% — 1 एकड़ तालाब (₹16.70 लाख) पर ₹13,36,000 या 0.4 एकड़ यूनिट (₹10.34 लाख) पर ₹8,27,200।
केवल चिन्हित पठारी जिलों के उन प्रखंडों में जहाँ पठारी भूमि उपलब्ध है (कंडिका 5(II)(ii)); तालाब, ट्यूबवेल व सोलर पंप, इनपुट और शेड एक पैकेज में। यहाँ केवल दो छपे आकार दिए गए हैं। 0.4 से 1 एकड़ के बीच के तालाब पर आदेश समानुपातिक लागत दर से भुगतान करता है (कंडिका 9(iii), PDF पृ. 7); 0.4 एकड़ से छोटे तालाब पर विचार नहीं होगा (कंडिका 10(घ), PDF पृ. 8)। भुगतान दो किस्तों में — तालाब निर्माण के बाद 60%, इकाइयों और इनपुट के बाद 40% (कंडिका 9(ii))।
“योजनान्तर्गत समेकित रूप से तालाब के निर्माण एवं संबद्ध इकाईयों के अधिष्ठापन/निर्माण पर अधिकतम ₹ 16.70 लाख प्रति एकड़ जलक्षेत्र तथा न्यूनतम ₹ 10.34 लाख प्रति युनिट (एक युनिट = 0.4 एकड़ जलक्षेत्र) इकाई लागत आकलित है … जिसपर 80 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडि) राशि की अनुमान्यता होगी।”निजी या बंदोबस्त सरकारी तालाब में डालने के लिए स्थानीय अंगुलिका की ख़रीद का 50%, अधिकतम ₹1,875 प्रति एकड़ जलक्षेत्र।
लगभग 5,000 अंगुलिका प्रति एकड़। आदेश में रकबे की कोई सीमा नहीं छपी; 1,000 एकड़ की सीमा केवल इस कैलकुलेटर की तकनीकी सीमा है। विभाग से स्पॉन लेने वाले बीज उत्पादक और उनका परिवार यह लाभ नहीं ले सकते।
“इस योजना अंतर्गत निजी क्षेत्र के तथा बंदोबस्त सरकारी तालाबों के मत्स्य पालन से आच्छादन हेतु स्थानीय स्तर पर उत्पादित मत्स्य अंगुलिका के क्रय में 50 प्रतिशत सहायता अर्थात् अधिकतम 1875/- रु0 प्रति एकड़ औसत जलक्षेत्र (लगभग 5000 बीज प्रति एकड़) हेतु अनुदान डी0बी0टी0 के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा।”प्रशिक्षित मत्स्य बीज उत्पादकों को स्पॉन मिलता है, जिसकी कीमत का 90% सरकार देती है (अनुमानित दर अधिकतम ₹550 प्रति लाख स्पॉन); उत्पादक 10% देता है।
केवल चालू या पिछले वर्ष विभाग से प्रशिक्षित बीज उत्पादकों के लिए। इन्हें ₹2,000 का एक्सट्रूडेड मैश फीड और जाल पर अधिकतम ₹2,000 की सहायता भी मिलती है (कंडिका 7)।
“मत्स्य बीज उत्पादकों को सरकारी तथा गैर सरकारी हैचरी से अधिकतम 550/–रु0 प्रति लाख स्पॉन की अनुमानित दर से उत्पादन/जिला स्तरीय निविदा द्वारा क्रय कर आपूर्ति करने की योजना है। आपूर्ति किये जाने वाले स्पॉन के मूल्य का 90 प्रतिशत व्यय का वहन सरकार द्वारा तथा 10 प्रतिशत मूल्य का वहन लाभुक मत्स्य बीज उत्पादक द्वारा किया जायेगा।”जलाशय के मछुआरों को अधिकतम 5 कि.ग्रा. गिल नेट पर ₹590 प्रति कि.ग्रा. का 90% — अधिकतम ₹2,655।
जलाशय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्यों, विस्थापितों और कोविड-19 के प्रवासी मज़दूरों के लिए जो जलाशय में मछली पकड़ते हैं।
“प्रति लाभुक अधिकतम 05 कि0 ग्रा0 गिल नेट … हेतु अनुदान उपलब्ध कराया जाना है। … निर्धारित न्यूनतम दर 590/– रुपये के विरुद्ध 90 प्रतिशत् की आर्थिक सहायता अर्थात् 2655/– रु0 दी जाएगी एवं आवश्यक शेष 10 प्रतिशत राशि का वहन लाभुकों द्वारा स्वयं किया जाएगा।”जलाशय मत्स्यजीवी सहयोग समिति को ₹4,14,000 की 4–6 सीटर मोटरचालित नाव पर 90% — अधिकतम ₹3,72,600।
समितियों का चयन अख़बार में विज्ञापन के बाद उपायुक्त करते हैं; नाव चलाने और रख-रखाव की ज़िम्मेदारी समिति की है।
“मोटरचालित नाव की इकाई लागत निर्धारित करने हेतु आमंत्रित “इच्छा की अभिव्यक्ति” में निर्धारित न्यूनतम दर 4,14,000/– रुपये का 90 प्रतिशत अर्थात् अधिकतम 3,72,600/– रुपये का स्वीकृत अनुदान देय होगा तथा आवश्यक शेष 10 प्रतिशत राशि का वहन लाभुक समितियों द्वारा स्वयं किया जाएगा।”जलाशय/खदान स्तरीय समितियों और उनके सदस्यों को ₹40,000 इकाई लागत की 14 फ़ुट नाव: सरकारी सहायता अधिकतम ₹36,000।
आदेश ₹40,000 इकाई लागत में से ₹36,000 (90%) छापता है। ज़रूरत पर 4 हेक्टेयर से बड़े निजी तालाब वालों को भी नाव मिल सकती है।
