महाझींगा, देशी माँगुर एवं मोती पालन (मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण योजना), झारखंड
चालू होने का आधार: मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण योजना स्वीकृति 2026-27 (राज्यादेश 25, 11.08.2026) (11 अग॰ 2026, Para 1 — राज्य योजना “मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण योजना” अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026–27 में … योजना क्रियान्वयन की स्वीकृति प्रदान की जाती है)
निजी तालाबों में महाझींगा या देशी माँगुर पालन के ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर और मोती पालन के ₹20,000 प्रति यूनिट का 80% (अनुसूचित जनजाति, जाति, महिला) या 70% (अन्य) राज्य देता है।
- मुख्य लाभ
- 80%लागत का, अधिकतम
- घटक
- 3हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
- कौन ले सकता है
- 6तरह के आवेदक
- अंतिम तिथि
- मौसमी“कब आवेदन करें” देखें
क्या मिलता है
निजी तालाब में महाझींगा पालन, इकाई लागत ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80% (₹3,20,000/हे.), अन्य को 70% (₹2,80,000/हे.)।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
“निजी क्षेत्र के चयनित कृषकों के तालाबों में भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत स्वीकृत इकाई दर के अनुरुप ही प्रति हेक्टेयर मो0 4,00,000/– रू0 मात्र के दर पर महाझींगा का पालन किया जाएगा। इस हेतु राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत् (अधिकतम 3,20,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,28,000/– रू0 प्रति एकड़) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिये राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत् (अधिकतम 2,80,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,12,000/– रू0 प्रति एकड़)”निजी तालाब में देशी माँगुर पालन, इकाई लागत ₹4,00,000 प्रति हेक्टेयर: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को 80%, अन्य को 70%।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
“निजी क्षेत्र के तालाबों में देशी माँगूर पालन एवं प्रत्यक्षण हेतु भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत स्वीकृत इकाई दर के अनुरुप ही प्रति हेक्टेयर मो0 4,00,000/– रू0 मात्र का दर होगा। इस हेतु … अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत् (अधिकतम 3,20,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,28,000/– रू0 प्रति एकड़) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिये राज्य सरकार का अंशदान 70 प्रतिशत् (अधिकतम 2,80,000/– रू0 प्रति हेक्टेयर अथवा 1,12,000/– रू0 प्रति एकड़)”तालाब, केज या सीमेंट टैंक में मोती पालन, ₹20,000 प्रति यूनिट: अनुसूचित जनजाति, जाति और महिला को ₹16,000 (80%), अन्य को ₹14,000 (70%)।
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है
“सभी जलक्षेत्र (निजी/बन्दोबस्त) के तालाबों/केज/Cemented Tank में Cluster Approach के तहत् मोती पालन एवं प्रत्यक्षण हेतु … मो0 20,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट का दर होगा। … अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 80% (अधिकतम मो0 16,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट) … अन्य सभी कोटि के लाभुकों के लिए राज्य सरकार का अंशदान 70% (अधिकतम मो0 14,000/–रू0 मात्र प्रति यूनिट)”मुझे कितना मिल सकता है?
आँकड़ा देखने के लिए हेक्टेयर की संख्या भरें।
कौन आवेदन कर सकता है
- अन्य किसान
- लघु या सीमांत किसान
- अनुसूचित जाति किसान
- अनुसूचित जनजाति किसान
- महिला किसान
- काश्तकार या बटाईदार
ज़रूरी काग़ज़
आवेदन कैसे करें
- अख़बार विज्ञापन पर ज़िला मत्स्य पदाधिकारी के माध्यम से आवेदन करें; ज़िला स्तरीय समिति किसानों का चयन करती है (कंडिका 12(ख), (घ))।
- किसानों को क्लस्टर में लिया जाता है, और एक ही लाभुक को दोबारा लाभ नहीं मिलता (कंडिका 12(ख))।
- राज्य का अंशदान डीबीटी से आपके बैंक खाते में आता है (कंडिका 12(ख)–(घ))।
आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।
कब आवेदन करें
2026-27 के लिए 11.08.2026 को स्वीकृत; अख़बार विज्ञापन के बाद आवेदन लिए जाते हैं।
दूसरी योजनाओं के साथ
दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।