सिंचाई और सोलर पंपPMKSY – Per Drop More Crop
ड्रिप: आपकी दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% (लघु-सीमांत) या 45%।
निजी, मुफ़्त मार्गदर्शिका — सरकारी वेबसाइट नहीं। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल पर करें।
ड्रिप, स्प्रिंकलर, सोलर पंप और जल भंडारण।
सिंचाई और सोलर पंपड्रिप: आपकी दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% (लघु-सीमांत) या 45%।
सिंचाई और सोलर पंपनया ऑफ़-ग्रिड सोलर पंप (या डीज़ल पंप बदलने) पर केंद्र बेंचमार्क लागत का 30% देता है — पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में 50%।
फल, सब्ज़ी और फूलकिसान समूह के स्वामित्व वाले लाइनिंग युक्त सामुदायिक जल टैंक के लिए ₹80 प्रति घन मीटर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में ₹100) का 75%, अधिकतम 30,000 घन मीटर।
फल, सब्ज़ी और फूलपुरानी अरेबिका कॉफ़ी के पुनर्रोपण के लिए ₹3,25,000 प्रति हेक्टेयर का 40% (₹1,30,000), साल में अधिकतम 25 हेक्टेयर।
सिंचाई और सोलर पंपवाटरशेड परियोजना में आपकी अपनी ज़मीन पर मिट्टी और जल संरक्षण (एनआरएम) के काम का ख़र्च परियोजना देती है, सिर्फ़ आपका 10% हिस्सा छोड़कर — अनुसूचित जाति/जनजाति या छोटे-सीमांत किसान हों तो 5% — जो आप नक़द या श्रम के रूप में दे सकते हैं।
सिंचाई और सोलर पंपबिना लाइनिंग वाले खेत-तालाब की खुदाई की लागत का 50%, अधिकतम ₹52,500।
सिंचाई और सोलर पंपस्टैण्ड एलोन सोलर पंप (1 से 7.5 एचपी) की निविदा कीमत का 60%; बाकी 40% आप देते हैं।
सिंचाई और सोलर पंपड्रिप, मिनी या माइक्रो पर लघु-सीमांत किसानों को इकाई लागत का 90%; अन्य किसानों को 80%।
सिंचाई और सोलर पंपछोटे और सीमांत किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम का 100% मिलता है; बाकी किसानों को 75%।
पॉलीहाउस और शेड नेटअनुसूचित जाति/जनजाति के छोटे व सीमांत किसानों को एकीकृत खेती, ग्रीनहाउस, शेड नेट हाउस, सोलर ड्रायर, मूल्य संवर्धन मशीन और कृषि मशीनों पर 70% अनुदान (सामान्य दर के ऊपर 20% अतिरिक्त)।
सिंचाई और सोलर पंपछोटे, सीमांत और महिला किसानों को बोरवेल या ट्यूबवेल की लागत का 60%, प्रति कुआँ ₹1,20,000 तक।
सिंचाई और सोलर पंपछोटे और सीमांत किसान (2 हेक्टेयर तक) ड्रिप या स्प्रिंकलर की लागत का 10% देते हैं — 90% पीएमकेएसवाई और राज्य टॉप-अप से मिलता है।
सिंचाई और सोलर पंपप्रति बूँद अधिक फ़सल में 55% पाने वाले किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर की स्वीकृत लागत का अतिरिक्त 25% — कुल 80%।
सिंचाई और सोलर पंपधान का बिचड़ा और जूट: अधिकतम ₹1,500 प्रति एकड़ (₹750 प्रति सिंचाई, अधिकतम 2 सिंचाई), 8 एकड़ तक।
सिंचाई और सोलर पंपआप अपने पंप प्रकार का केवल तय कृषक अंश देते हैं; पंप की बाकी लागत सरकार और राज्य द्वारा चुकाए जाने वाले ऋण से पूरी होती है।
सिंचाई और सोलर पंपअपने खेत-तालाब की प्लास्टिक लाइनिंग की लागत का 50%, अधिकतम ₹75,000।
सिंचाई और सोलर पंपसोलर पंप की लागत का 10% आप देते हैं (अनुसूचित जाति/जनजाति हों तो 5%); बाकी 90% या 95% योजना देती है।
सिंचाई और सोलर पंपइनलेट-आउटलेट सहित खेत-तालाब की खुदाई पर आकार के अनुसार तय अनुदान: ₹23,881 (15 × 15 × 3 मीटर) से ₹75,000 (30 × 25 × 3 मीटर और बड़ा) तक; काली मिट्टी में 1:1.5 ढलान पर थोड़ा कम।
सिंचाई और सोलर पंपखेत-तालाब की स्वीकृत लागत का 80% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 90%), तालाब के आकार और मिट्टी के अनुसार।
सिंचाई और सोलर पंपप्लास्टिक लाइनिंग वाली खेत तलाई: लागत का 90%, अधिकतम ₹1,35,000, लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के लिए।
सिंचाई और सोलर पंपलघु और सीमांत किसानों को 10% ज़्यादा (अधिकतम ₹40,000 अतिरिक्त) — कुल इकाई लागत का 85%, अधिकतम ₹3,40,000।
सिंचाई और सोलर पंपपाइपलाइन की लागत का 50%, एचडीपीई पर ₹50 प्रति मीटर, पीवीसी पर ₹35 और एचडीपीई लेफ़्लैट पाइप पर ₹20 प्रति मीटर तक, और अधिकतम ₹15,000।
सिंचाई और सोलर पंपअनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को हर आकार के पम्प पर ₹45,000 अतिरिक्त अनुदान मिलता है, जिससे उनका अपना हिस्सा उतना कम हो जाता है।
सिंचाई और सोलर पंपड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर या फव्वारा संयंत्र की इकाई लागत का 75% लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला किसानों को; अन्य किसानों को 70%।
सिंचाई और सोलर पंपड्रिप या मिनी-स्प्रिंकलर सिस्टम की लागत का 85%, 5 हेक्टेयर तक, ज़मीन के मालिक हर श्रेणी के किसान के लिए।
सिंचाई और सोलर पंप5 एकड़ तक वाले अनुसूचित जाति या जनजाति किसान को ड्रिप सिस्टम पर 100%, अधिकतम ₹2,18,000।
सिंचाई और सोलर पंपनामित आठ ज़िलों में से किसी में वन अधिकार पट्टाधारक किसान को ड्रिप सिस्टम की पूरी (100%) लागत मिलती है।
सिंचाई और सोलर पंपअनुसूचित जाति और जनजाति किसानों को 5 हेक्टेयर तक ड्रिप सिंचाई पर 90% सब्सिडी।
फल, सब्ज़ी और फूलटमाटर, मिर्च और अन्य सब्ज़ियों के लिए लकड़ी या बाँस के खंभों और तार का कच्चा मंडप: ₹52,000 प्रति हेक्टेयर का 50% (₹26,000/हे.), 2 हेक्टेयर तक।
फल, सब्ज़ी और फूलपरियोजना में बहुवर्षीय बाग़: व्यक्तिगत किसान और ट्रस्ट को लागत का 50% (4 हेक्टेयर तक), मिलकर खेती करने वाले एफ़पीओ/सहकारी सदस्यों को 75% (50 हेक्टेयर तक), MIDH-NHM की फ़सलवार इकाई लागत पर।
फल, सब्ज़ी और फूलनए बाग़ में अंतरवर्तीय फसल के रूप में सब्ज़ी लगाने पर पूरे ₹30,000 प्रति हेक्टेयर, 1 से 2 हेक्टेयर तक।
सिंचाई और सोलर पंपबागवानी फ़सल उगाने वाले हर वर्ग के किसान को पहले 2 हेक्टेयर तक ड्रिप या स्प्रिंकलर की स्वीकृत लागत का 90%।
सिंचाई और सोलर पंपनारियल बाग़ में ड्रिप या स्प्रिंकलर की योग्य लागत का 30% तक, केंद्र की “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” सब्सिडी के ऊपर; दोनों मिलाकर 85% (छोटे और सीमांत) या 75% (बाक़ी) से ज़्यादा नहीं।
इस काम के लिए कोई चालू योजना जितना सबसे बड़ा हिस्सा देती है, आवेदक के हिसाब से। राशि फिर भी हर योजना की लागत-सीमा तक।
ड्रिप: आपकी दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% (लघु-सीमांत) या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें।
“Table 1: Indicative cost of Drip Irrigation System for calculation of subsidy”पोर्टेबल स्प्रिंकलर: आपके पाइप और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें। कम पहुँच वाले राज्यों और पूर्वोत्तर सहित पहाड़ी राज्यों के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि 15% और 25% अधिक लागत “ली जा सकती है” — यह राज्य का निर्णय है, इसलिए हम छपी लागत ही लेते हैं।
“Table 4: Indicative Cost of Portable Sprinkler Irrigation System”माइक्रो स्प्रिंकलर: आपकी दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें। कम पहुँच वाले राज्यों और पूर्वोत्तर सहित पहाड़ी राज्यों के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि 15% और 25% अधिक लागत “ली जा सकती है” — यह राज्य का निर्णय है, इसलिए हम छपी लागत ही लेते हैं।
“Table 5: Indicative cost of Micro Sprinkler Irrigation System”मिनी स्प्रिंकलर: आपकी दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें। कम पहुँच वाले राज्यों और पूर्वोत्तर सहित पहाड़ी राज्यों के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि 15% और 25% अधिक लागत “ली जा सकती है” — यह राज्य का निर्णय है, इसलिए हम छपी लागत ही लेते हैं।
“Table 6:- Indicative Cost of Mini Sprinkler Irrigation System”अर्ध-स्थायी स्प्रिंकलर: आपके क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें। कम पहुँच वाले राज्यों और पूर्वोत्तर सहित पहाड़ी राज्यों के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि 15% और 25% अधिक लागत “ली जा सकती है” — यह राज्य का निर्णय है, इसलिए हम छपी लागत ही लेते हैं।
“Table 7: Indicative Cost of Semi-Permanent Sprinkler System”रेन गन: आपके पाइप और क्षेत्र की सांकेतिक लागत का 55% या 45%।
गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें। कम पहुँच वाले राज्यों और पूर्वोत्तर सहित पहाड़ी राज्यों के लिए दिशानिर्देश कहते हैं कि 15% और 25% अधिक लागत “ली जा सकती है” — यह राज्य का निर्णय है, इसलिए हम छपी लागत ही लेते हैं।
“Table: 9 Indicative Cost of Large Volume Sprinklers(Rain–gun)”जो किसान अपने एफपीओ, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह या जल उपयोगकर्ता समूह के ज़रिये क्लस्टर में ड्रिप लगाते हैं, उन सभी को ज़मीन के आकार से परे सांकेतिक लागत का 55% मिलता है।
