फसल और बीजNFSNM (NFSM)
नई किस्मों के प्रमाणित बीज की आधी कीमत, प्रति क्विंटल सीमा तक, 1 हेक्टेयर के लिए।
निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
बीज, फसल प्रदर्शन और उत्पादन सहायता।
फसल और बीजनई किस्मों के प्रमाणित बीज की आधी कीमत, प्रति क्विंटल सीमा तक, 1 हेक्टेयर के लिए।
फसल और बीजपंजीकृत पारंपरिक अनाज या मोटे अनाज की किस्म का बीज उगाने पर ₹1,000 प्रति क्विंटल।
फसल और बीजवर्षा-आधारित क्लस्टर में एकीकृत खेती प्रणाली अपनाने के लिए प्रति किसान परिवार ₹30,000 तक।
फसल और बीजआपकी अधिसूचित दालें, तिलहन या खोपरा पूरे एमएसपी पर ख़रीदे जाते हैं और 3 दिन के भीतर पैसा बैंक खाते में आता है — यदि आपने पंजीकरण कराया है और आपके राज्य में पीएसएस ख़रीद चल रही है।
फसल और बीजरबर लगाने या दोबारा लगाने पर ₹40,000 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 1 हेक्टेयर: पहले साल ₹30,000 और तीसरे साल ₹10,000।
फसल और बीजरबर लगाने या दोबारा लगाने पर ₹50,000 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 5 हेक्टेयर, पहले ही साल में (₹40,000 + ₹10,000)।
फसल और बीजबांस रोपण लागत का 50%, ₹1,20,000 प्रति हेक्टेयर मानक पर (पूर्वोत्तर में ₹1,30,000), अधिकतम 10 हेक्टेयर — पूर्वोत्तर के बाहर ₹60,000 प्रति हेक्टेयर।
फसल और बीजआपके खेत पर नज़दीकी दूरी (90 × 30 सेमी) वाले कपास का प्रदर्शन, ₹13,500 प्रति हेक्टेयर के इनपुट के साथ, 0.4 से 2 हेक्टेयर तक।
फसल और बीजधान की परती ज़मीन या अंतर-फ़सल जैसी नई ज़मीन पर दलहन बोने वाले किसानों को मुफ़्त दलहन बीज किट।
फसल और बीजआत्मा द्वारा भुगतान किया गया मुफ़्त किसान प्रशिक्षण: दूसरे राज्य में 7 दिन तक (₹1,500 प्रति दिन), राज्य के भीतर 5 दिन तक (₹1,250 प्रति दिन) या ज़िले में 2 दिन (₹500 प्रति दिन), जिसमें यात्रा, भोजन, ठहरना और प्रशिक्षण किट शामिल है।
फसल और बीजसरकार ₹15 और आपको मिले दाम के बीच का अंतर देती है (अधिकतम ₹9 प्रति नग), 50,000 नग तक — एक किसान को ₹3.5 लाख से ज़्यादा नहीं।
फसल और बीजधान, मूँगफली और दलहन के अधिक उपज वाले या प्रमाणित बीज का आधा दाम, 120 किलो (2 हेक्टेयर) तक।
फसल और बीजकम से कम 1,000 वर्ग मीटर (0.1 हेक्टेयर) पर श्री विधि (एसआरआई) से धान उगाने पर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर (रकबे के अनुपात में)।
फसल और बीजसीधी ख़रीद केंद्र पर बेचे गए ग्रेड ‘ए’ धान पर ख़रीद मूल्य के ऊपर ₹1,560 प्रति टन।
फसल और बीजस्वीकृत परियोजना लागत का 45% राज्य सब्सिडी के रूप में पहले ही, 45% बैंक ऋण; आपको 10% लगाना होता है।
फसल और बीजखेत के चारों ओर सौर, चेन-लिंक, चेन-सह-सौर या कांटेदार तार की बाड़ की लागत का 70%।
जैविक खेती और मृदा स्वास्थ्यप्राकृतिक खेती से उगाया गेहूँ सरकार ₹80 प्रति किलो पर ख़रीदती है (पहले ₹60)।
फसल और बीजराज्य की ख़रीद व्यवस्था में बेचे धान पर ₹3,100 प्रति क्विंटल — एमएसपी और बाक़ी अंतर ओडिशा की आदान सहायता से।
फसल और बीजखरीफ़ और रबी मौसम में लैम्प्स/पैक्स से लिए प्रमाणित या हाइब्रिड बीज की क़ीमत पर 50% छूट।
फसल और बीजसरकार को बेचे धान का कुल भुगतान ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से, प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक।
फसल और बीजछोटे या सीमांत किसान द्वारा सरकार को एमएसपी पर बेचे गए खरीफ़ धान के हर क्विंटल पर ₹200 अतिरिक्त।
फसल और बीजमिलेट्स की पंक्ति में बुवाई पर ₹8,500 प्रति हेक्टेयर — तीन साल में ₹4,000, ₹3,000 और ₹1,500।
फसल और बीजधान की खेती लायक रखे गए धान के खेत के मालिक को हर साल ₹3,000 प्रति हेक्टेयर।
फसल और बीजरबर उत्पादन प्रोत्साहन योजना में रबर का राज्य समर्थन मूल्य ₹250 प्रति किलो।
फसल और बीजरबी सीज़न में चंडीगढ़ कृषि विभाग से ख़रीदे उन्नत किस्म के गेहूँ बीज का आधा दाम।
फसल और बीजजैव उर्वरक, कीटनाशक, कल्चर, हार्मोन और सूक्ष्म पोषक मुफ़्त, ₹5,000 तक।
फल, सब्ज़ी और फूलबीज सहित ₹1,25,150 प्रति हेक्टेयर इकाई लागत का 75% — यानी ₹93,863 प्रति हेक्टेयर — 0.1 से 2 हेक्टेयर तक।
फसल और बीजसामुदायिक तारबंदी में — कम से कम 7 किसानों का समूह, एक घेरे में कम से कम 5 हेक्टेयर — घेरे पर पड़ने वाले हर किसान को 400 रनिंग मीटर तक की लागत का 70%, अधिकतम ₹56,000।
फसल और बीजधान की जगह दूसरी फसल वाले हर एकड़ पर ₹8,000।
फसल और बीजसीधी बिजाई (डीएसआर) से बोए गए धान के हर एकड़ पर ₹4,500।
फसल और बीजहर उस एकड़ पर ₹1,200 जहाँ आप पराली जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करते हैं।
फसल और बीजसीधी बिजाई (डीएसआर) से बोए गए धान के हर एकड़ पर ₹1,500।
फसल और बीजधान की जगह उगाई गई ख़रीफ़ मक्का के हर हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) पर ₹17,500 — केवल पठानकोट, गुरदासपुर, बठिंडा, संगरूर, जालंधर और कपूरथला ज़िलों में।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
नई किस्मों के प्रमाणित बीज की आधी कीमत, प्रति क्विंटल सीमा तक, 1 हेक्टेयर के लिए।
दालें: अक्टूबर 2025 में कैबिनेट ने अलग “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” (2025-26 से 2030-31) को मंज़ूरी दी, और 2026-27 के एनएफ़एसएनएम लक्ष्यों में केवल अनाज हैं — दलहन बीज अब किस मिशन में है, यह ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें। हर पंक्ति में लिखा है “लागत का 50% या ₹… प्रति क्विंटल (जो कम हो)”। 10 साल से पुरानी किस्मों की प्रति क्विंटल सीमा आधी है। बायो-फोर्टिफाइड धान और गेहूँ पर ₹500 प्रति क्विंटल अतिरिक्त (अनुलग्नक-II टिप्पणी)। बीज लेने के बाद दो साल तक यह सहायता या मिनीकिट दोबारा नहीं मिलता (2.B(viii))।
“Financial assistance is available, as specified in Annexure-II, for the distribution of certified seeds to farmers.”कृषि विभाग की ओर से इनपुट किट के साथ आपके अपने खेत पर फसल प्रदर्शन।
प्रति हेक्टेयर राशि विभाग प्रदर्शन पर खर्च करता है (इसमें खेत दिवस, प्रचार और निगरानी के ₹800 प्रति हेक्टेयर शामिल हैं); यह आपको नकद नहीं मिलती। अतिरिक्त खर्च किसान उठाता है, और एक ही किसान को दो साल तक दोबारा क्लस्टर में नहीं लिया जाता (1.A(iv)(f), (xv)(f))।
“Cluster demonstration serves as an adaptive research approach to display improved package of practices, cutting-edge technologies, or newly released and notified crop varieties or hybrids (less than 10 years old).”नई दलहन या मोटे अनाज की किस्म के प्रमाणित बीज की मुफ़्त मिनीकिट।
एक ही फसल या किस्म की मिनीकिट दो साल में एक बार ही (2.C(vi))। आकांक्षी ज़िलों को प्राथमिकता (2.C(xvi)(g))।
“In order to ensure rapid dissemination of seeds of newly released and notified high-yielding, climate-resilient, bio-fortified, resistant to insect, pest and diseases, short and medium duration varieties or hybrids (that are less than 10 years old) in Pulses and Nutri-Cereals assistance for distribution of certified seed in form of minikits free of cost to farmers is available under the mission.”आपके खेत के 0.40–1 हेक्टेयर पर कृषि विज्ञान केंद्र का प्रदर्शन, बीज, कीट प्रबंधन (आईपीएम) और पोषण प्रबंधन (आईएनएम) सामग्री की मुफ़्त किट के साथ।
आईसीएआर के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र चलाते हैं; मृदा स्वास्थ्य कार्ड ज़रूरी है और किट में रासायनिक खाद नहीं होती (केवल एफ़सीओ-स्वीकृत नैनो उर्वरक)। एक ही किसान को दो साल तक दोबारा नहीं लिया जाता (1.B(ix)(b))।
“Cluster Front Line Demonstrations (CFLDs) (by KVKs on Farmer’s Field): The CFLD serves as an adaptive research methodology aimed at showcasing improved package of practices, advanced technologies, and newly released or notified crop varieties or hybrids (less than 10 years old).”आपके खेत के 0.40–1 हेक्टेयर पर आईसीएआर संस्थान द्वारा नई किस्म का प्रदर्शन, बीज, आईपीएम और आईएनएम सामग्री की मुफ़्त किट के साथ।
