आय सहायताPM-KISAN
₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में।
निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
किसान के बैंक खाते में सीधे दी जाने वाली राशि।
आय सहायता₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में।
आय सहायता60 साल की उम्र से जीवन भर ₹3,000 महीना पेंशन — शर्त यह कि आपके पास 2 हेक्टेयर तक ज़मीन हो, आप 18 से 40 साल की उम्र में जुड़ें और 60 साल तक मासिक अंशदान देते रहें।
मत्स्य पालनयदि आप पूर्णकालिक सक्रिय मछुआरे हैं, बीपीएल हैं, उम्र 18–60 साल है और मछुआरा सहकारी समिति के सदस्य हैं, तो मछली पकड़ने पर रोक/मंदी के मौसम में ₹4,500 मिलते हैं (3 महीने ₹1,500 प्रति माह): आपकी बचत के ₹1,500 में सरकार ₹3,000 जोड़ती है।
आय सहायता18 से 40 साल के बीच जुड़ें, 60 साल तक तय मासिक राशि दें, तो सरकार जीवन भर ₹1,000 से ₹5,000 महीने (आपकी पसंद) की पेंशन की गारंटी देती है, फिर वही पेंशन पति/पत्नी को।
फसल और बीजसीधी ख़रीद केंद्र पर बेचे गए ग्रेड ‘ए’ धान पर ख़रीद मूल्य के ऊपर ₹1,560 प्रति टन।
ऋण और ब्याज सहायता₹50 लाख तक के बैंक ऋण का पूरा ब्याज (केंद्र की ब्याज सहायता के बाद) राज्य लौटाता है, अगर आप समय पर चुकाएँ; राज्य के ख़र्च पर ऋण गारंटी से ऋण बिना गिरवी के मिलता है।
आय सहायताहर ग्रामीण छोटे या सीमांत किसान परिवार को, बटाईदारों सहित, ₹4,000 सालाना (₹2,000 खरीफ़ से पहले और ₹2,000 रबी से पहले)।
फसल और बीजराज्य की ख़रीद व्यवस्था में बेचे धान पर ₹3,100 प्रति क्विंटल — एमएसपी और बाक़ी अंतर ओडिशा की आदान सहायता से।
फसल और बीजसरकार को बेचे धान का कुल भुगतान ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से, प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक।
आय सहायताएक एकड़ या ज़्यादा खेती योग्य ज़मीन हो तो ₹10,000 सालाना; एक एकड़ से कम पर अनुपात में, पर कभी ₹4,000 से कम नहीं।
आय सहायताहर किसान परिवार को ₹3,000 सालाना, पीएम-किसान के अलावा।
फसल और बीजछोटे या सीमांत किसान द्वारा सरकार को एमएसपी पर बेचे गए खरीफ़ धान के हर क्विंटल पर ₹200 अतिरिक्त।
आय सहायताहर घर से 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के एक किसान को ₹1,000 प्रति माह (₹12,000 प्रति वर्ष)।
डेयरी और पशुपालनचुने जाने पर ₹6,000 डीबीटी से, अगर आपके पास कम से कम एक संकर गाय, 10 वयस्क मादा बकरियाँ या एक संकर सूअरी है।
आय सहायताहर पंजीकृत उत्पादक के बैंक खाते में ₹5,000, जिसे वह अपनी ज़रूरत के अनुसार ख़र्च कर सकता है।
फसल और बीजधान की खेती लायक रखे गए धान के खेत के मालिक को हर साल ₹3,000 प्रति हेक्टेयर।
फसल और बीजरबर उत्पादन प्रोत्साहन योजना में रबर का राज्य समर्थन मूल्य ₹250 प्रति किलो।
आय सहायता60 साल या उससे ज़्यादा उम्र के छोटे या सीमांत किसान को ₹2,000 प्रति माह (₹24,000 प्रति वर्ष)।
आय सहायताखेतिहर मज़दूर कल्याण सोसायटी में पंजीकृत खेतिहर मज़दूर को वर्षा राहत के रूप में हर साल ₹2,000।
आय सहायतापीएम-किसान पाने वाले किसान परिवारों को पीएम-किसान के ऊपर राज्य से ₹6,000 प्रति वर्ष।
आय सहायतामहाराष्ट्र से ₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में, पीएम-किसान के अलावा।