क्लस्टर मैदानी राज्यों में 50 हेक्टेयर या अधिक और पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में 20 हेक्टेयर का, लगातार ज़मीन पर होता है; सहायता संगठन के ज़रिये मिलती है (धारा 7.27.1)। क्लस्टर में स्प्रिंकलर प्रणाली पर भी यही 55% लागू है। गिनी जाने वाली लागत आपके कोटेशन और दिशानिर्देशों में आपकी प्रणाली, दूरी और क्षेत्र की सांकेतिक लागत (जीएसटी सहित) में से जो कम हो, वही है (धारा 20.1)। प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर (धारा 7.9), और उसी ज़मीन पर सात साल तक दोबारा नहीं (धारा 7.10)। छपे हुए आकारों के बीच लागत सीधी रेखा से निकाली जाती है, जैसा दिशानिर्देश का अपना उदाहरण दिखाता है (धारा 9.5); तालिका में न दी गई दूरी के लिए दिशानिर्देश पास की दूरियों का औसत लेता है — यहाँ सबसे पास वाली चुनें।
“7.27.1 … Water User Associations/Groups, Farmer Producer Organizations, Cooperative societies, Self-Help Groups, Growers’ Associations etc. shall be encouraged to adopt Micro Irrigation in a cluster. In such cases the beneficiary will be entitled to avail financial assistance through their respective organizations / bodies. The total financial assistance available to the individual beneficiary in the group would be 55% under the scheme.”सूक्ष्म सिंचाई क्लस्टर चलाने वाले एफपीओ, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह या जल उपयोगकर्ता समूह को क्लस्टर लागत का 3% प्रशासनिक शुल्क मिल सकता है।
“दिया जा सकता है” — राज्य तय करता है। राज्यों को सूक्ष्म सिंचाई लक्ष्य का कम से कम 5% एफपीओ के ज़रिये पूरा करना है (धारा 7.27.2)।
“Such farmers groups/organizations may be allowed to avail an administrative/institutional charges @ 3% of the cost of the Cluster.”सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के साथ उर्वरक टैंक, सैंड या हाइड्रो-साइक्लोन फ़िल्टर, या ड्रिप लाइन वाइंडर: सांकेतिक क़ीमत का 55% (लघु-सीमांत) या 45%।
“उस समय लागू सब्सिडी दर” पर — यानी धारा 20.1 की सूक्ष्म सिंचाई दर — आपके कोटेशन और अनुलग्नक XII की सांकेतिक क़ीमत में जो कम हो उस पर। उर्वरक टैंक, वेंचुरी या स्वचालित डोज़िंग में से एक ही ले सकते हैं (13.1(i))। कोई और वैकल्पिक सामान आपके अपने ख़र्च पर है (13.4)।
“13.1 … The provision is kept to provide the said component on the then existing rate of subsidy to the beneficiary; if required & provided. These components are: i. Fertilizer tank … ii. Sand filters/media filters … iii. Hydro Cyclone Filters/Sand Separators … iv. Drip Line Winder”मैदानी क्षेत्र में जल संचयन तालाब या डिग्गी: ₹125 प्रति घन मीटर पर गिनी लागत का 50%, लाइनिंग सहित अधिकतम ₹75,000।
बिना लाइनिंग वाले तालाब/टैंक पर गिनी जाने वाली लागत 30% कम होती है (अनुलग्नक XIII, मद 1) — यहाँ की राशि लाइनिंग वाले के लिए है। केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“1 Water harvesting system ,Diggi for individuals/community — 50% of cost (Construction cost - Rs. 125 for plain/ Rs. 150 per cum for hilly areas) limited to Rs. 75000 for plain areas and Rs. 90000 for hilly areas including lining. For smaller size of the ponds/ dug wells, cost admissible on pro rata basis. Cost for non-lined ponds/tanks will be 30% less.”पहाड़ी क्षेत्र में जल संचयन तालाब या डिग्गी: ₹150 प्रति घन मीटर पर गिनी लागत का 50%, लाइनिंग सहित अधिकतम ₹90,000।
दिशानिर्देश पहाड़ी क्षेत्रों की सूची नहीं देता; यह राज्य तय करता है। बिना लाइनिंग वाले तालाब/टैंक पर गिनी जाने वाली लागत 30% कम होती है (अनुलग्नक XIII, मद 1) — यहाँ की राशि लाइनिंग वाले के लिए है। केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“1 Water harvesting system ,Diggi for individuals/community — 50% of cost (Construction cost - Rs. 125 for plain/ Rs. 150 per cum for hilly areas) limited to Rs. 75000 for plain areas and Rs. 90000 for hilly areas including lining. For smaller size of the ponds/ dug wells, cost admissible on pro rata basis. Cost for non-lined ponds/tanks will be 30% less.”उथला या मध्यम ट्यूबवेल/बोरवेल: लागत का 50%, अधिकतम ₹25,000 — अति-दोहित, क्रिटिकल या सेमी-क्रिटिकल भूजल क्षेत्रों में नहीं।
केवल वहाँ जहाँ केंद्रीय भूजल बोर्ड ने क्षेत्र को अति-दोहित, क्रिटिकल या सेमी-क्रिटिकल नहीं माना है (अनुलग्नक XIII, मद 2)। केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“2 Construction of Tube wells / Bore wells (Shallow / Medium) only in areas which are not categorized under over-exploited, critical & semi- critical zones by Central Ground Water Board. — 50% of the total cost of installation limited to Rs. 25,000 / - per unit”छोटे तालाब/टैंक की मरम्मत या जीर्णोद्धार: लागत का 50%, अधिकतम ₹15,000।
केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“3 Restoration / Renovation of small tank — 50% of the cost of renovation limited to Rs. 15,000 / - per unit”बंद पड़े बोरवेल का पुनर्भरण (रिचार्ज): लागत का 50%, अधिकतम ₹5,000।
केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“4 Recharge of defunct bore well — 50% of the cost of recharging limited to Rs. 5000 / - per unit”पाइप या प्री-कास्ट जल वितरण प्रणाली: लागत का 50%, अधिकतम ₹10,000 प्रति हेक्टेयर।
मद 5 कोई क्षेत्र सीमा नहीं छापता; हम अधिकतम 5 हेक्टेयर गिनते हैं, जो इससे जुड़ी सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के लिए प्रति लाभार्थी पीडीएमसी सीमा है (धारा 7.9)। केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“5 Pipe/pre-cast distribution system — 50% of the cost of system limited to Rs. 10,000 / - per ha”बिजली या डीज़ल से पानी उठाने का पंप: स्थापना लागत का 50%, अधिकतम ₹15,000।
केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“6 Water Lifting Devices (Electric, Diesel, wind / Solar) — 50% of the cost of installation limited to Rs. 15,000/ - per electric / diesel unit and Rs. 50,000/- per solar / wind unit”सौर या पवन ऊर्जा से पानी उठाने का यंत्र: स्थापना लागत का 50%, अधिकतम ₹50,000।
केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“6 Water Lifting Devices (Electric, Diesel, wind / Solar) — 50% of the cost of installation limited to Rs. 15,000/ - per electric / diesel unit and Rs. 50,000/- per solar / wind unit”15 एचपी तक का पेट्रोल सिंचाई पंप: स्थापना सहित लागत का 50%, अधिकतम ₹10,000।
केवल “तभी जब किसान ने अपने खेत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने का विकल्प चुना हो” (अनुलग्नक XIII), उसी प्रणाली से जुड़ा और किसान की वास्तविक ज़रूरत के अनुसार (धारा 13.2)। राज्य पीडीएमसी राशि का लगभग 20% (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 40%) ही इन कामों पर ख़र्च कर सकते हैं (धारा 7.8), इसलिए पूछें कि आपका राज्य इस साल यह दे रहा है या नहीं।
“7 Petrol Irrigation Pumps- up to 15 hp — Rs. 10000/unit or 50% of the cost of the system (including installation) whichever is less.”नया ऑफ़-ग्रिड सोलर पंप (या डीज़ल पंप बदलने) पर केंद्र बेंचमार्क लागत का 30% देता है — पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में 50%।
जहाँ राज्य अपना हिस्सा देता है, वहाँ वह कम से कम 30% और जोड़ता है, और किसान 40% देता है (विशेष क्षेत्रों में 20%)। केवल ग्रिड-रहित क्षेत्र; डार्क या ब्लैक ज़ोन में नए पंप नहीं (5.2.5)। सहायता 7.5 एचपी के स्तर तक (पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों में 10% स्थापनाओं के लिए 15 एचपी)। लद्दाख 15 एचपी के लिए पहाड़ी क्षेत्र में गिना गया है (5.1(v)) पर 5.3.1.1(ii) की 50% सूची में नहीं, इसलिए वहाँ 30% दिखाते हैं। राज्य हिस्से के बिना केंद्रीय पोर्टल से आवेदन पर सहायता 30% तक सीमित है (5.3.1.2(iii))। ये 2024 के दिशानिर्देशों के नियम हैं, 31.12.2025 तक निविदा हुए पंपों के लिए; पीएम कुसुम 2.0 में दरें अलग हो सकती हैं।
“CFA of 30% of the benchmark cost or tender cost, whichever is lower, of a particular category/type of the stand-alone solar Agriculture pump will be provided. The State Government will give a subsidy of at-least 30%; and the remaining 40% will be provided by the farmer.”ग्रिड से जुड़े मौजूदा पंप पर सोलर पैनल लगाने के लिए केंद्र सौर लागत का 30% तक देता है — पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में 50% तक — और बची बिजली आप बिजली कंपनी को बेच सकते हैं।