“स्पेसिफिकेशन (ल0 X चौ0 X ग0 – 14’ X 4’6” X 20”) एवं इकाई लागत के आलोक में मो0 40,000/– (चालीस हजार) रू0 होगी, में सरकारी सहायता अधिकतम् मो0 36,000/– (छत्तीस हजार) रू0 प्रति नाव लाभुक के बैंक खाते में डी0बी0टी0 के माध्यम से उपलब्ध करायी जायेगी। शेष राशि समितियों अथवा उनके सदस्यों के द्वारा स्वयं वहन किया जायेगा।”2020-21 तक बने केज के धारकों को नए ग्रो-आउट नेट पर ₹30,200 का 75% — ₹22,650 प्रति नेट — अधिकतम दो नेट।
नॉटलेस या बड़े नेट पर भी गणना ₹30,200 पर ही होगी; बाक़ी आप देंगे। केज में अभी मछली पालन चल रहा होना चाहिए।
“45 Ply के knotted ग्रो–आउट हेतु निर्धारित न्यूनतम दर 30,200/– रुपये का 75 प्रतिशत अर्थात् अधिकतम 22,650/– रुपये का स्वीकृत अनुदान देय होगा तथा शेष लाभुक का अंशदान होगा।”जिन केज धारकों के पास केज हाउस नहीं है, उन्हें ₹6,01,000 तक के केज हाउस (फीड भंडार और ठहरने की जगह) पर 90% अनुदान।
निदेशालय द्वारा सूचीबद्ध फ़र्म (पत्रांक 248, 08.02.2024) से बनवाया जाएगा, केवल वहाँ जहाँ केज पहले से हैं या इस वर्ष लग रहे हैं।
“केज हाउस की इकाई लागत निर्धारित करने हेतु वित्तीय वर्ष 2023–24 में आमंत्रित “इच्छा की अभिव्यक्ति” में निर्धारित न्यूनतम दर 6,01,000/– रुपये पर अधिकतम 90 प्रतिशत अनुदान देय होगा तथा शेष 10 प्रतिशत लाभुक का अंशदान होगा।”फैक्ट्री में बने फ्लोटिंग फीड (2 mm या छोटा) की कीमत का 50%, अधिकतम ₹25 प्रति कि.ग्रा., 700 कि.ग्रा. तक — अधिकतम ₹17,500।
“मत्स्य पालकों को 2 mm अथवा इससे छोटे साईज के फैक्ट्री उत्पादित फ्लोटिंग फीड (खुले बाजार से) के क्रय पर भी 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25/–रू0 प्रति किलोग्राम फीड की दर से ही अनुदान देय होगा। एक लाभुक को अधिकतम कुल 700 किलोग्राम … पर अधिकतम 17500/–(सतरह हजार पाँच सौ) रू0 अनुदान की राशि लाभुक के बैंक खाते में डी0बी0टी0 की जायेगी।”केज मत्स्य पालकों को दूसरी फ़सल से: 2–4 mm फ्लोटिंग फीड की कीमत का 50%, अधिकतम ₹25 प्रति कि.ग्रा., 1,500 कि.ग्रा. तक — अधिकतम ₹37,500।
“केज मत्स्य पालकों को दूसरे crop से मछली उत्पादन के लिए 2 mm से बड़े 4 mm तक के फैक्ट्री उत्पादित फ्लोटिंग फीड (खुले बाजार से) के क्रय पर 50 प्रतिशत् अथवा अधिकतम 25/–रू0 प्रति किलोग्राम फीड की दर से अनुदान देय होगा। एक लाभुक को अधिकतम कुल 1500 किलोग्राम … पर अधिकतम 37,500/–(सैंतीस हजार पाँच सौ) रू0 अनुदान”आरएएस इकाई को दूसरी फ़सल से: 90 m³ के हर टैंक के लिए 650 कि.ग्रा. तक फीड पर ₹25 प्रति कि.ग्रा. (और बिल का अधिकतम आधा) — अधिकतम ₹16,250 प्रति टैंक, 8 टैंक तक।
“रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम में दूसरे crop से मछली उत्पादन के लिए एक लाभुक को 90 m³ के प्रति टैंक (अधिकतम 08 टैंक) के लिए अधिकतम 650 किलोग्राम प्रति टैंक की दर से 4 mm तक के साईज के फैक्ट्री उत्पादित फ्लोटिंग फीड के क्रय पर 25/–रू0 प्रति किलोग्राम के समानुपातिक दर पर अनुदान की राशि लाभुक के बैंक खाते में डी0बी0टी0 की जायेगी।”बायोफ्लॉक टैंक को दूसरी फ़सल से: 10 m³ के हर टैंक के लिए 50 कि.ग्रा. तक फीड पर ₹25 प्रति कि.ग्रा. (और बिल का अधिकतम आधा) — अधिकतम ₹1,250 प्रति टैंक, 50 टैंक तक।
“बायोफ्लॉक टैंक में दूसरे crop से मछली उत्पादन के लिए एक लाभुक को 10 m³ के प्रति टैंक (अधिकतम 50 टैंक) के लिए अधिकतम 50 किलोग्राम प्रति टैंक की दर से 4 mm तक के साईज के फैक्ट्री उत्पादित फ्लोटिंग फीड के क्रय पर 25/–रू0 प्रति किलोग्राम के समानुपातिक दर पर अनुदान”बायोफ्लॉक तालाब (0.1 हे.) को दूसरी फ़सल से: 1,500 कि.ग्रा. तक फीड पर ₹25 प्रति कि.ग्रा. (और बिल का अधिकतम आधा) — अधिकतम ₹37,500।
“बायोफ्लॉक तालाब (0.1 Ha) में दूसरे crop के मछली उत्पादन के लिए एक लाभुक को अधिकतम 1500 किलोग्राम प्रति तालाब (0.1 Ha) की दर से 4 mm तक के साईज के फैक्ट्री उत्पादित फ्लोटिंग फीड के क्रय पर 25/–रू0 प्रति किलोग्राम के समानुपातिक दर पर अनुदान”केज बैटरी (एक 12×8×5 मी. केज या दो 8×6×5 मी. केज) ₹3,58,000 पर 90% — ₹3,22,200।