आय सहायताबैलों की जोड़ी से खेती करने वाले लघु या सीमांत किसान को ₹30,000 प्रति वर्ष, जन आधार से जुड़े बैंक खाते में।
आय सहायताकम से कम 10 सेंट खेती की ज़मीन वाले या RoFR ज़मीन जोतने वाले किसान परिवार को राज्य से ₹14,000 सालाना, पीएम-किसान के ₹6,000 के अलावा (कुल ₹20,000)।
आय सहायतापट्टादार के रूप में आपके नाम हर एकड़ खेती योग्य ज़मीन पर ₹12,000 सालाना (हर मौसम ₹6,000 प्रति एकड़)।
मत्स्य पालनहर पारंपरिक मछुआरा परिवार को मंदी के मौसम के लिए ₹7,000।
डेयरी और पशुपालनआविन सहकारी समिति को दिए दूध पर ₹3 प्रति लीटर अतिरिक्त।
मत्स्य पालनसालाना मछली पकड़ने की रोक के लिए हर समुद्री मछुआरा परिवार को ₹8,000।
मत्स्य पालनआपकी अपनी ₹1,500 बचत के ऊपर राज्य से ₹3,000 — मंदी के महीनों में कुल ₹4,500।
आय सहायतामंडी स्तर लॉटरी हर छह महीने: पहला / दूसरा / तीसरा इनाम ₹25,000 / ₹15,000 / ₹10,000, ई-नाम बिक्री पर किसानों को मिले कूपनों में से (हर ₹10,000 की बिक्री पर एक कूपन)।
फल, सब्ज़ी और फूलबेचे गए ऑयल पाम ताज़े फल गुच्छों के हर टन पर ₹8,500 और गोवा समिति के मासिक मूल्य का अंतर आपको मिलता है।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में।
केवल वे परिवार जिनके नाम भू-अभिलेख में खेती योग्य ज़मीन है (धारा 3)। बाहर (धारा 4.1): संस्थागत भूमिधारक; ऐसे परिवार जिनका कोई सदस्य संवैधानिक पद पर है या रहा है; केंद्र या राज्य मंत्री, सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य, नगर निगम के मेयर या ज़िला पंचायत अध्यक्ष (वर्तमान या पूर्व); सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम अधिकारी या कर्मचारी (मल्टी टास्किंग स्टाफ / चतुर्थ श्रेणी / ग्रुप डी को छोड़कर); ₹10,000 या अधिक मासिक पेंशन पाने वाले पेंशनभोगी (मल्टी टास्किंग स्टाफ / चतुर्थ श्रेणी / ग्रुप डी को छोड़कर); पिछले कर-निर्धारण वर्ष में आयकर देने वाले; पंजीकृत प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट; और नए लाभार्थियों में अनिवासी भारतीय।
“The financial benefit of Rs.6000/- per year is to be released to the eligible farmers in three installments of Rs.2000/- each every 4-month / trimester”60 साल की उम्र से जीवन भर ₹3,000 महीना पेंशन — शर्त यह कि आपके पास 2 हेक्टेयर तक ज़मीन हो, आप 18 से 40 साल की उम्र में जुड़ें और 60 साल तक मासिक अंशदान देते रहें।
केवल वे भूमिधारक किसान पात्र हैं जिनके नाम भू-अभिलेख में 2 हेक्टेयर तक ज़मीन है (पैरा 3(p))। एनपीएस, ईएसआईसी या ईपीएफ़ओ में शामिल लोग, पीएम-एसवाईएम या पीएम-एलवीएम से जुड़े लोग, आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी, संवैधानिक पदधारी और पंजीकृत पेशेवर पात्र नहीं (पैरा 5.1)। 60 के बाद आपकी मृत्यु होने पर पति/पत्नी को आधी पेंशन, ₹1,500 महीना मिलती है (पैरा 6(xiv))। जल्दी योजना छोड़ने पर सरकार का बराबर हिस्सा आपको नहीं मिलता (पैरा 6(vii))।
“The Pradhan Mantri Kisan Maan-Dhan Yojana (PM-KMY) provides for an assured monthly pension of Rs. 3000/- to all land holding Small and Marginal Farmers (SMFs), whether male or female, on their attaining the age of 60 years.”हर महीने आप जितना ₹55 से ₹200 तक (जुड़ते समय की उम्र से तय) जमा करते हैं, उतनी ही राशि सरकार आपके पेंशन खाते में जमा करती है।