पूर्वोत्तर राज्यों को प्राथमिकता (1.C(xi))। मृदा स्वास्थ्य कार्ड ज़रूरी है (1.C(xiii))।
“Front Line Demonstrations (FLDs) (by ICAR-Institutes on Farmer’s Field): The Front-Line Demonstration (FLD) is a technology adoption initiative designed to showcase the improved package of practises, latest released varieties, hybrids, and other technologies developed by ICAR-Institutes on selected farmers' fields.”सूक्ष्म पोषक तत्व, चूना, जिप्सम, सल्फ़र उर्वरक या जैव उर्वरक की आधी कीमत, ₹2,500 प्रति हेक्टेयर तक, एक मौसम में अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए।
केवल फसल के लिए कृषि विश्वविद्यालय/आईसीएआर द्वारा सुझाई मात्रा पर। राज्य चाहें तो यह न चलाएँ (और इस पर अपने एनएफ़एसएनएम फ़ंड का अधिकतम 5% ख़र्च कर सकते हैं); एक बार लेने के बाद दो साल तक दोबारा नहीं मिलता (2.D(iv), (vi))।
“Nutrient Management/Soil Ameliorants 50% of cost or Rs. 2500/Ha (whichever is less)”आईपीएम के लिए पौध संरक्षण दवाओं, जैव कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों की आधी कीमत, ₹2,500 प्रति हेक्टेयर तक, एक मौसम में अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए।
केवल कृषि विश्वविद्यालय/आईसीएआर द्वारा सुझाई मात्रा पर। राज्य चाहें तो यह न चलाएँ (अपने एनएफ़एसएनएम फ़ंड का अधिकतम 5%); एक बार लेने के बाद दो साल तक दोबारा नहीं मिलता (2.E(ii), (iv))।
“Plant Protection Measures 50% of cost or Rs. 2500/Ha (whichever is less)”पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में: आपके उगाए नई दलहन किस्मों के प्रमाणित बीज पर ₹5,000 प्रति क्विंटल का 75% (₹3,750) डीबीटी से।
यह तभी मिलता है जब आप किसी पात्र एजेंसी (राज्य बीज निगम, एनएससी, नेफेड, आईएफ़एफ़डीसी, कृभको, एचआईएल, एनएफ़एल, बीबीएसएसएल या आईसीएआर/कृषि विश्वविद्यालय बीज हब) के पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में बीज उगाते हैं: प्रति क्विंटल सहायता का 75% डीबीटी से आपको, 25% एजेंसी को; अधिकतम 5 हेक्टेयर के लिए, और एक ही उत्पादक को हर साल दोबारा नहीं लिया जाना चाहिए (2.A(ii), (v), (x))। एजेंसी को आपका बीज एमएसपी या बाज़ार भाव, जो ज़्यादा हो, उससे ऊपर ख़रीदना होगा (2.A(iv))। केवल 8 साल से नई किस्में या संकर।
“Under the component 75% of the assistance is meant for seed growers (through DBT) and 25% for seed producing agencies to meet their expenditure (including certification cost) if the seed is produced on seed growers field. … Pulses (for Varieties) Rs. 5,000/Qtls.”पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में: ज्वार, बाजरा, रागी या छोटे मोटे अनाज की नई किस्मों के प्रमाणित बीज पर ₹3,000 प्रति क्विंटल का 75% (₹2,250) डीबीटी से।
यह तभी मिलता है जब आप किसी पात्र एजेंसी (राज्य बीज निगम, एनएससी, नेफेड, आईएफ़एफ़डीसी, कृभको, एचआईएल, एनएफ़एल, बीबीएसएसएल या आईसीएआर/कृषि विश्वविद्यालय बीज हब) के पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में बीज उगाते हैं: प्रति क्विंटल सहायता का 75% डीबीटी से आपको, 25% एजेंसी को; अधिकतम 5 हेक्टेयर के लिए, और एक ही उत्पादक को हर साल दोबारा नहीं लिया जाना चाहिए (2.A(ii), (v), (x))। एजेंसी को आपका बीज एमएसपी या बाज़ार भाव, जो ज़्यादा हो, उससे ऊपर ख़रीदना होगा (2.A(iv))। केवल 8 साल से नई किस्में या संकर।
“Under the component 75% of the assistance is meant for seed growers (through DBT) and 25% for seed producing agencies to meet their expenditure (including certification cost) if the seed is produced on seed growers field. … Jowar (for Varieties) Rs. 3,000/Qtls.”पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में: मोटे अनाज (श्री अन्न) के संकर बीज पर ₹10,000 प्रति क्विंटल का 75% (₹7,500) डीबीटी से।
यह तभी मिलता है जब आप किसी पात्र एजेंसी (राज्य बीज निगम, एनएससी, नेफेड, आईएफ़एफ़डीसी, कृभको, एचआईएल, एनएफ़एल, बीबीएसएसएल या आईसीएआर/कृषि विश्वविद्यालय बीज हब) के पंजीकृत बीज उत्पादक के रूप में बीज उगाते हैं: प्रति क्विंटल सहायता का 75% डीबीटी से आपको, 25% एजेंसी को; अधिकतम 5 हेक्टेयर के लिए, और एक ही उत्पादक को हर साल दोबारा नहीं लिया जाना चाहिए (2.A(ii), (v), (x))। एजेंसी को आपका बीज एमएसपी या बाज़ार भाव, जो ज़्यादा हो, उससे ऊपर ख़रीदना होगा (2.A(iv))। केवल 8 साल से नई किस्में या संकर।
“Under the component 75% of the assistance is meant for seed growers (through DBT) and 25% for seed producing agencies to meet their expenditure (including certification cost) if the seed is produced on seed growers field. … Hybrids in Nutri-Cereals Rs. 10,000/Qtls.”एनएफ़एसएनएम फ़्लेक्सी फ़ंड में राज्य द्वारा चुनी गई नई, लागत घटाने वाली पद्धति या मशीन की आधी कीमत तक (प्रति किसान एक बार)।
केवल उन नवाचारों के लिए जो स्माम या किसी अन्य योजना में नहीं हैं (जैसे सटीक खेती, नई मशीनें) और जिन्हें राज्य ने आईसीएआर/कृषि विश्वविद्यालय की सलाह से कार्य योजना में रखा हो। एक बार लेने वाला किसान दोबारा पात्र नहीं (4(vi))। कृषि यंत्र और सिंचाई उपकरण अब यहाँ से नहीं मिलते।
“Financial assistance will cover up to 50% of the cost of each intervention.”आपके खेत के कम से कम 0.4 हेक्टेयर पर कपास का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, ज़रूरी इनपुट के साथ।
एनएफ़एसएनएम-कपास असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (i), पृ.39–40)। प्रदर्शन कम से कम 10 हेक्टेयर के क्लस्टर में (पूर्वोत्तर/पहाड़ी राज्यों में 2 हेक्टेयर)। पृ.44 की टिप्पणी के अनुसार “कपास उत्पादकता मिशन” शुरू होने पर ये कपास घटक बंद हो जाएँगे; केंद्रीय बजट 2026-27 में उसकी पंक्ति (कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन, बजट अनुमान 2025-26 ₹500 करोड़) है पर 2026-27 का प्रावधान नहीं।
“Front Line Demonstration (FLD): Four types of FLDs are proposed in Cotton namely: i. FLDs on Integrated Crop Management (ICM) including Integrated Nutrient Management (INM), Integrated Pest Management (IPM), soil & water management/ improved agronomic practices. ii. FLDs on Desi & Extra Long Staple (ELS) Cotton/FLDs on ELS Cotton Seed Production. iii. FLDs on Intercropping. iv. FLDs on Natural Colour Cotton”कपास या गन्ने के लिए पौध संरक्षण दवाओं और जैव-एजेंटों की आधी कीमत, ₹500 प्रति हेक्टेयर तक।
राज्य कृषि विभाग, गन्ना आयुक्त या आईसीएआर के माध्यम से वितरण। एनएफ़एसएनएम-कपास असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (i), पृ.39–40)। एनएफ़एसएनएम-गन्ना आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (iii), पृ.40)।
“Financial assistance of Rs. 500/ha or 50% of the cost, whichever is less will be provided to State Department of Agriculture (SDAs)/ICAR-Institutions for distribution of plant protection chemicals & bio-agents.”एजेंसी के लिए अपने खेत में जूट का आधार बीज उगाने पर: ₹12,000 प्रति क्विंटल का 75% (₹9,000)।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)। केवल 10 साल तक पुरानी किस्में (आवंटन के 20% तक 15 साल तक), कृषि विभाग, क्रिजैफ़, एनएससी, राज्य बीज निगम, कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर या केवीके के लिए उत्पादन। 75% किसान हिस्सा तब मिलता है जब बीज आपके खेत में उगे।
“Assistance of Rs. 12000/qtl will be provided to production of foundation seed & Rs. 5500/qtl to production of certified seed. … The incentives on production of Foundation Seed & Certified Seed will be shared on 75:25 bases between farmers & seed producing agencies in case when seeds are grown at farmer’s field.”एजेंसी के लिए अपने खेत में जूट का प्रमाणित बीज उगाने पर: ₹5,500 प्रति क्विंटल का 75% (₹4,125)।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)। 75% किसान हिस्सा तब मिलता है जब बीज किसी बीज उत्पादक एजेंसी के लिए आपके खेत में उगे।
