फल, सब्ज़ी और फूलMIDH
किसान समूह के स्वामित्व वाले लाइनिंग युक्त सामुदायिक जल टैंक के लिए ₹80 प्रति घन मीटर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में ₹100) का 75%, अधिकतम 30,000 घन मीटर।
निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
बाग़, सब्ज़ियाँ, फूल और मसाले।
फल, सब्ज़ी और फूलकिसान समूह के स्वामित्व वाले लाइनिंग युक्त सामुदायिक जल टैंक के लिए ₹80 प्रति घन मीटर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में ₹100) का 75%, अधिकतम 30,000 घन मीटर।
फल, सब्ज़ी और फूलव्यावसायिक खुले खेत की बागवानी परियोजना की पात्र लागत का 35% (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 45%), अधिकतम ₹100 लाख की लागत पर।
फल, सब्ज़ी और फूलनए नारियल बाग़ के लिए ₹56,000 प्रति हेक्टेयर (₹1.60 लाख का 35%), अधिकतम 2 हेक्टेयर तक, दो सालाना किस्तों में।
फल, सब्ज़ी और फूलहर पुराने या रोगी पेड़ को काटकर हटाने पर ₹1,000, प्रति हेक्टेयर अधिकतम 32 पेड़ (₹32,000), 1 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलप्रति हेक्टेयर ₹42,000 तक के आदान मुफ़्त, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक, दो सालाना किस्तों में।
फल, सब्ज़ी और फूलअनुसूचित जाति/जनजाति उत्पादकों को पुनर्रोपण लागत का 75%, अधिकतम प्रति हेक्टेयर ₹2,10,000 तमिलनाडु व केरल में, अन्य जगह ₹1,68,000, या बड़ी इलायची के लिए ₹75,000।
फल, सब्ज़ी और फूलपुरानी अरेबिका कॉफ़ी के पुनर्रोपण के लिए ₹3,25,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,30,000), साल में अधिकतम 25 हेक्टेयर।
फल, सब्ज़ी और फूलभाव ट्रिगर मूल्य से नीचे गिरने पर सूचीबद्ध फसल को उत्पादन क्लस्टर से बाहर ले जाने, या 3 महीने तक किराए का भंडारण लेने के ख़र्च का 50%।
भंडारण और कोल्ड चेननिर्यात पैक-हाउस, रेफ्रिजरेटेड वाहन, केले के केबल सिस्टम या प्रसंस्करण लाइन की लागत का 40% (पूर्वोत्तर, हिमालयी राज्य, द्वीप केंद्रशासित प्रदेश, अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं के लिए 75%), अधिकतम ₹2 करोड़।
फल, सब्ज़ी और फूलआपके पूरे ऑयल पाम क्षेत्र के लिए पौध: देसी पौध पर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर तक या आयातित पौध पर ₹29,000 प्रति हेक्टेयर तक (150 पौधे प्रति हेक्टेयर)।
सिंचाई और सोलर पंपड्रिप, मिनी या माइक्रो पर लघु-सीमांत किसानों को इकाई लागत का 90%; अन्य किसानों को 80%।
फल, सब्ज़ी और फूल1,500 वर्गमीटर के एक पान बरेजे की लागत ₹1,51,360 का 50% — ₹75,680 — विभिन्न निवेशों के रूप में।
फल, सब्ज़ी और फूलनए बाग़ के प्रति हेक्टेयर ₹3,000 प्रति माह, अधिकतम 36 माह — प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹1,08,000 — केवल तब तक जब तक पौधे जीवित रहें।
फसल और बीजसरकार ₹15 और आपको मिले दाम के बीच का अंतर देती है (अधिकतम ₹9 प्रति नग), 50,000 नग तक — एक किसान को ₹3.5 लाख से ज़्यादा नहीं।
फल, सब्ज़ी और फूलस्वीकृत इकाई लागत का अधिकतम 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही, अधिकतम 45% बैंक ऋण; आपको कम से कम 10% लगाना होता है।
फल, सब्ज़ी और फूल2026 के मौसम में आपका सी-ग्रेड सेब ₹12 प्रति किलो पर ख़रीदा जाता है।
फल, सब्ज़ी और फूलओला-रोधी जाल की लागत का 80% (लघु-सीमांत किसान) या 50% (अन्य), अधिकतम 5,000 वर्ग मीटर पर।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धननए व्यावसायिक कृषि उद्यम की स्थायी पूँजी लागत (ज़मीन छोड़कर) का 40% (अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला उद्यमियों के लिए 50%), प्रति परिवार अधिकतम ₹1 करोड़।
फल, सब्ज़ी और फूलसघन सेब बाग़ के लिए ₹12,00,000 प्रति एकड़ का 80% — एक एकड़ पर ₹9,60,000।
फल, सब्ज़ी और फूलबाग़ की घेरबाड़ की लागत का 50%, अधिकतम ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर।
फल, सब्ज़ी और फूलताज़े फल या फूल हवाई कार्गो या सड़क से लद्दाख के बाहर भेजने में असल ख़र्च का 75%।
फसल और बीजजैव उर्वरक, कीटनाशक, कल्चर, हार्मोन और सूक्ष्म पोषक मुफ़्त, ₹5,000 तक।
फल, सब्ज़ी और फूल₹80,000 प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का 50% — यानी ₹40,000 प्रति हेक्टेयर — 0.1 से 2 हेक्टेयर गेंदा पर।
फल, सब्ज़ी और फूलबीज सहित ₹1,25,150 प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का 75% — यानी ₹93,863 प्रति हेक्टेयर — 0.1 से 2 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूललीफ कलेक्शन शेड की वास्तविक कीमत का 50%, अधिकतम ₹37,500, कम से कम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) में चाय उगाने वाले किसानों के लिए।
फल, सब्ज़ी और फूलनए बाग़ के लिए गड्ढे, कलम, रोपाई, पौध संरक्षण, खाली जगह भरना और ड्रिप का 100% खर्च, फ़सल-वार लागत मानकों के भीतर, तीन साल में।
फसल और किसान बीमाआप बीमित राशि का 2.5% देते हैं: सब्ज़ी या मसाले पर ₹750 प्रति एकड़, फलों पर ₹1,000 प्रति एकड़।
फल, सब्ज़ी और फूललगाई गई कलमी इमली के प्रति हेक्टेयर ₹20,000।
फल, सब्ज़ी और फूलआपके नारियल बाग़ के लिए एपर्टोक्राइसा शिकारी कीट और कोकोकॉन सूक्ष्मजीव मिश्रण की लागत का 75%।
फल, सब्ज़ी और फूलनए शहतूत बाग़ के प्रति एकड़ ₹45,000, 2 एकड़ (₹90,000) तक।
फल, सब्ज़ी और फूलआपके उगाए बाइवोल्टाइन रीलिंग कोकून पर ₹50 प्रति किलो।
पॉलीहाउस और शेड नेटराज्य टॉप-अप: इकाई लागत (आकार के अनुसार प्राकृतिक वातावरण वाले ट्यूबुलर पॉली हाउस पर ₹1,200, ₹1,050 या ₹1,000 प्रति वर्गमीटर; शेडनेट हाउस पर ₹710 प्रति वर्गमीटर) या फ़र्म की दर, जो कम हो, का 20%, अधिकतम 2,000 वर्गमीटर।
फल, सब्ज़ी और फूलहर फल फ़सल के लिए प्रति कलम/पौधा तय राशि (जैसे आम ₹100, अमरूद ₹80, अनार ₹30, खजूर ₹1,750), या असली ख़र्च कम हो तो वह, 500 से 2,600 पौधों पर।
फल, सब्ज़ी और फूलअदरक या हल्दी के प्रति हेक्टेयर (इकाई लागत ₹1,00,000): सामान्य बड़े किसान 50%, सामान्य लघु/सीमांत किसान 65%, अनुसूचित जनजाति और जाति के किसान 75%, अधिकतम 2 हेक्टेयर।
फल, सब्ज़ी और फूलफ़ील्ड-कवर ढाँचे की लागत का 40%, ₹5,00,000 प्रति हेक्टेयर तक गिनी जाती है (अधिकतम ₹2,00,000 प्रति हेक्टेयर), 0.20 से 1 हेक्टेयर तक अनुपात में।
फल, सब्ज़ी और फूलसघन आम बाग़: प्रति कलम ₹100 तक (या असली क़ीमत, जो कम हो), अधिकतम ₹40,000 प्रति हेक्टेयर, कम से कम 400 कलम प्रति हेक्टेयर, 0.20 से 2 हेक्टेयर पर।
फल, सब्ज़ी और फूलप्राकृतिक खेती से उगाई सब्ज़ी: बीज, प्राकृतिक इनपुट और खेती ख़र्च के लिए ₹20,000 प्रति हेक्टेयर तक, 0.20 से 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, जीवन में एक बार।
फल, सब्ज़ी और फूलटमाटर, मिर्च और अन्य सब्ज़ियों के लिए लकड़ी या बाँस के खंभों और तार का कच्चा मंडप: ₹52,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹26,000/हे.), 2 हेक्टेयर तक।
भंडारण और कोल्ड चेनबागवानी उपज के लिए नई आसवन या प्रसंस्करण इकाई (बॉयलर, कटर, ड्रायर, मिक्सर, पल्पर, पैकिंग मशीन…): लागत का 50%, ₹2.50 लाख तक; एफ़पीओ, किसान समूह, स्वयं सहायता समूह और सहकारी संस्था को 75%, ₹3.75 लाख तक; एक बार।
फल, सब्ज़ी और फूलफल, सब्ज़ी, फूल और पौधों के समुद्री निर्यात का भाड़ा: भाड़ा बिल का 25%, प्रति बिल अधिकतम ₹50,000 और सालाना ₹2.50 लाख, पाँच साल तक।
कृषि यंत्रमिनी रोटावेटर: लागत का 50%, ₹80,000 तक गिनी (अधिकतम ₹40,000)।
फल, सब्ज़ी और फूलस्वरोज़गार बागवानी नर्सरी (500 वर्गमीटर का ढाँचा ₹3 लाख + स्टार्टर किट ₹50,000): लागत का 65%, अधिकतम ₹2,27,500, 200 से 500 वर्गमीटर, जीवन में एक बार।
फल, सब्ज़ी और फूलपरियोजना में बहुवर्षीय बाग़: व्यक्तिगत किसान और ट्रस्ट को लागत का 50% (4 हेक्टेयर तक), मिलकर खेती करने वाले एफ़पीओ/सहकारी सदस्यों को 75% (50 हेक्टेयर तक), MIDH-NHM की फ़सलवार इकाई लागत पर।
फल, सब्ज़ी और फूलबेचे गए ऑयल पाम ताज़े फल गुच्छों के हर टन पर ₹8,500 और गोवा समिति के मासिक मूल्य का अंतर आपको मिलता है।
फल, सब्ज़ी और फूलहाई-टेक नर्सरी: लागत का और 15%, बड़ी नर्सरी (1–2 हे.) में ₹30 लाख प्रति हेक्टेयर तक, छोटी (0.4–1 हे.) में ₹20 लाख प्रति हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलकटाई के औज़ार: लागत का 50%, ₹2,00,000 तक गिनी जाती है — अधिकतम ₹1,00,000, पाँच साल में एक बार।
फल, सब्ज़ी और फूलपरियोजना गाँवों के 0.10–5 हेक्टेयर वाले किसान: गड्ढे, रोपण, पौध संरक्षण, खाली जगह भरने और खाद के लिए परिशिष्ट-अ की पूरी प्रति हेक्टेयर राशि (वास्तविक ख़र्च से अधिक नहीं), 3 साल में।
मुर्गी, बकरी और सूअर पालनशहतूत रोपण: ₹60,000 प्रति एकड़ का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — ₹45,000 या ₹54,000 प्रति एकड़।
फल, सब्ज़ी और फूलइकाई लागत का 40–50%, ड्रिप रहित अधिकतम ₹30,000–₹50,000 और ड्रिप सहित ₹40,000–₹80,000 प्रति हेक्टेयर (सामान्य, उच्च या अति उच्च घनत्व), ¼ से 4 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलइकाई लागत का 50%, बीज वाले मसालों पर अधिकतम ₹10,000 या जड़/कंद वाले मसालों (हल्दी, अदरक, लहसुन) पर अधिकतम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर, 0.25 से 2 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलनए बाग़ में अंतरवर्तीय फसल के रूप में सब्ज़ी लगाने पर पूरे ₹30,000 प्रति हेक्टेयर, 1 से 2 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलजैव उर्वरक/सूक्ष्म तत्व के ₹500 और पौध संरक्षण रसायन के ₹500 — कुल ₹1,000 प्रति हेक्टेयर।
फल, सब्ज़ी और फूल0.40 हेक्टेयर के लिए 800 कि.ग्रा. आलू बीज की कीमत, अधिकतम ₹40,000।
फल, सब्ज़ी और फूलनारियल पौधा: ₹85 का 75% (₹63.75 प्रति पौधा), एक लाभार्थी को 5 से 712 पौधे।
फल, सब्ज़ी और फूलबीज मसाले: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹20,000 प्रति हेक्टेयर), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
फल, सब्ज़ी और फूलअमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, पपीता, आँवला, अनार या सुगंधित पौधे: ₹1,00,000 प्रति एकड़ अनुदान, अधिकतम 10 एकड़।
फल, सब्ज़ी और फूलबरेजा में पान: प्रति किसान 100 वर्ग मीटर (0.01 हेक्टेयर) के लिए ₹11,750।
भंडारण और कोल्ड चेन100 टन तक के बहुउद्देशीय भंडार, कोल्ड स्टोरेज या पैकिंग केंद्र की लागत का 35%।
फल, सब्ज़ी और फूलहाइब्रिड, अधिक उपज वाले और खुले परागण वाले सब्ज़ी बीज 75% छूट पर।
फल, सब्ज़ी और फूलफूलों के लिए कम से कम 100 वर्ग मीटर का कम लागत वाला पॉलीहाउस, मुफ़्त।
फल, सब्ज़ी और फूलफलों की पौध आधी कीमत पर; पुराने संतरा बाग़ों के जीर्णोद्धार के लिए सामग्री।
फल, सब्ज़ी और फूलचाय के हर हेक्टेयर पर ₹10,000, एक बार, 2 हेक्टेयर तक वाले उत्पादकों को।
भंडारण और कोल्ड चेन₹10,000 से कम के कटाई बाद के औज़ार पर आधी कीमत, और ₹10,000 या ज़्यादा वाले पर तीन-चौथाई कीमत राज्य देता है।
डेयरी और पशुपालनजंगली जानवर के मारे हर पशु पर तय राशि: गाय या बैल ₹24,000, भैंस ₹25,000, बछड़ा ₹10,000, बकरी ₹12,000, भेड़ ₹20,000, सूअर ₹12,000, टट्टू ₹15,000, याक या ज़ो ₹30,000, मुर्गी ₹350 प्रति किलो।
सिंचाई और सोलर पंपबागवानी फ़सल उगाने वाले हर वर्ग के किसान को पहले 2 हेक्टेयर तक ड्रिप या स्प्रिंकलर की स्वीकृत लागत का 90%।
फल, सब्ज़ी और फूलहर वर्ग के किसान को 0.20 से 1 हेक्टेयर नए नारियल रोपण पर ₹9,225 प्रति हेक्टेयर (₹75 के 123 पौधों की क़ीमत)।
फल, सब्ज़ी और फूलनया काली मिर्च बाग़ लगाने पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर (रोपण सामग्री, आदान और पौध संरक्षण)।
फल, सब्ज़ी और फूलकेरग्रामम में हर रोगी, पुराने या बूढ़े नारियल पेड़ को काटकर हटाने पर ₹1,000।
सिंचाई और सोलर पंपनारियल बाग़ में ड्रिप या स्प्रिंकलर की योग्य लागत का 30% तक, केंद्र की “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” सब्सिडी के ऊपर; दोनों मिलाकर 85% (छोटे और सीमांत) या 75% (बाक़ी) से ज़्यादा नहीं।
फल, सब्ज़ी और फूलपहाड़ में बेमौसमी सब्ज़ी: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 75%, अधिकतम 1 हेक्टेयर — अधिकतम ₹37,500।
फल, सब्ज़ी और फूलअच्छी गुणवत्ता की लाल मिर्च के हर कुन्तल पर ₹700।
पॉलीहाउस और शेड नेटफूलों के लिए ग्रीनहाउस, शेड नेट हाउस या टनल: एमआईडीएच मानक पर लागत का 85%, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर।
फल, सब्ज़ी और फूलचुने गए उद्यमी की संरक्षित खेती के लिए ₹7,000 प्रति वर्ग मीटर (या असल लागत, जो कम हो) का 80% — अधिकतम ₹5,600 प्रति वर्ग मीटर।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
आम, अमरूद, नींबू वर्गीय जैसे नए बाग़ के लिए ₹1.25 लाख प्रति हेक्टेयर का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर।
₹1.25 लाख/हेक्टेयर सब्सिडी गिनने की लागत की ऊपरी सीमा है (अनुलग्नक V, "* लागत मानक का अर्थ ऊपरी सीमा"); कम खर्च पर सब्सिडी उसी खर्च पर मिलेगी। सघन बाग़ और सेब के ऊँचे मानक यहाँ नहीं दिखाए गए। ड्रिप की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“C) New orchards of Apple, Mango, Guava, Litchi, Pomegranate, Citrus etc. a) Without drip irrigation (drip will be in convergence with other schemes) (i). Regular spacing Rs. 1.25lakh/ha. Assistance @ 40% in general area for an area upto2 ha. on pro rata basis for meeting the expenditure on planting material and other input costin 2 instalments of 60:40 subject to survival rate of 80% in 2nd year.”1 से 2 हेक्टेयर की निजी बड़ी पौधशाला (नर्सरी) के लिए अधिकतम ₹30 लाख प्रति हेक्टेयर का 40%।