जुड़ते समय की उम्र के अनुसार आपका मासिक अंशदान (पैरा 6(x)): 18 → ₹55, 19 → ₹58, 20 → ₹61, 21 → ₹64, 22 → ₹68, 23 → ₹72, 24 → ₹76, 25 → ₹80, 26 → ₹85, 27 → ₹90, 28 → ₹95, 29 → ₹100, 30 → ₹105, 31 → ₹110, 32 → ₹120, 33 → ₹130, 34 → ₹140, 35 → ₹150, 36 → ₹160, 37 → ₹170, 38 → ₹180, 39 → ₹190, 40 → ₹200। सरकार भी उतनी ही राशि जोड़ती है। चाहें तो तिमाही, चार-मासिक या छमाही भी जमा कर सकते हैं (पैरा 6(ix))।
“The Central Government through the Department of Agriculture Cooperation and Farmers Welfare shall also contribute an equal amount as contributed by the eligible subscriber, to the pension Fund.”18 से 40 साल के बीच जुड़ें, 60 साल तक तय मासिक राशि दें, तो सरकार जीवन भर ₹1,000 से ₹5,000 महीने (आपकी पसंद) की पेंशन की गारंटी देती है, फिर वही पेंशन पति/पत्नी को।
पूरा अंशदान आप ख़ुद देते हैं: ₹1,000 महीना पेंशन के लिए 18 साल में जुड़ने पर ₹42 महीना और 40 साल में जुड़ने पर ₹291; ₹5,000 के लिए ₹210 से ₹1,454 महीना (अनुलग्नक-1)। सरकार का 50% सह-अंशदान केवल 31 दिसंबर 2015 से पहले जुड़े लोगों को 2015-16 से 2019-20 तक मिला (पैरा 5) — अब बंद है। आयकरदाता नहीं जुड़ सकते (पीआईबी, वित्त मंत्रालय, 9 मई 2026)। छोटे और सीमांत भूमिधारक किसानों के लिए पीएम-केएमवाई बेहतर हो सकती है, जिसमें सरकार बराबर अंशदान देती है।
“(i) Central Government guaranteed minimum pension amount : Each subscriber under APY shall receive a Central Government guaranteed minimum pension of Rs. 1000 per month or Rs. 2000 per month or Rs. 3000 per month or Rs. 4000 per month or Rs. 5000 per month, after the age of 60 years until death. (ii) Central Government guaranteed minimum pension amount to the spouse : After the subscriber’s demise, the spouse of the subscriber shall be entitled to receive the same pension amount as that of the subscriber until the death of the spouse.”18 से 40 साल का कोई भी बैंक खाताधारक जो आयकर नहीं देता, जुड़ सकता है — ज़मीन होना ज़रूरी नहीं।
“Eligibility : APY is open to all bank account holders in the age group of 18 to 40 years who are not income tax payers and the contributions differ, based on pension amount chosen.”ख़ास मामलों में, जब आप ऋण नहीं ले सकते, आपकी परियोजना रिपोर्ट के आधार पर ₹1,00,000 तक का मुख्यमंत्री विशेष पैकेज अनुदान।
यह केवल “टारगेटेड प्रोग्रेस पार्टनर” को मिलता है: वे व्यक्ति या समूह जिनकी परियोजना किसी विभाग की नोडल समिति सिफ़ारिश करे और शीर्ष निकाय (मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मिज़ोरम राज्य नीति समन्वय समिति) योग्यता और उपलब्ध धन के आधार पर चुने (धारा 2.2.1, 6.2, 7(4))। किसान कृषि एवं किसान कल्याण, बागवानी, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा, मत्स्य, रेशम और दूसरे लागू करने वाले विभागों के ज़रिए आते हैं (धारा 4.2)। आवेदन करने से सहायता पक्की नहीं होती (फ़ॉर्म-1 का घोषणा-पत्र)। अनुदान के आवेदन पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में आते और जाँचे जाते हैं (धारा 6.3.2(1))। अनुदान लेने पर उस परियोजना के पूरा होने तक योजना के दूसरे लाभ नहीं मिलते, और लगातार ख़राब प्रदर्शन पर पैसा लौटाना पड़ सकता है (धारा 3.2.2(3), (5))।