पंप की क्षमता (kW) के दोगुने तक सौर क्षमता को सहायता, 7.5 एचपी तक के पंपों के लिए (6.3.5(i))। पंप बदलने पर केंद्र की सहायता नहीं (6.3.5(iv))। राज्य सब्सिडी न हो तो बैंक लागत का 70% तक ऋण दे सकते हैं (6.3.5(v))। दिशानिर्देश 30% / 50% “तक” कहते हैं, इसलिए वास्तविक हिस्सा कम हो सकता है। अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप को भी 50% (“द्वीप”) मिल सकता है, पर पैरा 6 उनका नाम नहीं लेता, इसलिए वहाँ 30% दिखाते हैं। ये 2024 के दिशानिर्देशों के नियम हैं, 31.12.2025 तक स्वीकृत परियोजनाओं के लिए; पीएम कुसुम 2.0 में दरें अलग हो सकती हैं।
“CFA up to 30% (upto 50% of NER/Hilly/Islands) of the cost of solarisation will be provided for solar PV component including solar modules, module mounting structure, controller/inverter, balance of system, installation & commissioning, five Year CMC, insurance, etc., on basis of benchmark cost or cost discovered through tender whichever is less.”अपनी ज़मीन पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाएँ — ख़ुद, किसी समूह, एफपीओ या सहकारी समिति के साथ, या किसी डेवलपर के ज़रिये जो आपको किराया दे — और डिस्कॉम 25 साल तक तय दर पर इसकी पूरी बिजली ख़रीदती है।
प्लांट यथासंभव सब-स्टेशन से 5 किमी के भीतर हो; डिस्कॉम हर सब-स्टेशन की क्षमता अधिसूचित कर आवेदन माँगती है, और अधिक प्रस्ताव आने पर अपनी दर को अधिकतम सीमा रखकर निविदा करती है (पैरा 4.3)। आप अधिकतम ₹5,000 प्रति मेगावाट प्रोसेसिंग शुल्क, बोली होने पर ₹1 लाख/मेगावाट बैंक गारंटी देते हैं, और सब-स्टेशन तक लाइन बनाते हैं (पैरा 4.4, 4.7, 4.8)। ₹0.40 प्रति यूनिट प्रोत्साहन डिस्कॉम को मिलता है, आपको नहीं (पैरा 4.9)। बाक़ी पीएम-कुसुम की तरह यह भी पीएम कुसुम 2.0 आने तक नई परियोजनाओं के लिए बंद है।
“Component-A: Setting up of 10,000 MW of Decentralized Ground/ Stilt Mounted Grid Connected Solar or other Renewable Energy based Power Plants by the farmers on their land … Solar or other Renewable Energy based Power Plants (REPP) of capacity of 500 kW to 2 MW will be setup by Renewable Power Generator (RPG). … The renewable power generated will be purchased by DISCOMs at the pre-fixed levelized tariff. … The duration of PPA will be 25 years from Commercial Operation Date (COD) of the project.”जहाँ आपका राज्य कंपोनेंट-B राज्य अंश के साथ चलाता है, वहाँ वह केंद्र के 30%–50% के ऊपर स्टैंडअलोन सोलर पंप की लागत का कम से कम 30% और देता है।
“कम से कम 30%” — राज्य अधिक भी दे सकता है। जो राज्य “अपना हिस्सा देने की स्थिति में नहीं” है, वहाँ किसान केवल केंद्र के हिस्से से पंप लगा सकते हैं (पैरा 5.2.2), इसलिए अपने राज्य का आदेश देखें। दोनों हिस्से मिलने पर किसान अधिकतम 40% देता है (पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में अधिकतम 20%) (पैरा 5.3.1.1)। ये 2024 के दिशानिर्देशों के नियम हैं, 31.12.2025 तक निविदा हुए पंपों के लिए।
“CFA of 30% of the benchmark cost or tender cost, whichever is lower, of a particular category/type of the stand-alone solar Agriculture pump will be provided. The State Government will give a subsidy of at-least 30%; and the remaining 40% will be provided by the farmer.”फ़ीडर स्तर सौरीकरण में सब-स्टेशन के पास के किसान अपनी ज़मीन सोलर प्लांट के लिए राज्य सरकार द्वारा घोषित किराए पर पट्टे पर दे सकते हैं।
दिशानिर्देश केवल यह बताता है कि अभी कुछ राज्य ₹25,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष या रेडी रेकनर दर का 6%, जो अधिक हो, 3% सालाना बढ़ोतरी के साथ, 30 साल के लिए देते हैं — आपका राज्य अपनी दर तय करता है। सब-स्टेशन के पास कम से कम 5 एकड़ लगातार ज़मीन को प्राथमिकता है (लगभग 4–5 एकड़ प्रति मेगावाट)। ज़मीन राज्य के पोर्टल पर या तहसीलदार/ज़िलाधिकारी के ज़रिये दें (पैरा 6.4.2(iii)–(iv))। फ़ीडर स्तर प्लांट की केंद्रीय सहायता राज्य एजेंसी को जाती है, किसानों को नहीं।
“Land for setting up the solar plant: If there is no Government land near the substation to set up solar plant, theland may be taken on lease from the farmers. Land lease rates would be announced by the state government. … The State Government will publicise these rates along with the list of substations and request farmers to offer their land on lease in the vicinity of the substations at the offered lease rent.”किसान समूह के स्वामित्व वाले लाइनिंग युक्त सामुदायिक जल टैंक के लिए ₹80 प्रति घन मीटर (पूर्वोत्तर व हिमालयी क्षेत्रों में ₹100) का 75%, अधिकतम 30,000 घन मीटर।
लाइनिंग कम से कम 500 माइक्रॉन प्लास्टिक फ़िल्म या आरसीसी/एचडीपीई की हो; बिना लाइनिंग के तालाब (केवल काली मिट्टी में) 30% कम लागत के गिने जाते हैं। मनरेगा लाभार्थियों को केवल लाइनिंग की लागत मिलती है; अन्य को पूरी लागत पर। व्यक्तिगत किसानों का जल संचयन पीडीएमसी मानकों से होता है।
“B.4. Creation of Water resources a) Water Harvesting Structures for Community– Construction of on farm community tank, pond /reservoirs with use of plastic/RCC lining Rs. 24.00 lakh per unit @ Rs 80 per cubic metre in general areas and Rs 30 lakh/ per unit @ Rs 100 per cubic metre for NE & Himalayan States, and Scheduled areas, Andaman & Nicobar and Lakshadweep Islands for a maximum capacity of 30,000 cub mts. Assistance @ 75% to irrigate 10 ha of command area, for a storage capacity of 30,000 cubic meter and for smaller capacity on pro-rata basis … owned & managed by a community/ farmer group.”पानी की टंकी, खुला/रिंग कुआँ, स्प्रिंकलर या ड्रिप की बोर्ड इकाई लागत का 40% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 75–90%), जो जोत के आकार से तय होती है।
0.4–25 हेक्टेयर की जोत (अनुसूचित जाति/जनजाति 0.10 हेक्टेयर से)। एक जल संरचना और सिंचाई उपकरण; पिछले दस वर्षों में जिस संरचना पर सहायता ली हो उसके लिए नहीं। 2 हेक्टेयर तक के अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पादकों को 90% मिलता है; हम 2 हेक्टेयर से ऊपर के लिए छपी 75% दर दिखाते हैं ताकि राशि कभी बढ़ाकर न बताएँ। 25 हेक्टेयर से बड़ी जोत और कंपनियों को 25%। दरें 2024-25 से 2025-26 की कार्यान्वयन विधि से हैं; आईसीडीपी 2026-27 तक बढ़ा है, पर जाँच के समय 2026-27 का उत्पादक परिपत्र प्रकाशित नहीं था। बजट कम होने पर बोर्ड दर घटा सकता है (1.1.1.3 टिप्पणी 1)।
“1.1.2.2. Scale of subsidy: I. General a) Up to 25 ha. 40% II. ST / SC Growers a) Up to 2 Ha. 90% b) >2 75%”वाटरशेड परियोजना में आपकी अपनी ज़मीन पर मिट्टी और जल संरक्षण (एनआरएम) के काम का ख़र्च परियोजना देती है, सिर्फ़ आपका 10% हिस्सा छोड़कर — अनुसूचित जाति/जनजाति या छोटे-सीमांत किसान हों तो 5% — जो आप नक़द या श्रम के रूप में दे सकते हैं।
आपका अंशदान गाँव के वाटरशेड विकास कोष में जाता है, जिससे बाद में साझा संपत्तियों की मरम्मत होती है। केवल स्वीकृत परियोजना वाले गाँव शामिल हैं।
“The contribution to WDF may be 10% of cost of NRM works when executed on private lands. However, in case of SC/ST, small and marginal farmers, the contribution may be 5% of cost of NRM works. These contributions may be acceptable either in cash (preferably transferred electronically) at the time of execution of works or in the form of voluntary labour.”बिना लाइनिंग वाले खेत-तालाब की खुदाई की लागत का 50%, अधिकतम ₹52,500।
मानक तालाब 22 मी × 20 मी × 3 मी है; बड़ा तालाब खुदवा सकते हैं, पर अनुदान अधिकतम ₹52,500 ही रहेगा (प्रस्तर 5, 6)। केवल उन किसानों के लिए जिन्होंने पिछले 7 वर्षों में उद्यान/कृषि विभाग से ड्रिप/स्प्रिंकलर लगवाया है और वह चालू है, या जो तालाब के साथ सूक्ष्म सिंचाई लगाने का त्रिपक्षीय अनुबंध देते हैं (प्रस्तर 3)। लक्ष्य का 15% अनुसूचित जाति/जनजाति और 50% लघु-सीमांत किसानों के लिए है, महिलाओं को प्राथमिकता (प्रस्तर 3)।
“जल संचयन अन्तर्गत खेत-तालाब का निर्माण जिसके नान लाइन तालाब पर 50 प्रतिशत अधिकतम (लाइन युक्त तालाब के अनुदान रू0 75000 से 30 प्रतिशत कम) रू0 52500 का अनुदान निर्धारित है।”तालाब खुदवा चुके और सूक्ष्म सिंचाई लगा चुके किसान को बिजली या डीज़ल पंपसेट की कीमत का 50%, अधिकतम ₹15,000।
केवल उन किसानों के लिए जिनके यहाँ पंजीकरण की तिथि तक उद्यान विभाग से सूक्ष्म सिंचाई लग चुकी है और तालाब पूरा हो गया है; पंपसेट 5 एचपी या अधिक का और आईएसआई मार्क वाला हो, जिसे किसान ख़ुद ख़रीदकर बिल दे (प्रस्तर 10)।
“वाटर लिफ्टिंग डिवाइस अन्तर्गत पम्पसेट (electric/डीजल) जिस पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रू0 15000.00 प्रति इकाई अनुदान निर्धारित है।”स्टैण्ड एलोन सोलर पंप (1 से 7.5 एचपी) की निविदा कीमत का 60%; बाकी 40% आप देते हैं।