परियोजना आधारित; नर्सरी को हर साल प्रति हेक्टेयर कम से कम 1,00,000 प्रमाणित पौधे तैयार करने होंगे और अंतिम किस्त के 18 महीने में मान्यता लेनी होगी। पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों, वाइब्रेंट गाँवों, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में न्यूनतम क्षेत्र 0.5 हेक्टेयर है — हम हर जगह 1 हेक्टेयर की सीमा लगाते हैं, इसलिए वहाँ छोटी नर्सरी भी पात्र हो सकती है।
“i. Large Nursery (1 to 2 ha) Upto Rs. 30 lakhs/ Ha. Cost of large nursery on pro rata basis: 1 ha. - 30.00 lakh 2 ha. - 30.00 lakh x 2 Assistance @ 100% to public sector and @ 40% to private sector for an area from 1 to 2 ha. as project based activity, on pro-rata basis.”0.4 से 1 हेक्टेयर की निजी छोटी नर्सरी के लिए अधिकतम ₹20 लाख प्रति हेक्टेयर का 50%।
परियोजना आधारित; नर्सरी को हर साल प्रति हेक्टेयर कम से कम 50,000 प्रमाणित पौधे तैयार करने होंगे और अंतिम किस्त के 18 महीने में मान्यता लेनी होगी।
“ii. Small Nursery (0.4 to 1 ha) Rs. 20 lakhs/Ha. Assistance @ 100% to public sector and @ 50% to private sector for an area from 0.4 to 1 ha. as a project based activity, on pro rata basis.”निजी नर्सरी को मान्यता के स्तर तक उन्नत करने के लिए अधिकतम ₹4 लाख प्रति हेक्टेयर का 50%, अधिकतम 2 हेक्टेयर।
इसमें माध्यम का हॉट-बेड निर्जीवीकरण, कार्य शेड, वायरस जाँच (नींबू वर्गीय, सेब), हार्डनिंग कक्ष / नेट हाउस, मिस्ट कक्ष, मातृ ब्लॉक और सिंचाई / फर्टिगेशन शामिल हैं। अंतिम किस्त के 18 महीने में मान्यता लेना अनिवार्य है।
“iii. Upgrading nursery infrastructureto meet accreditation norms (upto 2 ha) Need based upto a maximum of Rs. 4.00 lakh/ha Assistance @ 100% to public sector and @ 50% to private sector for a nursery of an area upto 2 ha on pro-rata basis.”नई निजी टिशू कल्चर इकाई की लागत का 40%, अधिकतम ₹250 लाख की लागत पर, बैंक ऋण से जुड़ी सब्सिडी।
₹250 लाख 25 लाख पौधे/वर्ष की इकाई के लिए है; छोटी इकाई (कम से कम 10 लाख पौधे) का मानक अनुपात में घटता है, जिसे हम नहीं घटाते — अपनी परियोजना लागत भरें। अंतिम किस्त के 18 महीने में मान्यता।
“iv. Setting up new TC unit Project based upto Rs 250 lakh per project for a capacity of 25 lakh plants or on pro-rata basis for minimum 10 lakh plants. Assistance @ 100% to public sector and in case of private sector, credit linked back-ended assistance @ 40% as project based activity.”1 से 2 हेक्टेयर पर सब्ज़ी या मसाला बीज उत्पादन के लिए ₹50,000 (खुला परागित) या ₹1.80 लाख (संकर) प्रति हेक्टेयर का 35% (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
धन जारी करने से पहले राज्य हर लाभार्थी के लिए बीज उत्पादन लक्ष्य तय करता है। वाइब्रेंट गाँवों में न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“vi. Seed Production for Vegetables and Spices a) Open pollinated crops (1 to 2 ha) Rs 50,000 /ha. b) Hybrid Seeds (1 to 2 ha) Rs. 1.80 lakh/ha Assistance @ 100% to public sector and in case of private sector assistance @ 35% in general areas and 50% in NE & Himalayan States, Scheduled areas, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands for an area from 1 to 2 ha. on pro rata basis.”मातृ ब्लॉक के लिए पौध-सामग्री आयात की लागत का 50%, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियों के लिए, अधिकतम ₹150 लाख प्रति वर्ष की लागत पर।
ऋण से जुड़ी और परियोजना आधारित। छपे वाक्य में एफपीओ, एफआईजी, स्वयं सहायता समूह और सहकारी समितियों का नाम है पर अंत में "स्वयं सहायता समूहों को" लिखा है; एफपीओ या सहकारी समिति के रूप में आवेदन से पहले राज्य बागवानी मिशन से पूछ लें।
“vii. Import of planting material, mother block for mass multiplications. Project based for a project cost upto Rs. 150 lakh/year. Assistance @ 100% to State Govt. / Public Sector and in case of FPOs, FIGs, SHGs and Cooperatives credit linked subsidy @ 50% to SHGs as project-based activity.”गुणवत्तापूर्ण बागवानी बीज और पौध-सामग्री के उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की निजी परियोजना की लागत का 50%, अधिकतम ₹300 लाख प्रति वर्ष की लागत पर।
ऋण से जुड़ी और परियोजना आधारित।
“viii. Production of quality Seed and Planting Material including handling, processing, packing& storage for identified horticulture crops Project based for a project cost upto Rs. 300 lakh/year. Assistance @ 100% to State Govt. / Public Sector and in case of private sector, credit linked subsidy @ 50% including FPOs, FIGs, SHGs and Cooperatives as project based activity.”नए फल बाग़ (स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, कीवी, अंगूर, केला, सघन सेब आदि) के प्रति हेक्टेयर मानक का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
60:40 की दो किस्तों में; दूसरी किस्त तभी, जब दूसरे साल 80% पौधे जीवित हों। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“B. 2 Establishment of New Gardens (Area expansion- for a maximum area of 2 ha per beneficiary). I. Fruits … Assistance @ 40% in general areas for an area upto 2 ha. on pro rata basis … In the case of NE & Himalayan States, Scheduled areas, vibrant villages, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands, assistance will be @ 50% for an area upto 2 ha. on pro rata basis”संकर सब्ज़ियों के लिए ₹60,000 प्रति हेक्टेयर, या खुले परागण वाले प्याज़-लहसुन के लिए ₹50,000 का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर, एक किस्त में (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
वाइब्रेंट गाँवों को अधिकतम लागत का 80% मिलता है; ये राज्य के अंदर अधिसूचित सीमावर्ती गाँव हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इसे लागू नहीं कर सकते। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“II. Vegetables (For maximum area of 2 ha. per beneficiary) Hybrid vegetables Rs.60,000/-ha … i. Onion and Garlic in open pollinated Rs. 50,000/ ha. Assistance @ 40% in general areas for an area upto 2 ha. on pro-rata basis in single instalment. In the case of NE & Himalayan States, Scheduled areas, vibrant villages, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands, assistance will be @ 50% for an area upto 2 ha. on pro rata basis. In case of vibrant villages assistance will be @ 80% of the maximum cost.”कट, कंद वाले या खुले फूलों के प्रति हेक्टेयर मानक का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर, दो किस्तों में (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
60:40 की दो किस्तों में। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“IV. Flowers (For a maximum area of 2 ha per beneficiary) i. Cut Flowers Rs. 1.25 lakh/ha ii) Bulbous and Rhizomatic Flowers Rs. 2.50 lakh/ha iii) Loose Flowers Rs. 50,000 /ha Assistance @ 40% in general areas for an area upto2 ha. on pro rata basis in 2 instalments of 60:40. In the case of NE & Himalayan States, Scheduled areas, vibrant villages, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands, assistance will be @ 50%”बीज, प्रकंद या बहुवर्षीय मसालों के प्रति हेक्टेयर मानक का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर, दो किस्तों में (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
60:40 की दो किस्तों में, पौध-सामग्री और आईएनएम/आईपीएम आदानों के लिए। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“V. Spices (For a maximum area of 2 ha per beneficiary) i. Seed Spices Rs. 50,000/ha ii.Rhizomatic and bulbous Spices (Ginger, Turmeric, and Garlic) Rs. 1.00 Lakh/ ha. iii. Perennial Spices Rs. 1.00 lakh/ha Assistance @ 40% in general areas for an area upto2 ha. on pro rata basis for meeting the expenditure on planting material and cost of material for INM/IPM etc. in 2 instalments of 60:40.”सुगंधित या औषधीय पौधों के प्रति हेक्टेयर मानक का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर, दो किस्तों में (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
60:40 की दो किस्तों में, पौध-सामग्री और आईएनएम/आईपीएम आदानों के लिए। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“VI. Aromatic and Medicinal Plants (For a maximum area of 2 ha per beneficiary) (i) Cost intensive aromatic plants Rs1.25 lakh/ha (ii) Other aromatic plants Rs 50,000/ha (iii) Medicinal plants Rs. 1.5 lakh/ha Assistance @ 40% in general areas for an area upto2 ha. on pro rata basis for meeting the expenditure on planting material and cost of material for INM/IPM etc. in 2 instalments of 60:40”काजू, कोको, बादाम या अखरोट के नए बाग़ के प्रति हेक्टेयर मानक का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
60:40 की दो किस्तों में; दूसरी किस्त तभी, जब दूसरे साल 80% पौधे जीवित हों। मानक प्रति हेक्टेयर लागत की ऊपरी सीमा है; सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 2 हेक्टेयर पर अनुपात में, पौध-सामग्री और आदानों के लिए मिलती है (अनुलग्नक V, B.2)। ड्रिप सिंचाई की सहायता पीडीएमसी मानकों से अलग मिलती है। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“VII. Plantation crops (For a maximum area of 2 ha per beneficiary). (A) Cashew and Cocoa (a) Without drip Irrigation (i) Regular Spacing Rs 75,000 /ha. (b) With Intercropping Rs 50,000 /ha. (ii) High Density (Minimum 400 plants per hectare) (Cashew Only) Rs. 1.5 lakh/ha (B) New Orchards of Almond and Walnut Almond: Rs. 3.00 lakh/ha. Walnut: Rs. 4.00 lakh/ha. Assistance @40% in general areas for an area upto 2 ha. on pro-rata basis … in 2instalments of 60:40 subject to survival rate of 80% in 2nd year.”पुराने, कम उपज वाले बाग़ के जीर्णोद्धार के लिए (मद के अनुसार) ₹10,000 से ₹40,000 प्रति हेक्टेयर का 40%, अधिकतम 2 हेक्टेयर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 50%)।
हर मद का अलग मानक है; तीनों लें तो जोड़ लें (कुल ₹60,000 प्रति हेक्टेयर)। केवल पुराने, कम उपज वाले बाग़-बागान, सिद्ध तकनीक से जीर्णोद्धार पर पात्र हैं (धारा 7.20)। अनुसूचित क्षेत्र और वाइब्रेंट गाँव भी बढ़ी दर पाते हैं, पर ये राज्य के अंदर अधिसूचित इलाके हैं, इसलिए केवल राज्य से हम इन्हें लागू नहीं कर सकते — अपने ज़िला उद्यान कार्यालय से पूछें। लद्दाख को यहाँ बढ़ी दर नहीं दिखाई गई: एचएमएनईएच की सूची 2019 में लद्दाख के अलग केंद्रशासित प्रदेश बनने से पहले की है, इसलिए हम कम दर मानते हैं।
“B.3. Rejuvenation/ replacement of senile plantation, canopy management (i) Removal of dead/dying/old plants Rs. 10,000/ha (ii) Top-working and gap filling with new plant Rs. 10,000/ha (iii) Cost of input towards nutrient management, pest management and irrigation Rs. 40,000/ha Assistance @ 40% in general areas for an area upto 2 ha on pro-rata basis In the case of NE & Himalayan States, Scheduled areas, vibrant villages, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands, assistance will be @ 50% for an area upto 2 ha. on pro-rata basis”उत्तम कृषि पद्धतियाँ (भारत जीएपी) अपनाने और प्रमाणन के लिए ₹20,000 प्रति हेक्टेयर का 50%, अधिकतम 2 हेक्टेयर।
“B.9 Adoption and Certification for Good Agricultural Practices (GAP) /Bharat GAP Rs. 20,000/ha. Assistance @ 50% subject to a maximum of 2 ha/ beneficiary or on pro-rata basis for smaller areas.”व्यावसायिक खुले खेत की बागवानी परियोजना की पात्र लागत का 35% (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 45%), अधिकतम ₹100 लाख की लागत पर।
परिपत्र ने दर 40%/50% (दिशानिर्देश योजना 1, मद 1(i), पृ. 6) से घटाकर 35%/45% की; प्रति परियोजना ₹100 लाख का मानक और अन्य शर्तें बनी रहती हैं। परियोजना 2 हेक्टेयर से बड़ी हो (पूर्वोत्तर में 1 हेक्टेयर से बड़ी)। 21 अगस्त 2026 से एक परिवार (पति/पत्नी, माता-पिता, बेटे, बेटियाँ) में से केवल एक सदस्य, सभी एनएचबी योजनाओं में एक ही बार, सहायता ले सकता है; किसानों के समूह और सेवारत सरकारी कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकते (परिपत्र धारा 1–2)। ज़मीन की लागत नहीं गिनी जाती (धारा 5)। अनुसूचित क्षेत्रों को भी बढ़ी दर मिलती है — एनएचबी से पूछें, क्योंकि केवल राज्य से हम यह नहीं जान सकते।
“Open Field Cultivation Projects — General Area 35% — NER/Himalayan States, Scheduled Areas and specified UTs* 45%”20 हेक्टेयर से बड़ी सेब, अखरोट, बादाम, काजू, कीवी या खजूर की बड़ी हाई-टेक बाग़ परियोजना की पात्र लागत का 35% (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 45%), अधिकतम ₹200 लाख की लागत पर।