“Assistance of Rs. 12000/qtl will be provided to production of foundation seed & Rs. 5500/qtl to production of certified seed. … The incentives on production of Foundation Seed & Certified Seed will be shared on 75:25 bases between farmers & seed producing agencies in case when seeds are grown at farmer’s field.”आपके खेत पर जूट का प्रदर्शन — सड़ाने (रेटिंग) की नई विधियों का, या उत्पादन तकनीक और अंतर-फसल का — इनपुट के साथ।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)।
“Assistance of Rs. 20000/- per FLDs (Rs. 17,000 for inputs & Rs. 3000 for contingency) will be provided for an area of 0.25 ha (75% of the area for alternating retting technology and 25% for traditional technologies) … The assistance of Rs. 9000/ha will be provided of which Rs. 1000/- will be for contingencies like field day, publicity materials, POL, visit of scientists, etc.”जूट के प्रमाणित बीज की आधी कीमत, ₹100 प्रति किलो तक।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)। वितरण मुख्यतः राज्य कृषि विभाग से (E(iv))।
“For State Department of Agriculture and ICAR assistance of Rs. 100/kg or 50% of the cost, whichever is less will be provided for distribution of certified seeds (not older than 10 years).”जूट के लिए नेल वीडर की आधी कीमत, प्रति मशीन ₹1,000 तक।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)।
“Rs. 1000/machine or 50% of the cost, whichever is less will be provided for distribution of nail weeder”क्रिजैफ़-सोना जैसे रेटिंग सूक्ष्मजीव मिश्रण की आधी कीमत, ₹25 प्रति किलो तक।
एनएफ़एसएनएम-जूट एवं संबद्ध रेशे आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (ii), पृ.40)।
“Rs. 25/kg or 50% of the cost, whichever is less will be provided for distribution of microbial consortium such as CRIJAF-SONA and similar other approved microbial formulation.”आपके गन्ने के खेत में दलहन, तिलहन या अनाज की अंतर-फसल, या सिंगल बड चिप रोपण का प्रदर्शन, इनपुट के साथ।
एनएफ़एसएनएम-गन्ना आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में चलता है (कार्यान्वयन एजेंसियाँ (iii), पृ.40)। कृषि विभाग, गन्ना आयुक्त, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय या केवीके कम से कम 10 हेक्टेयर के क्लस्टर में (पूर्वोत्तर/पहाड़ी राज्यों में 2 हेक्टेयर) आयोजित करते हैं।
“Assistance of Rs. 9000/Demonstration (1.0 ha each) will be provided of which Rs.1000/ - for contingencies like field day, publicity material, POL, visit of scientists etc.”नई किस्म के प्रमाणित बीज की आधी कीमत, प्रति क्विंटल सीमा तक, 1 हेक्टेयर के लिए।
केवल 10 साल तक पुरानी अधिसूचित किस्में या संकर; ट्रुथफुली लेबल्ड बीज पात्र नहीं। एक ही किसान को दो साल तक दोबारा नहीं। तालिका-B की टिप्पणी के अनुसार कार्यान्वयन एजेंसी इस प्रमाणित बीज पर किसी और राज्य या केंद्र योजना से सहायता नहीं ले सकती।
“Financial assistance of 50% or as decided by Seed Division, DA&FW, GoI (whichever is less) (Table-B) is available for distribution of Certified Seed to farmers.”ग्राम पंचायत स्तर पर 500 टन के बीज प्रसंस्करण संयंत्र और गोदाम की लागत का 50%, अधिकतम ₹40 लाख — केवल एफ़पीओ और बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए।
केवल वे एफपीओ और बहु-राज्य सहकारी समितियाँ जो बीज उत्पादन कर रही हों और जिन्हें कम से कम 2 साल का अनुभव हो। संयंत्र साल में 500 टन, 1 टन प्रति घंटा क्षमता का हो, साथ में 500 टन का गोदाम। ज़मीन और उसके पंजीकरण का खर्च नहीं मिलता, और एजेंसी को साथी पोर्टल इस्तेमाल करना होगा।
“Maximum assistance per unit is 50% for the complete setup cost limited to Rs. 40 Lakh. The rest amount will be borne by the agency.”पिछले 5 साल में अधिसूचित किस्म के प्रजनक (ब्रीडर) बीज की आधी कीमत, आधार बीज उगाने वाले बीज उत्पादक के लिए।
आपको अपनी या पट्टे की ज़मीन पर पंजीकृत बीज उत्पादक (व्यक्ति या संस्था) होना चाहिए, जिसे कोई पात्र सरकारी एजेंसी (राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज निगम, एनएससी, राष्ट्रीय बीज एजेंसियाँ, कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर संस्थान, केवीके, बीज हब) बीज दे; प्रति बीज उत्पादक अधिकतम 5 हेक्टेयर, और एक ही उत्पादक को हर साल दोबारा नहीं लिया जाना चाहिए। सब कुछ साथी पोर्टल पर दर्ज होता है। केवल अनाज, मोटे अनाज, दलहन, रेशा और चारा फसलें। एजेंसी को यह सहायता पूरी की पूरी आपको देनी होगी (iv)। एक ही मौसम में प्रजनक और आधार बीज दोनों की सहायता नहीं मिलती।
“Financial assistance of 50% on the Breeder Seed cost (100% GoI Share) decided by Seed Division, DA&FW, GoI, is available for distribution of Breeder Seed of newly released varieties/hybrids which are ≤5 years old (from the date of notification) to seed growers for foundation seed production (Table-B).”पिछले 8 साल में अधिसूचित किस्म के आधार बीज की आधी कीमत, प्रति क्विंटल सीमा तक, प्रमाणित बीज उगाने वाले बीज उत्पादक के लिए।
आपको अपनी या पट्टे की ज़मीन पर पंजीकृत बीज उत्पादक (व्यक्ति या संस्था) होना चाहिए, जिसे कोई पात्र सरकारी एजेंसी (राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज निगम, एनएससी, राष्ट्रीय बीज एजेंसियाँ, कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर संस्थान, केवीके, बीज हब) बीज दे; प्रति बीज उत्पादक अधिकतम 5 हेक्टेयर, और एक ही उत्पादक को हर साल दोबारा नहीं लिया जाना चाहिए। सब कुछ साथी पोर्टल पर दर्ज होता है। किसी किस्म के आधार बीज-I या II में से केवल एक बार सहायता मिलती है।
“Financial assistance of 50% on Foundation Seed cost (100% GoI) decided by the seed producing agency or as decided by Seed Division, DA&FW, GoI (whichever is less) (Table-B) is available for distribution of Foundation Seed only for the purpose of certified seed production to seed growers (which may be a seed grower or an organization) of newly released varieties/hybrids which are ≤8 years old (from the date of notification).”इस घटक में मिले प्रजनक या आधार बीज से उगाए बीज पर आपके द्वारा चुकाए बीज निरीक्षण (प्रमाणन) शुल्क का आधा, ₹400 प्रति हेक्टेयर तक।
केवल इस घटक में बाँटे गए प्रजनक या आधार बीज से उगाए बीज के निरीक्षण शुल्क पर (iv), और वह बीज प्रति बीज उत्पादक अधिकतम 5 हेक्टेयर के लिए मिलता है (प्रजनक बीज (v), आधार बीज (v)) — इसलिए हम अधिकतम 5 हेक्टेयर गिनते हैं। आधार और प्रमाणित दोनों बीज उत्पादन शामिल।
“The maximum assistance available will be upto 50% or maximum of Rs. 400/hectare (whichever is less) on inspection charges taken from Seed Growers or Agencies (for the seed production taken on their own farms).”पंजीकृत पारंपरिक किस्म के बीज की आधी कीमत, उसे उगाने और बढ़ाने के लिए।
केवल उन 10–15 पारंपरिक किस्मों (50 साल से ज़्यादा से उगाई जा रही) के लिए जिन्हें आपका राज्य चुनता है और पीपीवी एंड एफ़आरए पंजीकृत करता है, राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज निगम या कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से (घटक 4)। उत्पादन साथी पोर्टल पर दर्ज होता है।
“This assistance will cover 50% of the seed cost and will be shared between the central and state governments. The maximum assistance available will be equivalent to the assistance provided for foundation seed, as outlined in Table-B.”पंजीकृत पारंपरिक अनाज या मोटे अनाज की किस्म का बीज उगाने पर ₹1,000 प्रति क्विंटल।