“This special provision is made for allowing grant of not more than Rs.1 lakh in exceptional case where the Progress Partner is not in a position to avail loans while having a livelihood project that can be significantly boosted by a small grant.”हर ग्रामीण छोटे या सीमांत किसान परिवार को, बटाईदारों सहित, ₹4,000 सालाना (₹2,000 खरीफ़ से पहले और ₹2,000 रबी से पहले)।
मध्यम और बड़े किसान, आयकरदाता, सरकारी व सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारी और पेंशनभोगी, संवैधानिक पदधारी, पंजीकृत पेशेवर, और एक परिवार के एक से ज़्यादा सदस्य बाहर हैं (“Exclusion parameters”, पृ. 2–3)। 2024-25 के दिशानिर्देश में शहरी किसान भी बाहर हैं, पर 2026-27 के बजट भाषण (पैरा 25) के अनुसार योजना अब शहरी किसानों तक भी पहुँचती है — अपने प्रखंड कार्यालय से पुष्टि करें। यह पीएम-किसान के अलावा है।
“financial support to be provided to the eligible rural Small & Marginal Farmers by way of a grant of Rs. 2,000/- per farm family in Kharif& Rabi crop season each totaling to Rs.4000/- per annum.”एक एकड़ या ज़्यादा खेती योग्य ज़मीन हो तो ₹10,000 सालाना; एक एकड़ से कम पर अनुपात में, पर कभी ₹4,000 से कम नहीं।
एक एकड़ पर राशि बढ़ना रुक जाती है: ₹10,000 अधिकतम है। एक एकड़ से कम पर अनुपात में मिलता है, पर कम से कम ₹4,000 सालाना — हमारा कैलकुलेटर यह न्यूनतम सीमा नहीं जोड़ता, इसलिए 0.4 एकड़ से कम पर असली राशि ₹4,000 है। दर्ज बर्गादार (बटाईदार) भी पात्र हैं। 2026-27 के लिए स्थिति साफ़ नहीं: कृषि विभाग के 03.07.2026 के परिपत्र में कृषक बंधु (नतून) के सभी लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन और पीएम-किसान से मिलान करने का आदेश है, और 2026-27 का बजट भाषण (22.06.2026) कृषक बंधु का ज़िक्र नहीं करता — उसकी जगह किसान परिवारों के लिए अलग से ₹3,000 सालाना की घोषणा करता है। इस राशि पर भरोसा करने से पहले अपने प्रखंड के सहायक कृषि निदेशक से पुष्टि करें।
“Under the new scheme, every enrolled farmer will get financial assistance of Rs. 10000/- per annum for one acre (100 decimal) or more of cultivable land. Farmers having less than one acre of land will be eligible for assistance on pro rata basis subject to a minimum of Rs. 4000/- per annum per farmer. The financial assistance will be given in two equal installments, one in Kharif and the other in Rabi season.”हर किसान परिवार को ₹3,000 सालाना, पीएम-किसान के अलावा।
यह घोषणा पीएम-किसान वाले पैराग्राफ़ में है, इसलिए पात्रता पीएम-किसान जैसी ही होने की संभावना है। 22 जून 2026 के 2026-27 बजट भाषण में घोषित। राज्य के पोर्टलों पर अभी इसका लागू करने वाला आदेश या दिशानिर्देश नहीं मिला, इसलिए पात्रता और आवेदन का तरीक़ा बदल सकता है — अपने प्रखंड कृषि कार्यालय से पुष्टि करें।