यह दिशानिर्देश योजना 1 की मद 1(ii) है — चुनी हुई उच्च मूल्य वाली फ़सलों (सेब, अखरोट, बादाम, काजू, कीवी, खजूर) की बड़ी हाई-टेक खुले खेत की खेती: 20 हेक्टेयर से बड़ी परियोजनाओं के लिए प्रति परियोजना ₹200 लाख (पृ. 6)। परिपत्र ने दर 40% / 50% से 35% / 45% की। गिनी जाने वाली लागत फ़सल-वार प्रति हेक्टेयर सीमा (पृ. 11–15) × आपका क्षेत्रफल है, अधिकतम ₹200 लाख। 21 अगस्त 2026 से एक परिवार (पति/पत्नी, माता-पिता, बेटे, बेटियाँ) में से केवल एक सदस्य, सभी एनएचबी योजनाओं में एक ही बार, सहायता ले सकता है; किसानों के समूह और सेवारत सरकारी कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकते (परिपत्र धारा 1–2)। ज़मीन की लागत नहीं गिनी जाती (धारा 5)। अनुसूचित क्षेत्रों को भी बढ़ी दर मिलती है — एनएचबी से पूछें, क्योंकि केवल राज्य से हम यह नहीं जान सकते।
“Open Field Cultivation Projects — General Area 35% — NER/Himalayan States, Scheduled Areas and specified UTs* 45%”नई निजी टिशू कल्चर इकाई की लागत का 35%, अधिकतम ₹250 लाख की लागत पर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में 45%), बैंक ऋण से जुड़ी सब्सिडी।
दिशानिर्देश योजना 1 मद 1(v), नई टिशू कल्चर इकाई: अधिकतम ₹250 लाख प्रति इकाई; इकाई को हर साल कम से कम 10 लाख (25 लाख तक) तैयार पौधे बनाने होंगे और अंतिम किस्त के 18 महीने में मान्यता लेनी होगी (पृ. 7)। परिपत्र ने पहले की 40% दर को 35% / 45% किया। 21 अगस्त 2026 से एक परिवार (पति/पत्नी, माता-पिता, बेटे, बेटियाँ) में से केवल एक सदस्य, सभी एनएचबी योजनाओं में एक ही बार, सहायता ले सकता है; किसानों के समूह और सेवारत सरकारी कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकते (परिपत्र धारा 1–2)। ज़मीन की लागत नहीं गिनी जाती (धारा 5)। अनुसूचित क्षेत्रों को भी बढ़ी दर मिलती है — एनएचबी से पूछें, क्योंकि केवल राज्य से हम यह नहीं जान सकते।
“New Tissue Culture Units – Private Sector — General Area 35% — NER/Himalayan States, Scheduled Areas and specified UTs* 45%”नए नारियल बाग़ के लिए ₹56,000 प्रति हेक्टेयर (₹1.60 लाख का 35%), अधिकतम 2 हेक्टेयर तक, दो सालाना किस्तों में।
प्रति लाभार्थी कम से कम 0.08 हेक्टेयर (20 सेंट), 160 पौधे प्रति हेक्टेयर के हिसाब से; भुगतान वास्तव में खड़े पौधों पर। नारियल विकास बोर्ड की योजनाएँ 2014 से एमआईडीएच की उप-योजना के रूप में चलती हैं (परिचय, पृ. 6); लागत मानक 2026 में संशोधित हुए।
“Expansion of area under coconut — Cost Norm Rs.1.60 lakh/ ha — Subsidy (35%) Rs.56,000/ ha — 35% of cost for a maximum of 2 ha per beneficiary in two equal installments.”हर पुराने या रोगी पेड़ को काटकर हटाने पर ₹1,000, प्रति हेक्टेयर अधिकतम 32 पेड़ (₹32,000), 1 हेक्टेयर तक।
केवल साल में 10 से कम नारियल देने वाले, सर्वेक्षण में चिह्नित पेड़; 32 की सीमा से ऊपर के चिह्नित पेड़ भी हटाने होंगे। सभी घटकों में सहायता प्रति लाभार्थी 1 हेक्टेयर तक। पिछले पाँच वर्षों में एलओडीपी, पीआईसीसीएस या आर&आर सहायता लेने वाले पात्र नहीं।
“(i) Cutting and removal of old, senile, unproductive and disease advanced palms: Subsidy @ Rs. 1,000 per palm, subject to a maximum of Rs. 32,000/ ha (maximum 32 palms per hectare) is provided, as reimbursement, during the first year after cutting and removal”बचे पेड़ों को सुधारने के लिए 1 हेक्टेयर पर ₹17,500 (₹70,000 का 25%) के आदान, दो साल तक हर साल ₹8,750।
नक़द नहीं, सामान के रूप में: खाद, उर्वरक, पौध-संरक्षण व अन्य आदान, जिन्हें सीडीबी सूचीबद्ध एजेंसियों से ख़रीदकर आपकी सब्सिडी में समायोजित करता है (लाभ वितरण)।
“(ii) Rejuvenation of the remaining coconut palms by Integrated Management: The subsidy @ 25% of the total cost of rejuvenation (Rs. 70,000); i.e., Rs. 17,500 per ha is provided in two annual installments of Rs. 8,750/- each. The maximum eligibility for availing assistance under this component is 1 ha per beneficiary.”नए नारियल पौधों की आधी लागत, अधिकतम ₹45 प्रति पौधा और ₹4,500 प्रति हेक्टेयर।
पौधों का बिल परियोजना लागत में भरें। यहाँ सीमा 1 हेक्टेयर की अधिकतम राशि है; कटाई के बाद वाले रोपण मौसम में पुनर्रोपण ज़रूरी है।
“(iii) Assistance for replanting: The subsidy @ 50% cost of coconut seedlings subject to a maximum of Rs 4,500/ha (Rs.45 per seedling) is extended, as reimbursement, for replanting during the first year.”प्रति हेक्टेयर ₹42,000 तक के आदान मुफ़्त, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक, दो सालाना किस्तों में।
इसमें ज़रूरी आदान, अंतर-फसल की पौध, हरी खाद बीज, पौध-संरक्षण व जैव आदान आते हैं — मज़दूरी, किराया या ढाँचा नहीं। चुने गए क्लस्टर में 5 साल या अधिक उम्र के कम से कम 10 फलदार पेड़ ज़रूरी; पिछले पाँच वर्षों में एलओडीपी, पीआईसीसीएस या आर&आर सहायता लेने वाले पात्र नहीं (पात्रता i, vi)।
“The subsidy is 100% of the cost i.e. Rs. 42,000/- per hectare in two equal annual installments limited to max of 2 ha per beneficiary.”पुनर्रोपण लागत का 33.33%, अधिकतम प्रति हेक्टेयर ₹1,00,000 तमिलनाडु व केरल में, अन्य जगह ₹75,000, या बड़ी इलायची के लिए ₹33,600।
केवल 4 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले पंजीकृत इलायची उत्पादक; प्रति उत्पादक अधिकतम 4 हेक्टेयर और साल में 2 हेक्टेयर; कम से कम 1,100 पौधे/हेक्टेयर (छोटी इलायची, तमिलनाडु व केरल) या 4,000/हेक्टेयर (बड़ी इलायची)। उसी क्षेत्र को 8 साल बाद ही दोबारा सहायता। दो सालाना किस्तों में भुगतान। स्पाइस्ड योजना केवल 30 सितंबर 2026 तक (या 16वें वित्त आयोग की नई योजना मंज़ूर होने तक) बढ़ाई गई थी; भरोसा करने से पहले मसाला बोर्ड से पूछ लें।
“1.1.1 Replanting / New Planting (Tamil Nadu & Kerala) (Ha): 33.33% of cost of cultivation subject to a maximum of Rs 1,00,000/- per Ha for General Category … 1.1.2 Replanting/New Planting (Karnataka & other potential states) (Ha): 33.33% of cost of cultivation subject to a maximum of Rs 75,000/- per Ha for General Category … 2.1 Replanting/New Planting: 33.33% of cost of cultivation of large cardamom subject to a maximum of Rs 33,600/- per Ha for General Category”अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पादकों को पुनर्रोपण लागत का 75%, अधिकतम प्रति हेक्टेयर ₹2,10,000 तमिलनाडु व केरल में, अन्य जगह ₹1,68,000, या बड़ी इलायची के लिए ₹75,000।
हर साल की किस्त सीमा की आधी है — जैसे तमिलनाडु व केरल में अनुसूचित जाति/जनजाति को ₹1,05,000 सालाना, सामान्य को ₹50,000 (1.1.1)। केवल 4 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले पंजीकृत इलायची उत्पादक; प्रति उत्पादक अधिकतम 4 हेक्टेयर और साल में 2 हेक्टेयर; कम से कम 1,100 पौधे/हेक्टेयर (छोटी इलायची, तमिलनाडु व केरल) या 4,000/हेक्टेयर (बड़ी इलायची)। उसी क्षेत्र को 8 साल बाद ही दोबारा सहायता। दो सालाना किस्तों में भुगतान। स्पाइस्ड योजना केवल 30 सितंबर 2026 तक (या 16वें वित्त आयोग की नई योजना मंज़ूर होने तक) बढ़ाई गई थी; भरोसा करने से पहले मसाला बोर्ड से पूछ लें।
“75% of cost of cultivation Rs. 2,10,000/ per Ha for SC/ST payable in two annual installments of Rs. 50,000/- and 1,05,000/- respectively (1.1.1) … 75% of cost of cultivation Rs 1,68,000/- per Ha for SC/ST (1.1.2) … 75% of cost of cultivation Rs 75,000/- per Ha for SC/ST (2.1)”पुरानी अरेबिका कॉफ़ी के पुनर्रोपण के लिए ₹3,25,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,30,000), साल में अधिकतम 25 हेक्टेयर।
कम से कम 25 साल पुरानी अरेबिका (अरेबिका बौनी 15 साल) के लिए। 2 हेक्टेयर तक के अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पादकों को 90% मिलता है; हम 2 हेक्टेयर से ऊपर के लिए छपी 75% दर दिखाते हैं ताकि राशि कभी बढ़ाकर न बताएँ। 25 हेक्टेयर से बड़ी जोत और कंपनियों को 25%। दरें 2024-25 से 2025-26 की कार्यान्वयन विधि से हैं; आईसीडीपी 2026-27 तक बढ़ा है, पर जाँच के समय 2026-27 का उत्पादक परिपत्र प्रकाशित नहीं था। बजट कम होने पर बोर्ड दर घटा सकता है (1.1.1.3 टिप्पणी 1)।
“1.1.1.2. Unit Cost: i) For Arabica - Rs.3,25,000/- per ha … 1.1.1.3. Scale of Subsidy: General a) Up to 25 ha 40% b) >25 ha including Corporate / Partnership firms 25% c) ST / SC Growers a) Up to 2 Ha. 90% b) >2 ha. 75%”पुरानी रोबस्टा कॉफ़ी के पुनर्रोपण के लिए ₹2,75,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,10,000), साल में अधिकतम 25 हेक्टेयर।
कम से कम 40 साल पुरानी रोबस्टा के लिए। 2 हेक्टेयर तक के अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पादकों को 90% मिलता है; हम 2 हेक्टेयर से ऊपर के लिए छपी 75% दर दिखाते हैं ताकि राशि कभी बढ़ाकर न बताएँ। 25 हेक्टेयर से बड़ी जोत और कंपनियों को 25%। दरें 2024-25 से 2025-26 की कार्यान्वयन विधि से हैं; आईसीडीपी 2026-27 तक बढ़ा है, पर जाँच के समय 2026-27 का उत्पादक परिपत्र प्रकाशित नहीं था। बजट कम होने पर बोर्ड दर घटा सकता है (1.1.1.3 टिप्पणी 1)।
“1.1.1.2. Unit Cost: ii) For Robusta - Rs.2,75,000/- per ha … 1.1.1.3. Scale of Subsidy: General a) Up to 25 ha 40% b) >25 ha including Corporate / Partnership firms 25% c) ST / SC Growers a) Up to 2 Ha. 90% b) >2 ha. 75%”भाव ट्रिगर मूल्य से नीचे गिरने पर सूचीबद्ध फसल को उत्पादन क्लस्टर से बाहर ले जाने, या 3 महीने तक किराए का भंडारण लेने के ख़र्च का 50%।
सब्सिडी केवल तब मिलती है जब उत्पादन क्लस्टर में फसल का भाव खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के अधिसूचित ट्रिगर मूल्य से नीचे हो (टमाटर, प्याज़, आलू के अलावा अन्य फसलों में राज्य का ट्रिगर मूल्य) (पैरा 2.G)। फसल पात्र उत्पादन क्लस्टर से हो (पैरा 2.C) और पैरा 2.B में दिए 22 फलों व 20 सब्ज़ियों में से हो। पूर्वोत्तर राज्यों, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हवाई अड्डों से हवाई ढुलाई पर 50% भाड़ा मिलता है (पैरा 2.K, 2.L)।
“The Ministry will provide subsidy @50 % of the cost of the following two components, subject to the cost norms notified by the Ministry: (i) Transportation of Eligible Crops from Eligible Production Cluster; and/or (ii) Hiring of appropriate storage facilities for Eligible Crops (for maximum period of 3 months);”आपके पूरे ऑयल पाम क्षेत्र के लिए पौध: देसी पौध पर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर तक या आयातित पौध पर ₹29,000 प्रति हेक्टेयर तक (150 पौधे प्रति हेक्टेयर)।
यह राशि पौध की क़ीमत के लिए है और राज्य विभाग या प्रसंस्करण कंपनी के ज़रिये जाती है, आपको नक़द नहीं मिलती (धारा 15.1)।
“15.1 … Assistance will be provided to the farmers through the State Department of Agriculture/Horticulture/ Oil palm processors for purchasing of planting material @ Rs. 20,000/ha for domestic seedlings and Rs. 29,000/ha for imported seedlings (at the rate of 150 plants per ha) for the entire land holding and planting area of the farmer.”पहले 4 साल छोटे पौधों की देखभाल और अंतरफसल उगाने की आधी लागत, कुल ₹42,000 प्रति हेक्टेयर तक (हर साल ₹10,500 प्रति हेक्टेयर)।
पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ₹42,000 की जगह ₹50,000 प्रति हेक्टेयर (हर साल ₹6,250 + ₹6,250) मिलते हैं (धारा 16.1); दस्तावेज़ राज्यों की सूची नहीं देता, इसलिए हम हर जगह ₹42,000 वाली राशि दिखाते हैं — पूर्वोत्तर या अंडमान-निकोबार में हों तो राज्य विभाग से पूछें।
“16.1 … During gestation period of 4 years, assistance for maintenance to the farmers will be given @ 50% of the cost limited to Rs. 50,000/ha (Rs. 6,250/ha per year for Maintenance and Rs. 6,250/ha per year for Inter-cropping) in NE/A& N Islands & Rs. 42,000/ha (Rs. 5,250/ha per year for Maintenance and Rs. 5,250/ha per year for Inter-cropping) for General States.”1 नवंबर 2025 से 31 अक्टूबर 2026 तक ऑयल पाम के ताज़ा फल गुच्छों का ₹15,488 प्रति टन सुनिश्चित मूल्य: कंपनी कम दे तो अंतर सरकार देती है।
केवल उन राज्यों में जिन्होंने योजना का उद्योग भुगतान फ़ॉर्मूला अपनाने का समझौता (एमओयू) किया है; जहाँ राज्य अपना ऑयल पाम मूल्य आदेश रखता है, वहाँ व्यवहार्यता अंतर भुगतान नहीं होता (दिशानिर्देश धारा 29 V, पीडीएफ़ पृ. 21)। हर ऑयल पाम वर्ष के लिए नया व्यवहार्यता मूल्य घोषित होता है।
“Viability Price for OPY 2025–26 — ₹ 15,488 (Rupees Fifteen Thousand Four Hundred Eighty-Eight only) per ton of FFBs. 2. The above Viability Price shall be effective from 1st November, 2025 to 31st October, 2026.”1,500 वर्गमीटर के एक पान बरेजे की लागत ₹1,51,360 का 50% — ₹75,680 — विभिन्न निवेशों के रूप में।
राशि "विभिन्न निवेशों पर" देय है, ज़रूरी नहीं कि नकद मिले। 250–1,000 वर्गमीटर के छोटे बरेजे इसी पत्रक में दी गई अलग केंद्रीय आरकेवीवाई पान योजना में आते हैं।
“योजनान्तर्गत पान की खेती हेतु 1500 वर्गमी. में प्रति बरेजा निर्माण लागत की धनराशि रु. 1,51,360/- का 50 प्रतिशत धनराशि रु. 75,680/- विभिन्न निवेशों पर देय है।”नए बाग़ के प्रति हेक्टेयर ₹3,000 प्रति माह, अधिकतम 36 माह — प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹1,08,000 — केवल तब तक जब तक पौधे जीवित रहें।