केवल उन 10–15 पारंपरिक किस्मों (50 साल से ज़्यादा से उगाई जा रही) के लिए जिन्हें आपका राज्य चुनता है और पीपीवी एंड एफ़आरए पंजीकृत करता है, राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज निगम या कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से (घटक 4)। उत्पादन साथी पोर्टल पर दर्ज होता है।
“Seed production incentives are available @ Rs.1000 per quintal for Cereals, Millets, and Minor Millets, and @ Rs.2000 per quintal for Oilseeds and Pulses.”पंजीकृत पारंपरिक दलहन या तिलहन किस्म का बीज उगाने पर ₹2,000 प्रति क्विंटल।
केवल उन 10–15 पारंपरिक किस्मों (50 साल से ज़्यादा से उगाई जा रही) के लिए जिन्हें आपका राज्य चुनता है और पीपीवी एंड एफ़आरए पंजीकृत करता है, राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज निगम या कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से (घटक 4)। उत्पादन साथी पोर्टल पर दर्ज होता है।
“Seed production incentives are available @ Rs.1000 per quintal for Cereals, Millets, and Minor Millets, and @ Rs.2000 per quintal for Oilseeds and Pulses.”वर्षा-आधारित क्लस्टर में एकीकृत खेती प्रणाली अपनाने के लिए प्रति किसान परिवार ₹30,000 तक।
ज़मीन कितनी भी हो, हर परिवार के लिए एक जैसे ₹30,000, और यह अधिकतम सीमा है (“restricted to”)। प्रणाली में फसलों के साथ इनमें से कम से कम दो हों: मछली के बच्चे, मधुमक्खी इकाई, साइलेज गड्ढा, वर्मीकम्पोस्ट/जैविक खाद इकाई (अनुलग्नक-XLIV)। यह केवल राज्य द्वारा चुने गए वर्षा-आधारित क्लस्टरों में है।
“Support to each farming family under RAD component will be restricted to financial assistance of Rs.30,000/-.The amount of assistance shall be uniform for all farmers irrespective of the size of their land holding.”क्लस्टर प्रदर्शन वाले खेत को धान से मक्का, खरीफ़ दलहन या तिलहन में बदलने पर ₹5,000 प्रति हेक्टेयर नकद (₹2,500 भूमि विकास + ₹2,500 विपणन सहायता) — केवल पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
केवल फसल विविधीकरण कार्यक्रम: यह पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, धान वाले प्रमुख ज़िलों के अति-दोहित और गंभीर भूजल ब्लॉकों में चलता है (B.8.1)। आउटपुट-आउटकम ढाँचा 2026-27 में सीडीपी का कोई लक्ष्य नहीं है, इसलिए ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें कि इस साल सीडीपी चल रहा है या नहीं। नकद राशि मक्का, खरीफ़ दलहन (अरहर, मूँग, उड़द, ग्वार) और तिलहन (सोयाबीन, तिल) के लिए छपी है; पॉपलर/यूकेलिप्टस कृषि-वानिकी कॉलम में नकद हिस्सा नहीं है (तालिका की पंक्ति B और C में “-”)। आपको उन लाभार्थियों में होना चाहिए जिन्हें ज़िला कार्यक्रम प्रबंधन समूह 10 हेक्टेयर के क्लस्टर प्रदर्शन के लिए चुनता है (B.8.4 III)। दिशानिर्देश में प्रति किसान क्षेत्र की कोई सीमा नहीं छपी है।
“The financial assistance of Rs 10000 per hectare expect poplar based agro-forestry system will be given in the form of Rs. 5000 for critical inputs including honorarium & other activities, Rs.2500 for land development and Rs.2500 for marketing support. … * &** Land development charge and marketing support will he paid to the farmers in cash to support the losses incurred due to diversion of area from paddy to alternate crops.”आपकी धान वाली ज़मीन पर वैकल्पिक फसल का क्लस्टर प्रदर्शन, जिसमें ज़रूरी इनपुट (बीज, सूक्ष्म पोषक तत्व, बीज उपचार और पौध संरक्षण दवाएँ) कृषि विभाग देता है — केवल पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
केवल फसल विविधीकरण कार्यक्रम: यह पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, धान वाले प्रमुख ज़िलों के अति-दोहित और गंभीर भूजल ब्लॉकों में चलता है (B.8.1)। आउटपुट-आउटकम ढाँचा 2026-27 में सीडीपी का कोई लक्ष्य नहीं है, इसलिए ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें कि इस साल सीडीपी चल रहा है या नहीं। इनपुट बुवाई से पहले ज़िला कार्यक्रम प्रबंधन समूह देता है (B.8.5(i)); यह पैसा आपको नकद नहीं मिलता। हर 10 हेक्टेयर के क्लस्टर का नेतृत्व एक प्रगतिशील किसान करता है, जिसे एक बार ₹2,000 मानदेय मिलता है।
“Assistance @ of Rs.10000 per ha for Maize, kharif pulses ( arhar, mung bean, urd bean, cluster bean ), oilseeds ( soybean, til) and Rs.10000/- perhectare for poplar based agro-forestry system for sole crop. … An amount of Rs. 5000/- per hectare for inter-cropping of pulses and wheat will be provided to the farmers in the terms of critical inputs for organization of demonstrations.”मक्का शेलर, ड्रायर, स्प्रेयर, थ्रेशर, दलहन ग्रेडर या मक्का प्रसंस्करण इकाई की आधी कीमत, हर मशीन की तय सीमा तक, 10 किसानों के समूह के लिए जो इसे किराये पर चलाए — केवल पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
केवल फसल विविधीकरण कार्यक्रम: यह पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, धान वाले प्रमुख ज़िलों के अति-दोहित और गंभीर भूजल ब्लॉकों में चलता है (B.8.1)। आउटपुट-आउटकम ढाँचा 2026-27 में सीडीपी का कोई लक्ष्य नहीं है, इसलिए ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें कि इस साल सीडीपी चल रहा है या नहीं। मशीन 10 किसानों के समूह को मिलती है और किराये (कस्टम हायरिंग) पर चलती है, किसी एक किसान को नहीं। सूची “आदि” पर ख़त्म होती है: राज्य अपने सीडीपी आवंटन के 23% (मशीनरी, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए) से दूसरी फसल-विशेष मशीनें भी दे सकता है।
“The crop specific farm machinery will be provided to the farming community (group of 10 farmers) on custom hiring basis. An assistance @ of 50% cost of machine limiting to Rs. 25000/- for Maize sheller, Rs.5.00 lakh for portable maize dryer, Rs. 3000 for powered sprayer, Rs.25000 multi-crop thresher, Rs. 2.0 lakh for portable cleaner cum grader for pulses and Rs. 10.00 lakh maize processing unit etc.”आपकी अधिसूचित दालें, तिलहन या खोपरा पूरे एमएसपी पर ख़रीदे जाते हैं और 3 दिन के भीतर पैसा बैंक खाते में आता है — यदि आपने पंजीकरण कराया है और आपके राज्य में पीएसएस ख़रीद चल रही है।
पीएसएस में अधिसूचित दालें, तिलहन और खोपरा आते हैं। केंद्र की ख़रीद शुरू में राज्य के उस फसल के उत्पादन के 25% तक सीमित है (अध्याय III A(viii)), इसलिए हर किसान की पूरी फसल नहीं ख़रीदी जाती। तिलहन के लिए राज्य एक मौसम में पीएसएस या पीडीपीएस में से एक चुनता है (अध्याय I)। गेहूँ और धान की ख़रीद एफ़सीआई और राज्य एजेंसियाँ करती हैं, इस योजना में नहीं।
“Payment to Farmers: The payments to the farmers shall be released to their individual bank accounts though RTGS or NEFT within three days from actual delivery to the procuring agency.”जब राज्य में पीडीपीएस चल रही हो और आप अधिसूचित तिलहन मंडी में एमएसपी से कम पर बेचें, तो एमएसपी और बिक्री मूल्य (या आपका भाव कम हो तो राज्य का मॉडल भाव) का अंतर आपको मिलता है, अधिकतम एमएसपी का 15%।
एमएसपी या उससे अधिक पर बेचने पर कुछ नहीं मिलता (E.4(a))। केवल अपनी अधिसूचित एपीएमसी मंडी में तय अवधि में बिका औसत अच्छी गुणवत्ता का तिलहन गिना जाता है; केवल नमूने पर हुए सौदे नहीं (E.2.1, 2.10)। भुगतान उतनी मात्रा तक होता है जितनी राज्य आपके बोए रकबे से अनुमानित करता है (E.3.3)। केंद्र राज्य के उत्पादन के 40% तक पीडीपीएस में सहायता देता है (4(c))।