“Under this scheme, ₹6,000 per year is provided to eligible farmers in three equal instalments to support their agricultural needs. In order to further support the agriculture needs of farmers, I hereby announce additional financial assistance of ₹3,000 for each farmer family in a year.”हर घर से 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के एक किसान को ₹1,000 प्रति माह (₹12,000 प्रति वर्ष)।
कौन पात्र है (धारा 2(c), 6): सिक्किम सब्जेक्ट/सीओआई धारक, 50 वर्ष या उससे अधिक, केवल कृषि, बागवानी या संबद्ध खेती पर निर्भर, 4 हेक्टेयर से कम ज़मीन वाला, अधिया या कुट पर खेती करने वाले भी। हर घर से केवल एक सदस्य; पेंशनर की मृत्यु पर यह पति/पत्नी या परिवार के किसी दूसरे पात्र सदस्य को मिलती है (धारा 9)। सरकारी कर्मचारी और पेंशनर, निजी या ठेका कर्मचारी, ज़मीन पट्टे पर देने वाले ज़मींदार, वृद्धावस्था या दूसरी कल्याण पेंशन पाने वाले, 4 हेक्टेयर से अधिक ज़मीन वाले, ट्रेड लाइसेंस धारक या सूचीबद्ध ठेकेदार पात्र नहीं (धारा 7)। ग़लत जानकारी पर दिया गया पैसा वसूला जाता है (धारा 13)। हमें 2025-26 या 2026-27 का कोई आदेश या बजट प्रावधान नहीं मिला जो आज इस योजना या इस दर की पुष्टि करे — अपने कृषि कार्यालय से पूछें।
“The amount of pension payable to each person shall be Rs. 1,000/- (Rupees One Thousand) only per month.”हर पंजीकृत उत्पादक के बैंक खाते में ₹5,000, जिसे वह अपनी ज़रूरत के अनुसार ख़र्च कर सकता है।
2025-26 के बजट भाषण (पैरा 24.6) में फ़ोकस+ की सालाना सहायता ₹5,000 से बढ़ाकर ₹6,000 प्रति परिवार करने की घोषणा थी, पर 2026-27 का भाषण ₹5,000 की किस्त देने की बात कहता है, इसलिए हम ₹5,000 दिखाते हैं। किसी भी भाषण में 2026-27 में भुगतान कब और कितनी बार होगा, यह नहीं छपा।
“FOCUS+ is our flagship programme for our producers. Fulfilling my commitment of providing ₹5,000 untied benefit to the enrolled producers, we have released backlog installment to about 93,000 verified beneficiaries this year.”धान की खेती लायक रखे गए धान के खेत के मालिक को हर साल ₹3,000 प्रति हेक्टेयर।
2020 के निर्देशों में रॉयल्टी ₹2,000 प्रति हेक्टेयर प्रति वित्त वर्ष थी; 2026-27 का बजट भाषण अब ₹3,000 बताता है। मालिक ख़ुद खेती करे या दूसरे किसानों/एजेंसियों से कराए, दोनों पात्र हैं; ज़मीन का स्वरूप बदले बिना फ़सल चक्र में दालें, सब्ज़ियाँ, तिल या मूँगफली उगाने वाले भी पात्र हैं; लगातार तीन साल परती रही ज़मीन पर खेती दोबारा शुरू होने तक रॉयल्टी नहीं मिलती (परिपत्र 07.09.2020, पृ.2)।
“In all seasons, input assistance of ₹5000, production bonus of ₹1000, and a Royalty of ₹3000 to land owners per hectare are being provided. Assistance of up to ₹40,000 per hectare is provided for cultivating paddy in barren land.”60 साल या उससे ज़्यादा उम्र के छोटे या सीमांत किसान को ₹2,000 प्रति माह (₹24,000 प्रति वर्ष)।