एक बैटरी में अधिकतम दो लाभुक साझा हो सकते हैं (कंडिका 25(iv)6)।
““इच्छा की अभिव्यक्ति” में निर्धारित प्रति केज–बैटरी की दर मो0 3,58,000/– रू0 मात्र पर 90 प्रतिशत अर्थात् मो0 3,22,200/– रू0 मात्र का अनुदान देय होगा तथा शेष 10 प्रतिशत लाभुक का अंशदान होगा।”केज बैटरी के इनपुट (अंगुलिका और फ्लोटिंग फीड) का 50%, अधिकतम ₹2,00,000।
“विस्थापित केज लाभुकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उपरोक्त उल्लिखित दोनों प्रकार के केज–बैटरी हेतु इनपुट के लिए राज्य सरकार का अंशदान 50 प्रतिशत (अधिकतम मो0 2,00,000/–रू0) होंगे तथा शेष अंशदान लाभुक का होगा।”केज मत्स्य पालक को ₹2,420 की लाइफ़ जैकेट पर 75% — अधिकतम ₹1,815।
यही दर 11.08.2026 के मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण आदेश (कंडिका 12(क)) में भी छपी है।
“लाईफ जैकेट की इकाई लागत निर्धारित करने हेतु आमंत्रित “इच्छा की अभिव्यक्ति” में निर्धारित न्यूनतम दर 2420/– रुपये का 75 प्रतिशत अर्थात् अधिकतम 1815/– रुपये का स्वीकृत अनुदान देय होगा तथा शेष अंशदान लाभुक का अपना होगा।”आँधी या फ़सल नुकसान से टूटे केज को एक केज-एक बैटरी में दोबारा बनाने के ₹1,82,500 का 90% — ₹1,64,250।
केवल पुराने केज धारकों या जलाशय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्यों के लिए; विस्थापित केज धारकों को प्राथमिकता।
““इच्छा की अभिव्यक्ति” में निर्धारित केज रिमॉडलिंग दर मो0 1,82,500/– रू0 मात्र प्रति पर 90 प्रतिशत अर्थात् मो0 1,64,250/– रू0 मात्र का अनुदान देय होगा तथा शेष 10 प्रतिशत लाभुक/धारक समिति का अंशदान होगा।”एक मछली-सह-बत्तख इकाई (0.4 हे. तालाब, 160 बत्तख चूज़े) ₹1,53,350: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹1,22,680), अन्य को 70% (₹1,07,345)।
एक स्थल/लाभुक पर एक ही इकाई। 0.2 हेक्टेयर तालाब पर राज्य का अंशदान समानुपातिक (आधा) होगा।
“इस योजना अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत (अधिकतम मो0 1,22,680/–रू0) होगा तथा शेष अंशदान लाभुक का होगा। अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत (अधिकतम मो0 1,07,345/–रू0) होगा, शेष राशि लाभुक द्वारा स्वयं वहन किया जायेगा।”इनपुट सहित एक 0.1 हे. बायोफ्लॉक तालाब, इकाई लागत ₹14,00,000: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹11,20,000), अन्य को 70% (₹9,80,000); एक व्यक्ति को एक इकाई।
“इस योजना अंतर्गत लाभुकों के निजी जमीन पर 0.1 हेक्टेयर (एक यूनिट) के बायोफ्लॉक तालाब निर्माण (इनपुट सहित) हेतु … मो0 14,00,000/– (चौदह लाख) रू0 मात्र अंतर्गत क्रियान्वित कराया जाना है। इस हेतु राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत् (अधिकतम 11,20,000/– रू0 प्रति 0.1 हेक्टेयर) तथा शेष अंशदान लाभुक का होगा। अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिये राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत् (अधिकतम 9,80,000/– रू0 प्रति 0.1 हेक्टेयर) तथा शेष अंशदान लाभुक का होगा। एक लाभुक को अधिकतम एक यूनिट (0.1 हेक्टेयर) का लाभ दिया जायेगा।”निजी तालाब में महाझींगा पालन, इकाई लागत ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹3,20,000/हे.), अन्य को 70% (₹2,80,000/हे.)।
“निजी क्षेत्र के चयनित कृषकों के तालाबों में भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत स्वीकृत इकाई दर के अनुरुप ही प्रति हेक्टेयर मो0 4,00,000/– रू0 मात्र के दर पर महाझींगा का पालन किया जाएगा। इस हेतु राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत् (अधिकतम 3,20,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,28,000/– रू0 प्रति एकड़) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिये राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत् (अधिकतम 2,80,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,12,000/– रू0 प्रति एकड़)”निजी तालाब में देशी माँगुर पालन, इकाई लागत ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80%, अन्य को 70%।