“The farmer would be paid the difference between the MSP and the estimated modal price for two weeks /actual sale price subject to a maximum of 15 per cent of the MSP value based on MSP notified for the Year/Season.”बिना एमएसपी वाली जल्दी ख़राब होने वाली फसलों के दाम पिछले सामान्य मौसम से कम से कम 10% गिरने पर, यदि राज्य बाज़ार हस्तक्षेप शुरू करे, तो वह तय बाज़ार हस्तक्षेप मूल्य पर ख़रीदता है — या उस मूल्य और आपके बिक्री मूल्य का अंतर, उसके 25% तक, आपको देता है।
एमआईएस तभी चलती है जब राज्य सरकार प्रस्ताव भेजे और विभाग मंज़ूर करे, और बाज़ार भाव कम से कम 10% गिरे हों (एमआईएस (b))। बाज़ार हस्तक्षेप मूल्य उत्पादन लागत से अधिक नहीं होता (एमआईएस (e)), और उत्पादन के 25% तक ही लागू है (एमआईएस (g), (h))। ख़रीद सहकारी समितियों, किसान संगठनों या सीधे किसानों से होती है (एमआईएस (k))।
“Option for price deficiency payment to farmers : In place of physical procurement, States may have an option to make differential payment between Market Intervention Price (MIP) and Selling Price, subject to coverage of 25% of production of crops and maximum of price difference upto 25% of MIP.”रबर लगाने या दोबारा लगाने पर ₹40,000 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 1 हेक्टेयर: पहले साल ₹30,000 और तीसरे साल ₹10,000।
4.00 हेक्टेयर तक रबर वाले उत्पादकों के लिए; धान के खेत और वन भूमि पात्र नहीं; कम से कम 420 पौधे/हेक्टेयर बनाए रखने होंगे। ये दरें 2025-26 रोपण दौर की हैं; बाद की किस्तें 2025-26 के बाद की नई प्राकृतिक रबर योजना मंज़ूर होने पर निर्भर हैं, और जाँच के समय 2026-27 का दौर घोषित नहीं हुआ था।
“Traditional Region: Assistance - Rs. 40,000/- ha – in two instalments 1st year- Rs.30000/- ( Rs.15000/- per ha as planting assistance + Rs. 15000/- per ha as grant for planting material (Poly bag/ Root trainer plants) of advanced growth. The assistance will be @ Rs 30/- per plant limited to 500 plants per ha - single installment) 3rd year- Rs.10000/- per ha as planting assistance”रबर लगाने या दोबारा लगाने पर ₹50,000 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 5 हेक्टेयर, पहले ही साल में (₹40,000 + ₹10,000)।
5.00 हेक्टेयर से अधिक रबर न रखने वाले उत्पादकों के लिए; इनरोड परियोजना में लगाए क्षेत्र पात्र नहीं; पुनर्रोपण पुराने पेड़ हटाने के बाद ही। ये दरें 2025-26 रोपण दौर की हैं; बाद की किस्तें 2025-26 के बाद की नई प्राकृतिक रबर योजना मंज़ूर होने पर निर्भर हैं, और जाँच के समय 2026-27 का दौर घोषित नहीं हुआ था।
“Non-traditional area/North Eastern Region — Planting assistance at the rate of Rs. 50,000 per ha limited to 5.00 ha for new planting and replanting with PB/RTPs. The assistance shall be paid in two installments in the first year of planting itself. The first installment of Rs.40,000 per ha and second installment of Rs.10,000 per ha.”बांस रोपण लागत का 50%, ₹1,20,000 प्रति हेक्टेयर मानक पर (पूर्वोत्तर में ₹1,30,000), अधिकतम 10 हेक्टेयर — पूर्वोत्तर के बाहर ₹60,000 प्रति हेक्टेयर।
मेड़ पर रोपण ₹300 प्रति पौधे से गिना जाता है। वन अधिकार (एफ़आरए पट्टा) वाले अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों को 90% (अनुलग्नक I, टिप्पणी 3)। दूसरे साल की राशि पौधों के जीवित रहने पर निर्भर है। एनबीएम राज्य बांस मिशन चलाता है और राज्य के साथ मिलकर वित्त देता है (60:40; पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में 90:10, §8), इसलिए यह वहीं मिलता है जहाँ राज्य इसे अपनी योजना में शामिल करे।
“Plantation (Using planting material from the accredited/approved nurseries) — Rs.1.20 lakh per ha (min 400 plants/ha) or Rs. 300/- per plant (for boundary plantation with nominal spacing of 5m). For the NER States cost norm shall be Rs.1.30 lakh per ha. — 100% of cost to Govt. sector. For private sector 50% of the cost upto 10 Ha over 2 years (60:40). No subsidy will be provided for private plantation above 10 ha per person.”मौजूदा बांस बागान सुधारने के लिए ₹30,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹15,000), अधिकतम 2 हेक्टेयर, 5 साल में एक बार।
केवल उन मौजूदा बागानों के लिए जिन्हें पिछले 5 साल में एनबीएम सहायता नहीं मिली। पूर्वोत्तर में लागत मानक 10% अधिक है (अनुलग्नक I, टिप्पणी 1); हम सामान्य मानक दिखाते हैं।
“Stock Improvement — Rs. 30,000 per ha once in 5 years. — For Government 100%. For private 50% limited to 2 ha per beneficiary. For existing plantations where no NBM assistance received in past 5 years.”आपके खेत पर नज़दीकी दूरी (90 × 30 सेमी) वाले कपास का प्रदर्शन, ₹13,500 प्रति हेक्टेयर के इनपुट के साथ, 0.4 से 2 हेक्टेयर तक।
प्रदर्शन प्लॉट कम से कम 0.4 हेक्टेयर और एक किसान के लिए साल में 2 हेक्टेयर से ज़्यादा नहीं होगा; एक ही किसान को दोबारा नहीं चुना जाता, और जिसे किसी दूसरी योजना में प्रदर्शन मिल चुका है उसे भी नहीं (13.1.2(iv)–(vi), पृ.15)। पहले बीज दिया जाता है; बाक़ी राशि जैव-उर्वरक, सूक्ष्म पोषक, पौध-वृद्धि नियामक और पौध संरक्षण पर जाती है। रासायनिक खाद नहीं मिलती — वह आप ख़ुद ख़रीदें (13.1.4, पृ.16)। सहायता डीबीटी से आती है — नक़द या पॉइंट-ऑफ़-सेल पर इनपुट के रूप में (धारा 8, पृ.9)। छपी दर में ₹500 प्रति हेक्टेयर फ़ील्ड-डे का है, जो विभाग ख़र्च करता है; यहाँ दिखाई गई राशि इनपुट वाला हिस्सा है।
“1.1 Closer Spacing (CS) Technology Rs. 14000/Ha (Inputs: Rs.13500 Field day: Rs. 500)”आपके खेत पर सघन रोपण (90 × 15 सेमी) वाले कपास का प्रदर्शन, ₹18,000 प्रति हेक्टेयर के इनपुट के साथ, 0.4 से 2 हेक्टेयर तक।
प्रदर्शन प्लॉट कम से कम 0.4 हेक्टेयर और एक किसान के लिए साल में 2 हेक्टेयर से ज़्यादा नहीं होगा; एक ही किसान को दोबारा नहीं चुना जाता, और जिसे किसी दूसरी योजना में प्रदर्शन मिल चुका है उसे भी नहीं (13.1.2(iv)–(vi), पृ.15)। पहले बीज दिया जाता है; बाक़ी राशि जैव-उर्वरक, सूक्ष्म पोषक, पौध-वृद्धि नियामक और पौध संरक्षण पर जाती है। रासायनिक खाद नहीं मिलती — वह आप ख़ुद ख़रीदें (13.1.4, पृ.16)। सहायता डीबीटी से आती है — नक़द या पॉइंट-ऑफ़-सेल पर इनपुट के रूप में (धारा 8, पृ.9)। छपी दर में ₹500 प्रति हेक्टेयर फ़ील्ड-डे का है, जो विभाग ख़र्च करता है; यहाँ दिखाई गई राशि इनपुट वाला हिस्सा है।
“1.2 High Density Planting System (HDPS) Technology Rs. 18500/Ha (Inputs: Rs.18000 Field day: Rs. 500)”आपके खेत पर लंबे रेशे (ईएलएस) वाले कपास का प्रदर्शन, ₹9,000 प्रति हेक्टेयर के इनपुट के साथ, 0.4 से 2 हेक्टेयर तक।
प्रदर्शन प्लॉट कम से कम 0.4 हेक्टेयर और एक किसान के लिए साल में 2 हेक्टेयर से ज़्यादा नहीं होगा; एक ही किसान को दोबारा नहीं चुना जाता, और जिसे किसी दूसरी योजना में प्रदर्शन मिल चुका है उसे भी नहीं (13.1.2(iv)–(vi), पृ.15)। पहले बीज दिया जाता है; बाक़ी राशि जैव-उर्वरक, सूक्ष्म पोषक, पौध-वृद्धि नियामक और पौध संरक्षण पर जाती है। रासायनिक खाद नहीं मिलती — वह आप ख़ुद ख़रीदें (13.1.4, पृ.16)। सहायता डीबीटी से आती है — नक़द या पॉइंट-ऑफ़-सेल पर इनपुट के रूप में (धारा 8, पृ.9)। छपी दर में ₹500 प्रति हेक्टेयर फ़ील्ड-डे का है, जो विभाग ख़र्च करता है; यहाँ दिखाई गई राशि इनपुट वाला हिस्सा है।
“1.3 Extra Long Staple (ELS) cotton production technology Rs. 9500/Ha (Inputs: Rs. 9000 Field day: Rs. 500)”आपके खेत पर एकीकृत फ़सल प्रबंधन (आईपीएम, आईएनएम, अंतर-फ़सल) वाले कपास का प्रदर्शन, ₹7,000 प्रति हेक्टेयर के इनपुट के साथ, 0.4 से 2 हेक्टेयर तक।
प्रदर्शन प्लॉट कम से कम 0.4 हेक्टेयर और एक किसान के लिए साल में 2 हेक्टेयर से ज़्यादा नहीं होगा; एक ही किसान को दोबारा नहीं चुना जाता, और जिसे किसी दूसरी योजना में प्रदर्शन मिल चुका है उसे भी नहीं (13.1.2(iv)–(vi), पृ.15)। पहले बीज दिया जाता है; बाक़ी राशि जैव-उर्वरक, सूक्ष्म पोषक, पौध-वृद्धि नियामक और पौध संरक्षण पर जाती है। रासायनिक खाद नहीं मिलती — वह आप ख़ुद ख़रीदें (13.1.4, पृ.16)। सहायता डीबीटी से आती है — नक़द या पॉइंट-ऑफ़-सेल पर इनपुट के रूप में (धारा 8, पृ.9)। छपी दर में ₹500 प्रति हेक्टेयर फ़ील्ड-डे का है, जो विभाग ख़र्च करता है; यहाँ दिखाई गई राशि इनपुट वाला हिस्सा है।