कर्षक पेंशन सामाजिक-सुरक्षा पेंशन की दर पर मिलती है: विभाग के पृष्ठ पर वित्त विभाग के वे सभी आदेश सूचीबद्ध हैं जिनसे यह दर बढ़ी (₹1,300, ₹1,400, ₹1,500, ₹1,600)। पृष्ठ पर अभी भी ₹1,600 लिखा है; आदेश 136/2025/वित्त ने नवंबर 2025 से ऐसी सभी पेंशन ₹2,000 कर दीं। पात्रता (छोटे और सीमांत किसान, 60 वर्ष और ऊपर, आय व अन्य शर्तों के साथ) आदेश 26/2012/कृषि और पृष्ठ पर दिए बाद के आदेशों से तय है।
“സാമൂഹ്യ സുരക്ഷാ പെൻഷനുകൾ, ക്ഷേമനിധി ബോർഡ് പെൻഷനുകൾ/സർക്കസ്/ അവശകലാകാര പെൻഷനുകൾ, 2025 നവംബർ പ്രാബല്യത്തിൽ നിലവിലെ 1600/- രൂപ നിരക്കിൽ നിന്നും പ്രതിമാസം 2000/- രൂപയായി വർദ്ധിപ്പിച്ച് ഉത്തരവ് പുറപ്പെടുവിക്കുന്നു.”खेतिहर मज़दूर कल्याण सोसायटी में पंजीकृत खेतिहर मज़दूर को वर्षा राहत के रूप में हर साल ₹2,000।
भाषण में किस्तों की संख्या नहीं बताई गई; हम इसे साल में एक भुगतान दिखा रहे हैं। केवल सोसायटी में पंजीकृत मज़दूर पात्र हैं।
“All the Agricultural Labourers who have registered under Agriculture Labour Welfare Society will be provided ₹ 2,000 per annum as Rain Relief, from the Financial Year 2025-26.”पीएम-किसान पाने वाले किसान परिवारों को पीएम-किसान के ऊपर राज्य से ₹6,000 प्रति वर्ष।
तीन बराबर किश्तों की बात म.प्र. जनसंपर्क संचालनालय के 28 अक्टूबर 2024 के समाचार से है (“एक वित्तीय वर्ष में कुल 6 हजार रुपये की राशि तीन समान किश्तों में प्रदान की जाती है”); बजट भाषण में केवल सालाना राशि छपी है। योजना का प्रकाशित आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए “पीएम-किसान परिवार” के अलावा पात्रता की शर्तें यहाँ नहीं दी गई हैं।
“प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि अन्तर्गत किसान परिवारों को रुपये 6 हज़ार प्रतिवर्ष की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। हमारी सरकार द्वारा भी “मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना” अंतर्गत रुपये 6 हज़ार प्रतिवर्ष जोड़कर कुल रुपये 12 हज़ार प्रतिवर्ष का लाभ दिया जा रहा है।”महाराष्ट्र से ₹6,000 प्रति वर्ष, ₹2,000 की तीन किस्तों में, पीएम-किसान के अलावा।
केवल उन पीएम-किसान लाभार्थियों के लिए जो हर किस्त के समय पात्र पाए गए (धारा 2); पीएम-किसान पात्रता में जो भी बदलाव करे, वह यहाँ अपने-आप लागू होता है (धारा 1(ii))। अपात्र व्यक्ति को दिया गया पैसा राजस्व विभाग के ज़रिए वसूला जाता है (धारा 5)। पीएम-किसान के साथ मिलाकर यह ₹12,000 प्रति वर्ष होता है।
“पहिला हप्ता — माहे एप्रिल ते जुलै — रु. २०००/-; दुसरा हप्ता — माहे ऑगस्ट ते नोव्हेंबर — रु. २०००/-; तिसरा हप्ता — माहे डिसेंबर ते मार्च — रु. २०००/-”बैलों की जोड़ी से खेती करने वाले लघु या सीमांत किसान को ₹30,000 प्रति वर्ष, जन आधार से जुड़े बैंक खाते में।
खेती में काम आने वाली बैलों की एक जोड़ी (2 बैल) और लघु/सीमांत का प्रमाण-पत्र चाहिए (धारा 1.1, 1.2)। बैलों का पशु बीमा और 15 वर्ष से कम उम्र की शर्त, और बीमा पॉलिसी व स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र अपलोड करना, 03.08.2025 के संशोधन से हटा दिए गए हैं। मंदिर भूमि के पुजारी और जनजाति क्षेत्रों के वनाधिकार पट्टाधारक भी पात्र हो सकते हैं (धारा 1.4, 1.5)। केवल लघु और सीमांत किसान पात्र हैं, उप-जिले के लक्ष्य में "पहले आओ-पहले पाओ" से (धारा 4.1, 4.3, 5.2)। दिशा-निर्देश 2025-26 के हैं; 2026-27 के आउटकम बजट में भी 6,333 किसानों का लक्ष्य है।
