नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी (पोकरा) चरण-2 — फल बाग़ रोपण
चालू होने का आधार: महाराष्ट्र शासन निर्णय 06.10.2026 — पोकरा चरण-2 को 2026-27 के लिए ₹192.30 करोड़ (6 अक्टू॰ 2026, शासन निर्णय: ₹192,30,41,200 released to the Project Director for phase 2 in 2026-27 (budget provision 2026-27 ₹474 crore; project runs six years from 2025-26 in 7,201 villages of 21 districts — प्रस्तावना))
पोकरा परियोजना गाँवों में 0.10–5 हेक्टेयर वाले किसानों को बाग़ के परियोजना-वित्तपोषित काम — गड्ढे, कलम लगाना, पौध संरक्षण, खाली जगह भरना और खाद — का 100% परिशिष्ट-अ के प्रति हेक्टेयर मानक पर (फ़सल के अनुसार ₹60,547 से ₹1,43,700 प्रति हेक्टेयर), 3 साल में मिलता है।
- मुख्य लाभ
- 100%लागत का, अधिकतम
- घटक
- 1हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
- कौन ले सकता है
- 6तरह के आवेदक
- अंतिम तिथि
- मौसमी“कब आवेदन करें” देखें
क्या मिलता है
परियोजना गाँवों के 0.10–5 हेक्टेयर वाले किसान: गड्ढे, रोपण, पौध संरक्षण, खाली जगह भरने और खाद के लिए परिशिष्ट-अ की पूरी प्रति हेक्टेयर राशि (वास्तविक ख़र्च से अधिक नहीं), 3 साल में।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। ज़मीन तैयार करना, गड्ढे भरना, निराई-गुड़ाई और बाड़ किसान के ख़र्च पर (खंड 3.3 अ)। मनरेगा मज़दूरी या सामग्री दरें बदलने पर दरें बदलती हैं (3.10)। केवल व्यक्तिगत किसान, संस्थाएँ नहीं (2.1); किसी अन्य योजना में पहले लगाया क्षेत्र 5 हेक्टेयर में से घटेगा (2.5)। यह राज्यव्यापी भाऊसाहेब फुंडकर फल बाग़ योजना से अलग है, जिसकी 2023-24 मार्गदर्शक सूचनाओं का यह पालन करती है (3.1)।
“ब. प्रकल्प अनुदानीत बाबी / कामे — १. खड्डे खोदणे. २. कलमे लागवड करणे. ३. पीक संरक्षण करणे ४. नांग्या भरणे. ५. रासायनिक/सेंद्रिय खते — 100 % नानाजी देशमुख कृषी संजीवनी प्रकल्प”मुझे कितना मिल सकता है?
आँकड़ा देखने के लिए फल फ़सल और दूरी भरें।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। ज़मीन तैयार करना, गड्ढे भरना, निराई-गुड़ाई और बाड़ किसान के ख़र्च पर (खंड 3.3 अ)। मनरेगा मज़दूरी या सामग्री दरें बदलने पर दरें बदलती हैं (3.10)। केवल व्यक्तिगत किसान, संस्थाएँ नहीं (2.1); किसी अन्य योजना में पहले लगाया क्षेत्र 5 हेक्टेयर में से घटेगा (2.5)। यह राज्यव्यापी भाऊसाहेब फुंडकर फल बाग़ योजना से अलग है, जिसकी 2023-24 मार्गदर्शक सूचनाओं का यह पालन करती है (3.1)।
कौन आवेदन कर सकता है
- अन्य किसान
- लघु या सीमांत किसान
- अनुसूचित जाति किसान
- अनुसूचित जनजाति किसान
- महिला किसान
- काश्तकार या बटाईदार
ज़रूरी काग़ज़
- अपने नाम का 7/12 उतारा; संयुक्त हो तो अन्य खातेदारों की, और किरायेदार दर्ज हो तो किरायेदार की सहमति (खंड 2.2–2.3)
- मिट्टी जाँच रिपोर्ट (या नमूना भेजने का प्रमाण; नींबूवर्गीय फ़सलों के लिए रिपोर्ट अनिवार्य) (3.3 अ-1; अप्रैल 2026 संशोधन पत्र)
- कलम और खाद के बिल, ऑनलाइन अपलोड (3.8, 4.11)
आवेदन कैसे करें
- पोकरा डीबीटी पोर्टल पर सर्वे नंबर, क्षेत्र, फ़सल और दूरी के साथ आवेदन करें (खंड 4.1–4.2); रोपण साल में कभी भी हो सकता है (4.3)।
- पूर्व-स्वीकृति के बाद अपने ख़र्च पर सरकारी या कृषि विश्वविद्यालय की नर्सरी, या एनएचबी-मान्यता प्राप्त लाइसेंसी नर्सरी से कलम ख़रीदें और 120 दिन में रोपण पूरा करें (4.9–4.10)।
- बिल अपलोड कर ऑनलाइन माँग करें; पहले साल की राशि आधार से जुड़े खाते में आती है, दूसरे-तीसरे साल की राशि 1 और 2 साल बाद तभी जब 80% / 90% पौधे जीवित हों (3.9, 3.12–3.14, 4.15)।
आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।
कब आवेदन करें
परियोजना चलने तक (2025-26 से 2030-31) पोकरा डीबीटी पोर्टल पर कभी भी आवेदन करें; पूर्व-स्वीकृति के बाद तय दिनों में काम पूरा कर अनुदान की माँग करनी होती है।
दूसरी योजनाओं के साथ
दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।