“1.4 Integrated Crop Management (ICM) in cotton Rs. 7500/Ha (Inputs: Rs. 7000 Field day: Rs. 500)”30 किसानों के बैच में कपास की उन्नत खेती पर दो दिन का मुफ़्त फ़सल-प्रणाली प्रशिक्षण (इस पर प्रति किसान प्रति दिन ₹250 ख़र्च होते हैं)।
“Every training will consist of two sessions involving 30 farmers to inculcate the knowledge of improved package of practices in the farmers. … Support is provided for 30 participants, with funding of Rs. 15,000 per two-day training (Rs. 250 per farmer per day).”धान की परती ज़मीन या अंतर-फ़सल जैसी नई ज़मीन पर दलहन बोने वाले किसानों को मुफ़्त दलहन बीज किट।
विज्ञप्ति में किट का आकार और किसानों के चयन का तरीक़ा नहीं छपा। एनएफ़एसएनएम के दलहन मिनीकिट इस मिशन के शुरू होने पर बंद हो जाते हैं (एनएफ़एसएनएम दिशानिर्देश 2025-26, पृ.32)।
“The Mission also seeks to expand the area under pulses by an additional 35 lakh hectares by targeting rice fallow areas and other diversifiable lands, supported by promoting intercropping and crop diversification. For this, 88 lakh seed kit will be distributed free of cost to the farmers.”भाग लेने वाले राज्यों में, अगर आप नेफ़ेड या एनसीसीएफ़ में पंजीकरण कराकर अनुबंध करते हैं, तो वे चार साल तक आपकी पूरी तुअर, उड़द और मसूर एमएसपी पर ख़रीदेंगे।
केवल उन राज्यों में जो इसमें शामिल हों, और केवल उन किसानों के लिए जो नेफ़ेड या एनसीसीएफ़ में पंजीकरण कराकर अनुबंध करें। एमएसपी हर मौसम सरकार तय करती है।
“A major feature of the Mission will be assured maximum procurement of Tur, Urad, and Masoor under Price Support Scheme (PSS) of PM-AASHA. NAFED and NCCF will undertake 100% procurement in participating states for the next four years from farmers who register with these agencies and enter into agreements.”आत्मा द्वारा भुगतान किया गया मुफ़्त किसान प्रशिक्षण: दूसरे राज्य में 7 दिन तक (₹1,500 प्रति दिन), राज्य के भीतर 5 दिन तक (₹1,250 प्रति दिन) या ज़िले में 2 दिन (₹500 प्रति दिन), जिसमें यात्रा, भोजन, ठहरना और प्रशिक्षण किट शामिल है।
लागत मानक में किसान की यात्रा, भोजन, ठहरना, स्थल, प्रशिक्षण सामग्री, किट और इनपुट शामिल हैं (अनुलग्नक-V(a) B.2 टिप्पणी, पृ.84)। ज़िला-स्तरीय प्रशिक्षण आरपीएल आधारित है और प्रगतिशील किसान का प्रमाणपत्र देता है (B.2(c), पृ.85)। कम से कम 50% लाभार्थी छोटे और सीमांत किसान और 30% महिला किसान होने चाहिए; प्रदर्शन और प्रशिक्षण के व्यक्तिगत लाभार्थी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत चुनती है, और पंचायतें बारी-बारी से शामिल होती हैं (धारा 9.3(ii)(a)–(e), पृ.53–54)।
“Training of farmers for maximum period of 7days. a) Inter-State Rs.1500/farmer/day b) Within State Rs.1250/farmer/day c) Within district Rs.500 RPL based training /farmer/day”आपके खेत के लगभग एक एकड़ (0.4 हेक्टेयर) पर, या किसी संबद्ध गतिविधि में, नई तकनीक का प्रदर्शन — ₹6,000 तक, ख़र्च आत्मा देती है।
प्रदर्शन के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जाँच ज़रूरी है (B.3 टिप्पणी, पृ.85)। कम से कम 50% लाभार्थी छोटे और सीमांत किसान और 30% महिला किसान होने चाहिए; प्रदर्शन और प्रशिक्षण के व्यक्तिगत लाभार्थी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत चुनती है, और पंचायतें बारी-बारी से शामिल होती हैं (धारा 9.3(ii)(a)–(e), पृ.53–54)।
“Demonstrations a) Demonstration (Agri.) Rs. 6000/ demonstration of 1 acre b) Demonstration (allied sector) Rs. 6000/ demonstration”अच्छे खेत और संस्थान देखने के लिए मुफ़्त भ्रमण: दूसरे राज्य में (₹1,500 प्रति दिन), राज्य के भीतर (₹1,000 प्रति दिन) या ज़िले के भीतर (₹500 प्रति दिन), यात्रा और ठहरने का ख़र्च दिया जाता है।
पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में मानक ₹2,000 प्रति दिन (दूसरा राज्य) और ₹1,250 प्रति दिन (राज्य के भीतर) है। दूसरे राज्य का भ्रमण अधिकतम 7 दिन, राज्य के भीतर 5 दिन और ज़िले के भीतर 1 दिन का होता है, यात्रा का समय छोड़कर; ख़र्च असल यात्रा और ठहरने-खाने तक सीमित है (B.4, पृ.85–86)। कम से कम 50% लाभार्थी छोटे और सीमांत किसान और 30% महिला किसान होने चाहिए; प्रदर्शन और प्रशिक्षण के व्यक्तिगत लाभार्थी ग्राम सभा या ग्राम पंचायत चुनती है, और पंचायतें बारी-बारी से शामिल होती हैं (धारा 9.3(ii)(a)–(e), पृ.53–54)।
“Exposure visit of farmers- maximum duration of 5 days excluding travel time Inter State Rs.1500/farmer/day Within the State Rs.1000/farmer/day Within District Rs.500/farmer/day”अधिकृत एजेंसियों को बेचे गए धान पर सरकार आपके दाम और एमएसपी + ₹2 प्रति किलो के बीच का अंतर देती है, हर सीज़न 15,000 किलो तक।
दोनों सीज़न अलग-अलग गिने जाते हैं। कम से कम 100 किलो बेचना ज़रूरी (पैरा iv (b))। हर सीज़न की शुरुआत में एमएसपी घोषित होने के बाद विभाग सुनिश्चित मूल्य तय करता है (पैरा iv (a))। यह पहले के तय ₹22 प्रति किलो की जगह है।
“(i) Considering higher labour and other input cost, the assured price of paddy shall be revised and fixed Rs. 2/- over and above MSP announced by Government of India. … (b) Difference between assured price fixed by the Agriculture department and actual price received by farmers for sale of paddy to the authorized purchase agencies shall be provided under the scheme of assured price. A farmer will be entitled for assistance for maximum of 15000 kgs. per season for production of paddy @ 5000 kgs. per ha.”धान, मूँगफली और दलहन के अधिक उपज वाले या प्रमाणित बीज का आधा दाम, 120 किलो (2 हेक्टेयर) तक।
मिलकर खेती करने वाले किसान क्लब, संघ और समूहों पर 120 किलो की सीमा नहीं, पर उनके खेती वाले रकबे जितनी ही मदद (धारा 5)। निदेशालय में पंजीकृत धान ट्रांसप्लांटर सेवा प्रदाता भी मैट नर्सरी के धान बीज पर 50% का दावा कर सकते हैं (धारा 4(iii), 5)।
“All such seeds will be sold at 50% subsidy provided at point of sale through all branches of the above four agencies as well as departmental sub-offices. A farmer will be provided assistance to purchase a maximum of 120 kg. seed to cover 2.0 ha area. … subsidy of 50% of standard cost fixed by department from time to time or actual cost whichever is less shall be reimbursed to concerned farmer on production of bills towards purchase of seeds.”कम से कम 1,000 वर्ग मीटर (0.1 हेक्टेयर) पर श्री विधि (एसआरआई) से धान उगाने पर ₹20,000 प्रति हेक्टेयर (रकबे के अनुपात में)।
1,000 वर्ग मीटर (0.1 हेक्टेयर) से कम पर कुछ नहीं मिलता। किसानों का चयन ज़ोनल कृषि अधिकारी करते हैं; विभाग के निर्देश मानने होंगे और दूसरे किसानों को खेत देखने देना होगा (धारा 4)। अधिकतम रकबे की कोई सीमा नहीं छपी।
“Incentives to SRI farmers:— An amount of Rs. 20,000/- per hectare will be provided on pro rata basis to the farmers adopting SRI in a minimum area of 1000 m2 area to compensate towards the additional labour required for row planting and conoweeder operation etc.”नई किस्म का प्रदर्शन प्लॉट, सामग्री और मज़दूरी की मदद के साथ: प्रति 1,000 वर्ग मीटर ₹7,000 (धान), ₹4,500 (दलहन) या ₹5,500 (तिलहन), 2,000 वर्ग मीटर तक।
मशीन किराया यहाँ नहीं मिलता क्योंकि वह दूसरी राज्य योजना में है (धारा 5(D)(vii))। चुने गए किसानों को नई किस्मों के मुफ़्त बीज मिनीकिट (धान 2 किलो, दलहन 1 किलो, मूँगफली 5 किलो, मिलेट 0.5 किलो) भी मिलते हैं (धारा 5(A))।