“प्रदेश में लघु एवं सीमान्त कृषकों को बैलों से खेती करवाये जाने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में 30 हजार रूपये प्रतिवर्ष दिये जाने; 7.2 … कृषकों को प्रोत्साहन राशि रूपये 30000/– का भुगतान जनाधार से जुडे खाते में …”कम से कम 10 सेंट खेती की ज़मीन वाले या RoFR ज़मीन जोतने वाले किसान परिवार को राज्य से ₹14,000 सालाना, पीएम-किसान के ₹6,000 के अलावा (कुल ₹20,000)।
राज्य की राशि किस्तों में (धारा 10, पृ. 6): ख़रीफ़ में ₹5,000, रबी में ₹5,000, गर्मी में ₹4,000 — हर बार पीएम-किसान के ₹2,000 के साथ। परिवार यानी पति, पत्नी और बच्चे; विवाहित बच्चे अलग इकाई गिने जाते हैं (धारा 4)। साझी ज़मीन में पैसा परिवार के उस सदस्य को जाता है जिसके नाम सबसे ज़्यादा ज़मीन है (धारा 6.A)। इन्हें नहीं मिलेगा (धारा 5): संस्थागत भूमिधारक; ऐसे परिवार जिनमें कोई सदस्य वर्तमान या पूर्व संवैधानिक पदधारी, मंत्री, सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य, या वर्तमान मेयर या ज़िला परिषद अध्यक्ष हो; सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी, सार्वजनिक उपक्रम या स्थानीय निकाय कर्मचारी (₹20,000 से कम वेतन वाले मल्टी टास्किंग स्टाफ / चतुर्थ श्रेणी / ग्रुप डी को छोड़कर); ₹10,000 या अधिक मासिक पेंशन पाने वाले; आयकर देने वाले; प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट और आर्किटेक्ट; और वे जिनकी खेती की ज़मीन घर के प्लॉट, मछली पालन या किसी अन्य गैर-कृषि काम में बदल चुकी है।
“The benefit of the scheme shall be provided to all the landholder farmer families who collectively own cultivable land with a minimum of 10 cents and Farmer families Cultivating ROFR lands @Rs. 20,000/- per annum (Rs. 14,000/- Under Annadatha Sukhibhava scheme and Rs.6000/-under PM-KISAN) per family per annum as per validated Landownership database subject to exclusions.”पट्टे की ज़मीन जोतने वाले भूमिहीन बटाईदार किसान को राज्य बजट से ₹20,000 सालाना, ₹10,000 की दो किस्तों में।
रबी में ₹10,000 और गर्मी में ₹10,000 (धारा 10, पृ. 6)। आपके नाम कोई खेती की ज़मीन न हो, पट्टा अपने ही परिवार से न लिया हो, और कम से कम 1 एकड़ पट्टे पर हो (सब्ज़ी, फूल और चारे के लिए 0.5 एकड़; पान के लिए 0.1 एकड़)। एक ज़मीन मालिक परिवार के साथ केवल एक बटाईदार को लाभ; कई बटाईदार हों तो क्रम है अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, अन्य। अनुसूचित क्षेत्रों में केवल आदिवासी बटाईदार मान्य हैं (धारा 6.B, पृ. 3–4)।
“Financial assistance will also be provided to all eligible landless cultivators in the State @ Rs. 20,000/- per year from the Budget allocation of the Government of Andhra Pradesh.”पट्टादार के रूप में आपके नाम हर एकड़ खेती योग्य ज़मीन पर ₹12,000 सालाना (हर मौसम ₹6,000 प्रति एकड़)।
धारा 3.1 (तेलुगु में) के अनुसार रायतु भरोसा में फ़सल निवेश सहायता बढ़ाकर ₹12,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष की गई है। शासनादेश में एकड़ की कोई ऊपरी सीमा नहीं छपी। भुगतान केवल भू भारती में दर्ज खेती योग्य ज़मीन पर (धारा 3.2); RoFR पट्टादार शामिल (धारा 3.3)। 2026-27 बजट भाषण (पैरा 64) इसे दो फ़सलों के लिए ₹6,000 प्रति एकड़ प्रति मौसम बताता है।