“निजी क्षेत्र के तालाबों में देशी माँगूर पालन एवं प्रत्यक्षण हेतु भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत स्वीकृत इकाई दर के अनुरुप ही प्रति हेक्टेयर मो0 4,00,000/– रू0 मात्र का दर होगा। इस हेतु … अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत् (अधिकतम 3,20,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,28,000/– रू0 प्रति एकड़) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिये राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत् (अधिकतम 2,80,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,12,000/– रू0 प्रति एकड़)”तालाब, केज या सीमेंट टैंक में मोती पालन, ₹20,000 प्रति यूनिट: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को ₹16,000 (80%), अन्य को ₹14,000 (70%)।
“सभी जलक्षेत्र (निजी/बन्दोबस्त) के तालाबों/केज/Cemented Tank में Cluster Approach के तहत् मोती पालन एवं प्रत्यक्षण हेतु … मो0 20,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट का दर होगा। … अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80% (अधिकतम मो0 16,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 70% (अधिकतम मो0 14,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट)”सड़क किनारे, चौक या हाट में मछली बेचने वाले खुदरा विक्रेता को ₹15,000 की मछली बिक्री किट पर 95% — अधिकतम ₹14,250।
जिसे अनुदानित वैन मिली है उसे नहीं (कंडिका 9)। 2026-27 में महिलाओं को प्राथमिकता।
“एक मछली बिक्री किट की इकाई लागत मो0 15,000/– रू0 मात्र आकलित की गई है … निर्धारित स्पेशिफिकेशन के एक मछली बिक्री किट हेतु खुदरा मत्स्य विक्रेताओं को विभागीय अनुदान 95 प्रतिशत अथवा अधिकतम् मो0 14,250/– रू0 (दोनों में से जो कम हो) दिया जायेगा।”मछली या मत्स्य बीज ढोने वाली मत्स्यजीवी सहयोग समिति या उसके सदस्य को चार पहिया भारवाहक वैन पर 60%, अधिकतम ₹4,80,000।
कम-से-कम ₹8 लाख की वैन के लिए आवेदन हो और आप मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्य हों; निबंधन और बीमा का ख़र्च आपका (कंडिका 3, 8.1)।
“मछलियों तथा मछलियों के बीज परिवहन हेतु मत्स्यजीवी सहयोग समितियों अथवा उनके सदस्यों को अनुदान पर चार पहिया भारवाहक वैन के लिए विभागीय अनुदान 60 प्रतिशत अथवा अधिकतम् मो0 4.80 लाख रू0 (दोनों में से जो कम हो) दिया जायेगा।”शहर में एक्वेरियम या रंगीन मछली की दुकान खोलने वाले प्रशिक्षित व्यक्ति को ₹1,00,000 तक के उपकरण (2026-27 में राज्य में 13 दुकानें)।
रंगीन मछली पालन में प्रशिक्षित महिलाओं को प्राथमिकता, उनमें दिव्यांग आवेदकों को सर्वोच्च (कंडिका 8.2)।
“शहरी क्षेत्रों में एक्वेरियम शॉप/रंगीन मछली दुकान सज्जा के लिए उपकरण हेतु अनुदान दिया जाएगा। सक्षम स्तर से चयनित लाभुकों को प्रति लाभुक अधिकतम मो0 1.00 लाख रू0 का उपकरणों के रुप में अनुदान कुल 13 लाभुकों के रंगीन मछली/एक्वेरियम बिक्री दुकान हेतु दिया जाएगा”नया तालाब (घटक-I): ₹11 लाख इकाई लागत (₹7 लाख खुदाई + ₹4 लाख आदान) का 40% — ₹4.40 लाख प्रति हेक्टेयर — या 50% — ₹5.50 लाख प्रति हेक्टेयर, 0.1 से 5 हेक्टेयर जल क्षेत्र पर।
जल क्षेत्र 0.10 से 5.00 हेक्टेयर, कम से कम 5 फ़ुट गहराई (पैरा 3(V)); अनुदान वास्तव में खोदे गए जल क्षेत्र के अनुपात में (पैरा 6A(xx))। ट्रांसजेंडर और दिव्यांग आवेदकों को भी 50%। पहले 5 हेक्टेयर से कम पर तालाब अनुदान मिला हो तो बाकी क्षेत्र पर मिल सकता है।