जो पंप बुक करें उसकी निविदा कीमत भरें — 60% उसी कीमत पर है। केंद्र का अंश 1 से 7.5 एचपी तक के पंप पर बेंचमार्क या निविदा कीमत, जो कम हो, का 30% है; 10 एचपी पंप पर 7.5 एचपी वाला केंद्रीय अंश मिलता है (प्रस्तर 1), इसलिए 7.5 एचपी से ऊपर 60% पूरा न मिले। इसमें केंद्र की पीएम-कुसुम राशि शामिल है — दोनों को जोड़ें नहीं।
“बेन्चमार्क मूल्य टेण्डर मूल्य से कम होने के फलस्वरूप सोलर पम्पों के कुल मूल्य (टेण्डर मूल्य) पर कृषकों को 60 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य कराने हेतु अतिरिक्त धनराशि को राज्य सरकार के अंश से टाप-अप के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा। अवशेष 40 प्रतिशत कृषक अंश के रूप में लाभार्थी कृषक के द्वारा वहन किया जायेगा।”ड्रिप, मिनी या माइक्रो पर लघु-सीमांत किसानों को इकाई लागत का 90%; अन्य किसानों को 80%।
इस दर में केंद्र की पर ड्रॉप मोर क्रॉप राशि शामिल है — यह उसके ऊपर अलग से नहीं है।
“योजनान्तर्गत प्रदेश सरकार द्वारा इस विधा को अधिक लोकप्रिय करने एवं पानी की बचत किये जाने हेतु ड्रिप, मिनी एवं माइक्रो में लघु सीमान्त कृषकों को इकाई लागत का 90 प्रतिशत एवं एवं अन्य कृषकों 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।”पोर्टेबल, सेमी-परमानेंट या रेनगन स्प्रिंकलर पर लघु-सीमांत किसानों को इकाई लागत का 75%; अन्य किसानों को 65%।
इस दर में केंद्र की पर ड्रॉप मोर क्रॉप राशि शामिल है — यह उसके ऊपर अलग से नहीं है।
“पोर्टेबल, सेमीपरमानेंट एवं रेनगन स्प्रिंकलर हेतु लघु सीमान्त कृषकों को 75 एवं अन्य कृषकों को 65 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था निर्धारित।”छोटे और सीमांत किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम का 100% मिलता है; बाकी किसानों को 75%।
पैसा तीन हिस्सों से आता है — भारत सरकार का हिस्सा, राज्य का अनिवार्य हिस्सा और ‘राज्य अतिरिक्त हिस्सा’, जो कुल को 100% / 75% तक ले जाता है और सामग्री पर 5% जीएसटी भी देता है (तालिका 1–3)। यह कुल अनुदान है, केंद्र की ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अनुदान के ऊपर अलग से नहीं। कृषि बजट 2026-27 (अनुच्छेद 25) यही पैटर्न दोहराता है।
“as per the existing subsidy pattern of 100% for SF/MF and 75% for other farmers towards the installation of the Micro Irrigation System”अनुसूचित जाति/जनजाति के छोटे व सीमांत किसानों को केंद्र–राज्य सोलर पंप योजना में सोलर पंप सेट पर 80% अनुदान।
केवल उन अनुसूचित जाति/जनजाति किसानों के लिए जो छोटे या सीमांत भी हैं।
“80 per cent subsidy for the installation of solar-powered pump sets under Union-State shared schemes.”जिन अनुसूचित जाति/जनजाति किसानों की वर्षा-आधारित ज़मीन पर सिंचाई नहीं है, उन्हें बिजली या सोलर पंप सहित बोरवेल या ट्यूबवेल, पूरा ख़र्च राज्य देगा (2026-27 में 300 किसान)।
“To create irrigation facilities in rainfed lands belonging to 300 Scheduled Caste and Scheduled Tribe farmers who do not have access to irrigation, bore wells or tube wells with electric motor pumps or solar-powered pump sets will be established with 100 per cent subsidy.”छोटे, सीमांत और महिला किसानों को बोरवेल या ट्यूबवेल की लागत का 60%, प्रति कुआँ ₹1,20,000 तक।
भाषण इसे सामान्य वर्ग के किसानों की योजना बताता है; अनुसूचित जाति और जनजाति के किसान अण्णल आंबेडकर योजना (अनुच्छेद 13) में आते हैं।
“60 percent back ended subsidy assistance up to a maximum of Rs.1.20 lakh per well for small, marginal, and women farmers”बाकी किसानों को बोरवेल या ट्यूबवेल की लागत का 50%, प्रति कुआँ ₹1,00,000 तक।
अगर आप छोटे, सीमांत या महिला किसान हैं, तो आप पर 60% / ₹1,20,000 वाली दर लागू होती है — दोनों नहीं।
“50 percent back ended subsidy assistance up to a maximum of Rs.1 lakh per well for other categories of farmers”छोटे और सीमांत किसान (2 हेक्टेयर तक) ड्रिप या स्प्रिंकलर की लागत का 10% देते हैं — 90% पीएमकेएसवाई और राज्य टॉप-अप से मिलता है।
90% कुल मिलाकर है: छोटे और सीमांत किसानों के लिए पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी का अपना 55% और किसान के 10% हिस्से तक बाक़ी राशि राज्य का टॉप-अप। 2 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन वाले किसान इस टॉप-अप में नहीं हैं। 22 जून 2026 के 2026-27 बजट भाषण में घोषित। राज्य के पोर्टलों पर अभी इसका लागू करने वाला आदेश या दिशानिर्देश नहीं मिला, इसलिए पात्रता और आवेदन का तरीक़ा बदल सकता है — अपने प्रखंड कृषि कार्यालय से पुष्टि करें।
“For small and marginal farmers in West Bengal, owning cultivable lands up to 2 Ha, it is proposed that eligible farmers are able to avail the benefits under PMKSY PDMC contributing only 10% of the projected cost and balance cost will be borne by State Government as top up, in addition to financial support in PMKSY PDMC.”प्रति बूँद अधिक फ़सल में 55% पाने वाले किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर की स्वीकृत लागत का अतिरिक्त 25% — कुल 80%।
पीडीएमसी में 55% की दर लघु और सीमांत किसानों के लिए है, इसलिए हम यह अतिरिक्त सब्सिडी उन्हें दिखाते हैं। नाबार्ड के सूक्ष्म सिंचाई कोष ऋण से: तीन साल में अतिरिक्त सब्सिडी के लिए ₹66.8628 करोड़ (मंत्रिपरिषद निर्णय सं. 94/10/2026, दिनांक 04.08.2026)।
“The Top-Up Subsidy shall be confined to 25% assistance for admissible Drip and Sprinkler Irrigation Systems and shall be admissible to beneficiaries entitled to 55% subsidy under PDMC, subject to an overall subsidy ceiling of 80% of the approved/admissible cost.”धान का बिचड़ा और जूट: अधिकतम ₹1,500 प्रति एकड़ (₹750 प्रति सिंचाई, अधिकतम 2 सिंचाई), 8 एकड़ तक।
दर ₹75 प्रति लीटर डीजल है, यानी ₹750 प्रति एकड़ प्रति सिंचाई (कंडिका 1.1); दिखाई गई राशि सभी अनुमत सिंचाइयों की अधिकतम राशि है। प्रति किसान अधिकतम 8 एकड़ (कंडिका 1.4), कम से कम ₹100 का भुगतान (कंडिका 1.5), परिवार के एक ही सदस्य को (कंडिका 1.8), और केवल बिहार के निबंधित पेट्रोल पंप से डिजिटल/कम्प्यूटराइज़्ड वाउचर पर खरीदे डीजल पर (कंडिका 1.9, 3.4)। सही राशि सत्यापन के बाद तय होती है (कंडिका 3.11)।
“खरीफ फसलों की सिंचाई डीजल पम्पसेट से करने के लिए क्रय किये गये डीजल पर 75 रूपये प्रति लीटर की दर से 750 रूपये प्रति एकड़, प्रति सिंचाई डीजल अनुदान दिया जायेगा। धान का बिचड़ा एवं जूट फसल की अधिकतम 2 सिंचाई के लिए अधिकतम 1500 रूपये प्रति एकड़ देय होगा।”खड़ी फसल — धान, मक्का, दलहन, तिलहन, मौसमी सब्ज़ी, औषधीय व सुगंधित पौधे: अधिकतम ₹2,250 प्रति एकड़ (अधिकतम 3 सिंचाई), 8 एकड़ तक।
दर ₹75 प्रति लीटर डीजल है, यानी ₹750 प्रति एकड़ प्रति सिंचाई (कंडिका 1.1); दिखाई गई राशि सभी अनुमत सिंचाइयों की अधिकतम राशि है। प्रति किसान अधिकतम 8 एकड़ (कंडिका 1.4), कम से कम ₹100 का भुगतान (कंडिका 1.5), परिवार के एक ही सदस्य को (कंडिका 1.8), और केवल बिहार के निबंधित पेट्रोल पंप से डिजिटल/कम्प्यूटराइज़्ड वाउचर पर खरीदे डीजल पर (कंडिका 1.9, 3.4)। सही राशि सत्यापन के बाद तय होती है (कंडिका 3.11)।
“खड़ी फसल में धान, मक्का एवं अन्य खरीफ फसलों के अंतर्गत दलहनी, तेलहनी, मौसमी सब्जी, औषधीय एवं सुगन्धित पौधे की अधिकतम 3 सिंचाई के लिए अधिकतम 2250 रूपये प्रति एकड़ देय होगा।”आप अपने पंप प्रकार का केवल तय कृषक अंश देते हैं; पंप की बाकी लागत सरकार और राज्य द्वारा चुकाए जाने वाले ऋण से पूरी होती है।
आपका अंश पंप की लागत का लगभग 10% मार्जिन मनी है (नियम बिंदु 5); लागत के 60% के बराबर हिस्सा कृषक ऋण से पूरा होता है, जिसके भुगतान का पूरा दायित्व राज्य शासन का है (नियम बिंदु 6)। शर्त: उस खसरे पर अभी बिजली का पंप नहीं होना चाहिए, और बाद में बिजली पंप लगाने पर उस पर बिजली अनुदान नहीं मिलेगा (योजना पृष्ठ)। यूनिवर्सल सोलर पंप कंट्रोलर (USPC) वाले पंप पर उसी क्षमता के बिना USPC वाले पंप जितना ही अनुदान मिलता है, इसलिए उनका कृषक अंश ज़्यादा है (नियम बिंदु 3)।
“सोलर पम्प प्रकार — हितग्राही किसान अंश (रु.): 1 एच.पी.डी.सी. सरफेस (Normal Controller) 12,427/-; 1 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (Normal Controller) 13,713/-; 2 एच.पी.डी.सी. सरफेस (Normal Controller) 15,574-; 2 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (Normal Controller) 15,574/-; 3 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (Normal Controller) 20,968/-; 3 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (USPC Controller) 43,728; 5 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (Normal Controller) 30,289/-; 5 एच.पी.डी.सी. सबमर्सिबल (USPC Controller) 57,914/-; 7.5 एच.पी.डी.सी.सबमर्सिबल (Normal Controller) 41,537/-; 7.5 एच.पी.डी.सी.सबमर्सिबल (USPC Controller) 76,009/-; 7.5 एच.पी.ए.सी. सबमर्सिबल (Normal Controller) 41,537/-; 7.5 एच.पी.ए.सी. सबमर्सिबल (USPC Controller) 78,331/-”केंद्र की ड्रिप/स्प्रिंकलर सब्सिडी के ऊपर अतिरिक्त 25% (लघु-सीमांत किसान) या 30% (अन्य, 5 हेक्टेयर तक) — कुल 80% या 75%।