यह पूरे 36 माह की राशि है; कम पौधे जीवित रहें या कम माह हों तो राशि घटेगी। पत्रक 27 जनपदों के नाम या प्रति किसान अधिकतम क्षेत्रफल नहीं बताता — जिला उद्यान अधिकारी से पूछें।
“(i) गंगा से आच्छादित 27 जनपदों में नवीन उद्यान रोपण हेतु रु. 3000/- प्रतिमाह प्रति हेक्टेयर की दर से पौधों की जीवितता के अनुरूप 36 माह तक लाभार्थी को कुल रु. 108000/- प्रोत्साहन स्वरूप अनुदान देय है।”निजी क्षेत्र में 1 हेक्टेयर की छोटी नर्सरी: ₹15 लाख इकाई लागत का 50%, अधिकतम ₹7.50 लाख, बैंक ऋण से जुड़ा और काम पूरा होने के बाद (बैक-एंडेड)।
"क्रेडिट लिंक्ड बैक एंडेड": नर्सरी के लिए बैंक ऋण लेना होगा, और काम की जाँच के बाद अनुदान उस ऋण में समायोजित होता है।
“(ii) निजी क्षेत्र में छोटी नर्सरी की स्थापना (1 हेक्टेयर) की इकाई लागत रु. 15 लाख का 50 प्रतिशत अधिकतम अनुदान रु. 7.50 लाख, क्रेडिट लिंक्ड बैक इण्डेड।”सरकार ₹15 और आपको मिले दाम के बीच का अंतर देती है (अधिकतम ₹9 प्रति नग), 50,000 नग तक — एक किसान को ₹3.5 लाख से ज़्यादा नहीं।
उत्पादन असल के हिसाब से, पर प्रति हेक्टेयर अधिकतम 10,000 नग गिना जाता है; कम ज़मीन वालों को उसी अनुपात में। दावे के लिए कम से कम 500 नारियल बेचने ज़रूरी (पैरा 4(ii)(b)–(c))। नारियल के लिए 1 अप्रैल 2023 से लागू।
“(a) Benefit of assured price shall be provided to the coconut sold to registered traders to the extend of difference between assured rate of Rs. 15/- and the price received per nut by the farmer. (b) Benefit shall be limited to 50,000 nuts per beneficiary for a maximum area of 5 ha. with 800 bearing coconut trees. … (e) The average minimum price fixed per coconut will not be less than Rs. 6/- per nut and the maximum assured price to be paid to an individual farmers shall not exceed Rs. 3.5 lakhs.”कच्चे काजू पर सरकार ₹150 प्रति किलो और आपके बिक्री दाम का अंतर देती है — अधिकतम ₹40 प्रति किलो — साल में 2,000 किलो तक।
कम से कम 50 किलो बेचना ज़रूरी; 5 हेक्टेयर से कम ज़मीन वालों को उसी अनुपात में (पैरा 4(iii)(b))। काजू के लिए 1 फ़रवरी 2023 से लागू।
“(a) Benefit of assured price of Rs. 150/- shall be provided to raw cashewnut sold by farmers to the extend of difference between Rs. 150/- kg. and the price received per kg. by the farmer. … (b) Benefit of the scheme shall be provided to maximum of 2000 kgs. per individual cultivator, considering max. area of 05 ha. … (c) The maximum limit of difference amount between the assured price of Rs. 150/- and the actual sale price below the assured price shall be Rs. 40/- kg.”स्वीकृत इकाई लागत का अधिकतम 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही, अधिकतम 45% बैंक ऋण; आपको कम से कम 10% लगाना होता है।
व्यक्ति 0.5 से 25 हेक्टेयर तक, एसएचजी और एफ़पीओ 1 से 50 हेक्टेयर तक ले सकते हैं (पैरा 5(xi))। बैंक के बकायेदार पात्र नहीं हैं, और जो घटक किसी दूसरी सरकारी योजना से मिल चुका है वह दोबारा नहीं मिलता (पैरा 5(vii), (xiii))। व्यक्ति के ₹1.60 लाख और एसएचजी के ₹10 लाख तक के ऋण पर कोई गिरवी नहीं (पैरा 7(b))। आवेदन फ़ॉर्म में अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र माँगा गया है (परिशिष्ट III.A)।
“Funding Pattern — The beneficiaries under the scheme will be eligible for subsidy from Government of Arunachal Pradesh as follows: Beneficiary — Minimum 10%; Subsidy from Govt of A.P — Maximum 45% — Available front-ended and to be adjusted proportionately against each instalment; Bank finance — Maximum 45%.”2026 के मौसम में आपका सी-ग्रेड सेब ₹12 प्रति किलो पर ख़रीदा जाता है।
इसी तारीख़ के एक अलग आदेश में प्रसंस्करण-योग्य आम ₹12 प्रति किलो पर 15.07.2026 से 31.08.2026 तक ख़रीदा गया; वह अवधि ख़त्म हो चुकी है।
“Market Intervention Scheme (MIS) will be implemented in collaboration with the Central Government for the procurement of 1,50,000 M.T of C-Grade Apple for which procurement price will be ₹ 12.00/- per kg.”सघन सेब बाग़ के लिए ₹12,00,000 प्रति एकड़ का 80% — एक एकड़ पर ₹9,60,000।
विभाग की तालिका पर तारीख़ नहीं है; यह राज्य बागवानी मिशन की वेबसाइट पर इस समय लगी राज सहायता की सूची है। 2026-27 के बजट में मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़ हैं। रोपण से पहले ज़िला उद्यान अधिकारी से मौजूदा लागत मानक की पुष्टि करें।
“मिशन एप्पल योजना — रू0 12 लाख प्रति एकड़ का 80% — अधिकतम सीमा 01 एकड़”बाग़ की घेरबाड़ की लागत का 50%, अधिकतम ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर।
सीमा ₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर है (₹33,300 से बढ़ाई गई); हम हिसाब ₹1,00,000 पर, यानी एक हेक्टेयर पर, रोकते हैं। स्थिति अज्ञात: तालिका पर तारीख़ नहीं है, और 2026-27 के बजट में “फ़सलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़” के ₹20 करोड़ में इस बागवानी योजना का नाम नहीं है।
“उद्यानों की घेरबाड़ की योजना — जंगली जानवरों के बचाव हेतु उद्यानों की घेरबाड़ हेतु राजसहायता। — 50% — घेरबाड़ हेतु 50 प्रतिशत राज सहायता के अन्तर्गत अधिकतम रू0 33,300/प्रति है0 की दर फेन्सिंग निर्माण के लिये अनुदान को बढ़ाकर रू0 1.00 लाख प्रति है0 किया गया”ताज़े फल या फूल हवाई कार्गो या सड़क से लद्दाख के बाहर भेजने में असल ख़र्च का 75%।
केवल विभाग में पंजीकृत किसानों, उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए।
“75% subsidy on actual cost for freighting/transporting fresh fruit crop & fresh flower outside UT through Air cargo or by road (provision for registered farmers/entrepreneurs/SHG only)”नया बाग़ लगाने पर 75%, अधिकतम 5 कनाल, पृष्ठ पर छपी प्रति कनाल दर से।
“Development of Individual Orchard: 75% subsidy @ Rs. 0.6825 lakhs per Kanal per beneficiary — Orchard size maximum of 5 kanals, to be administered on pro-rata basis”फल, फूल, सब्ज़ी, औषधीय और मसाले के पौधे मुफ़्त, ₹2,000 तक।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। ज़िला पंचायत (क्रम 1–7) और ग्राम पंचायतें (जैविक खाद) चलाती हैं। दमण ज़िला पंचायत के सितंबर 2023 के परिपत्र में 2023-24 के लिए यही दरें दी गई थीं (फ़ॉर्म 25.09.2023 तक, ज़मीन के 1/14 और आधार के साथ, पहले आओ पहले पाओ); 2025-26 या 2026-27 की कोई सूचना नहीं मिली।
“Distribution of Plants ( Horticultural, floriculture, Vegetables, Medicinal, Species — 100% cost limited to Rs. 2000/-.”₹80,000 प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का 50% — यानी ₹40,000 प्रति हेक्टेयर — 0.1 से 2 हेक्टेयर गेंदा पर।
“एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तथा न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर तक योजना का लाभ मिल सकता है। योजना की इकाई दर ₹80000 प्रति हेक्टेयर है जिस पर अनुदान की राशि 50% है।”गेंदा ढोने के मालवाहक वाहन की कीमत का 50%, अधिकतम ₹3,25,000 (₹6,50,000 अनुमानित लागत का 50%)।
केवल इस योजना में गेंदा की खेती करने वाले किसानों के लिए।
“मालवाहक वाहन (Carriage Vehicle) का अनुमानित लागत 650000 रूपये का 50 प्रतिशत 325000 रुपया या वाहन का वास्तविक मूल्य का 50 प्रतिशत, दोनों में से जो कम हो पर अनुदान देय होगा।”बीज सहित ₹1,25,150 प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का 75% — यानी ₹93,863 प्रति हेक्टेयर — 0.1 से 2 हेक्टेयर तक।
केवल पृष्ठ पर दिए 30 ज़िलों में: औरंगाबाद, बाँका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गयाजी, गोपालगंज, कैमूर, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मधेपुरा, मुज़फ़्फ़रपुर, मुंगेर, नालंदा, नवादा, पटना, पूर्णियाँ, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चंपारण। न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हे.)। पृष्ठ पर ₹93,863 प्रति हेक्टेयर छपा है; हमारी गणना नीचे की ओर पूर्णांक करके ₹93,862 दिखाती है।
“प्रति हेक्टेयर अनुमानित इकाई लागत बीज मूल्य सहित 1,25,150.00 रूपये मात्र पर 75 प्रतिशत अर्थात् 93,863.00 रूपये मात्र प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दो किस्तों में 75:25 के अनुपात में दिया जायेगा। प्रथम किस्त के रूप में 70,397.00 रूपये इनपुट एवं उपादान क्रय के लिए तथा द्वितीय किस्त के रूप में 23,466.00 रूपये प्रति हेक्टेयर आलू रोपाई उपरांत स्थल निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन के पश्चात् दी जायेगी।”लीफ कलेक्शन शेड की वास्तविक कीमत का 50%, अधिकतम ₹37,500, कम से कम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) में चाय उगाने वाले किसानों के लिए।
मौजूदा चाय बागान के प्रबंधन के लिए। नए चाय रोपण की प्रति हेक्टेयर सहायता पृष्ठ पर नहीं छपी है, इसलिए उसकी कोई राशि नहीं दिखाई गई है। नए रोपण की सहायता लेने वाले किसान अन्य बागवानी अवयवों का लाभ नहीं ले सकते।
“लीफ कलेक्शन शेड:- इस मशीन को वैसे इच्छुक कृषक, जो न्यूनतम 5 एकड़(2 हेक्टेयर) में चाय की खेती कर रहे हों को अनुदानित दर पर उपलब्ध करायी जायेगी। लीफ कलेक्शन शेड हेतु वास्तविक मूल्य का 50 प्रतिशत/अधिकतम 37500.00 (सैंतीस हजार पाँच सौ) रूपये दोनों में से जो कम होगा, अनुदान देय होगा।”नए बाग़ के लिए गड्ढे, कलम, रोपाई, पौध संरक्षण, खाली जगह भरना और ड्रिप का 100% खर्च, फ़सल-वार लागत मानकों के भीतर, तीन साल में।
कोंकण में 10 हेक्टेयर और बाकी महाराष्ट्र में 6 हेक्टेयर तक, एक से अधिक फल भी (धारा 7.1); कम से कम ज़मीन कोंकण में 10 गुंठा और बाकी जगह 20 गुंठा (धारा 8.7)। फल: आम, अनार, काजू, अमरूद, सीताफल, आँवला, इमली, जामुन, कोकम, कटहल, कागज़ी नींबू, चीकू, संतरा, मोसंबी, अंजीर और नारियल के पौधे (धारा 5)। जो किसान मनरेगा में पात्र हैं (जॉब कार्ड वाले लघु-सीमांत, अनुसूचित जाति/जनजाति), उन्हें पहले 2 हेक्टेयर तक मनरेगा से मदद दी जाती है (धारा 7.3, 8.3)। ड्रिप का पैसा पहले पीएमकेएसवाई प्रति बूँद अधिक फसल और राज्य की ड्रिप योजनाओं से, और बाकी ही इस योजना से (धारा 9.4)। दूसरे और तीसरे साल की राशि के लिए 80% और 90% पौधे जीवित होने चाहिए (धारा 11.2)। असली खर्च मानक से कम हो तो असली खर्च ही मिलता है (धारा 11.4)।
“सदर तक्त्यातील ब मधील अ.क्र. १ ते ५ येथील बाबींकरिता शासनातर्फे शेतकऱ्यांना १००% अनुदान देण्यात येईल. (ब. शासन अनुदानीत बाबी / कामे: १) खड्डे खोदणे २) कलमे लागवड करणे (नारळाच्या बाबतीत रोपे) ३) पीक संरक्षण ४) नांग्या भरणे ५) ठिबक सिंचनाद्वारे पाणी देणे)”लगाई गई कलमी इमली के प्रति हेक्टेयर ₹20,000।
भाषण में प्रति किसान अधिकतम रकबा नहीं छपा, और यह भी नहीं कि ₹20,000 एक बार में मिलेंगे या किस्तों में।
“high-yielding grafted tamarind, which can withstand drought and thrive in areas receiving an annual rainfall of 500 to 700 mm, will be promoted for area expansion in an extent of 1,250 acres over five years with a total outlay of Rs.1 crore, and financial assistance of Rs.20,000 per hectare.”आपके नारियल बाग़ के लिए एपर्टोक्राइसा शिकारी कीट और कोकोकॉन सूक्ष्मजीव मिश्रण की लागत का 75%।
“Integrated Pest and Disease Management techniques along with sustainable biological control methods will be widely promoted among the coconut farmers for which the predatory insect Apertochrysa and the Cococon microbial mixture will be provided to farmers at 75 per cent subsidy covering an area of 1,350 acres, with an allocation of Rs.1 crore from the state fund.”नए शहतूत बाग़ के प्रति एकड़ ₹45,000, 2 एकड़ (₹90,000) तक।
“Development of Mulberry garden — 1.00 Acre 45,000/- ; 2.00 Acre 90,000/-”900–1,200 वर्ग फ़ुट के रेशम कीट पालन शेड के लिए ₹2,43,750 तक, या 1,200–1,500 वर्ग फ़ुट के लिए ₹3,37,500 तक।
“Construction of Silkworm Rearing Shed — 900-1200 Sq.ft 2,43,750/- ; 1200-1500 Sq.ft 3,37,500/-”कीटाणुनाशक के लिए प्रति लाभार्थी ₹3,750।
“Disinfectants — Per beneficiary 3,750/-”शहतूत पौध नर्सरी लगाने के लिए ₹1,12,500 प्रति एकड़।
नर्सरी के अधिकतम रकबे की सीमा नहीं छपी।
“Assistance is provided to farmers for establishing mulberry nurseries to produce and supply quality mulberry saplings to farmers taking up new mulberry cultivation. A subsidy of Rs.1,12,500/- per acre is provided for the establishment of a mulberry nursery.”एक चॉकी (छोटे रेशम कीट) पालन केंद्र के लिए किसान या उद्यमी को ₹9,75,000।
“With a view to ensuring the continuous supply of quality chawkie worms to silk farmers, assistance is provided to farmers and entrepreneurs for establishing Chawkie Rearing Centres. A scheme assistance of Rs.9,75,000/- is provided for the establishment of one Chawkie Rearing Centre.”छोटे और सीमांत किसानों को अधिक उपज वाले शहतूत पौधे: ₹14,000 का 75% (₹10,500), अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% (₹12,600)।
केवल छोटे और सीमांत किसान। पृष्ठ यह नहीं बताता कि ₹14,000 प्रति एकड़ है या नहीं।