“The unit cost towards new tank excavation and various inputs for taking up pisciculture activities in tanks are Rs.7.00 Lakh/ha & Rs.4.00 lakh/Ha respectively under Component-l. … Subsidy @ 40 % shall be provided to the General category and @ 50% to SC/ ST/ Women/ PWD/ Transgender categories of beneficiaries”पुराना कम उपज वाला तालाब (घटक-II): एक फ़सल के बीज, चारा व अन्य आदान के ₹4 लाख का 40% — ₹1.60 लाख प्रति हेक्टेयर — या 50% — ₹2.00 लाख प्रति हेक्टेयर, 0.1 से 2 हेक्टेयर पर।
अपना या 7+ वर्ष के पट्टे का तालाब; पिछले 5 वर्षों में उस तालाब पर MPY, PMMSY या ऐसी सहायता मिली हो तो अनुदान नहीं (पैरा 6B.2(i))।
“The unit cost towards input assistance for intensive pisciculture in existing tanks with low productivity is Rs.4.00 lakh/Ha under Component-ll.”आपके खेत तालाब की छपी आदान लागत का 40% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग को 60%): ₹16,000 (20×20 मी), ₹9,000 (15×15 मी) या ₹4,000 (10×10 मी)।
एक बार की सहायता, प्रति लाभार्थी अधिकतम 1 एकड़ जल क्षेत्र; तालाब में कम से कम 5 फ़ुट पानी 5 महीने तक रहना चाहिए। ट्रांसजेंडर और दिव्यांग किसानों को भी 60%। एक परिवार को एक ही लाभ; पिछले दो वर्षों में परिवार के किसी सदस्य को यह अनुदान मिला हो तो नहीं (पैरा 5(iv))।
“Input Assistance towards Pisciculture will be provided by F & ARD Department @ 40% for General and 60% for SC/ST/Women/Transgender/PWD category of farmers towards cost of seed, feed & others on the Unit cost of Rs 4.00 lakh /Ha shall be provided.”2, 4 या 6 टैंक की बायोफ्लॉक इकाई के ₹2, ₹4 या ₹6 लाख का 50% (अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग को 60%) — अधिकतम ₹3 लाख (₹3.60 लाख)।
प्रति लाभार्थी कम से कम 2 टैंक (30 घन मीटर), अधिकतम 6 टैंक (90 घन मीटर), पहले अनुदान पाए टैंक मिलाकर (पैरा 4.1(iii)–(iv))। ट्रांसजेंडर और दिव्यांग आवेदकों को भी 60%। तीन वर्ष में एक परिवार को एक लाभ।
“The unit cost of the scheme towards capital & inputs are Rs.0.75 Lakh/tank & Rs. 0.25 lakh/tank respectively. … Subsidy @ 50 % shall be provided to the General category and @ 60% to SC/ ST/ Women/ PWD/ Transgender categories of beneficiaries”सीएम-एलिवेट के तहत मछली पालन इकाई की लागत का 50% सब्सिडी।
2026-27 का भाषण (पैरा 3.6.2) मछली तालाबों के लिए सीएम-एलिवेट योजना “50% से 75% तक सब्सिडी” के साथ बताता है, पर किसे कौन-सी दर मिलेगी यह नहीं बताता, इसलिए हम मिशन के लिए छपी 50% दर ही दिखाते हैं, ऊँची नहीं। 2025-26 में मिशन को ₹30 करोड़ दिए गए (पैरा 6.3)।
“The Meghalaya State Aquaculture Mission 3.0 will be launched soon. The Mission will target production of 19,000 MT of fish and will benefit 50,000 fish farmers. Part of the Mission will be implemented under the banner of CM ELEVATE, with the same 50% subsidy structure as other livestock initiatives.”आपकी परमिट वाली मोटर मछली नाव को मिलने वाले हर लीटर औद्योगिक केरोसिन पर ₹35 की छूट।
दर विभाग की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट से है, जो नवीनतम प्रकाशित है; यही बजट शीर्ष 2026-27 में भी है। रिपोर्ट औद्योगिक केरोसिन का मासिक कोटा नहीं छापती (अलग से, परमिट वाली नावों को पीडीएस केरोसिन पीडीएस दर पर मिलता है — मुख्य बिंदु 1.7)।
“The Dept has introduced a scheme of supplying industrial kerosene to the motorized fishing boats. As industrial kerosene is available at Rs.86/- per liter, a rebate of Rs.35/- per liter is provided and rest will be borne by the fishermen.”मछली पकड़ने के सामान की मुफ़्त किट, 2026-27 के बजट के अनुसार ₹20,000 की (पहले ₹10,000)।