जो किसान लघु या सीमांत नहीं हैं, उन्हें 5 हेक्टेयर तक 30% अतिरिक्त मिलता है। राज्य की दरें अधिकतम हैं: केंद्र के मानकों वाली लागत और अधिकतम सीमा में से जो कम हो, वही मिलता है (धारा 4(क))। 2019 में सूखा-प्रवण तालुकों, आत्महत्या-प्रभावित और नक्सल-प्रभावित ज़िलों में शुरू हुई; 18.11.2021 के शासन निर्णय से बाकी 107 तालुकों में भी लागू, इसलिए अब पूरे राज्य में है।
“सुक्ष्मसिंचन-[केंद्र पुरस्कृत प्रधानमंत्री कृषी सिंचन योजनेंतर्गत- प्रति थेंब अधिक पीक(सुक्ष्म सिंचन) घटकांतर्गत देण्यात येणाऱ्या अनुदानास पूरक अनुदान] अ) ठिबक सिंचन ब) तुषार सिंचन — प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजनेंतर्गत अल्प व अत्यल्प भू-धारक शेतकऱ्यांना देय ५५% अनुदानास पुरक अनुदान २५% देऊन ८०% अनुदान देण्यासाठी व इतर शेतकऱ्यांना (५ हेक्टरच्या मर्यादेत) देय ४५% अनुदानास ३०% अनुदान देऊन ७५% अनुदान देण्यासाठी आवश्यक निधीच्या मर्यादेत.”अपने खेत-तालाब की प्लास्टिक लाइनिंग की लागत का 50%, अधिकतम ₹75,000।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार भुगतान (धारा 4(iii))। 2026-27 की मंज़ूरी (17.09.2026 का शासन निर्णय) सूक्ष्म सिंचाई और व्यक्तिगत खेत-तालाब के लिए है; इस साल लाइनिंग खुली है या नहीं, अपने तालुका कृषि कार्यालय से पूछें।
“वैयक्तिक शेततळ्यांचे प्लॅस्टीक अस्तरीकरण — प्रत्यक्ष खर्चाच्या ५०% किंवा रु.७५,००० यापैकी जे कमी असेल ते”सोलर पंप की लागत का 10% आप देते हैं (अनुसूचित जाति/जनजाति हों तो 5%); बाकी 90% या 95% योजना देती है।
योजना का लक्ष्य पाँच साल में 5 लाख ऑफ-ग्रिड सोलर पंप है; इस घटक का 60% एआईआईबी ऋण और 30% राज्य अनुदान से, और ऊपर लिखा किसान हिस्सा (धारा 2, 5)।
“शेतकऱ्यांचा लाभार्थी हिस्सा (सर्वसाधारण लाभार्थी१०% व अनु. जाती/जमाती लाभार्थी ५%)”इनलेट-आउटलेट सहित खेत-तालाब की खुदाई पर आकार के अनुसार तय अनुदान: ₹23,881 (15 × 15 × 3 मीटर) से ₹75,000 (30 × 25 × 3 मीटर और बड़ा) तक; काली मिट्टी में 1:1.5 ढलान पर थोड़ा कम।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। अपने नाम पर कम से कम 0.40 हेक्टेयर ज़मीन चाहिए, और मागेल त्याला शेततळे, सामूहिक तालाब या किसी दूसरी सरकारी योजना से पहले खेत-तालाब न लिया हो। स्वीकृत से बड़ा तालाब बनाने पर भी स्वीकृत राशि ही मिलती है; छोटा बनाने पर उससे नीचे के आकार की राशि। अनुदान एक ही किस्त में मिलता है। ये वही आकार-वार दरें हैं जो राज्य की मुख्यमंत्री शाश्वत कृषि सिंचन योजना की व्यक्तिगत खेत-तालाब मार्गदर्शिका 2022-23 (07.11.2022) में हैं, जिसका हवाला मार्गदर्शिका देती है।
“वैयक्तिक शेततळे आकारमान व खोदकामाचे परीमाण निहाय अर्थसहाय्य — अ. इनलेट आऊटलेट सह शेततळे (रक्कम रुपये): देय अनुदान १५ X १५ X ३ — २३८८१ … ३४ X ३४ X ३ — ७५०००; विविध आकारमानाच्या शेततळ्यासाठी कमाल रक्कम रुपये ७५०००/- … रकमेच्या मर्यादेत अनुदान देय राहील.”इनलेट-आउटलेट रहित खेत-तालाब पर आकार के अनुसार तय अनुदान: ₹14,433 (15 × 15 × 3 मीटर, काली मिट्टी) से ₹75,000 तक।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। शर्तें इनलेट-आउटलेट वाले तालाब जैसी; बिना इनलेट-आउटलेट वाले तालाब को भरने के लिए अतिरिक्त बहता पानी उपलब्ध होना चाहिए। केवल एक आकार चुना जा सकता है।
“ब. इनलेट आऊटलेट विरहित शेततळे — देय अनुदान १५ X १५ X ३ — १८६२१ … ३४ X ३४ X ३ — ७५०००; बाजू उतार (१:१.५) (काळ्या मातीमध्ये) १५ X १५ X ३ — १४४३३”पहले से बने खेत-तालाब (इनलेट-आउटलेट रहित) की प्लास्टिक फ़िल्म अस्तरीकरण की लागत का 50%, अधिकतम ₹75,000।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। तालाब पहले से बना हो और कम से कम 15 × 15 × 3 मीटर (441 घन मीटर) का हो, और पहले अस्तरीकरण की मदद न ली हो। लागत 500 माइक्रॉन फ़िल्म ₹77 प्रति वर्ग मीटर और बिछाई ₹18 प्रति वर्ग मीटर से गिनी जाती है; जैसे 20 × 20 × 3 मीटर तालाब: लागत ₹82,436 → ₹41,218। तालाब के चारों ओर बाड़ अपने ख़र्च से।
“१. इनलेट आउटलेट विरहित शेततळ्यांच्या प्लास्टिक फिल्म अस्तरीकरणासाठी प्रत्यक्ष मोजमापानुसार लागणाऱ्या खर्चाच्या ५०% किंवा ₹७५,००० पैकी जे कमी असेल ते अर्थसहाय्य देय आहे.”अनुसूचित जाति और जनजाति के किसान: अस्तरीकरण लागत का 90%, अधिकतम ₹75,000।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। तालिका का उदाहरण: 20 × 20 × 3 मीटर तालाब, लागत ₹82,436 → छपी राशि ₹74,193 (तालिका गोल करती है; हमारा कैलकुलेटर ₹74,192 तक नीचे लेता है)।
“२. अनुसूचित जाती व अनुसूचित जमाती प्रवर्गातील लाभार्थी यांना प्रत्यक्ष मोजमापानुसार लागणाऱ्या खर्चाच्या ९० % किंवा ₹७५,००० पैकी जे कमी असेल ते अर्थसहाय्य देय राहील.”ड्रिप और स्प्रिंकलर सेट: लघु-सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक) को 80%, 2.01–5 हेक्टेयर वालों को 75%, अनुसूचित जाति/जनजाति को 90% — सरकारी लागत मानक पर, 5 हेक्टेयर तक।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। उसी रकबे पर सूक्ष्म सिंचाई की मदद दोबारा 7 साल बाद ही; पोर्टेबल स्प्रिंकलर लेने वाला किसान उसी ज़मीन पर 3 साल बाद अंतर-दर से ड्रिप ले सकता है। अपना सिंचाई स्रोत ज़रूरी है। पूर्व स्वीकृति से पहले सेट न लगाएँ — ऐसे दावे ख़ारिज होते हैं।
“अल्प व अत्यल्प भूधारक शेतकरी (२.०० हे. पर्यंत) — ८० %; २.०१ ते ५.०० हे. जमीनधारणा असणारे शेतकरी — ७५ %; अनुसूचित जाती व जमाती प्रवर्गातील शेतकरी — ९० %”अनुसूचित जाति और जनजाति के किसान: 10 एचपी तक के बिजली पंप या डीज़ल इंजन की क़ीमत का 90%, अधिकतम ₹40,000।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। केवल 5 हेक्टेयर तक वाले अनुसूचित जाति और जनजाति के किसान, परिवार में एक व्यक्ति, जिनके पास पानी है पर उठाने का साधन नहीं, और जिन्होंने दूसरी योजना से यह मदद नहीं ली।
“पाणी उपसा साधने (पंप संच) — विद्युत पंप (१० एच.पी. पर्यंत) / डिझेल इंजिन (१० एच.पी. पर्यंत): किंमतीच्या ९० टक्के किंवा उच्चतम रु.४०,०००/प्रती पंपसंच यापैकी जे कमी असेल ते”अनुसूचित जाति और जनजाति के किसान: सिंचाई पाइप की लागत का 100%, प्रचलित मानक पर (एचडीपीई ₹100 प्रति मीटर, पीवीसी ₹70, एचडीपीई लैमिनेटेड ₹40), अधिकतम ₹30,000।
केवल 21 ज़िलों (छत्रपति संभाजीनगर, बीड, जालना, परभणी, धाराशिव, लातूर, नांदेड़, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरोली, हिंगोली, अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल, बुलढाणा, वर्धा, जलगाँव, नासिक) के 7,201 परियोजना गाँवों के 5 हेक्टेयर तक ज़मीन वाले किसानों के लिए। 63, 75 या 90 मिमी का एक ही प्रकार का आईएसआई-मार्क पाइप; हर पाइप पर किसान का नाम, परियोजना का नाम और वर्ष उभारना ज़रूरी। किसान पंप सेट और पाइप दोनों ले सकता है।
“पाईप — एच.डी.पी.ई. / पी.व्ही.सी. / एच.डी.पी.ई. लॅमीनेटेड: प्रचलित आर्थिक मापदंडाच्या किंवा प्रत्यक्ष होणाऱ्या खर्चाच्या १००% किंवा रु. ३०,०००/- यापैकी जे कमी असेल ते”खेत-तालाब की स्वीकृत लागत का 80% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 90%), तालाब के आकार और मिट्टी के अनुसार।
15×15×3 मीटर और उससे बड़े तालाब के लिए एक ही सर्वे नंबर में कम से कम 1 एकड़ खेती की ज़मीन चाहिए; 0.5 एकड़ वाला किसान 10×10×3 या 12×12×3 मीटर (काली मिट्टी में 12×12×3 मीटर) बना सकता है, अगर जलग्रहण क्षेत्र कम से कम 1 एकड़ हो (3.2, 3.4)। जिन किसानों को कृषि भाग्य या किसी और योजना में पहले खेत-तालाब मिल चुका है, वे पात्र नहीं (3.2)। छपे सरकारी हिस्से गोल किए गए हैं; हम रुपये तक नीचे की ओर लेते हैं।
“ನೀರು ಸಂಗ್ರಹಣಾ ರಚನೆ (ಕೃಷಿ ಹೊಂಡ) — ಸಹಾಯಧನ (%): ಸಾಮಾನ್ಯ 80, ಪ.ಜಾತಿ/ ಪ.ಪಂಗಡ 90”खेत-तालाब की पॉलिथीन लाइनिंग की लागत का 80%, अधिकतम ₹70,000।
उन किसानों के लिए जो अनुसूचित जाति/जनजाति के नहीं हैं। लाल मिट्टी में बने तालाब के लिए लाइनिंग अनिवार्य है; गहरी काली मिट्टी में और पहाड़ी व तटीय क्षेत्रों (ज़ोन 9 और 10) में यह वैकल्पिक है, किसान की ज़रूरत के अनुसार (4.3, 4.3.1)। एचडीपीई लाइनिंग स्वीकृत संस्था लगाती है और जीपीएस फ़ोटो वाले निरीक्षण के बाद सब्सिडी उसी संस्था को दी जाती है (4.3)।
“ನೀರು ಇಂಗದಂತೆ ತಡೆಯಲು ಪಾಲಿಥೀನ್ ಹೊದಿಕೆ (ಸಾಮಾನ್ಯ ವರ್ಗಕ್ಕೆ ಗರಿಷ್ಠ-ರೂ.70,000 ಹಾಗೂ ಪ.ಜಾತಿ/ಪ.ಪಂಗಡಕ್ಕೆ ಗರಿಷ್ಠ-ರೂ.80,000 ಮಿತಿಯಲ್ಲಿ) — ಸಹಾಯಧನ (%): ಸಾಮಾನ್ಯ 80”खेत-तालाब की पॉलिथीन लाइनिंग की लागत का 90%, अधिकतम ₹80,000, अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए।
