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योजना चालू है

नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी (पोकरा) चरण-2 — रेशम उद्योग: शहतूत, कीट पालन गृह और उपकरण

चालू होने का आधार: महाराष्ट्र शासन निर्णय 06.10.2026 — पोकरा चरण-2 को 2026-27 के लिए ₹192.30 करोड़ (6 अक्टू॰ 2026, शासन निर्णय: ₹192,30,41,200 released to the Project Director for phase 2 in 2026-27 (budget provision 2026-27 ₹474 crore; project runs six years from 2025-26 in 7,201 villages of 21 districts — प्रस्तावना))

PoCRA silk (mulberry) unit · कृषि विभाग, महाराष्ट्र सरकार — नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी प्रकल्प (विश्व बैंक सहायित) · राज्य योजना

पोकरा परियोजना गाँवों में: शहतूत रोपण (मानक ₹60,000 प्रति एकड़), रेशम कीट पालन गृह (₹3,25,000) और पालन व कीटाणुनाशन उपकरण (₹48,500) — सामान्य किसानों को 75% (कुल ₹3,25,125) और अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% (₹3,90,150), इसी क्रम में।

मुख्य लाभ
90%लागत का, अधिकतम
घटक
3हर एक दस्तावेज़ से पढ़ा
कौन ले सकता है
5तरह के आवेदक
अंतिम तिथि
मौसमी“कब आवेदन करें” देखें

क्या मिलता है

90%लागत का, अधिकतम

शहतूत रोपण: ₹60,000 प्रति एकड़ का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — ₹45,000 या ₹54,000 प्रति एकड़।

स्रोत पोकरा चरण-2 मार्गदर्शक सूचना: रेशम उद्योग इकाई · धारा रेशीम उदयोग या घटका अंतर्गत समाविष्ट घटक व अर्थसहाय्य, table row १ (तुती लागवड) · पृ. 3 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

शहतूत के लिए कम से कम 0.40 हेक्टेयर मध्यम से भारी, अच्छी जल निकासी वाली सिंचित ज़मीन चाहिए (मानदंड 3–5)। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।

“तुती लागवड — प्रति एकर — ६०,००० — ४५,००० (७५%) — ५४,००० (९०%)”
90%लागत का, अधिकतम

रेशम कीट पालन गृह: ₹3,25,000 मानक का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — अधिकतम ₹2,43,750 या ₹2,92,500।

स्रोत पोकरा चरण-2 मार्गदर्शक सूचना: रेशम उद्योग इकाई · धारा रेशीम उदयोग या घटका अंतर्गत समाविष्ट घटक व अर्थसहाय्य, table row २ (किटक संगोपनगृह बांधकाम) · पृ. 3 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

तालिका में इकाई 1,100 वर्ग फ़ुट लिखी है, जबकि सामान्य सूचना 4 में 60 × 22 फ़ुट (1,320 वर्ग फ़ुट) का गृह, कम से कम 10 × 8 फ़ुट का पत्ती भंडार और 5 × 4 × 3 फ़ुट की कीटाणुनाशन टंकी माँगी गई है (सूचना 4–5)। शहतूत लगाने के बाद ही। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।

“किटक संगोपनगृह बांधकाम — ११०० चौ.फुट — ३,२५,००० — २,४३,७५० (७५%) — २,९२,५०० (९०%)”
90%लागत का, अधिकतम

कीट पालन व कीटाणुनाशन उपकरण: ₹48,500 मानक का 75% (अनुसूचित जाति/जनजाति 90%) — अधिकतम ₹36,375 या ₹43,650।

स्रोत पोकरा चरण-2 मार्गदर्शक सूचना: रेशम उद्योग इकाई · धारा रेशीम उदयोग या घटका अंतर्गत समाविष्ट घटक व अर्थसहाय्य, table row ३ (किटक संगोपन व निर्जंतुकीकरण साहित्य) · पृ. 3 · हमारी प्रति (PDF)
दस्तावेज़ में ठीक क्या लिखा है

शहतूत और पालन गृह पूरे होने के बाद ही। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।

“किटक संगोपन व निर्जंतुकीकरण साहित्य — प्रति लाभार्थी — ४८,५०० — ३६,३७५ (७५%) — ४३,६५० (९०%)”

मुझे कितना मिल सकता है?

आँकड़ा देखने के लिए एकड़ की संख्या भरें।

स्रोत पोकरा चरण-2 मार्गदर्शक सूचना: रेशम उद्योग इकाई · धारा रेशीम उदयोग या घटका अंतर्गत समाविष्ट घटक व अर्थसहाय्य, table row १ (तुती लागवड) · पृ. 3 · हमारी प्रति (PDF)

शहतूत के लिए कम से कम 0.40 हेक्टेयर मध्यम से भारी, अच्छी जल निकासी वाली सिंचित ज़मीन चाहिए (मानदंड 3–5)। केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 पोकरा चरण-2 परियोजना गाँवों में। सामान्य किसान 75%, अनुसूचित जाति व जनजाति किसान 90% — मानक या वास्तविक ख़र्च, जो कम हो। एक परिवार से एक व्यक्ति, 5 हेक्टेयर तक ज़मीन, और किसी अन्य सरकारी योजना से रेशम सहायता ली हो तो पात्र नहीं। कम से कम 5 साल रेशम उद्योग करना ज़रूरी।

कौन आवेदन कर सकता है

  • अन्य किसान
  • लघु या सीमांत किसान
  • अनुसूचित जाति किसान
  • अनुसूचित जनजाति किसान
  • महिला किसान

ज़रूरी काग़ज़

  • ज़मीन संयुक्त हो तो अन्य खातेदारों का अनापत्ति प्रमाणपत्र (लाभार्थी 2)
  • काम और ख़रीद के मूल बिल (लाभार्थी 4)

आवेदन कैसे करें

  1. पोकरा डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण कर आवेदन करें; ज़मीन संयुक्त हो तो अन्य खातेदारों का अनापत्ति पत्र अपलोड करें (लाभार्थी 1–2)।
  2. चरणों में करें: पहले शहतूत लगाएँ, फिर पालन गृह बनाएँ, फिर उपकरण ख़रीदें — हर चरण पिछला पूरा होने पर ही मंज़ूर होता है (सामान्य सूचना 2–3)।
  3. पूर्व-स्वीकृति के 60 दिन में काम पूरा कर मूल बिल अपलोड करके डीबीटी पोर्टल पर माँग करें (लाभार्थी 3–4)।
आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें ↗

आवेदन मुफ़्त है। आवेदन के लिए किसी को पैसा न दें।

कब आवेदन करें

परियोजना चलने तक (2025-26 से 2030-31) पोकरा डीबीटी पोर्टल पर कभी भी आवेदन करें; पूर्व-स्वीकृति के बाद तय दिनों में काम पूरा कर अनुदान की माँग करनी होती है।

दूसरी योजनाओं के साथ

दस्तावेज़ इस पर कुछ नहीं कहते कि इसे दूसरी योजनाओं के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं। दोनों पर भरोसा करने से पहले कार्यालय से पूछें।