विभाग की 2023-24 वार्षिक रिपोर्ट पुष्टि करती है कि किट 100% सरकारी सहायता से दी जाती है (मुख्य बिंदु 1.12: 1,250 मछुआरे, ₹125 लाख)। किसी दस्तावेज़ में किट का सामान या पात्रता नहीं लिखी; मत्स्य कार्यालय से पूछें।
“The rates of fisheries requisite kit provided for fishermen free of cost will be increased from Rs.10,000 to Rs. 20,000 to encourage fishing activities.”आउटबोर्ड मोटर वाली मछली पकड़ने की नावों के लिए रियायती सफ़ेद केरोसिन; सब्सिडी अब ₹75 है (मत्स्यफ़ेड का पृष्ठ अभी पुराने ₹25 प्रति लीटर दिखाता है)।
बजट भाषण इकाई नहीं छापता; मत्स्यफ़ेड का योजना पृष्ठ पुरानी दर “₹25 प्रति लीटर सब्सिडी” छापता है, इसलिए ₹75 भी संभवतः प्रति लीटर है। ₹75 की दर का कोई लागू आदेश नहीं मिला — भरोसा करने से पहले मत्स्यफ़ेड से पूछ लें।
“The kerosene subsidy being provided to fishermen is enhanced to ₹75.”मछली तालाब के इनपुट: ₹1.50 लाख प्रति हेक्टेयर का 50%, अधिकतम 4 हेक्टेयर — अधिकतम ₹3,00,000।
सहकारी समितियाँ, एफएफपीओ, स्वयं सहायता समूह और झींगा क्लस्टर 20 हेक्टेयर तक ले सकते हैं। स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“1. Project Cost Rs. 1.50 lakh per Hectare. 2. Subsidy will be limited to 50% of the project cost. 3. Maximum limit 4 hectare per beneficiary and 20 hectares for Co-operative socities/FFPOs/Self Help Group(SHG)/Shrimp Cluster/Dam/Lakes. 4. Applicable only on Own land/Panchayati Ponds/Govt.Reservoir/Dams/Lakes.”3 साल या अधिक से मछली पालन वाले तालाब की मरम्मत: ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर का 50%, अधिकतम 4 हेक्टेयर — अधिकतम ₹4,00,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“1. Project Cost Rs. 2.00 lakh per Hectare 2. Subsidy will be limited to 50% of the project cost. 3. The maximum limit 4 hectare per beneficiary and 20 hectares for Co-operative societies/FFPOs/SHGs/Shrimp Cluster. 4. This benefit will be provided on those ponds which are under aquaculture for past three years or more.”मछली पकड़ने का जाल: लागत का 50%, अधिकतम ₹40,000 तक — अधिकतम ₹20,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“1. Project Cost Rs. 40,000/- 2. Subsidy of 50% or an amount of ₹20,000 per beneficiary, whichever is lower.”मछली कार्य के लिए लोडिंग ऑटो, चार-पहिया या ट्रॉली सहित मिनी ट्रैक्टर (28 एचपी): लागत का 30%, अधिकतम ₹2,25,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“subsidy @30% of the actual cost or Rs. 2.25 lakh, whichever is less, will be provided for fisheries related activities on the purchase of a loading auto/ four-wheeler or mini tractor with trolley (28 HP).”मत्स्य पालन के लिए सोलर बिजली: ₹50,000 प्रति किलोवाट का 60%, अधिकतम 30 किलोवाट — अधिकतम ₹9,00,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“Subsidy @60% on total project cost of amounting to Rs. 50,000/- per KW or Rs. 15,00,000/30KW for any fisheries activities like large RAS, Bio-floc (50 tanks), shrimp and fish farming, processing plants, feed plants and any other aqua related projects for single beneficiary.”मछली या झींगा फ़सल के बीमा प्रीमियम का आधा।
परियोजना लागत में प्रीमियम की रक़म भरें। स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“50% subsidy on Insurance Premium for shrimp/fish crop insurance.”तालाब इनपुट: ₹1,50,000 प्रति हेक्टेयर का 60% (₹90,000/हेक्टेयर), अधिकतम 4 हेक्टेयर — अधिकतम ₹3,60,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“1. 60% subsidy for the Inputs amounting to Rs. 1,50,000/- or Rs. 90,000/- per hectare whichever is less with maximum limit of 4.00 hectare per SC farmer. 2. Applicable on Own land/ Panchayati ponds/Govt. reservoir.”पंचायती तालाब या सरकारी जल का पहले साल का पट्टा: पट्टे का 50%, अधिकतम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर, 4 हेक्टेयर तक (₹2,00,000)।