“Supply of High Yielding Variety saplings — Farmer Type: Small and margi[nal]; Farmer Category: General (75%) SC (90%) ST (90%); Unit Cost: Rs 14000; DoS AP Share: General (Rs 10500) SC (Rs 12600) ST (Rs 12600)”अनुसूचित जाति/जनजाति किसान: रेशम कीट पालन शेड का 90% — 1,000 वर्ग फ़ुट टाइप-I शेड पर ₹3,60,000 या 600 वर्ग फ़ुट टाइप-II शेड पर ₹2,25,000।
पृष्ठ पर इकाई लागत और विभाग का हिस्सा छपा है; बाकी किसान देता है। यह बिना तारीख़ का वेब पृष्ठ है।
“Construction of Rearing Sheds — Farmer Category: SC (90%) ST (90%); Unit Cost: Type - I (Rs 4,00,000) Type-II (Rs 2,50,000); DoS AP Share: Type - I (Rs 3,60,000) Type - II (Rs 2,25,000); Type Of Shed: Type - I (1000 sft) Type-II (600 sft)”हर पालन शेड के लिए साल में ₹5,000 के कीटाणुनाशक: छोटे-सीमांत किसानों को 75% (₹3,750), अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% (₹4,500)।
“For disinfecting one rearing shed along with appliances an amount of Rs.5,000/- per year for 3-5 crops the scheme is being implemented with 75% assistance (General) as per CSB norms for small and marginal farmers and 90% assistance for SC & ST farmers.”बाइवोल्टाइन चॉकी कीट: प्रति 100 DFL ₹2,000 का 50% (₹1,000), अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% (₹1,800)।
पाठ में 90% अनुसूचित जाति के लिए लिखा है; सारांश तालिका में जनजाति (90%) भी है। आदिवासी तसर किसानों के लिए तसर DFL की अलग दर है (यहाँ नहीं जोड़ी)।
“The scheme is under implementation with a unit cost of unit cost of Rs.2000/- per 100 DFLs with 50% assistance to General farmers and 90% assistance to SC farmers”आपके उगाए बाइवोल्टाइन रीलिंग कोकून पर ₹50 प्रति किलो।
उन्नत क्रॉस-ब्रीड कोकून पर अनंतपुरमु और चित्तूर में ₹10/किलो और बाकी ज़िलों में ₹20/किलो; तसर कोकून पर ₹1,000 प्रति 1,000 कोकून (यहाँ नहीं जोड़े)।
“an incentive of Rs.50/- per kg for BV reeling cocoons and Rs.10/- per kg (for Anantapuramu and Chittor dists) and Rs.20/- per kg (for rest of the districts in the State) for Improved Cross breed Cocoons is provided under the scheme with 100% assistance.”अनुसूचित जाति/जनजाति किसान: वृक्ष शहतूत पर प्रति एकड़ ₹50,000 का 90% — ₹45,000 प्रति एकड़।
“‘Assistance for Tree Mulberry plantations’ is being provided for SC & ST farmers with 90% assistance the Central Silk Board approved unit cost of Rs.0.50 lakhs per acre.”अनुसूचित जाति/जनजाति किसान: पालन शेड को ठंडा रखने की व्यवस्था (वेंटिलेटर, पंखे, फॉगर) के ₹50,000 का 90% — ₹45,000।
“the scheme is now being implemented under State Development Schemes with a unit cost of Rs.0.50 lakhs for SC & ST farmers with 90% assistance.”हर फल फ़सल के लिए प्रति कलम/पौधा तय राशि (जैसे आम ₹100, अमरूद ₹80, अनार ₹30, खजूर ₹1,750), या असली ख़र्च कम हो तो वह, 500 से 2,600 पौधों पर।
एक ही ज़मीन पर एक से ज़्यादा फल फ़सल लगानी होगी (शर्त 13)। तालिका में फ़सल के अनुसार प्रति हेक्टेयर अधिकतम पौधे भी तय हैं (जैसे नारियल 200, आम 1,600); उसी घनत्व तक के पौधे गिनें। HRT-2 सभी किसानों के लिए 0.20–4 हेक्टेयर; HRT-3 (अनुसूचित जनजाति और वन अधिकार पत्रधारी, आदिवासी ज़िले) और HRT-4 (अनुसूचित जाति) 0.10–4 हेक्टेयर (परिशिष्ट-1, 1–2, 14)। असली ख़र्च की सीमा लगाने के लिए पौधों की लागत परियोजना लागत में भरें।
“પાકવાર નિયત થયેલ પ્રતિ રોપા/કલમ સહાય અથવા પ્રતિ કલમ/ ટીસ્યુ રોપા દીઠ ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછું હોય તે ધ્યાને લઇ વાવેતર કરેલ રોપા/કલમો મુજબ સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”रोपाई ख़र्च (इनपुट और मज़दूरी) के लिए ₹10,000 प्रति हेक्टेयर, अनुपात में, अधिकतम 4 हेक्टेयर।
“વાવેતર ખર્ચ (ઈનપુટ/લેબર) માટે પ્રતિ હેક્ટર રૂ.૧૦,૦૦૦/- મુજબ પ્રો રેટા બેઝ પ્રમાણે સહાય મળવા પાત્ર રહેશે.”अदरक या हल्दी के प्रति हेक्टेयर (इकाई लागत ₹1,00,000): सामान्य बड़े किसान 50%, सामान्य लघु/सीमांत किसान 65%, अनुसूचित जनजाति और जाति के किसान 75%, अधिकतम 2 हेक्टेयर।
₹1,00,000 प्रति हेक्टेयर में बीज ₹60,000, इनपुट ₹20,000 और मज़दूरी/अन्य ₹20,000 गिने जाते हैं; इस अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम को लिया जाता है (परिशिष्ट-2; परिशिष्ट-1, 13)। HRT-2 में कम से कम 0.20 हेक्टेयर; HRT-3 (अनुसूचित जनजाति व वन अधिकार पत्रधारी, आदिवासी ज़िले) और HRT-4 (अनुसूचित जाति) में कम से कम 0.10 हेक्टेयर; प्रति खाता अधिकतम 2 हेक्टेयर (परिशिष्ट-1, 14)।
“એકમ ખર્ચ:-૧,૦૦,૦૦૦/- પ્રતિ હે • HRT-૨ યોજના હેઠળ સામાન્ય જાતિના મોટા ખેડુતને ખર્ચના ૫૦% અથવા મહત્તમ રૂ.૫૦,૦૦૦/- પ્રતિ હે. સહાય તેમજ સામાન્ય જાતિના નાના/સિમાંત ખેડૂતને ખર્ચના ૬૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૬૫,૦૦૦/- પ્રતિ હે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે. • HRT-૩ યોજના હેઠળ અનુસુચિત જનજાતિના ખેડુતને અને HRT-4 યોજના હેઠળ અનુસુચિત જાતિના ખેડુતને ખર્ચના ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૭૫,૦૦૦/- પ્રતિ હે. સહાય મળવાપાત્ર રહેશે”फ़ील्ड-कवर ढाँचे की लागत का 40%, ₹5,00,000 प्रति हेक्टेयर तक गिनी जाती है (अधिकतम ₹2,00,000 प्रति हेक्टेयर), 0.20 से 1 हेक्टेयर तक अनुपात में।
प्रति खाता/लाभार्थी अधिकतम 1 हेक्टेयर, कम से कम 0.20 हेक्टेयर; अनुपात में भुगतान (परिशिष्ट-2 कॉलम 4–5)। सभी ज़िलों के सभी किसानों के लिए (परिशिष्ट-1, 1–2)। तय अवधि में किसी और योजना से इसी काम की सहायता ली हो तो नहीं (परिशिष्ट-1, 4)।
“એકમ ખર્ચ:-રૂ.૫,૦૦,૦૦૦/- એકમ/સ્ટ્રકચર (૧.૦૦ હેક્ટર વિસ્તાર માટે) • એકમ ખર્ચના ૪૦% અથવા મહત્તમ રૂ.૨,૦૦,૦૦૦/- પ્રતિ હે. સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”बहुवर्षीय फल फ़सलों की कलम, टिश्यू-कल्चर पौधे या बीज से तैयार पौधों पर ख़र्च का अधिकतम 90%, फ़सलवार प्रति हेक्टेयर लागत तक (आम ₹32,000, चीकू ₹22,000, अनार ₹20,000 …), 4 हेक्टेयर तक; केवल ₹250 तक क़ीमत वाले पौधों पर।
कलम NHB-मान्य, कृषि विश्वविद्यालय या विभाग की नर्सरी से; टिश्यू-कल्चर पौधे DBT-मान्य या सरकारी लैब (GNFC, GSFC, विश्वविद्यालय) से। प्रति खाता अधिकतम 4 हेक्टेयर। HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“બાગાયતી પાકોના વાવેતર માટે પ્લાંટીંગ મટીરીયલમાં ૯૦% સહાય આપવાનો કાર્યક્રમ … પાક વાર નિયત કરવામાં આવેલ બહુવર્ષાયુ ફળપાકની કલમ/ ટીસ્યુકલ્ચર (રોપા) / નાળીયેરી તથા અન્ય ગૌણ ફળપાક માટે બીજથી તૈયાર કરવામાં આવેલ રોપા ઉપર થયેલ ખર્ચના મહત્તમ ૯૦% મુજબ સહાય. જે રોપાની કિંમત રૂ.૨૫૦/- સુધી હશે તેવા કિસ્સામાં જ સહાય મળવાપાત્ર થશે.”खजूर (टिश्यू-कल्चर पौधे): पौधों की लागत का 50%, ₹4,37,500 प्रति हेक्टेयर (₹3,500 प्रति पौधा) तक गिनी — अधिकतम ₹2,18,750 प्रति हेक्टेयर — 0.20 से 2 हेक्टेयर पर।
आयातित टिश्यू-कल्चर पौधों (देश में कमी होने पर) पर अधिकतम ₹1,750 प्रति पौधा। प्रति खाता कम से कम 0.20 और अधिकतम 2 हेक्टेयर। HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“ટીસ્યુકલ્ચર છોડ દ્વારા ખારેકની ખેતીમાં વાવેતર વિસ્તાર વધારવા સહાય આપવાનો કાર્યક્રમ • પ્લાંટીંગ મટીરીયલ માટે સહાય • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૪,૩૭,૫૦૦/હે. (પ્રતિ રોપ- રૂ. ૩૫૦૦/-) • સહાય:- ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૨,૧૮,૭૫૦/હે. ની મર્યાદામાં સહાય.”खजूर खेती ख़र्च: ₹40,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (अधिकतम ₹20,000/हे.), पहले साल 60% और 75% पौधे ज़िंदा रहें तो दूसरे साल 40%।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“ખેતી ખર્ચ માટે સહાય. યુનિટ કોસ્ટ-રૂ. ૪૦,૦૦૦/હે. • સહાય- ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૨૦,૦૦૦/- પ્રતિ હેક્ટરની મર્યાદામાં સહાય જેમાં પ્રથમ વર્ષે મળવાપાત્ર રકમના ૬૦% સહાય તેમજ બીજા વર્ષે જો ૭૫ % રોપા જીવંત હોય તો જ બાકીના ૪૦% સહાય ચૂકવવાની રહેશે.”ड्रैगन फ्रूट (कमलम): ₹6,00,000 प्रति हेक्टेयर का 50%, अधिकतम ₹3,00,000 प्रति हेक्टेयर, 0.20 से 1 हेक्टेयर पर — पहले साल खंभे और पौधों पर ₹2,44,420/हे. तक और दूसरे साल रिंग या ट्रेलिस पर ₹55,580/हे. तक।
यह संकल्प सामान्य जाति के किसानों की दर छापता है; लघु, सीमांत और महिला किसानों को प्राथमिकता। जीवन में एक बार, प्रति लाभार्थी 0.20–1 हेक्टेयर; भुगतान से पहले संयुक्त स्थल जाँच। पहले साल 1,111 सीमेंट खंभे (₹3,33,300) और 4,444 पौधे (₹1,55,540); दूसरे साल 1,111 हेड रिंग या 400 किलो ट्रेलिस तार (₹1,11,160)।
“કમલમ ફળ (ડ્રેગનફ્રુટ)ના વાવેતર માટે સહાયનો કાર્યક્રમ • યુનિટ કોસ્ટ:- રૂ. ૬,૦૦,૦૦૦/હે • સહાય: સામાન્ય જાતિના ખેડુતને ૫૦% અથવા મહત્તમ રૂ. ૩,૦૦,૦૦૦/- બે માંથી જે ઓછુ હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”सघन आम बाग़: प्रति कलम ₹100 तक (या असली क़ीमत, जो कम हो), अधिकतम ₹40,000 प्रति हेक्टेयर, कम से कम 400 कलम प्रति हेक्टेयर, 0.20 से 2 हेक्टेयर पर।
₹100 प्रति कलम, ₹40,000 प्रति हेक्टेयर (400 कलम प्रति हेक्टेयर) की सीमा तक, अधिकतम 2 हेक्टेयर, यानी अधिकतम 800 कलम। कलम NHB-मान्य, विश्वविद्यालय या विभाग की नर्सरी से; बाक़ी रोपण ख़र्च किसान का। भुगतान से पहले संयुक्त स्थल जाँच।
“આંબા, જામફળ ફળપાકમાં ઘનિષ્ટ ખેતી પધ્ધતિ અપનાવી ક્રોપ ડાઇવર્સીફીકેશન • આંબા પાકમાં કલમ દીઠ મહત્તમ રૂ. ૧૦૦/- અથવા પ્રતિ કલમ ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછુ હોય તે ધ્યાને લઇને મહત્તમ રૂ. ૦.૪૦ લાખ પ્રતિ હેક્ટર સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”सघन अमरूद बाग़: प्रति कलम या टिश्यू पौधा ₹80 तक, अधिकतम ₹44,000 प्रति हेक्टेयर, कम से कम 550 पौधे प्रति हेक्टेयर, 0.20 से 2 हेक्टेयर पर।
₹80 प्रति पौधा, ₹44,000 प्रति हेक्टेयर (550 पौधे) तक, अधिकतम 2 हेक्टेयर, यानी अधिकतम 1,100 पौधे।
“જામફળ પાકમાં કલમ/ ટીસ્યુ રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ. ૮૦/- અથવા પ્રતિ કલમ/ ટીસ્યુ રોપા દીઠ ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછુ હોય તે ધ્યાને લઇને મહત્તમ રૂ. ૦.૪૪ લાખ પ્રતિ હેક્ટર સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”सघन आम या अमरूद बाग़ के पहले साल अंतरफ़सल: पौध सामग्री की लागत का 50%, अधिकतम ₹10,000 (आम) या ₹6,000 (अमरूद) प्रति हेक्टेयर।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“પ્રથમ વર્ષે આંતર પાકમાં અન્ય બાગાયતી પાકના પ્લાન્ટીંગ મટીરીયલના ખર્ચના ૫૦ ટકા લેખે મહત્તમ રૂ. ૦.૧૦ લાખ પ્રતિ હેક્ટર … (જામફળ) મહત્તમ રૂ. ૦.૦૬ લાખ પ્રતિ હેક્ટર”केले के टिश्यू-कल्चर पौधे: ₹5 प्रति पौधा, अधिकतम ₹15,000 प्रति हेक्टेयर (कम से कम 3,000 पौधे प्रति हेक्टेयर), 0.20 से 1 हेक्टेयर पर, हर दो साल में एक बार।
केवल उन किसानों के लिए जिनकी विभाग की दूसरी केला योजनाओं में क्षेत्र सीमा पूरी हो चुकी है। पौधे DBT-मान्य या सरकारी टिश्यू लैब से।
“કેળ પાકના ટીસ્યુકલ્ચર રોપ ઉપર સહાય • કેળપાકના ટીસ્યુકલ્ચર રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ.૫/- સહાય ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૧૫ લાખ પ્રતિ હેક્ટર બે માંથી જે ઓછુ હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”पपीता: ₹5 प्रति पौधा, अधिकतम ₹15,000 प्रति हेक्टेयर (कम से कम 3,000 पौधे प्रति हेक्टेयर), 0.20 से 1 हेक्टेयर पर, हर दो साल में एक बार।
केवल उन किसानों के लिए जिनकी विभाग की दूसरी योजनाओं में पपीते की क्षेत्र सीमा पूरी हो चुकी है। पौधे NHB-मान्य, विश्वविद्यालय या विभाग की नर्सरी से (मान्य नर्सरी पर्याप्त न होने तक अपनी पसंद की अच्छी नर्सरी से); बीज उत्पादक के अधिकृत विक्रेता से।
“પપૈયા પાકમાં ફળ પાક ઉત્પાદકતા વધારવાનો કાર્યક્રમ • પપૈયા પાકના રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ.૫/- સહાય ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૧૫ લાખ પ્રતિ હેક્ટર બે માંથી જે ઓછુ હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”नारियल रोपण: पौध सामग्री और इनपुट पर ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (अधिकतम ₹37,500/हे.), 4 हेक्टेयर तक, दो किस्तों (75:25) में।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“નાળીયેરી વાવેતર વિસ્તાર સહાય • યુનિટ કોસ્ટ રૂ ૦.૫૦ લાખ/ હે. • ખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ ૦.૩૭૫ લાખ/હે.”नारियल में पोषण और कीट प्रबंधन: ₹10,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹5,000/हे.), 0.20 से 4 हेक्टेयर, गुजरात एग्रो / गुजकोमासोल के विक्रेता से कम दाम पर इनपुट के रूप में।
स्रोत पर सहायता: विक्रेता क़ीमत में से घटा देता है।
“નાળીયેરીમાં સંકલિત પોષણ /જીવાત વ્યવસ્થાપનને પ્રોત્સાહન • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ.૧૦૦૦૦ /હે • ખર્ચના ૫૦%, (મહત્તમ રૂ. ૫૦૦૦/હે.)”पुराने बाग़ों का नवीनीकरण (30 साल से पुराना आम, 20 साल से पुराना नींबू): छँटाई, टॉप-वर्किंग, खाली जगह भराई और कीट/पोषण प्रबंधन की लागत का 50%, ₹80,000 (आम) या ₹50,000 (नींबू) प्रति हेक्टेयर तक, 0.20 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
आम इकाई: छँटाई/कटाई/टॉप-वर्किंग ₹40,000, खाली जगह भराई ₹20,000 (200 कलम/हे. तक), एकीकृत कीट व पोषण प्रबंधन ₹20,000। नींबू इकाई: ₹20,000, ₹10,000 और ₹20,000। औज़ार ISO/BIS/ISI प्रमाणित; इनपुट गुजरात एग्रो/गुजकोमासोल के अधिकृत विक्रेता से।