“రైతుభరోసా పథకం కింద పంట పెట్టుబడి సహాయాన్ని సంవత్సరానికి ఎకరాకు రూ.12,000 కు పెంచబడింది.”मंडी स्तर लॉटरी हर छह महीने: पहला / दूसरा / तीसरा इनाम ₹25,000 / ₹15,000 / ₹10,000, ई-नाम बिक्री पर किसानों को मिले कूपनों में से (हर ₹10,000 की बिक्री पर एक कूपन)।
यह लॉटरी है, पक्का भुगतान नहीं: ई-नाम से बेची गई उपज के हर ₹10,000 पर, जिस विक्रय पर्ची पर मंडी शुल्क देय हो, एक उपहार कूपन नंबर मिलता है (बिंदु 1(4), 4(3))। मंडी स्तर पर गेट-पास पर्चियों और ई-पेमेंट पर्चियों के ड्रॉ अलग होते हैं; खंड और राज्य स्तर पर दोनों शामिल होते हैं (निर्देश पत्र, बिंदु 1)। एक कूपन एक से ज़्यादा स्तर पर इनाम जीत सकता है (बिंदु 2)। इनाम की राशि विजेता के बैंक खाते में आती है; उस पर आयकर मंडी समिति भरती है (बिंदु 3(2), 6(1))। ख़र्च राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड उठाता है।
“मण्डी स्तर पर … प्रत्येक छः माह में प्रथम पुरस्कार (1) 25 हजार, द्वितीय पुरस्कार (1) 15 हजार, तृतीय पुरस्कार (1) 10 हजार (गेट पास की विक्रय पर्चियों पर तथा E-Payment की विक्रय पर्चियों पर)”खंड स्तर लॉटरी हर छह महीने: पहला / दूसरा / तीसरा इनाम ₹50,000 / ₹30,000 / ₹20,000, ई-नाम बिक्री पर किसानों को मिले कूपनों में से (हर ₹10,000 की बिक्री पर एक कूपन)।
यह लॉटरी है, पक्का भुगतान नहीं: ई-नाम से बेची गई उपज के हर ₹10,000 पर, जिस विक्रय पर्ची पर मंडी शुल्क देय हो, एक उपहार कूपन नंबर मिलता है (बिंदु 1(4), 4(3))। मंडी स्तर पर गेट-पास पर्चियों और ई-पेमेंट पर्चियों के ड्रॉ अलग होते हैं; खंड और राज्य स्तर पर दोनों शामिल होते हैं (निर्देश पत्र, बिंदु 1)। एक कूपन एक से ज़्यादा स्तर पर इनाम जीत सकता है (बिंदु 2)। इनाम की राशि विजेता के बैंक खाते में आती है; उस पर आयकर मंडी समिति भरती है (बिंदु 3(2), 6(1))। ख़र्च राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड उठाता है।
“खण्ड स्तर पर — प्रत्येक छः माह में प्रथम पुरस्कार (1) 50 हजार, द्वितीय पुरस्कार (1) 30 हजार, तृतीय पुरस्कार (1) 20 हजार”राज्य स्तर लॉटरी साल में एक बार: पहला / दूसरा / तीसरा इनाम ₹2.5 लाख / ₹1.5 लाख / ₹1 लाख, ई-नाम बिक्री पर किसानों को मिले कूपनों में से (हर ₹10,000 की बिक्री पर एक कूपन)।
यह लॉटरी है, पक्का भुगतान नहीं: ई-नाम से बेची गई उपज के हर ₹10,000 पर, जिस विक्रय पर्ची पर मंडी शुल्क देय हो, एक उपहार कूपन नंबर मिलता है (बिंदु 1(4), 4(3))। मंडी स्तर पर गेट-पास पर्चियों और ई-पेमेंट पर्चियों के ड्रॉ अलग होते हैं; खंड और राज्य स्तर पर दोनों शामिल होते हैं (निर्देश पत्र, बिंदु 1)। एक कूपन एक से ज़्यादा स्तर पर इनाम जीत सकता है (बिंदु 2)। इनाम की राशि विजेता के बैंक खाते में आती है; उस पर आयकर मंडी समिति भरती है (बिंदु 3(2), 6(1))। ख़र्च राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड उठाता है।
“राज्य स्तर पर — वर्ष में एक बार प्रथम पुरस्कार (1) 2.5 लाख, द्वितीय पुरस्कार (1) 1.5 लाख, तृतीय पुरस्कार (1) 1 लाख”