लाल मिट्टी में बने तालाब के लिए लाइनिंग अनिवार्य है; गहरी काली मिट्टी में और पहाड़ी व तटीय क्षेत्रों (ज़ोन 9 और 10) में यह वैकल्पिक है, किसान की ज़रूरत के अनुसार (4.3, 4.3.1)। एचडीपीई लाइनिंग स्वीकृत संस्था लगाती है और जीपीएस फ़ोटो वाले निरीक्षण के बाद सब्सिडी उसी संस्था को दी जाती है (4.3)।
“ನೀರು ಇಂಗದಂತೆ ತಡೆಯಲು ಪಾಲಿಥೀನ್ ಹೊದಿಕೆ (ಸಾಮಾನ್ಯ ವರ್ಗಕ್ಕೆ ಗರಿಷ್ಠ-ರೂ.70,000 ಹಾಗೂ ಪ.ಜಾತಿ/ಪ.ಪಂಗಡಕ್ಕೆ ಗರಿಷ್ಠ-ರೂ.80,000 ಮಿತಿಯಲ್ಲಿ) — ಸಹಾಯಧನ (%): ಪ.ಜಾತಿ/ ಪ.ಪಂಗಡ 90”खेत-तालाब के चारों ओर जीआई तार की बाड़ की लागत का 40% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 50%)।
“ಕೃಷಿ ಹೊಂಡದ ಸುತ್ತಲೂ ತಂತಿ ಬೇಲಿ (GI Wire Fencing) — ಸಹಾಯಧನ (%): ಸಾಮಾನ್ಯ 40, ಪ.ಜಾತಿ/ ಪ.ಪಂಗಡ 50”तालाब से पानी उठाने के लिए 10 एचपी तक के डीज़ल, पेट्रोल या सोलर पंप सेट की लागत का 80% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 90%)।
अगर आपके पास पहले से पंप सेट है, या किसी दूसरी योजना (एसएमएएम, राज्य कृषि यंत्रीकरण, पीएम-कुसुम, बागवानी) से मिल सकता है, तो उसे मौजूदा माना जाता है और यहाँ दोबारा नहीं दिया जाता (तालिका के नीचे विशेष सूचना)।
“ಹೊಂಡದಿಂದ ನೀರು ಎತ್ತಲು ಡೀಸೆಲ್ / ಪೆಟ್ರೋಲ್/ಸೋಲಾರ್ ಪಂಪ್ ಸೆಟ್ (upto 10 HP) (ಷರಾ: ಸೋಲಾರ್ ಪಂಪ್ಸೆಟ್ ಅಳವಡಿಸಿದ ಫಲಾನುಭವಿಗಳಿಗೆ ರೂ.30,000/- ಗಳ ಪ್ರೋತ್ಸಾಹಧನ ನೀಡುವುದು) — ಸಹಾಯಧನ (%): ಸಾಮಾನ್ಯ 80, ಪ.ಜಾತಿ/ ಪ.ಪಂಗಡ 90”खेत की मेड़ बनाने की लागत का 80% (अनुसूचित जाति/जनजाति को 90%)।
अगर मेड़ मनरेगा या वाटरशेड (पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 2.0) से बन सकती है, तो पहले वहीं से ली जाती है (तालिका के नीचे विशेष सूचना)।
“ಕ್ಷೇತ್ರ ಬದು ನಿರ್ಮಾಣ — ಸಹಾಯಧನ (%): ಸಾಮಾನ್ಯ 80, ಪ.ಜಾತಿ/ ಪ.ಪಂಗಡ 90”कच्ची खेत तलाई: लागत का 70%, अधिकतम ₹73,500, लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के लिए।
इसमें से 50% (up to ₹52,500) RKVY-PDMC(OI) से और 20% (अधिकतम ₹21,000) राज्य योजना से मिलता है; RKVY में बजट न हो तो पूरा अनुदान राज्य योजना से दिया जाता है (धारा 4.1 का नोट)। पूरी सीमा 1,200 घन मीटर या बड़ी तलाई पर है; 400 से 1,200 घन मीटर की तलाई पर अनुपात में अनुदान मिलता है, और 400 घन मीटर से छोटी तलाई पर कुछ नहीं (धारा 5.3)। गहराई अधिकतम 3 मीटर तक ही गिनी जाती है (धारा 5.4, 5.5)। अनुदान से पहले फव्वारा या ड्रिप सेट लगा होना चाहिए (धारा 1.4), और चारों कोनों पर रस्सी या चेन तथा चेतावनी बोर्ड ज़रूरी है (धारा 5.10, 5.11)।
“कच्चा फार्म पौण्ड निर्माण (इकाई लागत राशि रूपये 1,05,000/-) — लघु एवं सीमान्त कृषक/SC-ST कृषक: कच्चा फार्म पौण्ड निर्माण पर अनुदान इकाई लागत का 70 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 73,500/-जो भी कम हो, देय होगा”कच्ची खेत तलाई: लागत का 60%, अधिकतम ₹63,000, अन्य किसानों के लिए।
इसमें से 50% (up to ₹52,500) RKVY-PDMC(OI) से और बाकी टॉप-अप के रूप में राज्य योजना से मिलता है; RKVY में बजट न हो तो पूरा अनुदान राज्य योजना से दिया जाता है (धारा 4.1 का नोट)। पूरी सीमा 1,200 घन मीटर या बड़ी तलाई पर है; 400 से 1,200 घन मीटर की तलाई पर अनुपात में अनुदान मिलता है, और 400 घन मीटर से छोटी तलाई पर कुछ नहीं (धारा 5.3)। गहराई अधिकतम 3 मीटर तक ही गिनी जाती है (धारा 5.4, 5.5)। अनुदान से पहले फव्वारा या ड्रिप सेट लगा होना चाहिए (धारा 1.4), और चारों कोनों पर रस्सी या चेन तथा चेतावनी बोर्ड ज़रूरी है (धारा 5.10, 5.11)।
“कच्चा फार्म पौण्ड निर्माण (इकाई लागत राशि रूपये 1,05,000/-) — अन्य कृषक: कच्चा फार्म पौण्ड निर्माण पर इकाई लागत का 60 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 63,000/-जो भी कम हो, देय होगा”प्लास्टिक लाइनिंग वाली खेत तलाई: लागत का 90%, अधिकतम ₹1,35,000, लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के लिए।
इसमें से 50% (up to ₹75,000) RKVY-PDMC(OI) से और 40% (अधिकतम ₹60,000) राज्य योजना से मिलता है; RKVY में बजट न हो तो पूरा अनुदान राज्य योजना से दिया जाता है (धारा 4.1 का नोट)। पूरी सीमा 1,200 घन मीटर या बड़ी तलाई पर है; 400 से 1,200 घन मीटर की तलाई पर अनुपात में अनुदान मिलता है, और 400 घन मीटर से छोटी तलाई पर कुछ नहीं (धारा 5.3)। गहराई अधिकतम 3 मीटर तक ही गिनी जाती है (धारा 5.4, 5.5)। अनुदान से पहले फव्वारा या ड्रिप सेट लगा होना चाहिए (धारा 1.4), और चारों कोनों पर रस्सी या चेन तथा चेतावनी बोर्ड ज़रूरी है (धारा 5.10, 5.11)।
“प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड निर्माण (इकाई लागत राशि रूपये 1,50,000/-) — प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड निर्माण पर अनुदान इकाई लागत का 90 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 1,35,000/-जो भी कम हो, देय होगा।”प्लास्टिक लाइनिंग वाली खेत तलाई: लागत का 80%, अधिकतम ₹1,20,000, अन्य किसानों के लिए।
इसमें से 50% (up to ₹75,000) RKVY-PDMC(OI) से और 30% (अधिकतम ₹45,000) राज्य योजना से मिलता है; RKVY में बजट न हो तो पूरा अनुदान राज्य योजना से दिया जाता है (धारा 4.1 का नोट)। पूरी सीमा 1,200 घन मीटर या बड़ी तलाई पर है; 400 से 1,200 घन मीटर की तलाई पर अनुपात में अनुदान मिलता है, और 400 घन मीटर से छोटी तलाई पर कुछ नहीं (धारा 5.3)। गहराई अधिकतम 3 मीटर तक ही गिनी जाती है (धारा 5.4, 5.5)। अनुदान से पहले फव्वारा या ड्रिप सेट लगा होना चाहिए (धारा 1.4), और चारों कोनों पर रस्सी या चेन तथा चेतावनी बोर्ड ज़रूरी है (धारा 5.10, 5.11)।
“प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड निर्माण (इकाई लागत राशि रूपये 1,50,000/-) — अन्य कृषक: प्लास्टिक लाईनिंग फार्म पौण्ड निर्माण पर अनुदान इकाई लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 1,20,000/-जो भी कम हो, देय होगा।”पक्की या प्लास्टिक लाइनिंग डिग्गी की इकाई लागत का 75% (50% केंद्र, 25% राज्य टॉप-अप), अधिकतम ₹3,00,000।
केवल उन नहरी क्षेत्रों में जहाँ वारबंदी स्वीकृत है (धारा 1.1), कम से कम 0.5 हेक्टेयर सिंचित ज़मीन (धारा 1.3), और डिग्गी कम से कम 4 लाख लीटर की (धारा 5.1)। एक परिवार (जन आधार) को एक ही डिग्गी; पहले लाभ ले चुका किसान दोबारा पात्र नहीं (धारा 1.4)।
“अनुदान सीमा:- भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार पक्की डिग्गी का निर्माण करने पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत या राशि रुपयें 350/- प्रति घन मीटर भराव क्षमता तथा प्लास्टिक लाईनिंग डिग्गी का निर्माण करने पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत या राशि रुपयें 100/- प्रति घन मीटर भराव क्षमता अथवा अधिकतम रूपये 2.00 लाख, जो भी कम हो अनुदान का प्रावधान है। पक्की अथवा प्लास्टिक लाईनिंग डिग्गी का निर्माण करने पर टॉप–अप अनुदान इकाई लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रू. 1.00 लाख, जो भी कम हो, राज्य योजना से देय होगा।”लघु और सीमांत किसानों को 10% ज़्यादा (अधिकतम ₹40,000 अतिरिक्त) — कुल इकाई लागत का 85%, अधिकतम ₹3,40,000।
आप लघु/सीमांत तभी माने जाएँगे जब जन आधार में यह दर्ज हो (या प्रमाण-पत्र लगाएँ) और जमाबंदी में आपके हिस्से की ज़मीन इस सीमा में हो (धारा 2.3)। क्षेत्र, ज़मीन और आकार की शर्तें वही हैं जो सब किसानों के लिए (धारा 1.1, 1.3, 5.1)।
“लघु एवं सीमान्त श्रेणी के कृषकों को इकाई लागत का 10 प्रतिशत या राशि रूपये 40 हजार अतिरिक्त अनुदान राज्य योजना से देय होगा।”पाइपलाइन की लागत का 50%, एचडीपीई पर ₹50 प्रति मीटर, पीवीसी पर ₹35 और एचडीपीई लेफ़्लैट पाइप पर ₹20 प्रति मीटर तक, और अधिकतम ₹15,000।
अपनी ज़मीन और कुआँ, ट्यूबवेल या दूसरा जल स्रोत जिस पर बिजली, डीज़ल, ट्रैक्टर या सोलर पंप हो, ज़रूरी है; साझा कुएँ के हिस्सेदार अपनी-अपनी पाइपलाइन पर अलग-अलग अनुदान ले सकते हैं (धारा 1.1, 1.2)। केवल 63 मिमी या बड़े व्यास के पाइप पर अनुदान है (धारा 3.3), और पहले इस योजना का लाभ ले चुका किसान दोबारा पात्र नहीं (धारा 1.6)।
“4.1. सिंचाई पाईपलाइन पर स्त्रोत से खेत तक पानी ले जाने के लिए समस्त श्रेणी के कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि रू. 50/- प्रति मीटर एचडीपीई पाईप पर या राशि रू. 35/- प्रति मीटर पीवीसी पाईप पर या राशि रू. 20/- प्रति मीटर एचडीपीई लेमिनेटेड ले फ्लेट ट्यूब पाईप पर, अधिकतम राशि रूपये 15000/- जो भी कम हो, अनुदान देय होगा।”लघु और सीमांत किसानों को 50% के ऊपर इकाई लागत का 10% अतिरिक्त, अधिकतम ₹3,000।
यह सब किसानों वाले 50% के अतिरिक्त है, इसलिए लघु या सीमांत किसान को कुल ₹18,000 तक मिल सकते हैं। आप लघु/सीमांत तभी माने जाएँगे जब जन आधार में यह दर्ज हो (या प्रमाण-पत्र लगाएँ) और जमाबंदी में आपका हिस्सा इस सीमा में हो (धारा 2.3)।