“ફળપાકોના જુના બગીચાઓને નવસર્જન કરવા … આંબા પાક એકમ ખર્ચ – મહત્તમ રૂ. ૮૦,૦૦૦/હેક્ટર … ખર્ચના ૫૦% અથવા મહત્તમ રૂ. ૪૦,૦૦૦/હેક્ટર … લીંબુ પાક એકમ ખર્ચ – મહત્તમ રૂ. ૫૦,૦૦૦/હેક્ટર … ખર્ચના ૫૦% અથવા મહત્તમ રૂ. ૨૫,૦૦૦/હેક્ટર”औषधीय और सुगंधित फ़सलें: लागत का 75%, अधिकतम ₹11,250 प्रति हेक्टेयर, 0.20 से 4 हेक्टेयर पर।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“ઔષધિય / સુગંધિત પાકોના વાવેતર માટે સહાય • ખર્ચના ૭૫ ટકા અથવા રૂ.૧૧,૨૫૦/હેક્ટર ની મર્યાદા તે બે માંથી જે ઓછી હોય તેટલી સહાય મળવાપાત્ર થશે.”सहजन के पौधे: ₹8,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹4,000/हे.), 1 हेक्टेयर तक।
पौधे NHB-मान्य, विश्वविद्यालय या विभाग की नर्सरी से, या मान्य नर्सरी पर्याप्त होने तक अपनी पसंद की अच्छी नर्सरी से।
“સરગવાની ખેતીમાં સહાય આપવાનો કાર્યક્રમ • પ્લાંટીંગ મટીરીયલ માટે સહાય • યુનિટ કોસ્ટ-રૂ.૮૦૦૦/ હેક્ટર • સહાય:- ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૪૦૦૦/- પ્રતિ હેક્ટરની મર્યાદામાં સહાય.”सहजन खेती ख़र्च: ₹17,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹8,500/हे.), 1 हेक्टेयर तक।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“ખેતી ખર્ચ માટે સહાય. યુનિટ કોસ્ટ-રૂ. ૧૭,૦૦૦ /હેક્ટર સહાય- ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૮૫૦૦/- પ્રતિ હેક્ટરની મર્યાદામાં સહાય”बेल वाली सब्ज़ी (परवल, टिंडा, ककोड़ा …) टिश्यू-कल्चर या कलम वाले पौधों से: पौधों की लागत का 50%, ₹60,000 प्रति हेक्टेयर तक (₹30,000/हे.), 1 हेक्टेयर तक।
टिश्यू-कल्चर पौधे DBT-मान्य या सरकारी लैब (GSFC, GNFC, विश्वविद्यालय) से; NHB-मान्य नर्सरी के कलम वाले पौधे भी मान्य।
“વેલાવાળા શાકભાજીના ટીસ્યુકલ્ચરથી ઉત્પન્ન થયેલ પ્લાંટીંગ મટીરીયલ/ગ્રાફ્ટીંગ (છોડ/રોપા) દ્વારા વાવેતર માટે સહાય • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૬૦,૦૦૦/હેક્ટર • સહાય:- પ્લાંટીંગ મટીરીયલ (છોડ/રોપા)ના ખર્ચના ૫૦ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ.૩૦,૦૦૦ પ્રતિ હેક્ટરની મર્યાદામાં સહાય.”बागवानी फ़सलों में पानी में घुलने वाला उर्वरक: ₹20,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹10,000/हे.), 1 हेक्टेयर तक।
उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत मान्य, सरकारी/अर्ध-सरकारी/सहकारी संस्था का बनाया उर्वरक, उसके अधिकृत विक्रेता से।
“બાગાયતી પાકોમાં વોટર સોલ્યુબલ ખાતરમાં સહાય • યુનિટ કોસ્ટ – રૂ. ૨૦૦૦૦/ હેક્ટર • સહાય- સામાન્ય ખેડુત માટે ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૧૦૦૦૦/- પ્રતિ હેક્ટરની મર્યાદામાં સહાય.”गुजरात राज्य बीज निगम से जीरा, सौंफ़, धनिया, सोआ और अजवाइन का प्रमाणित बीज: बिक्री मूल्य पर 75% तक छूट काउंटर पर ही, 0.10 से 1 हेक्टेयर, हर साल।
स्रोत पर सहायता: गुजरात राज्य बीज निगम या उसका अधिकृत विक्रेता क़ीमत से घटा देता है।
“મસાલા પાકોના સર્ટીફાઇડ બિયારણ ઉપર સહાય યોજના … આ વેચાણ ભાવ ધ્યાને લઇ મસાલા પાકોના બિયારણની ખરીદી પર મહત્તમ ૭૫% સુધી એટસોર્સ સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”केवल देवीपूजक समाज के किसान: तरबूज़, ख़रबूज़ा या सब्ज़ी बीज और सूक्ष्म पोषक तत्व किट, ₹5,000 प्रति एकड़ का 90% (₹4,500/एकड़), 2 एकड़ तक, साल में एक बार।
केवल देवीपूजक किसान जो मानसून के बाद नदी के पाट, तालाब के तल या पट्टे/अपनी ज़मीन पर पारंपरिक खेती करते हैं। इस समाज के लिए लेजर में कोई वर्ग नहीं है, इसलिए कैलकुलेटर इसकी जाँच नहीं कर सकता — इसी समाज के हों तभी आवेदन करें। इनपुट गुजरात एग्रो के अधिकृत विक्रेता से।
“દેવીપૂજક ખેડુતોને તરબુચ / ટેટી /શાકભાજી /માઇક્રોન્યુટ્રીયન્ટ બિયારણ કીટ • યુનિટ કોસ્ટ : રૂ. ૫૦૦૦/કીટ્સ/એકર • ખર્ચના ૯૦ % અથવા રૂ. ૪૫૦૦/એકર, બે માંથી જે ઓછુ હોય તે મુજબ સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”बागवानी विभाग की नर्सरी और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस से ख़रीदी कलम, पौधे और पौध: तय क़ीमत पर 50% छूट, अधिकतम ₹5,000, साल में एक बार।
सामान्य जाति के किसानों के लिए छपी। गुजरात हॉर्टिकल्चर नॉलेज सोसाइटी की नर्सरियों पर स्रोत पर छूट।
“સામાન્ય જાતિના ખેડૂતોને બાગાયત ખાતાની નર્સરી અને સેન્ટર ઓફ એક્સેલન્સ ખાતે ઉત્પાદીત પ્લાન્ટીંગ મટીરીયલ્સમાં એટસોર્સ સહાય આપવાનો કાર્યક્રમ. • નર્સરી/સી.ઓ.ઇ.ખાતે ઉત્પાદીત થતા કલમ/રોપા/ધરુ/અન્ય બાગાયતી પ્લાન્ટીંગ મટીરીયલ્સમાં નક્કી કરેલ ભાવના ૫૦% અથવા મહત્તમ રૂ.૫૦૦૦/- ની મર્યાદામાં એટસોર્સ સહાય ચુકવવાની રહેશે.”टमाटर, मिर्च और अन्य सब्ज़ियों के लिए लकड़ी या बाँस के खंभों और तार का कच्चा मंडप: ₹52,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹26,000/हे.), 2 हेक्टेयर तक।
0.10 से 2 हेक्टेयर, प्रति खाता जीवन में एक बार। देवीपूजक लाभार्थियों को 90% (यहाँ शामिल नहीं: लेजर में उनका वर्ग नहीं)। अनुसूचित जाति/जनजाति के अलावा जो किसान 1 हेक्टेयर से ज़्यादा पर सहायता लें, उन्हें सूक्ष्म सिंचाई अपनानी होगी (परिशिष्ट-1, 23)।
“કાચા મંડપ ટામેટા/મરચાં અને અન્ય શાકભાજીના ટ્રેલીઝ • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૫૨૦૦૦/હે. • સામાન્ય ખેડુતને ખર્ચના ૫૦ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ. ૨૬,૦૦૦/હે.”बेल वाली सब्ज़ियों के लिए अर्ध-पक्का मंडप (किनारे पर सीमेंट/लोहे के खंभे, बीच में लकड़ी/बाँस): ₹80,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹40,000/हे.), 2 हेक्टेयर तक।
0.10 से 2 हेक्टेयर, प्रति खाता जीवन में एक बार। देवीपूजक लाभार्थियों को 90% (यहाँ शामिल नहीं: लेजर में उनका वर्ग नहीं)। अनुसूचित जाति/जनजाति के अलावा जो किसान 1 हेक्टेयर से ज़्यादा पर सहायता लें, उन्हें सूक्ष्म सिंचाई अपनानी होगी (परिशिष्ट-1, 23)।
“અર્ધ પાકા મંડપ- વેલાવાળા શાકભાજીના પેડલ • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૮૦,૦૦૦ / હે. • સામાન્ય ખેડુતને ખર્ચના ૫૦ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ. ૪૦,૦૦૦/હેક્ટર”बेल वाली सब्ज़ियों के लिए पक्का मंडप (सीमेंट/लोहे के खंभे, GI तार): ₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹80,000/हे.), 2 हेक्टेयर तक।
0.10 से 2 हेक्टेयर, प्रति खाता जीवन में एक बार। देवीपूजक लाभार्थियों को 90% (यहाँ शामिल नहीं: लेजर में उनका वर्ग नहीं)। अनुसूचित जाति/जनजाति के अलावा जो किसान 1 हेक्टेयर से ज़्यादा पर सहायता लें, उन्हें सूक्ष्म सिंचाई अपनानी होगी (परिशिष्ट-1, 23)।
“પાકા મંડપ- વેલાવાળા શાકભાજીના પેડલ • યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૧૬૦૦૦૦/હે. • સામાન્ય ખેડુતને ખર્ચના ૫૦ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ. ૮૦,૦૦૦/હેક્ટર”फल, सब्ज़ी, फूल और पौधों के समुद्री निर्यात का भाड़ा: भाड़ा बिल का 25%, प्रति बिल अधिकतम ₹50,000 और सालाना ₹2.50 लाख, पाँच साल तक।
निर्यातक के रूप में मान्य किसान, निजी संस्था, एफ़पीओ/एफ़पीसी और सहकारी संस्था के लिए। एक भाड़ा बिल भरें; सालाना कुल ₹2.50 लाख तक।
“દરીયાઇ માર્ગે ફળ, શાકભાજી, ફૂલ તથા છોડના નિકાસ માટે વાહતુક ખર્ચ • વાહતુક બિલના ૨૫ ટકા સહાય,મહત્તમ રૂ. ૫૦,૦૦૦ ની મર્યાદામાં સહાય • પ્રતિ વર્ષે એક લાભાર્થીને વધુમાં વધુ રૂ. ૨.૫૦ લાખ સુધીની મર્યાદામાં સહાય”बागवानी उपज के हवाई निर्यात का भाड़ा: भाड़ा बिल का 25%, प्रति बिल अधिकतम ₹50,000 और सालाना ₹10 लाख, पाँच साल तक।
निर्यातक के रूप में मान्य किसान, निजी संस्था, एफ़पीओ/एफ़पीसी और सहकारी संस्था के लिए। एक भाड़ा बिल भरें; सालाना कुल ₹10 लाख तक।
“હવાઇ માર્ગે બાગાયત પેદાશની નિકાશ માટેના નૂરમાં સહાય • વાહતુક બિલના ૨૫ ટકા, મહત્તમ રૂ. ૫૦,૦૦૦ ની મર્યાદામાં સહાય • વાર્ષિક મહત્તમ રૂ.૧૦.૦૦ લાખની મર્યાદામાં સહાય”निर्यात होने वाली बागवानी उपज का इरेडिएशन: गुजरात एग्रो की तय दर के शुल्क का 25%, प्रति निर्यातक सालाना अधिकतम ₹2.50 लाख।
निर्यातक के रूप में मान्य किसान, निजी संस्था, एफ़पीओ/एफ़पीसी और सहकारी संस्था के लिए।
“નિકાસકારોને બાગાયતી પાકોની ઇરેડીએશન પ્રક્રિયા માટે સહાય • યુનિટ કોસ્ટ –ગુજરાત એગ્રો દ્વારા વખતોવખત નક્કી થતા ઇરેડીએશન પ્રક્રિયાના ભાવો/ખર્ચના ૨૫% વાર્ષિક મહત્તમ રૂ. ૨.૫૦ લાખ પ્રતિ લાભાર્થીની મર્યાદામાં”स्वरोज़गार बागवानी नर्सरी (500 वर्गमीटर का ढाँचा ₹3 लाख + स्टार्टर किट ₹50,000): लागत का 65%, अधिकतम ₹2,27,500, 200 से 500 वर्गमीटर, जीवन में एक बार।
500 वर्गमीटर से कम पर अनुपात में; आई-खेडूत पर पंजीकृत कंपनी के मान्य मॉडल।
“સ્વરોજગારલક્ષી બાગાયતી નર્સરી વિકાસ કાર્યક્રમ. • યુનિટ કોસ્ટ:- રૂ. ૩,૫૦,૦૦૦ / એકમ • નર્સરી સ્ટ્રક્ચર- રૂ. ૩,૦૦,૦૦૦/એકમ (૫૦૦ ચો.મી વિસ્તાર માટે) • સ્ટાર્ટર કીટ: રૂ. ૫૦,૦૦૦/એકમ • સહાય: ખેડુતને ખર્ચના ૬૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૨,૨૭,૫૦૦/- બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”परियोजना में बहुवर्षीय बाग़: व्यक्तिगत किसान और ट्रस्ट को लागत का 50% (4 हेक्टेयर तक), मिलकर खेती करने वाले एफ़पीओ/सहकारी सदस्यों को 75% (50 हेक्टेयर तक), MIDH-NHM की फ़सलवार इकाई लागत पर।
परियोजना आधारित, 2 हेक्टेयर या ज़्यादा (बाग़ वाले हिस्से में व्यक्ति और ट्रस्ट 4 हेक्टेयर तक; मिलकर खेती करने वाले एफ़पीओ/एफ़पीसी/सहकारी सदस्य 50 हेक्टेयर तक), जीवन में एक बार। बाग़ घटक अनिवार्य है और मद 2–7 में से कम से कम दो के साथ लेना होगा। इकाई लागत MIDH-NHM दिशा-निर्देशों के अनुसार; बाग़ की सहायता पूरा होने पर दो किस्तों (60:40) में, दूसरी 90% पौधे ज़िंदा रहने पर।
“૧. બહુવર્ષાયુ ફળઝાડ વાવેતરમાં સહાય યુનિટ કોસ્ટ: રૂ. ૬૦.૦૦ લાખ ની મર્યાદામાં સહાય :- ➢ વ્યક્તિગત ખેડુત તથા ખેતીલાયક જમીન ધારણ કરેલ રજીસ્ટર્ડ ટ્રસ્ટ : ખર્ચના ૫૦ ટકા સહાય, મહત્તમ ૪ હે. ની મર્યાદામાં મળવાપાત્ર રહેશે. ➢ FPO, FPC, સહકારી મંડળીના સભાસદો સામુહિક રીતે ખેતી કરે તો તેઓને મહત્તમ ૫૦ હેક્ટરની મર્યાદામાં ખર્ચના ૭૫ ટકા સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”बेचे गए ऑयल पाम ताज़े फल गुच्छों के हर टन पर ₹8,500 और गोवा समिति के मासिक मूल्य का अंतर आपको मिलता है।
केवल केंद्रीय NMEO-ऑयल पाम योजना वाले ज़िलों में (परिशिष्ट-1, 1 और 30)। अंतर हर महीने के गोवा मूल्य पर निर्भर है, इसलिए राशि नहीं दिखाई गई।
“ફ્રેશ ફ્રુટ બંચીસ (FFB)ના ટેકાના ભાવ • ઓઇલપામ ફ્રેશ ફ્રુટ બંચીસ (FFB)ના ટેકાના ભાવ રૂ. ૮૫૦૦/- પ્રતિ મેટ્રીક ટન નક્કી થયેલ છે. • ઓઇલપામ ફ્રેશ ફ્રુટ બંચીસ (FFB) ના ટેકા ના ભાવ રૂ. ૮૫૦૦/- પ્રતિ મેટ્રીક ટન અને ગોવા રાજ્યની ઓઇલ પ્રામ અંગેની પ્રાઇસ ફીક્ષેશન કમીટી દ્વારા માસીક ધોરણે નક્કી થતા ઓઇલપામ ફ્રેશ ફ્રુટ બંચીસ (FFB)ના ભાવના તફાવતની રકમ જે તે જીલ્લાના ના.બા.નિ.શ્રી દ્વારા લાભાર્થી ખેડુત ને ચુકવવાની રહેશે.”हाई-टेक नर्सरी: लागत का और 15%, बड़ी नर्सरी (1–2 हे.) में ₹30 लाख प्रति हेक्टेयर तक, छोटी (0.4–1 हे.) में ₹20 लाख प्रति हेक्टेयर तक।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)। बड़ी नर्सरी को हर साल प्रति हेक्टेयर कम से कम 50,000, छोटी को 25,000 प्रमाणित पौधे तैयार करने होंगे; अंतिम किस्त के 18 महीने में NHB मान्यता। छोटी नर्सरी अधिकतम 1 हेक्टेयर।
“૧. મોટી નર્સરી (૧ થી ૨ હે.) • મહત્તમ રૂ. 30.00 લાખ પ્રતિ હેક્ટર … ખાનગી ક્ષેત્રોને ખર્ચના 40 % સહાય … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય; ૨. નાની નર્સરી (૦.૪ થી ૧ હે. સુધી) • મહત્તમ રૂ. 20.00 લાખ પ્રતિ હેક્ટર … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”नई टिश्यू-कल्चर लैब (साल में 25 लाख पौधे): लागत का और 15%, ₹2.50 करोड़ तक गिनी।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)।
“૪. નવા ટીસ્યુકલ્ચર એકમની સ્થાપના • પ્રોજેક્ટ આધારિત મહત્તમ રૂ. 250 લાખ પ્રતિ 25 લાખ છોડની ઉત્પાદન ક્ષમતાવાળા પ્રોજેક્ટ માટે સહાય … ખાનગી ક્ષેત્રોના કિસ્સામાં 40 % credit linked back-ended સહાય … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”सब्ज़ी और मसाला बीज उत्पादन (1–2 हे.): ₹50,000 प्रति हेक्टेयर (खुला परागण) या ₹1.80 लाख प्रति हेक्टेयर (हाइब्रिड) का और 15%।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)।
“૬. શાકભાજી તથા મસાલા બીજ ઉત્પાદન અ) ઓપન પોલીનેટેડ ક્રોપ્સ (1 થી 2 હે.) • એકમ ખર્ચ રૂ. 50,000 પ્રતિ હેક્ટર … બ) હાઇબ્રીડ સીડ્સ (1 થી 2 હેક્ટર) • એકમ ખર્ચ રૂ. 1.80 લાખ પ્રતિ હેક્ટર … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”हैंडलिंग, प्रसंस्करण, पैकिंग और भंडारण सहित गुणवत्ता बीज और पौध सामग्री उत्पादन इकाई: लागत का और 15%, ₹3 करोड़ तक गिनी।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)।
“૮. નિયત થયેલા બાગાયતી પાકોના હેંડલિંગ, પ્રોસેસિંગ, પેકિંગ અને સંગ્રહ સહિત ગુણવત્તા યુક્ત બિયારણ અને વાવેતર સામગ્રીનું ઉત્પાદન એકમ • પ્રોજેક્ટ ખર્ચ રૂ. 300 લાખ પ્રતિ વર્ષ સુધી … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”नए फल बाग़ (ड्रिप के बिना): फ़सल समूह की MIDH प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का और 15% (स्ट्रॉबेरी ₹2 लाख, अंगूर ₹3 लाख, केला सकर ₹1.10 लाख, आम/अमरूद/अनार सामान्य दूरी ₹1.25 लाख, पपीता व अन्य फल ₹75,000 …), 2 हेक्टेयर तक, दो किस्तों (60:40) में।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)। ड्रैगन फ्रूट, खजूर, बादाम या अखरोट पर नहीं (टॉप-अप नहीं छपा)। दूसरी किस्त 80% पौधे ज़िंदा रहने पर। सेब की पंक्तियाँ नहीं दी गईं (गुजरात में नहीं उगता)।