₹50,000 की सीमा प्रति हेक्टेयर है; हमने हिसाब 4 हेक्टेयर (₹2,00,000) पर रोका है, छोटे तालाब पर प्रति हेक्टेयर सीमा देखें। स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“@50% of the actual lease amount or Rs. 50,000/hectare whichever is less with the maximum limit of 4 hectare per SC farmer (applicable only on Panchayati Ponds and Govt. Water sheds/Dams).”दूसरे साल से पट्टा: पट्टे का 40%, अधिकतम ₹40,000 प्रति हेक्टेयर, 4 हेक्टेयर तक (₹1,60,000)।
₹40,000 की सीमा प्रति हेक्टेयर है; हमने हिसाब 4 हेक्टेयर पर रोका है। स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“40% of the actual lease amount or Rs.40,000/hectare whichever is less with the maximum limit of 4 hectare per beneficiary (applicable only on Panchayati ponds and govt. reservoirs).”मछली पकड़ने का जाल: लागत का 60%, अधिकतम ₹40,000 तक — अधिकतम ₹24,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“60% subsidy on the purchase of fishing nets of amounting to Rs. 40000/- with maximum limit of grant Rs :-24000/- per applicant.”चूल्हा, गैस और बर्तन सहित मछली बेचने की रेहड़ी: लागत का 60%, अधिकतम ₹60,000 तक — अधिकतम ₹36,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“For the purchase of the rehri along with (Stove, Gas Chulha utensil etc.) for the fish/fish product sale 60% subsidy will be provided on total project cost of Rs. 60,000/- or the subsidy amount of Rs. 36,000/- ,whichever is less, per beneficiary.”अधिसूचित जल की वार्षिक नीलामी: आपकी बोली की रक़म का 50%, अधिकतम ₹5,00,000।
स्थिति अज्ञात: ये विभाग के मौजूदा योजना पृष्ठ हैं (साइट जून 2026 में अद्यतन, हर पृष्ठ पर 10 नवम्बर 2024 या 2025 की तारीख़ और सरल “आवेदन” लिंक), पर 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें इस घटक का नाम हो; 2026-27 बजट मत्स्य विभाग का आवंटन बढ़ाता है पर ये मद नहीं गिनाता।
“@50% subsidy of the actual auctioned amount with maximum limit of Rs. 5,00,000/- whichever is less.”जलाशय की मछली नीलामी में ₹100/किलो से कम बिके तो अंतर का ₹20/किलो तक राज्य देगा।
एकमात्र दस्तावेज़ 2026-27 का बजट भाषण है; विभाग की वेबसाइटों पर लागू करने की कोई अधिसूचना नहीं मिली।
“The composite support price of reservoir fish will be one hundred rupees per kilogram. If in auction the reservoir fish is sold at a cost lower than one hundred rupees per kilogram, then the State Government will provide fishermen a subsidy of up to twenty rupees per kilogram through DBT.”बरसात में मछली पकड़ने पर रोक के समय मछुआरा परिवारों को ₹3,500 प्रति वर्ष।
एकमात्र दस्तावेज़ 2026-27 का बजट भाषण है; विभाग की वेबसाइटों पर लागू करने की कोई अधिसूचना नहीं मिली।
“during the rainy season when fishing is not possible or remains prohibited, keeping in mind the difficulties faced by the fisherman families during that period, I propose to provide a lump sum honorarium of three thousand five hundred rupees per year.”सक्रिय नदी और जलाशय मछुआरों को कास्ट या गिल जाल की लागत का 90%।
एकमात्र दस्तावेज़ 2026-27 का बजट भाषण है; विभाग की वेबसाइटों पर लागू करने की कोई अधिसूचना नहीं मिली।
“four thousand active river fishermen will be provided with cast nets and Three thousand active reservoir fishermen will be provided with gill nets with a 90 percent subsidy through DBT.”मानकों के अनुसार नाव ख़रीदने की लागत का 70%।