“लघु एवं सीमान्त श्रेणी के कृषकों को इकाई लागत का 10 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 3000/- जो भी कम हो, अतिरिक्त अनुदान देय होगा।”पम्प के आकार के हिसाब से तय अनुदान: 3 एचपी पर ₹1,09,392, 5 एचपी पर ₹1,68,518 और 7.5 एचपी पर ₹2,28,406; 10 एचपी पम्प पर 7.5 एचपी जितना ही अनुदान मिलता है, बाक़ी आप देते हैं।
केवल उस किसान के लिए जिसके पास खेती का बिजली कनेक्शन नहीं है, कम से कम 0.4 हेक्टेयर ज़मीन (अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति किसानों के लिए 3 व 5 एचपी पर 0.2 हेक्टेयर) और जल स्रोत है, और जो ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर या स्प्रिंकलर से सिंचाई करेगा (धारा 2, 3)। बाक़ी क़ीमत आप देते हैं (जैसे ₹2,02,933 के 3 एचपी एसी सरफेस पम्प पर ₹93,541), और लागत के 30% तक बैंक ऋण ले सकते हैं (धारा 9.3)। आपका नाम बिजली कंपनी को भेजा जाता है और बाद में कृषि बिजली कनेक्शन पर अनुदान नहीं मिलेगा (धारा 4.3)। 22.09.2025 से पहले बने बिलों पर पुरानी दरें लागू रहेंगी (07.10.2025 का पत्र, बिंदु 1)।
“9.1 पीएम कुसुम कम्पोनेंट– बी के तहत ऑफ ग्रिड स्टेन्ड अलोन सौर ऊर्जा पम्प परियोजना अन्तर्गत 60 प्रतिशत (30 प्रतिशत केन्द्रीय मद तथा 30 प्रतिशत राज्य मद) अनुदान देय होगा। — Solar pump category wise revised rate and subsidy effetive from 22.09.2025: General Farmer Subsidy 109392 (3 HP), 168518 (5 HP), 228406 (7.5 HP and 10 HP)”अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को हर आकार के पम्प पर ₹45,000 अतिरिक्त अनुदान मिलता है, जिससे उनका अपना हिस्सा उतना कम हो जाता है।
पत्र में हर पम्प आकार पर एक जैसे ₹45,000 छपे हैं (जैसे 3 एचपी एसी सरफेस पम्प: किसान हिस्सा ₹93,541 की जगह ₹48,541)। यह सामान्य अनुदान के ऊपर मिलता है। यहाँ 100% सिर्फ़ तय राशि दिखाने का तरीका है: इस मद से ₹45,000 से ज़्यादा कभी नहीं मिलता।
“Additional subsidy for SC/ST Farmer — Additional subsidy 45000 (S.N. 1–28)”ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर या फव्वारा संयंत्र की इकाई लागत का 75% लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला किसानों को; अन्य किसानों को 70%।
लघु और सीमांत किसानों के लिए 75% का बँटवारा: केन्द्र 33% + राज्य 22% + राज्य का अतिरिक्त 20%; अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला के लिए तालिका में 33/27 + 22/18 + 20/30 छपा है; अन्य किसानों के लिए 27% + 18% + 25% = 70%। अनुदान प्रति किसान 0.2 से 5 हेक्टेयर तक है, और उसी ज़मीन पर 7 वर्ष तक दोबारा नहीं (खण्ड ब, बिंदु 5, 7)। 2025-26 के दिशा-निर्देश 2026-27 में भी लागू हैं (14.05.2026 का पत्र)।
“ड्रिप, मिनि स्प्रिंकलर तथा स्प्रिंकलर संयंत्र पर देय अनुदान — ड्रिप एवं मिनि स्प्रिंकलर: लघु सीमान्त कृषक/एससी/एसटी/महिला 75 प्रतिशत, अन्य कृषक 70 प्रतिशत; स्प्रिंकलर: 75 प्रतिशत, 70 प्रतिशत (इकाई लागत का)”ड्रिप या फव्वारा संयंत्र के स्वचालन (ऑटोमेशन) पर हर किसान को 75% अनुदान; केन्द्र के ₹40,000 प्रति हेक्टेयर से ऊपर की राशि राज्य देता है।
“सूक्ष्म सिंचाई स्वचालन (ऑटोमेशन) हेतु समस्त श्रेणी कृषकों को 75 प्रतिशत अनुदान देय होगा। जिसमें के.प्र.यो. द्वारा देय रूपये 40000 प्रति हैक्टेयर से अधिक की देय राशि अतिरिक्त अनुदान/राज्य संसाधन मद से देय होगा।”ड्रिप या मिनी-स्प्रिंकलर सिस्टम की लागत का 85%, 5 हेक्टेयर तक, ज़मीन के मालिक हर श्रेणी के किसान के लिए।
दर मिकाडा के 2021-22 दिशानिर्देशों से है; इसकी पुष्टि करने वाला बाद का कोई आदेश हमें नहीं मिला। लाभ एक बार मिलता है; उसी ज़मीन पर ड्रिप या मिनी-स्प्रिंकलर के लिए 7 साल बाद ही दोबारा (धारा 13, 14)। ड्रिप की मेन और सब-लाइन ज़मीन के नीचे होनी चाहिए (धारा 19)। मिट्टी का काम और जीएसटी सब्सिडी में नहीं गिने जाते (धारा 17)।
“18. The subsidy on MI systems will be applicable @ 85% cost of the system for all categories of farmers in the State upto a land limit of 5 Hectare. However, in case of Aluminum based Sprinkler irrigation system, the assistance will be of maximum of Rs. 28,650/- for SC / ST farmers; Rs. 24,500/- for Small & Marginal farmers; and Rs. 21,000/- for other farmers upto a maximum of one hectare area.”एल्युमिनियम स्प्रिंकलर सेट की लागत का 85%, अधिकतम ₹28,650, अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए, एक हेक्टेयर तक।
दर मिकाडा के 2021-22 दिशानिर्देशों से है; इसकी पुष्टि करने वाला बाद का कोई आदेश हमें नहीं मिला। मिट्टी का काम और जीएसटी सब्सिडी में नहीं गिने जाते (धारा 17)।
“18. The subsidy on MI systems will be applicable @ 85% cost of the system for all categories of farmers in the State upto a land limit of 5 Hectare. However, in case of Aluminum based Sprinkler irrigation system, the assistance will be of maximum of Rs. 28,650/- for SC / ST farmers; Rs. 24,500/- for Small & Marginal farmers; and Rs. 21,000/- for other farmers upto a maximum of one hectare area.”एल्युमिनियम स्प्रिंकलर सेट की लागत का 85%, अधिकतम ₹24,500, छोटे और सीमांत किसानों के लिए, एक हेक्टेयर तक।
दर मिकाडा के 2021-22 दिशानिर्देशों से है; इसकी पुष्टि करने वाला बाद का कोई आदेश हमें नहीं मिला। मिट्टी का काम और जीएसटी सब्सिडी में नहीं गिने जाते (धारा 17)।
“18. The subsidy on MI systems will be applicable @ 85% cost of the system for all categories of farmers in the State upto a land limit of 5 Hectare. However, in case of Aluminum based Sprinkler irrigation system, the assistance will be of maximum of Rs. 28,650/- for SC / ST farmers; Rs. 24,500/- for Small & Marginal farmers; and Rs. 21,000/- for other farmers upto a maximum of one hectare area.”एल्युमिनियम स्प्रिंकलर सेट की लागत का 85%, अधिकतम ₹21,000, अन्य किसानों के लिए, एक हेक्टेयर तक।
दर मिकाडा के 2021-22 दिशानिर्देशों से है; इसकी पुष्टि करने वाला बाद का कोई आदेश हमें नहीं मिला। मिट्टी का काम और जीएसटी सब्सिडी में नहीं गिने जाते (धारा 17)।
“18. The subsidy on MI systems will be applicable @ 85% cost of the system for all categories of farmers in the State upto a land limit of 5 Hectare. However, in case of Aluminum based Sprinkler irrigation system, the assistance will be of maximum of Rs. 28,650/- for SC / ST farmers; Rs. 24,500/- for Small & Marginal farmers; and Rs. 21,000/- for other farmers upto a maximum of one hectare area.”5 एकड़ तक वाले अनुसूचित जाति या जनजाति किसान को ड्रिप सिस्टम पर 100%, अधिकतम ₹2,18,000।
प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Small Farmers /Medium Farmers Belonging to SC/ST Category — Central assistance from GoI 33%, Matching State Share 22%, Additional State share 45%, Total State Share 67%, Total % of subsidy 100, Farmer Contribution 0%, Ceiling limit: Area in acres 5, subsidy amount in lakhs 2.18”5 एकड़ तक वाले किसान (अनुसूचित जाति/जनजाति के अलावा) को ड्रिप सिस्टम पर 90%, अधिकतम ₹2,18,000।
प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Small Farmers /Medium Farmers other than SC/ST category — Central assistance from GoI 33%, Matching State Share 22%, Additional State share 35%, Total State Share 57%, Total % of subsidy 90, Farmer Contribution 10%, Ceiling limit: Area in acres 5, subsidy amount in lakhs 2.18”रायलसीमा या प्रकाशम ज़िलों में 5 से 10 एकड़ वाले किसान, या ITDA क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति किसान को ड्रिप सिस्टम पर 90%, अधिकतम ₹3,46,000।
केवल नामित ज़िलों में 5 से 10 एकड़ वाले खेतों के लिए। प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Medium farmers of Rayalaseema, Prakasam Districts and ST Farmers in ITDA areas (above 5 to 10 Ac) — Central assistance from GoI 27%, Matching State Share 18%, Additional State share 45%, Total State Share 63%, Total % of subsidy 90, Farmer Contribution 10%, Ceiling limit: Area in acres 10, subsidy amount in lakhs 3.46”प्रकाशम के अलावा तटीय ज़िलों में 5 से 10 एकड़ वाले किसान को ड्रिप सिस्टम पर 70%, अधिकतम ₹3,10,000।
केवल प्रकाशम को छोड़ तटीय ज़िलों में 5 से 10 एकड़ वाले खेतों के लिए। प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Medium farmers of Coastal Districts (above 5 to 10 Ac) except Prakasam — Central assistance from GoI 27%, Matching State Share 18%, Additional State share 25%, Total State Share 43%, Total % of subsidy 70, Farmer Contribution 30%, Ceiling limit: Area in acres 10, subsidy amount in lakhs 3.10”बड़े किसान को 12.5 एकड़ तक ड्रिप सिस्टम पर 50%, अधिकतम ₹4,00,000।