“B.2 નવા બગીચાઓ ઉભા કરવા (વિસ્તાર વધારવા માટે પ્રતિ લાભાર્થી મહત્તમ બે હેક્ટર વિસ્તાર માટે) … સામાન્ય વિસ્તારમાં ખર્ચના 40 % સહાય … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”फूल, बीज व कंद मसाले और सुगंधित फ़सलें: MIDH प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का और 15% (कट फ्लावर ₹1.25 लाख, कंद फूल ₹2.50 लाख, खुले फूल ₹50,000, बीज मसाले ₹50,000, अदरक/हल्दी/लहसुन ₹1 लाख, महँगी सुगंधित ₹1.25 लाख, अन्य सुगंधित ₹50,000), 2 हेक्टेयर तक।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)। बहुवर्षीय मसालों और औषधीय फ़सलों पर टॉप-अप नहीं छपा। अदरक/हल्दी का राज्य का अलग संकल्प (gj-adu-haldar-protsahan) अलग योजना है।
“(IV) ફૂલોના વાવેતર માટે … (V) મસાલા પાકો … (VI) સુગંધિત અને ઔષધિય પાકો (લાભાર્થી દીઠ મહત્તમ બે હેક્ટરની મર્યાદામાં) … સામાન્ય વિસ્તારમાં ખર્ચના 40 % સહાય … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”MIDH में पुराने बाग़ का नवीनीकरण: ₹10,000 प्रति हेक्टेयर (टॉप-वर्किंग और गैप फ़िलिंग) या ₹40,000 प्रति हेक्टेयर (दवा, खाद और सिंचाई इनपुट) का और 15%, 2 हेक्टेयर तक।
यह केवल राज्य का लागत पर अतिरिक्त 15% है; MIDH हिस्सा (35–50%) गुजरात बागवानी मिशन देता है और केंद्रीय MIDH रिकॉर्ड में है। मिशन के भुगतान आदेश के बाद ज़िला राज्य की पूरक राशि देता है (परिशिष्ट-1, 13); मिशन के पास धन या लक्ष्य न हो तो HRT-2 गैप फ़ंडिंग से दोनों हिस्से दे सकता है (परिशिष्ट-1, 12)। किसी शंका में MIDH-NHM दिशा-निर्देश मान्य (परिशिष्ट-1, 14)।
“B.3 જૂના બગીચાઓનું નવીનીકરણ/ નવસર્જન, કેનોપી મેનેજમેન્ટ … 2.ટોપ વર્કીંગ અને ગેપ ફીલીંગ એકમ ખર્ચ • રૂ. 0.10 લાખ પ્રતિ હેક્ટર 3.દવા, ખાતર અને ઇરીગેશન માટે ઇનપુટ ખર્ચ એકમ ખર્ચ • રૂ. 0.40 લાખ પ્રતિ હેક્ટર … રાજય સરકારશ્રીની વધારાની 15% પુરક સહાય”टमाटर, मिर्च और दूसरी सब्ज़ियों के लिए कच्चा मंडप: ₹52,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹39,000), 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૫૨૦૦૦ /હે. • ખર્ચના ૭૫ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ.૩૯,૦૦૦/હે. ની મર્યાદામાં સહાય”बेल वाली सब्ज़ियों के लिए अर्ध-पक्का मंडप: ₹80,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹60,000), 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“યુનિટ કોસ્ટ- રૂ. ૮૦૦૦૦ / હે. • ખર્ચના ૭૫ ટકા મુજબ મહત્તમ રૂ.૬૦,૦૦૦/હે. ની મર્યાદામાં સહાય”बेल वाली सब्ज़ियों के लिए पक्का मंडप (सीमेंट/लोहे के खंभे): ₹1,60,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹1,20,000), 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“યુનિટ કોસ્ટ - રૂ. ૧૬૦૦૦૦/હે. • અનુ. જન જાતિના ખેડુતને ખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ રૂ.૧.૨૦ લાખ/હે. ની મર્યાદામાં સહાય”मुफ़्त हाइब्रिड सब्ज़ी-बीज इनपुट किट (₹2,000 तक प्रति किट, 0.10 हेक्टेयर पर एक किट, अधिकतम दो किट), दो साल में एक बार।
बीपीएल, महिला, सीमांत और छोटे किसानों को पहले चुना जाता है।
“ઇનપુટ કીટની મહત્તમ કિંમત રૂ. ૨૦૦૦/કિટ રહેશે.”सहजन (मोरिंगा): पौध — ₹8,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹6,000), 1 हेक्टेयर तक।
“યુનિટ કોસ્ટ-રૂ.૮૦૦૦/ હેકટર સહાય:- ખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૬૦૦૦/- પ્રતિ હેકટરની મર્યાદામાં સહાય”सहजन (मोरिंगा): खेती ख़र्च — ₹17,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹12,750), 1 हेक्टेयर तक।
“યુનિટકોસ્ટ- રૂ. ૧૭,૦૦૦ /હેક્ટર • સહાય- ખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૧૨,૭૫૦/- પ્રતિ હેકટરની મર્યાદામાં સહાય”फल फ़सलों की कलम, टिश्यू-कल्चर पौधे और बीज से बनी पौध: फ़सल की प्रति हेक्टेयर पौध-लागत (₹1,650–₹32,000) का 90%, 4 हेक्टेयर तक।
केवल ₹250 तक की पौध पर, जो NHB-मान्य, कृषि विश्वविद्यालय या विभाग की नर्सरी से ली गई हो (टिश्यू-कल्चर पौधे DBT-मान्य लैब, GNFC, GSFC से)।
“પાક વાર નિયત કરવામાં આવેલ બહુવર્ષાયુ ફળપાકની કલમ/ ટીસ્યુકલ્ચર (રોપા) / નાળીયેરી તથા અન્ય ગૌણ ફળપાક માટે બીજથી તૈયાર કરવામાં આવેલ રોપા ઉપર થયેલ ખર્ચના મહત્તમ ૯૦% મુજબ સહાય.”बागवानी फ़सलों के लिए पानी में घुलनशील खाद: ₹20,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹15,000), 1 हेक्टेयर तक।
“યુનિટ કોસ્ટ – રૂ. ૨૦૦૦૦/ હેકટર • સહાય- અનુ. જન જાતિના ખેડુત માટેખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૧૫૦૦૦/- પ્રતિ હેકટરની મર્યાદામાં સહાય.”ड्रैगन फ़्रूट (कमलम): ₹6,00,000 प्रति हेक्टेयर का 75%, अधिकतम ₹4,50,000, 0.20 से 1 हेक्टेयर, जीवन में एक बार — दो साल में।
“યુનિટ કોસ્ટ:- રૂ. ૬,૦૦,૦૦૦/હે • સહાય: અનુ.જન જાતિના ખેડુતને ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૪,૫૦,૦૦૦/- બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”सघन आम: ₹100 प्रति कलम (प्रति हेक्टेयर कम से कम 400 कलम), प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹40,000, 0.10 से 2 हेक्टेयर।
सीमा ₹40,000 प्रति हेक्टेयर है; कैलकुलेटर केवल 2 हेक्टेयर की कुल सीमा (₹80,000) लगाता है। पहले साल अंतरफ़सल की पौध: 50%, प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹10,000 (दर्ज नहीं)।
“આંબા પાકમાં કલમ દીઠ મહત્તમ રૂ. ૧૦૦/- અથવા પ્રતિ કલમ ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછું હોય તે ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૪૦ લાખ પ્રતિ હેક્ટર સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”सघन अमरूद: ₹80 प्रति कलम या टिश्यू पौधा (प्रति हेक्टेयर कम से कम 555), प्रति हेक्टेयर अधिकतम ₹44,000, 0.10 से 2 हेक्टेयर।
सीमा ₹44,000 प्रति हेक्टेयर है; कैलकुलेटर केवल 2 हेक्टेयर की कुल सीमा (₹88,000) लगाता है।
“જામફળ પાકમાં કલમ/ ટીસ્યુ રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ. ૮૦/- અથવા પ્રતિ કલમ/ ટીસ્યુ રોપા દીઠ ખરેખર થયેલ ખર્ચ બે માંથી જે ઓછું હોય તે ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૪૪ લાખ પ્રતિ હેક્ટર સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”केले के टिश्यू-कल्चर पौधे: ₹5 प्रति पौधा (प्रति हेक्टेयर कम से कम 3,000), अधिकतम ₹15,000, 0.10 से 1 हेक्टेयर, दो साल में एक बार।
केवल उन किसानों के लिए जिनका दूसरी विभागीय योजनाओं में केले का क्षेत्र पूरा हो चुका।
“કેળપાકના ટીસ્યુકલ્ચર રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ.૫/- સહાય ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૧૫ લાખ પ્રતિ હેક્ટર બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”स्वरोज़गार बागवानी नर्सरी (200–500 वर्ग मीटर ढाँचा ₹3,00,000 + स्टार्टर किट ₹50,000): 75%, अधिकतम ₹2,62,500, जीवन में एक बार।
“યુનિટ કોસ્ટ:- રૂ. ૩,૫૦,૦૦૦ / એકમ … સહાય: અનુ.જન જાતિના ખેડુતને ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૨,૬૨,૫૦૦/- બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”पपीता: ₹5 प्रति पौधा (प्रति हेक्टेयर कम से कम 3,000), अधिकतम ₹15,000, 0.10 से 1 हेक्टेयर, दो साल में एक बार।
“પપૈયા પાકના રોપા દીઠ મહત્તમ રૂ.૫/- સહાય ધ્યાને લઇ મહત્તમ રૂ. ૦.૧૫ લાખ પ્રતિ હેક્ટર બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”30 साल से पुराने आम के बाग़ का नवीनीकरण (छँटाई, ख़ाली जगह भराई, कीट व पोषण प्रबंधन): ₹80,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹60,000), 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“એકમ ખર્ચ – મહત્તમ રૂ. ૮૦,૦૦૦/હેકટર … ખર્ચના ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૬૦,૦૦૦/હેકટર બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”20 साल से पुराने नींबू के बाग़ का नवीनीकरण: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 75% (₹37,500), 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“એકમ ખર્ચ – મહત્તમ રૂ. ૫૦,૦૦૦/હેકટર … ખર્ચના ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ. ૩૭,૫૦૦/હેકટર બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”क्रॉप, गुच्छा और फल कवर: सब्ज़ियों के लिए प्रति हेक्टेयर ₹50,000 तक, केला/पपीता ₹20,000, अनार/खजूर और फल कवर ₹35,000 का 75%; 0.10 से 2 हेक्टेयर, जीवन में एक बार।
“ખર્ચના ૭૫% કે મહત્તમ રૂ.૩૭,૫૦૦/-પ્રતિ હેકટરની મર્યાદામાં … રૂ.૧૫,૦૦૦/- … રૂ.૨૬,૨૫૦/- … રૂ.૨૬,૨૫૦/-પ્રતિ હેકટરની મર્યાદામાં, બે માંથી જે ઓછું હોય તે સહાય મળવાપાત્ર રહેશે.”विभाग की नर्सरी और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की कलम, पौध और दूसरी रोपण सामग्री: क़ीमत का 75%, अधिकतम ₹7,500, साल में एक बार (काउंटर पर ही घटाकर)।
“નર્સરી/સી.ઓ.ઈ.ખાતે ઉત્પાદીત થતા કલમ/રોપા/ધરૂ/અન્ય બાગાયતી પ્લાન્ટીંગ મટીરીયલ્સમાં નક્કી કરેલ ભાવના ૭૫% અથવા મહત્તમ રૂ.૭૫૦૦/- ની મર્યાદામાં એટસોર્સ સહાય ચુકવવાની રહેશે.”परियोजना गाँवों के 0.10–5 हेक्टेयर वाले किसान: गड्ढे, रोपण, पौध संरक्षण, खाली जगह भरने और खाद के लिए परिशिष्ट-अ की पूरी प्रति हेक्टेयर राशि (वास्तविक ख़र्च से अधिक नहीं), 3 साल में।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। ज़मीन तैयार करना, गड्ढे भरना, निराई-गुड़ाई और बाड़ किसान के ख़र्च पर (खंड 3.3 अ)। मनरेगा मज़दूरी या सामग्री दरें बदलने पर दरें बदलती हैं (3.10)। केवल व्यक्तिगत किसान, संस्थाएँ नहीं (2.1); किसी अन्य योजना में पहले लगाया क्षेत्र 5 हेक्टेयर में से घटेगा (2.5)। यह राज्यव्यापी भाऊसाहेब फुंडकर फल बाग़ योजना से अलग है, जिसकी 2023-24 मार्गदर्शक सूचनाओं का यह पालन करती है (3.1)।
“ब. प्रकल्प अनुदानीत बाबी / कामे — १. खड्डे खोदणे. २. कलमे लागवड करणे. ३. पीक संरक्षण करणे ४. नांग्या भरणे. ५. रासायनिक/सेंद्रिय खते — 100 % नानाजी देशमुख कृषी संजीवनी प्रकल्प”शहतूत रोपण: ₹60,000 प्रति एकड़ का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — ₹45,000 या ₹54,000 प्रति एकड़।
शहतूत के लिए कम से कम 0.40 हेक्टेयर मध्यम से भारी, अच्छी जल निकासी वाली सिंचित ज़मीन चाहिए (मानदंड 3–5)। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।
“तुती लागवड — प्रति एकर — ६०,००० — ४५,००० (७५%) — ५४,००० (९०%)”इकाई लागत का 40–50%, ड्रिप रहित अधिकतम ₹30,000–₹50,000 और ड्रिप सहित ₹40,000–₹80,000 प्रति हेक्टेयर (सामान्य, उच्च या अति उच्च घनत्व), ¼ से 4 हेक्टेयर तक।
प्रति हेक्टेयर इकाई लागत: सामान्य ₹60,000 (ड्रिप सहित ₹1,00,000), उच्च घनत्व ₹1,00,000 (₹1,50,000), अति उच्च ₹1,25,000 (₹2,00,000)। तालिका में सामान्य दूरी पर 40–50% और बाक़ी पर 40% छपा है; आपकी लागत भरने पर हम 40% गिनते हैं ताकि राशि ज़्यादा न दिखे। योजना-पत्रक पर तारीख़ नहीं है (2019 की फ़ाइल); 2026-27 के बजट में योजना की राशि है, पर मौजूदा दरें ज़िला कार्यालय से पुष्टि करें।
“निर्धारित मापदण्ड अनुसार 40-50 प्रतिशत अनुदान सहायता 60:20:20 के अनुपात में तीन वर्षो में देय है ।”इकाई लागत का 50%, बीज वाले मसालों पर अधिकतम ₹10,000 या जड़/कंद वाले मसालों (हल्दी, अदरक, लहसुन) पर अधिकतम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर, 0.25 से 2 हेक्टेयर तक।
पुस्तिका में इकाई लागत नहीं छपी; सीमा के भीतर 50% देखने के लिए अपनी लागत भरें। पुस्तिका पर तारीख़ नहीं है (2019 की फ़ाइल); 2026-27 के बजट में योजना की राशि है, पर मौजूदा दरें ज़िला कार्यालय से पुष्टि करें।
“उन्नत/संकर मसाला फसल के क्षेत्र विस्तार के लिये इकाई लागत का 50 प्रतिशत बीज वाली फसल हेतु अधिकतम रूपये10000/- प्रति हेक्टेयर तथा जड़ एवं कंद/प्रकंद वाली फसलों जैसे- हल्दी, अदरक, लहसुन के लिये अधिकतम रूपये 50,000/- प्रति हेक्टेयर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है । योजना में एक कृषक को 0.25 हेक्टेयर से लेकर 2.00 हेक्टेयर तक का लाभ दिया जा सकता है ।”बाग़ की फेंसिंग के लिए ₹1,08,970 प्रति हेक्टेयर का 50% — अधिकतम ₹54,485 प्रति हेक्टेयर, 1 से 2 हेक्टेयर तक।
विभाग की सामुदायिक फेंसिंग योजना से पहले लाभ ले चुके किसानों को नहीं (कंडिका 9)। न्यूनतम रकबा 1 हेक्टेयर (कंडिका 7(3))।
“फेंसिंग | हेक्टेयर | 1.08970 | 0.54485 | 50%”फल पौध रोपण के लिए ₹43,750 प्रति हेक्टेयर का 25% — लगभग ₹10,938 प्रति हेक्टेयर, 1 से 2 हेक्टेयर तक।
“फल पौध रोपण | हेक्टेयर | 0.4375 | 0.10938 | 25%”नए बाग़ में अंतरवर्तीय फसल के रूप में सब्ज़ी लगाने पर पूरे ₹30,000 प्रति हेक्टेयर, 1 से 2 हेक्टेयर तक।
“फलोद्यानों में अंतरवर्तीय फसल के रूप में सब्जी फसलों का रोपण | हेक्टेयर | 0.3000 | 0.3000 | 100%”प्रति हेक्टेयर बीज की कीमत का 40%, हल्दी (2,500 कि.ग्रा. बीज) पर अधिकतम ₹46,000 या अदरक (1,500 कि.ग्रा. बीज) पर ₹48,800, 0.25 से 2 हेक्टेयर तक।
“हल्दी बीज (2500 कि.ग्रा.) — आदान की कीमत का 40% अथवा रू. 46,000/- जो भी कम हो। अदरक बीज (1500 कि.ग्रा.) — आदान की कीमत का 40% अथवा रू. 48,800/- जो भी कम हो।”जैव उर्वरक/सूक्ष्म तत्व के ₹500 और पौध संरक्षण रसायन के ₹500 — कुल ₹1,000 प्रति हेक्टेयर।
ये लाइसेंसधारी विक्रेता से ख़रीदें; भुगतान से पहले बिलों का सत्यापन होता है (कंडिका 11(4))।
“जैव उर्वरक/सूक्ष्म तत्व 500/- ; पौध संरक्षण रसायन 500/-”0.40 हेक्टेयर के लिए 800 कि.ग्रा. आलू बीज की कीमत, अधिकतम ₹40,000।
तालिका अधिकतम अनुदान छापती है; इससे महँगे बीज का अंतर किसान देगा (कंडिका 10(2))।
“0.40 हेक्टेयर हेतु फसल प्रदर्शन पर विभिन्न घटकों में देय अधिकतम अनुदान … आलू बीज (800 कि.ग्रा.) 40,000/-”जैव उर्वरक/सूक्ष्म तत्व पर अधिकतम ₹500 और पौध संरक्षण रसायन पर ₹500 — कुल ₹1,000।
“जैव उर्वरक/सूक्ष्म तत्व 500/- ; पौध संरक्षण रसायन 500/-”नारियल पौधा: ₹85 का 75% (₹63.75 प्रति पौधा), एक लाभार्थी को 5 से 712 पौधे।