कोई मूल्य सीमा नहीं छपी, इसलिए राशि आपके कोटेशन पर निर्भर है। एकमात्र दस्तावेज़ 2026-27 का बजट भाषण है; विभाग की वेबसाइटों पर लागू करने की कोई अधिसूचना नहीं मिली।
“Based on requirement standards, fishermen will be provided 70 percent subsidy through DBT for the purchase of boats.”₹50,000 का एरेटर: 50% अनुदान (₹25,000), अनुसूचित जाति के मत्स्य पालकों को 60% (₹30,000); अधिकतम दो एरेटर।
0.50 हेक्टेयर तालाब पर एक एरेटर (2 एचपी क्वाड पैडल व्हील), 1.00 हेक्टेयर या बड़े तालाब पर अधिकतम दो। तालाब की मौजूदा उपज कम से कम 4 टन/हेक्टेयर हो और पट्टे के कम से कम 5 साल बचे हों। चयन ज़िला समिति में लॉटरी (रैंडमाइज़ेशन) से; पहली वरीयता मछुआ समुदाय की अंत्योदय, बीपीएल और विधवा महिला पट्टाधारकों को, फिर ग्राम सभा के अन्य पट्टाधारकों को, फिर निजी तालाब वालों को।
“एरेटर सिस्टम की प्रति इकाई लागत रू0.0.50 लाख होगी जिसमे लाभार्थी अंश का धनराशि (समस्त मत्स्य पालकों द्वारा योजना की इकाई लागत का 50% तथा अनुसूचित जाति महिला/पुरुष/अन्य मत्स्य पालक द्वारा 40% धनराशि) लाभार्थी स्वयं के संसाधन से अथवा बैंक ऋण लेकर वहन किया जाएगा। योजनान्तर्गत सामान्य महिला/पुरुष/ अन्य मत्स्य पालक को परियोजना के सापेक्ष 50 प्रतिशत अनुदान की धनराशि अर्थात ₹ 0.25 लाख प्रति इकाई एवं अनुसूचित जाति के महिला/पुरुष/अन्य मत्स्य पालक को 60 प्रतिशत अनुदान अर्थात ₹ 0.30 लाख प्रति इकाई देय होगा।”छपी इकाई लागत का 50% (एससी, एसटी और महिलाओं को 60%), जैसे ₹3 लाख का ट्राउट रेसवे → ₹1.50 लाख (₹1.80 लाख); ₹50 लाख की ट्राउट हैचरी → ₹25 लाख (₹30 लाख)।
हर इकाई की अपनी शर्तें कॉलम (vii) में हैं: जैसे हैचरी में 0.4 हेक्टेयर पर साल में कम से कम 10 लाख फ़्राई, रेसवे के लिए 50 घन मीटर जगह की ज़मीन, और आरएएस एक व्यक्ति को एक (कम से कम 10 सदस्यों के समूह को दो)। सहायता असल लागत पर, छपी सीमा के भीतर। एचएडीपी अभी चल रहा है (2026 के सरकारी आदेश 2026-27 के लिए एचएडीपी की राशि मंज़ूर करते हैं), पर इस परियोजना के किसान घटकों का कोई ताज़ा आदेश हमें नहीं मिला, और दरें 2022 के दिशानिर्देशों से हैं। पैसा लगाने से पहले विभाग से पक्का कर लें।
“Unit cost (Rs. lakhs) / Government Assistance (Rs. lakhs) General (50%) / SC/ST/Women (60%): 1 Establishment of Trout Fish Hatcheries 50.00 25.00 30.00; 2 Construction of Raceways of minimum of 50 cubic meter 3.00 1.50 1.80; 3 Inputs for Trout Rearing Units 2.50 1.25 1.50; 4 Construction of new ponds 1.30 0.65 0.78; Inputs 0.70 0.35 0.42; 5 Establishment of Medium RAS for Cold water Fisheries 25.00 12.50 15.00; 6 Establishment of large RAS for cold water fisheries 50.00 25.00 30.00; 9 Establishment of Backyard mini RAS units 0.50 0.25 0.30; Construction of cold storages/ice plants: Plant/storage of minimum 10-ton capacity 40.00 20.00 24.00; 9 Refrigerated Vehicles 25.00 12.50 15.00; 10 Fish feed mills (a) Mini Mills 30.00 15.00 18.00”छोटा आरएएस या छोटी बायोफ़्लॉक इकाई (₹7.50 लाख): ₹3 लाख (40%), या एससी, एसटी और महिलाओं को ₹4.50 लाख (60%) — जैसा तालिका में छपा है।
तालिका के शीर्षक में सामान्य 50% लिखा है, पर इन दो इकाइयों के लिए ₹7.50 लाख पर ₹3.00 लाख (40%) छपा है; हम छपी राशि मानते हैं। एक व्यक्ति को एक इकाई। एचएडीपी अभी चल रहा है (2026 के सरकारी आदेश 2026-27 के लिए एचएडीपी की राशि मंज़ूर करते हैं), पर इस परियोजना के किसान घटकों का कोई ताज़ा आदेश हमें नहीं मिला, और दरें 2022 के दिशानिर्देशों से हैं। पैसा लगाने से पहले विभाग से पक्का कर लें।
“7 Establishment of small RAS (with 1 tank of 100m3 Capacity) 7.50 3.00 4.50; 8. Establishment of small Biofloc (with 7 tank of 4m dia and 1.5 height) 7.50 3.00 4.50”