“The total assistance provided crop-wise for 1000 sq. mts. demonstration will be as under: Paddy Rs. 3000/- Rs. 4000/- Rs. 7000/-; Pulse Rs. 1500/- Rs. 3000/- Rs. 4500/-; Oilseed Rs. 2500/- Rs. 3000/- Rs. 5500/- … (x) A farmer shall be eligible for maximum area of 2000 sq. mts. under this component.”सीधी ख़रीद केंद्र पर बेचे गए ग्रेड ‘ए’ धान पर ख़रीद मूल्य के ऊपर ₹1,560 प्रति टन।
“The Government of Tamil Nadu is providing an incentive of Rs.1560/-per metric tonne for Grade ‘A’ and Rs.1310/- per metric tonne for common varieties of paddy procured directly from the farmers.”सीधी ख़रीद केंद्र पर बेचे गए सामान्य किस्म के धान पर ख़रीद मूल्य के ऊपर ₹1,310 प्रति टन।
“The Government of Tamil Nadu is providing an incentive of Rs.1560/-per metric tonne for Grade ‘A’ and Rs.1310/- per metric tonne for common varieties of paddy procured directly from the farmers.”खेत के चारों ओर सौर, चेन-लिंक, चेन-सह-सौर या कांटेदार तार की बाड़ की लागत का 70%।
योजना पृष्ठ के अनुसार 2023-24 से सौर, इंटरलिंक चेन, चेन-सह-सौर और कांटेदार तार की बाड़ पर 70% लागू है। 2026-27 के बजट भाषण में इसे “मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना” (₹10 करोड़) कहा गया है; यह 2016-17 में मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के नाम से शुरू हुई थी।
“For all type of Fencings 30% of the total cost of construction has to bear by the beneficiary and 70% assistance will be provided by the Govt.”राज्य की ख़रीद व्यवस्था में बेचे धान पर ₹3,100 प्रति क्विंटल — एमएसपी और बाक़ी अंतर ओडिशा की आदान सहायता से।
सहायता की रुपये में राशि ₹3,100 में से उस मौसम का एमएसपी घटाकर बनती है, इसलिए एमएसपी बढ़ने पर यह घटती है। धान बीज उत्पादकों को OSSC का बीज मूल्य (एमएसपी + 30%) और वही आदान सहायता (₹3,100 घटा एमएसपी) मिलती है (धारा 3(c)(ii))। केवल वही धान गिना जाता है जो राज्य की एजेंसियाँ सच में ख़रीदती हैं।
“Farmers who have registered to sell paddy through the existing mechanism of the Department of Food Supplies and Consumer Welfare will be paid Rs. 3100 per quintal, including the input assistance under Samrudha Krushak Yojana and the prevailing minimum support price (MSP).”खरीफ़ और रबी मौसम में लैम्प्स/पैक्स से लिए प्रमाणित या हाइब्रिड बीज की क़ीमत पर 50% छूट।
इसी योजना के बिरसा फ़सल विस्तार हिस्से में मोटे अनाज (मडुआ, मक्का), दलहन और तिलहन के बीज, पोषक तत्व और कीट-प्रबंधन सामग्री भी रियायती दर पर दी जाती है (क्रम 1); उसकी दर नहीं छपी।
“Within the framework of this scheme, seeds are made available to farmers of the state through LAMPS/PACS on 50 percent subsidy in Kharif and Rabi seasons.”सरकार को बेचे धान का कुल भुगतान ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से, प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक।
यह बजट भाषण का विवरण है। प्रति एकड़ आदान सहायता (एमएसपी से ऊपर की राशि) और भुगतान का समय तय करने वाला योजना आदेश विभाग के पोर्टल से नहीं मिल सका, इसलिए हम केवल कुल ₹3,100 दिखाते हैं। भाषण यह भी कहता है कि दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास योजना में जोड़े गए हैं, पर उनकी दर नहीं बताता।
“हमने मोदी की गारंटी अंतर्गत अन्नदाताओं से प्रति एकड़ 21 क्विंटल, 3100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी सुनिश्चित करने के लिए कृषक उन्नति योजना प्रारंभ की है।”छोटे या सीमांत किसान द्वारा सरकार को एमएसपी पर बेचे गए खरीफ़ धान के हर क्विंटल पर ₹200 अतिरिक्त।
भाषण यह भी कहता है कि सरकार “आने वाले वर्षों में धान का एमएसपी चरणबद्ध तरीक़े से ₹3,100 तक बढ़ाएगी”। 22 जून 2026 के 2026-27 बजट भाषण में घोषित। राज्य के पोर्टलों पर अभी इसका लागू करने वाला आदेश या दिशानिर्देश नहीं मिला, इसलिए पात्रता और आवेदन का तरीक़ा बदल सकता है — अपने प्रखंड कृषि कार्यालय से पुष्टि करें।
“For further support to small and marginal farmers, I propose to provide additional incentive of ₹200 over and above the MSP per quintal of paddy in Kharif season.”मिलेट्स की पंक्ति में बुवाई पर ₹8,500 प्रति हेक्टेयर — तीन साल में ₹4,000, ₹3,000 और ₹1,500।
केवल नीति में चुने गए विकासखंडों में (परिशिष्ट-I में प्रथम चरण के विकासखंड)। व्यक्तिगत किसान को 1 हेक्टेयर तक (समूह को 5 हेक्टेयर तक) तालिका की पूरी राशि मिलती है; उससे अधिक क्षेत्र पर उसका 50% (पैरा 4.1) — हम 1 हेक्टेयर की राशि दिखा रहे हैं।
“पंक्ति में बुआई विधि हेतु प्रोत्साहन (प्रति हेक्टेयर) — प्रथम वर्ष रू0 4000, द्वितीय वर्ष रू0 3000, तृतीय वर्ष रू0 1500, कुल योग रू0 8500”अन्य विधि से बोए मिलेट्स पर ₹4,250 प्रति हेक्टेयर — तीन साल में ₹2,000, ₹1,500 और ₹750।
केवल नीति में चुने गए विकासखंडों में (परिशिष्ट-I में प्रथम चरण के विकासखंड)। व्यक्तिगत किसान को 1 हेक्टेयर तक (समूह को 5 हेक्टेयर तक) तालिका की पूरी राशि मिलती है; उससे अधिक क्षेत्र पर उसका 50% (पैरा 4.1) — हम 1 हेक्टेयर की राशि दिखा रहे हैं।
“अन्य पद्धतियों के लिए प्रोत्साहन (प्रति हेक्टेयर) — प्रथम वर्ष रू0 2000, द्वितीय वर्ष रू0 1500, तृतीय वर्ष रू0 750, कुल योग रू0 4250”समूह द्वारा ख़रीद के लिए लाए गए मिलेट्स के पहले 15 क्विंटल पर ₹300 प्रति क्विंटल, उसके बाद ₹150 प्रति क्विंटल।
पंजीकृत किसानों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी और एनआरएलएम समूहों, एफ़पीओ और वीर माधो सिंह भण्डारी सामूहिक सहकारी खेती के क्लस्टरों के लिए। 15 क्विंटल से अधिक पर दर ₹150 प्रति क्विंटल है — हम केवल पहले 15 क्विंटल गिन रहे हैं।
“इस नीति के अन्तर्गत, यह धनराशि रू0 300.00/क्विंटल, 15 क्विंटल तक तथा रू0 150.00/क्विंटल, 15 क्विंटल से अधिक के अंतःग्रहण हेतु होगी।”धान के लिए हर मौसम ₹5,000 प्रति हेक्टेयर लागत सहायता।
“In all seasons, input assistance of ₹5000, production bonus of ₹1000, and a Royalty of ₹3000 to land owners per hectare are being provided. Assistance of up to ₹40,000 per hectare is provided for cultivating paddy in barren land.”धान के लिए हर मौसम ₹1,000 प्रति हेक्टेयर उत्पादन बोनस।
“In all seasons, input assistance of ₹5000, production bonus of ₹1000, and a Royalty of ₹3000 to land owners per hectare are being provided. Assistance of up to ₹40,000 per hectare is provided for cultivating paddy in barren land.”बंजर (परती) ज़मीन पर धान उगाने के लिए ₹40,000 प्रति हेक्टेयर तक।
“In all seasons, input assistance of ₹5000, production bonus of ₹1000, and a Royalty of ₹3000 to land owners per hectare are being provided. Assistance of up to ₹40,000 per hectare is provided for cultivating paddy in barren land.”रबर उत्पादन प्रोत्साहन योजना में रबर का राज्य समर्थन मूल्य ₹250 प्रति किलो।
आदेश समर्थन मूल्य तय करता है, भुगतान का फ़ॉर्मूला नहीं, इसलिए हम प्रति किलो कोई रुपये की राशि नहीं दिखाते: आपको क्या मिलेगा यह आपको मिले बाज़ार भाव पर निर्भर है। योजना 2015 में ₹150/किलो से शुरू हुई (आदेश 269/2015/वित्त) और अक्टूबर 2025 में ₹200 हुई (आदेश 134/2025/वित्त); 29.01.2026 का बजट भाषण (अनुच्छेद 104) भी ₹200 बताता है।
“റബ്ബർ ഉത്പാദന ഇൻസെന്റീവ് പദ്ധതി പ്രകാരം നിശ്ചയിച്ചിട്ടുള്ള റബ്ബറിന്റെ താങ്ങുവില കിലോഗ്രാമിന് 200 രൂപയിൽ നിന്നും 250 രൂപയാക്കി വർദ്ധിപ്പിച്ചുകൊണ്ട് ഉത്തരവ് പുറപ്പെടുവിക്കുന്നു.”रबी सीज़न में चंडीगढ़ कृषि विभाग से ख़रीदे उन्नत किस्म के गेहूँ बीज का आधा दाम।
पेज पर प्रति किसान कोई मात्रा सीमा या दाम नहीं छपा; छूट विभाग के बीज दाम का आधा है। चंडीगढ़ में लगभग 912 हेक्टेयर ही खेती की ज़मीन है, ज़्यादातर चारे के लिए।