कम से कम 5 पौधे। 2026-27 के ऑनलाइन आवेदन पृष्ठ पर इकाई लागत ज़्यादा छपी है (₹115: ₹100 उत्पादन + ₹15 परिवहन; 75% = ₹86.25); स्वीकृत्यादेश में संशोधन होने तक हम आदेश की ₹85 / ₹63.75 दर ही दिखाते हैं, ताकि राशि बढ़ा-चढ़ाकर न बताई जाए।
“नारियल के पौधा की इकाई लागत 85.00 रूपये (उत्पादन व्यय 70.00 रूपये एवं जिला परिवहन व्यय 15.00 रूपये) है। इकाई लागत 85.00 रूपये प्रति पौधा पर 75 प्रतिशत सहायतानुदान यानि 63.75 रूपये देय होगा। … एक लाभार्थी को न्यूनतम 5 तथा अधिकतम 712 पौधा (प्रति हेक्टेयर 178 पौधा) अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जायेगा।”बीज मसाले: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹20,000 प्रति हेक्टेयर), अधिकतम 2 हेक्टेयर।
न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.10 हेक्टेयर), अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) (कंडिका 8)। भूमिहीन और बटाईदार किसान एकरारनामा के साथ आवेदन कर सकते हैं। दर MIDH परिचालन दिशानिर्देश 2025 से ली गई है, पर योजना राज्य के पैसे से चलती है।
“बीज मसाला फसलों हेतु लागत 50,000.00 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से निर्धारित है, जिसका 40 प्रतिशत अर्थात् 20,000.00 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिये इनपुट उपादानों हेतु फसल के भौतिक सत्यापन पश्चात्, एक किस्त में अनुदान दिया जायेगा।”अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, पपीता, आँवला, अनार या सुगंधित पौधे: ₹1,00,000 प्रति एकड़ अनुदान, अधिकतम 10 एकड़।
अनुदान में पौध सामग्री, खेत की तैयारी, खाद एवं पोषक तत्व, कीटनाशी, सिंचाई और घेराबंदी के साथ शुरुआती वर्षों में आमदनी न होने की भरपाई भी शामिल है (कंडिका 5)। क्लस्टर एक राजस्व गाँव में 25 एकड़ का (ड्रैगन फ्रूट के लिए 15 एकड़) (कंडिका 7); प्रति किसान 0.25 से 10 एकड़ (कंडिका 8)। भुगतान दो किस्तों में 65:35; दूसरी किस्त 75% पौधे जीवित रहने पर (कंडिका 13)। चयन कोटि अनुपात 78.537 : 20 : 1.463 (सामान्य : अनु0 जाति : अनु0 जनजाति), 30% महिलाएँ (कंडिका 16)।
“योजना अन्तर्गत क्लस्टर निर्माण हेतु चयनित फसल यथा–अमरूद, नींबू, एप्पल बेर, बेल, कटहल, पपीता, आंवला, अनार एवं सुगंधित पौधा (तुलसी, लेमनग्रास, पामारोजा एवं जावा सिट्रोनेला) हेतु अनुदान की राशि 1.00 लाख रूपये प्रति एकड़ … दिया जाएगा।”ड्रैगन फ्रूट: ₹2,00,000 प्रति एकड़ अनुदान, अधिकतम 10 एकड़।
अनुदान में पौध सामग्री, खेत की तैयारी, खाद एवं पोषक तत्व, कीटनाशी, सिंचाई और घेराबंदी के साथ शुरुआती वर्षों में आमदनी न होने की भरपाई भी शामिल है (कंडिका 5)। क्लस्टर एक राजस्व गाँव में 25 एकड़ का (ड्रैगन फ्रूट के लिए 15 एकड़) (कंडिका 7); प्रति किसान 0.25 से 10 एकड़ (कंडिका 8)। भुगतान दो किस्तों में 65:35; दूसरी किस्त 75% पौधे जीवित रहने पर (कंडिका 13)। चयन कोटि अनुपात 78.537 : 20 : 1.463 (सामान्य : अनु0 जाति : अनु0 जनजाति), 30% महिलाएँ (कंडिका 16)।
“एवं ड्रैगन फ्रूट हेतु अनुदान की राशि 2.00 लाख रूपये प्रति एकड़ दिया जाएगा।”बरेजा में पान: प्रति किसान 100 वर्ग मीटर (0.01 हेक्टेयर) के लिए ₹11,750।
2026-27 की राशि 2,79,600 वर्ग मीटर के लिए है — 2025-26 के लक्ष्य के विरुद्ध हासिल क्षेत्र (कंडिका 3); बाक़ी शर्तें मूल स्वीकृत्यादेश सं0 53, दिनांक 02.06.2025 की हैं (कंडिका 8), जिसे हमने संग्रहित नहीं किया।
“पान विकास योजनान्तर्गत बरेजा में पान की खेती हेतु प्रति कृषक 100 वर्गमीटर (0.01 हे0) के लिए 11750.00 (ग्यारह हजार सात सौ पचास) रूपये मात्र का अनुदान प्रखण्ड उद्यान पदाधिकारी के भौतिक सत्यापनोपरांत संबंधित जिला उद्यान पदाधिकारी के द्वारा जांचोपरान्त भुगतान किया जायेगा।”हाइब्रिड, अधिक उपज वाले और खुले परागण वाले सब्ज़ी बीज 75% छूट पर।
स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(i) 75% subsidy sale of hybrid, HYV and OP quality vegetable seeds.”स्क्वैश और दूसरी बेल वाली सब्ज़ियों के लिए मचान, हर किसान को 200 वर्ग मीटर तक, पूरा मुफ़्त।
स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(iii) 100% assistance limited to 200 sqm per beneficiary in trellis making.”फूलों की पौध आधी कीमत पर।
स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(i) 50% subsidy on sale of flower planting materials.”फलों की पौध आधी कीमत पर; पुराने संतरा बाग़ों के जीर्णोद्धार के लिए सामग्री।
संतरा जीर्णोद्धार की मदद पौध और सामग्री के रूप में मिलती है; एफ़एक्यू में इसकी कोई दर नहीं छपी, इसलिए केवल पौध पर 50% सब्सिडी दिखाई गई है। स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(i) 50% subsidy sale of planting materials. (ii) Planting materials and input assistance for citrus rejuvenation programme.”चाय के हर हेक्टेयर पर ₹10,000, एक बार, 2 हेक्टेयर तक वाले उत्पादकों को।
2 हेक्टेयर की सीमा प्रश्न 4 की पात्रता शर्त है (2 हेक्टेयर तक ज़मीन), इसलिए हम अधिकतम 2 हेक्टेयर गिनते हैं। स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(ii) One-time financial assistance @ ₹10000/- per hectare.”जैव-उर्वरक, जैव-कीटनाशक, पौध सुरक्षा उपकरण, ब्रश कटर और चाय हार्वेस्टर की आधी कीमत।
स्थिति अज्ञात: निदेशालय के एफ़एक्यू पर कोई तारीख़ नहीं है (फ़ाइल का नाम 2025) और इस योजना का नाम लेने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। इस साल योजना चल रही है या नहीं, ज़िला बागवानी अधिकारी से पूछें।
“(iii) 50% subsidy on bio-fertilizers, bio-pesticides, bio-fungicides, plant protection equipments, brush cutters, harvesters’ etc.”हर बर्बाद इलायची कंद या मक्का भुट्टे पर ₹10; धान, बाजरा, आलू, फल, सब्ज़ी, अदरक और सूची की दूसरी फसलों के लिए बर्बाद रकबे का भुगतान बाज़ार मूल्य पर।
स्थिति अज्ञात: 2023 की अधिसूचना की कोई अंतिम तारीख़ नहीं है और इसके अनुसार 1 जनवरी 2024 से दरें हर साल 5% बढ़ती हैं, पर भुगतान की पुष्टि करने वाला 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट मद हमें नहीं मिला। हम 2023 की मूल दरें दिखाते हैं, जो अभी मिलने वाली राशि से कम हो सकती हैं।
“II. The rates of Ex-gratia payment for crop depredation/damaged: (i) Cardamom No. of rhizomes @ ₹ 10/- each (ii) Maize No. of cobs @ ₹ 10/- each (iii) Paddy Area damaged Assessment based on market value”हर वर्ग के किसान को 0.20 से 1 हेक्टेयर नए नारियल रोपण पर ₹9,225 प्रति हेक्टेयर (₹75 के 123 पौधों की क़ीमत)।
सहायता पौधों के रूप में मिलती है, नक़द नहीं; रकबा कम से कम 0.20 हेक्टेयर होना चाहिए (पृ.3), और इसे पाने वाला किसान नारियल विकास बोर्ड, मनरेगा या दूसरी योजनाओं से नारियल क्षेत्र विस्तार अनुदान नहीं ले सकता (खंड 7, क्रम 5)। ये 2023-24 के दिशानिर्देश लेखा शीर्ष 2401-00-111-0-08 के तहत हैं, जिसमें 2026-27 में राशि नहीं है; विभाग के मौजूदा “राज्य क्षेत्र योजनाएँ” पृष्ठ पर कार्यक्रम अब भी समग्र बागवानी विकास के तहत है, पर चालू वर्ष का आदेश नहीं मिला, इसलिए स्थिति अज्ञात है।
“ಒಂದು ಹೆಕ್ಟೇರ್ ತೆಂಗಿನ ಪ್ರದೇಶ ವಿಸ್ತರಣೆಯನ್ನು ಕೈಗೊಳ್ಳಲು ರೂ.31,966.59ಗಳ ವೆಚ್ಚವನ್ನು ಭರಿಸಬೇಕಾಗಿರುತ್ತದೆ. ಎಲ್ಲಾ ವರ್ಗದ ರೈತರಿಗೆ ಒಂದು ಹೆಕ್ಟೇರ್ ಪ್ರದೇಶ ವಿಸ್ತರಣೆಗೆ ರೂ.9225.00ಗಳ ಸಹಾಯಧನವನ್ನು ಒದಗಿಸಲಾಗುವುದು ಹಾಗೂ ರೈತರು ರೂ.22741.59ಗಳ ವೆಚ್ಚವನ್ನು ಭರಿಸಬೇಕಾಗಿರುತ್ತದೆ.”नया काली मिर्च बाग़ लगाने पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर (रोपण सामग्री, आदान और पौध संरक्षण)।
केवल AIMS पोर्टल पर पंजीकृत छोटे और सीमांत किसानों के लिए, क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड के साथ।
“The estimated cost for the establishment of one hectare of pepper garden is Rs 40000/- by the internal estimation conducted by the department. An assistance to the tune of Rs. 17000 per hectare can be given for planting materials, critical inputs needed during their planting, prophylactic pest and disease management practices at the time of planting etc.”जायफल के ग्राफ़्ट ₹40,000 प्रति हेक्टेयर तक (एक ग्राफ़्ट पर अधिकतम ₹250, या असली कीमत अगर कम हो)।
केवल AIMS पोर्टल पर पंजीकृत छोटे और सीमांत किसानों के लिए, क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड के साथ। रोपण सामग्री 100% सहायता पर मिलती है; हर ग्राफ़्ट का भुगतान ₹250 या असली कीमत, जो कम हो, पर होता है।
“It is sanctioned to establish nutmeg in an area of 292.85765 ha with a financial outlay of Rs.117.14306 lakh with financial assistance @ 40000/Ha. … The maximum rate of assistance per grafts shall be Rs. 250.00 or the actual cost of it whichever is less.”नारियल बाग़ों में अंतरफ़सल के रूप में लौंग की रोपण सामग्री, ₹13,750 प्रति हेक्टेयर तक।
केवल AIMS पोर्टल पर पंजीकृत छोटे और सीमांत किसानों के लिए, क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड के साथ।
“Cost of planting materials at a maximum rate of Rs.13,750 per hectare is admissible under this scheme component.”अदरक या हल्दी पर ₹15,000 प्रति हेक्टेयर — रोपण सामग्री, चूना, कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और जैव नियंत्रक।
केवल AIMS पोर्टल पर पंजीकृत छोटे और सीमांत किसानों के लिए, क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड के साथ।
“An assistance of Rs. 15,000/- per hectare is sanctioned for planting materials, lime, compost/farm yard manure, wood ash, bio fertilizers and bio control agents.”केरग्रामम में हर रोगी, पुराने या बूढ़े नारियल पेड़ को काटकर हटाने पर ₹1,000।
केरग्रामम की सहायता केवल 2026-27 के लिए अधिसूचित 40 केरग्रामम क्लस्टरों (हर एक 100 हेक्टेयर) में है; अपने कृषि भवन से पूछें कि आपकी पंचायत उनमें है या नहीं। प्रति-पेड़ घटकों की कुल सीमा ₹19,200 प्रति हेक्टेयर है।
“Cut & removal of disease affected, old and senile palms ₹1000 per palm”हटाए गए पेड़ों की जगह लगाए हर अच्छे नारियल पौधे पर ₹60।
केरग्रामम की सहायता केवल 2026-27 के लिए अधिसूचित 40 केरग्रामम क्लस्टरों (हर एक 100 हेक्टेयर) में है; अपने कृषि भवन से पूछें कि आपकी पंचायत उनमें है या नहीं। प्रति-पेड़ घटकों की कुल सीमा ₹19,200 प्रति हेक्टेयर है।
“Replanting with good quality seedlings 50 ₹60/ seedling”राज्यव्यापी केर रक्षा वारम अभियान में शिखर सफ़ाई और कीट नियंत्रण के लिए ₹75 प्रति पेड़ (₹25 कीटनाशक/जैव कीटनाशक और ₹50 चढ़ाई शुल्क)।
यह केवल केरग्रामम में नहीं, पूरे केरल में चलता है; 2026-27 में 12.84 लाख पेड़ों का लक्ष्य है, ज़्यादा कीट-रोग वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता। पेड़ों के थालों के लिए हरी खाद के बीज भी मिलते हैं (₹6.25 प्रति पेड़)।
“For this, an amount of ₹75.00 per palm is given, which includes ₹ 25/- for the cost of PPC/Bio pesticide and ₹50/- as a climbing charge.”पहाड़ में बेमौसमी सब्ज़ी: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर का 75%, अधिकतम 1 हेक्टेयर — अधिकतम ₹37,500।
स्थिति अज्ञात: विभाग की तालिका पर तारीख़ नहीं है और इस मद का नाम लेने वाला चालू वर्ष का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला उद्यान अधिकारी से पूछें कि इस वर्ष यह खुला है या नहीं।
“उत्तराखण्ड में बेमौसमी सब्जी उत्पादन — उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में बेमौसमी सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु राजसहायता। — रू0 50,000 प्रति है0 का 75% — 01 है0”अच्छी गुणवत्ता की लाल मिर्च के हर कुन्तल पर ₹700।
तालिका में मात्रा की कोई ऊपरी सीमा नहीं छपी। स्थिति अज्ञात: विभाग की तालिका पर तारीख़ नहीं है और इस मद का नाम लेने वाला चालू वर्ष का कोई आदेश नहीं मिला। ज़िला उद्यान अधिकारी से पूछें कि इस वर्ष यह खुला है या नहीं।
“मसाला मिर्च को प्रोत्साहन देने हेतु योजना — प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त मसाला मिर्च (लाल मिर्च) की खेती को बढ़ावा देने हेतु कृषकों को प्रोत्साहन राशि देना — प्रोत्साहन राशि रु0 700 प्रति कु0”ढके ढाँचे में कार्नेशन या जरबेरा की रोपण सामग्री और खेती: लागत का 50%, अधिकतम 4,000 वर्ग मीटर (मानक ₹610/वर्ग मीटर)।
स्थिति अज्ञात: उद्यान विभाग अपने योजना पृष्ठ पर यही दिशानिर्देश दिखाता है, पर ये 2018-19 / 2019-20 के हैं और चालू वर्ष का कोई आदेश या बजट मद नहीं मिला जिसमें योजना का नाम हो। उद्यान विकास अधिकारी से पूछें कि इस वर्ष इसके लिए पैसा है या नहीं।
“Cost of planting material & cultivation of Carnation & Gerbera under poly house/shade net house — Rs. 610/sqm — 50% of cost limited to 4000 sqm per beneficiary”बाग़ के जीर्णोद्धार की लागत का 50%, अधिकतम ₹6 लाख प्रति हेक्टेयर (अनुमान ₹12 लाख प्रति हेक्टेयर = 20 कनाल)।
छपा अनुमान सेब के लिए है (टॉप-वर्किंग, ग्राफ़्टिंग, प्रति कनाल 20 पौधों से खाली जगह भरना, सायन लकड़ी, इनपुट)। असल लागत कम हो तो सब्सिडी असल लागत का 50% होगी। एचएडीपी अभी चल रहा है (2026 के सरकारी आदेश 2026-27 के लिए एचएडीपी की राशि मंज़ूर करते हैं), पर इस परियोजना के किसान घटकों का कोई ताज़ा आदेश हमें नहीं मिला, और दरें 2022 के दिशानिर्देशों से हैं। पैसा लगाने से पहले विभाग से पक्का कर लें।
“The orchard rejuvenation shall carried out on first cum serve basis with 50% assistance to the maximum of Rs. 6.0 Lakh per Ha as per below given estimates. … Total cost per ha (20 Kanals) 1200000/=”