“Distribution of wheat seed on 50% discount:- … To address this challenge during the Rabi season, the Department of Agriculture procures quality wheat seeds of improved varieties and supplies them to farmers at a 50% subsidize.”धान, बाजरा, दलहन आदि के बीज की आधी लागत, ₹1,000 तक।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। ज़िला पंचायत (क्रम 1–7) और ग्राम पंचायतें (जैविक खाद) चलाती हैं। दमण ज़िला पंचायत के सितंबर 2023 के परिपत्र में 2023-24 के लिए यही दरें दी गई थीं (फ़ॉर्म 25.09.2023 तक, ज़मीन के 1/14 और आधार के साथ, पहले आओ पहले पाओ); 2025-26 या 2026-27 की कोई सूचना नहीं मिली।
“Distribution of Seeds ( paddy, Bajara, Pulses, etc.) — 50% cost limited to Rs.1000/-.”कीट नियंत्रण ट्रैप मुफ़्त, ₹2,500 तक।
केवल दमण और दीव ज़िले (यह आदेश 2020 में दादरा और नगर हवेली के साथ विलय से पहले का है)। ज़िला पंचायत (क्रम 1–7) और ग्राम पंचायतें (जैविक खाद) चलाती हैं। दमण ज़िला पंचायत के सितंबर 2023 के परिपत्र में 2023-24 के लिए यही दरें दी गई थीं (फ़ॉर्म 25.09.2023 तक, ज़मीन के 1/14 और आधार के साथ, पहले आओ पहले पाओ); 2025-26 या 2026-27 की कोई सूचना नहीं मिली।
“Distribution of Various type of traps for pest control — 100% cost limited to Rs.2500/-.”खेत के चारों ओर 400 रनिंग मीटर तक तारबंदी की लागत का 50%, अधिकतम ₹40,000, अगर एक ही जगह कम से कम 0.5 हेक्टेयर ज़मीन हो।
दो या ज़्यादा किसानों के समूह में आवेदन करने पर भी प्रति किसान यही 50% / ₹40,000 मिलता है (धारा 2.3)। वनाधिकार अधिनियम (FRA) के पट्टाधारक, जिनके पास 0.5 हेक्टेयर का पट्टा हो, उन्हें 90%, अधिकतम ₹72,000, केंद्रीय योजनाओं से मिलता है (धारा 2.6)। खेत की परिधि 400 मीटर से लंबी हो तो बाकी तारबंदी का खर्च आपका होगा, और अनुदान से पहले घोषणा देनी होगी कि बाकी खेत दीवार या अपनी तारबंदी से सुरक्षित है (धारा 1.5, 2.1)। तारबंदी में बिजली का करंट नहीं छोड़ा जा सकता (धारा 1.14)। कांटेदार तार/चैनलिंक/वर्गाकार जाली का GST बिल ज़रूरी है (धारा 3.7)।
“2.1 तारबंदी हेतु व्यक्तिगत (Individual) किसान को न्यूनतम क्षेत्रफल 0.5 हैक्टेयर कृषि भूमि होने पर अधिकतम 400 रनिंग मीटर तक (परिधि हेतु) ईकाई लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 40000/- जो भी कम हो, प्रति कृषक अनुदान देय होगा (400 रनिंग मीटर से कम होने पर Prorata basis पर अनुदान देय है)”लघु और सीमांत किसानों को 400 रनिंग मीटर तक तारबंदी की लागत का 60%, अधिकतम ₹48,000।
सामान्य दर से ऊपर का अतिरिक्त 10% (अधिकतम ₹8,000) राज्य योजना से मिलता है (धारा 2.2, 2.4)। आप लघु/सीमांत तभी माने जाएँगे जब जन आधार में इसी श्रेणी में सीडिंग हो (या प्रमाण-पत्र लगाएँ) और जमाबंदी में आपके हिस्से की ज़मीन इस सीमा में हो (धारा 3.5, 3.6)। खेत की परिधि 400 मीटर से लंबी हो तो बाकी तारबंदी का खर्च आपका होगा, और अनुदान से पहले घोषणा देनी होगी कि बाकी खेत दीवार या अपनी तारबंदी से सुरक्षित है (धारा 1.5, 2.1)। तारबंदी में बिजली का करंट नहीं छोड़ा जा सकता (धारा 1.14)। कांटेदार तार/चैनलिंक/वर्गाकार जाली का GST बिल ज़रूरी है (धारा 3.7)।
“2.2 व्यक्तिगत लाभार्थी कृषक लघु/सीमान्त श्रेणी होने पर अधिकतम 400 रनिंग मीटर तक (परिधि हेतु) ईकाई लागत का 60 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 48000/- जो भी कम हो, प्रति कृषक अनुदान देय होगा। (400 रनिंग मीटर से कम होने पर Prorata basis पर अनुदान देय है)”सामुदायिक तारबंदी में — कम से कम 7 किसानों का समूह, एक घेरे में कम से कम 5 हेक्टेयर — घेरे पर पड़ने वाले हर किसान को 400 रनिंग मीटर तक की लागत का 70%, अधिकतम ₹56,000।
केवल सामुदायिक आवेदन के लिए: कम से कम 7 किसान और तय घेरे में कम से कम 5 हेक्टेयर (धारा 1.4, 1.15)। जिनकी ज़मीन घेरे के बीच में है उन्हें समूह में गिना जा सकता है, पर अनुदान केवल परिधि वाले किसानों का बनता है (धारा 1.6)। सामुदायिक तारबंदी का अनुदान केवल राज्य योजना से मिलता है (धारा 2.5)। खेत की परिधि 400 मीटर से लंबी हो तो बाकी तारबंदी का खर्च आपका होगा, और अनुदान से पहले घोषणा देनी होगी कि बाकी खेत दीवार या अपनी तारबंदी से सुरक्षित है (धारा 1.5, 2.1)। तारबंदी में बिजली का करंट नहीं छोड़ा जा सकता (धारा 1.14)। कांटेदार तार/चैनलिंक/वर्गाकार जाली का GST बिल ज़रूरी है (धारा 3.7)।
“2.5 सामुदायिक आधार पर तारबन्दी करने वाले सभी श्रेणी के कृषकों हेतु पेरीफेरी (परिधि) के कृषकों के लिए न्यूनतम 07 कृषकों के एक समूह के लिए न्यूनतम 5.0 हैक्टेयर कृषि भूमि होने पर ईकाई लागत का 70 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 56000/- जो भी कम हो, प्रति कृषक अधिकतम 400 रनिंग मीटर तक अनुदान देय होगा।”धान की जगह दूसरी फसल वाले हर एकड़ पर ₹8,000।
2026-27 के लिए भाषण में धान की जगह दलहन, तिलहन या कपास उगाने वाले किसानों को ₹2,000 प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस का प्रस्ताव भी है (पैरा 27(ii)); यह बजट प्रस्ताव है, इसलिए हमने इसे राशि में नहीं जोड़ा। हमारा स्रोत हरियाणा बजट भाषण 2026-27 है; इस प्रोत्साहन का विभाग का 2026-27 का आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए कौन से ज़िले या फसलें पात्र हैं जैसी शर्तें नहीं दिखाई गई हैं।
“Last year, under the “Mera Pani-Meri Virasat Yojana”, I gave the incentive of ₹8,000 per acre to those farmers who gave up paddy cultivation.”सीधी बिजाई (डीएसआर) से बोए गए धान के हर एकड़ पर ₹4,500।
हमारा स्रोत हरियाणा बजट भाषण 2026-27 है; इस प्रोत्साहन का विभाग का 2026-27 का आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए कौन से ज़िले या फसलें पात्र हैं जैसी शर्तें नहीं दिखाई गई हैं।
“The subsidy of ₹1200 per acre given to farmers for managing paddy straw and the subsidy of ₹4500 per acre given to farmers for adopting DSR will be continued in the year 2026-27.”हर उस एकड़ पर ₹1,200 जहाँ आप पराली जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करते हैं।
हमारा स्रोत हरियाणा बजट भाषण 2026-27 है; इस प्रोत्साहन का विभाग का 2026-27 का आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए कौन से ज़िले या फसलें पात्र हैं जैसी शर्तें नहीं दिखाई गई हैं।
“The subsidy of ₹1200 per acre given to farmers for managing paddy straw and the subsidy of ₹4500 per acre given to farmers for adopting DSR will be continued in the year 2026-27.”सीधी बिजाई (डीएसआर) से बोए गए धान के हर एकड़ पर ₹1,500।
हमारा स्रोत पंजाब बजट भाषण 2026-27 है; विभाग का 2026-27 का आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए रकबे की सीमा या पंजीकरण की तारीख़ जैसी शर्तें नहीं दिखाई गई हैं।
“To encourage water-efficient cultivation practices, financial assistance of ₹1,500 per acre is being provided to farmers adopting Direct Seeded Rice.”धान की जगह उगाई गई ख़रीफ़ मक्का के हर हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) पर ₹17,500 — केवल पठानकोट, गुरदासपुर, बठिंडा, संगरूर, जालंधर और कपूरथला ज़िलों में।
पायलट केवल पठानकोट, गुरदासपुर, बठिंडा, संगरूर, जालंधर और कपूरथला ज़िलों में है; पंजाब के बाकी ज़िलों के किसान इसमें शामिल नहीं हैं। हमारा स्रोत पंजाब बजट भाषण 2026-27 है; विभाग का 2026-27 का आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए रकबे की सीमा या पंजीकरण की तारीख़ जैसी शर्तें नहीं दिखाई गई हैं।
“As part of our continued effort to promote sustainable cropping patterns, a pilot project encouraging a shift from paddy to kharif maize has been implemented in six districts - Pathankot, Gurdaspur, Bathinda, Sangrur, Jalandhar and Kapurthala with an incentive of ₹17,500 per hectare.”