प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Big farmers — Central assistance from GoI 27%, Matching State Share 18%, Additional State share 5%, Total State Share 23%, Total % of subsidy 50, Farmer Contribution 50%, Ceiling limit: Area in acres 12.5, subsidy amount in lakhs 4.00”किसी भी वर्ग के लघु या सीमांत किसान को 5 एकड़ तक स्प्रिंकलर सेट पर 50%, अधिकतम ₹19,000।
प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Small and Marginal farmers of all categories — Central assistance from GoI 33%, Matching State Share 17%, Additional State share 0%, Total State Share 17%, Total % of subsidy 50, Farmers Contribution 50%, Ceiling limit: Area in acres 5, subsidy amount in lakhs 0.19”अन्य किसानों को 12.5 एकड़ तक स्प्रिंकलर सेट पर 50%, अधिकतम ₹19,000।
प्रतिशत APMIP में सूचीबद्ध कंपनी द्वारा डिज़ाइन और बिल किए गए सिस्टम की लागत पर लगता है; सब्सिडी आपकी पंक्ति में छपी अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होती।
“Other famers — Central assistance from GoI 27%, Matching State Share 18%, Additional State share 5%, Total State Share 23%, Total % of subsidy 50, Farmers Contribution 50%, Ceiling limit: Area in acres 12.5, subsidy amount in lakhs 0.19”नामित आठ ज़िलों में से किसी में वन अधिकार पट्टाधारक किसान को ड्रिप सिस्टम की पूरी (100%) लागत मिलती है।
केवल नामित आठ ज़िलों — अल्लूरी सीतारामराजू, एलुरु, पार्वतीपुरम मन्यम, नंद्याल, पलनाडु, प्रकाशम, श्रीकाकुलम और विजयनगरम — में वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा पाने वाले किसानों के लिए, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत (पैरा 4)। बाक़ी किसानों पर सामान्य APMIP पैटर्न लागू है।
“hereby approve the extension of 100% subsidy for Drip Irrigation … under Per Drop More Crop (PDMC) Scheme to FRA Patta Holders in the eight identified districts viz., 1.Alluri Sitharamaraju, 2.Eluru, 3.Parvathipuram Manyam, 4.Nandyal, 5.Palnadu, 6.Prakasam, 7. Srikakulam & 8.Vizianagaram for implementation of Dhatri Aaba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan on saturation mode.”नामित आठ ज़िलों में से किसी में वन अधिकार पट्टाधारक किसान को स्प्रिंकलर सेट की लागत का 90% मिलता है।
केवल नामित आठ ज़िलों — अल्लूरी सीतारामराजू, एलुरु, पार्वतीपुरम मन्यम, नंद्याल, पलनाडु, प्रकाशम, श्रीकाकुलम और विजयनगरम — में वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा पाने वाले किसानों के लिए, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत (पैरा 4)। बाक़ी किसानों पर सामान्य APMIP पैटर्न लागू है।
“hereby approve the extension of … 90% subsidy for Sprinkler Irrigation under Per Drop More Crop (PDMC) Scheme to FRA Patta Holders in the eight identified districts … for implementation of Dhatri Aaba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan on saturation mode.”अनुसूचित जाति और जनजाति किसानों को 5 हेक्टेयर तक ड्रिप सिंचाई पर 90% सब्सिडी।
5 हेक्टेयर या आपके स्वामित्व-पत्र की ज़मीन, जो भी कम हो (धारा 3.2, 3.1.7)। जिस ज़मीन पर पहले सब्सिडी मिल चुकी है, उस पर 7 साल तक दोबारा नहीं मिलेगी (धारा 3.1.7)। आपकी श्रेणी स्वामित्व-पत्र की कुल ज़मीन से तय होती है (धारा 3.1.6)।
“All SC /ST Farmer are eligible for 90% subsidy.”पिछड़ा वर्ग किसानों और लघु व सीमांत किसानों को 5 हेक्टेयर तक ड्रिप सिंचाई पर 80% सब्सिडी।
पिछड़ा वर्ग किसानों को ज़मीन चाहे जितनी हो, 80% मिलता है; आपके उत्तरों से हम पिछड़ा वर्ग नहीं पहचान सकते, इसलिए कैलकुलेटर यह पंक्ति लघु और सीमांत किसानों को दिखाता है — बड़ी जोत वाले पिछड़ा वर्ग किसान 70% नहीं, 80% मानें। 5 हेक्टेयर या आपके स्वामित्व-पत्र की ज़मीन, जो भी कम हो (धारा 3.2, 3.1.7)। जिस ज़मीन पर पहले सब्सिडी मिल चुकी है, उस पर 7 साल तक दोबारा नहीं मिलेगी (धारा 3.1.7)। आपकी श्रेणी स्वामित्व-पत्र की कुल ज़मीन से तय होती है (धारा 3.1.6)।
“All BC, SF, MF farmers are eligible for 80% subsidy.”बाक़ी सभी किसानों को 5 हेक्टेयर तक ड्रिप सिंचाई पर 70% सब्सिडी।
5 हेक्टेयर या आपके स्वामित्व-पत्र की ज़मीन, जो भी कम हो (धारा 3.2, 3.1.7)। जिस ज़मीन पर पहले सब्सिडी मिल चुकी है, उस पर 7 साल तक दोबारा नहीं मिलेगी (धारा 3.1.7)। आपकी श्रेणी स्वामित्व-पत्र की कुल ज़मीन से तय होती है (धारा 3.1.6)।
“All other farmers are eligible for 70%.”किसी भी किसान को पोर्टेबल स्प्रिंकलर सेट पर 65%, केवल 1 हेक्टेयर की इकाई तक — ₹23,385 की इकाई लागत पर अधिकतम ₹15,200।
दिशानिर्देश पोर्टेबल स्प्रिंकलर पर 65% सब्सिडी केवल 1 हेक्टेयर की इकाई तक देते हैं (धारा 3.2, पृ. 15/63)। 0.4 हेक्टेयर से कम के छोटे सेट की इकाई लागत ₹16,969 और सब्सिडी ₹11,030 है (उसी तालिका की पंक्ति 41)।
“Portable Sprinkler (25 Nos HDPE Pipes, 5 Sprinkler Nozzles, 5 Nos Sprinkler Coupler etc) — TGMIP Unit Costs as per GO.Ms.No.9, Dt:28-03-2022 (Rs. per ha) 23385 — All Categories (65% Subsidy) 15200”ड्रिप सिंचाई के लिए सीमेंट की पानी की टंकी (कम से कम 25.50 घनमीटर, ड्रिप सेट के साथ): लागत का 50%, अधिकतम ₹50,000, प्रति खाता एक बार।
HRT-2 सामान्य (अनुसूचित जाति/जनजाति उप-योजना से बाहर) बजट मद है; यह राज्य के सभी किसानों और वन अधिकार पत्रधारकों के लिए है (परिशिष्ट-1, 3)। अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को यही घटक आमतौर पर HRT-4 और HRT-3 संकल्पों में मिलते हैं, जिनकी दर ज़्यादा हो सकती है। अनुपातिक इकाई लागत और आपके असली ख़र्च में से कम गिना जाता है (परिशिष्ट-1, 18)।
“ડ્રીપ ઈરીગેશન માટે પાણી સંગ્રહના ટાંકા બનાવવા • યુનિટ કોસ્ટ - રૂ. ૧.૦૦ લાખ/એકમ • સામાન્ય ખેડુતને ખર્ચના ૫૦ ટકા (મહત્તમ રૂ. ૫૦૦૦૦/-ની મર્યાદામાં)”परियोजना में एक सिंचाई स्रोत — ट्यूबवेल (₹2.50 लाख तक), लाइनिंग वाला जल संग्रह ढाँचा (₹100/घनमीटर) या स्रोत से पाइपलाइन (₹150/मीटर, 2.5 किमी तक): व्यक्ति और ट्रस्ट को 50%, ₹1,25,000 तक; एफ़पीओ और सहकारी को 75%, ₹1,87,500 तक।
परियोजना आधारित, 2 हेक्टेयर या ज़्यादा (बाग़ वाले हिस्से में व्यक्ति और ट्रस्ट 4 हेक्टेयर तक; मिलकर खेती करने वाले एफ़पीओ/एफ़पीसी/सहकारी सदस्य 50 हेक्टेयर तक), जीवन में एक बार। बाग़ घटक अनिवार्य है और मद 2–7 में से कम से कम दो के साथ लेना होगा। इकाई लागत MIDH-NHM दिशा-निर्देशों के अनुसार; बाग़ की सहायता पूरा होने पर दो किस्तों (60:40) में, दूसरी 90% पौधे ज़िंदा रहने पर।
“૨. પિયતના સાધનો યુનિટ કોસ્ટ : રૂ. ૨.૫૦ લાખ ની મર્યાદામાં … ➢ ઉપરોક્ત ત્રણ પૈકી પિયતના કોઇપણ એક સ્ત્રોત/સુવિધા પર વ્યક્તિગત ખેડુત તથા રજીસ્ટર્ડ ટ્રસ્ટને ખર્ચના ૫૦% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૧,૨૫,૦૦૦/- તેમજ FPO, FPC, સહકારી મંડળી ને ખર્ચના ૭૫% મુજબ મહત્તમ રૂ. ૧,૮૭,૫૦૦/- સહાય પ્રોરેટા મુજબ મળવાપાત્ર રહેશે.”नलकूप खनन (केसिंग पाइप सहित) की वास्तविक लागत, अधिकतम ₹10,000 (सामान्य), ₹15,000 (अन्य पिछड़ा वर्ग) या ₹18,000 (अ.जा./अ.ज.जा.)।
केवल तब जब आपके पास सिंचाई साधन न हो; 300 मीटर के भीतर दूसरा नलकूप या हैंडपंप न हो (कंडिका 7(4)–(5), 9(ब)(2))। कृषि विभाग की किसान समृद्धि योजना के नियमों से।
“नलकूप खनन पर अनुदान — सामान्य वर्ग: खनन की वास्तविक (केसिंग पाइप सहित) लागत अथवा रू. 10,000/– जो भी कम हो; अन्य पिछड़ा वर्ग: … रू. 15,000/–; अ.जा./अ.ज.जा.: … रू. 18,000/– जो भी कम हो”सफल नलकूप पर पंप और सहायक सामग्री की लागत, अधिकतम ₹15,000 (सामान्य), ₹20,000 (अन्य पिछड़ा वर्ग) या ₹25,000 (अ.जा./अ.ज.जा.)।
अपनी पसंद के पंजीकृत डीलर से आई.एस.आई. मार्का पंप; पाँच साल तक पंप बेचा नहीं जा सकता (कंडिका 9(ब)(6), (9))।
“सफल नलकूपों पर पंप प्रतिष्ठापन पर अनुदान — सामान्य वर्ग: पंप एवं सहायक सामग्री की लागत अथवा रू. 15,000/– जो भी कम हो; अन्य पिछड़ा वर्ग: … रू. 20,000/–; अ.जा./अ.ज.जा.: … रू. 25,000/– जो भी कम हो”बागवानी फ़सल उगाने वाले हर वर्ग के किसान को पहले 2 हेक्टेयर तक ड्रिप या स्प्रिंकलर की स्वीकृत लागत का 90%।
90% में से 33% केंद्र का, 22% राज्य का अनिवार्य हिस्सा और 35% राज्य का अतिरिक्त टॉप-अप है (लेखा शीर्ष 2401-00-108-2-59 से)। इसका आदेश स.आ. सं. ತೋಇ 80 ತೋಯೋಕಾ 2025, दिनांक 02-05-2025 है। दिशानिर्देश 2025-26 के हैं; 2026-27 के बजट में टॉप-अप शीर्ष के लिए राशि रखी गई है।
“2.00 ಹೆಕ್ಟೇರ್ ವರೆಗಿನ ಸಹಾಯಧನ — ಎಲ್ಲಾ ವರ್ಗದ ರೈತರಿಗೆ: ಕೇಂದ್ರ ಪಾಲು 33, ರಾಜ್ಯ ಪಾಲು ಕಡ್ಡಾಯವಾಗಿ ನೀಡಬೇಕಾದ ಪಾಲು 22, ಹೆಚ್ಚುವರಿ ಪಾಲು 35, ಒಟ್ಟು ರಾಜ್ಯ ಪಾಲು 57, ಒಟ್ಟು 90 (%). … 6) ಎಲ್ಲಾ ವರ್ಗದ ರೈತರಿಗೆ ಮೊದಲ ಗರಿಷ್ಠ 2.00 ಹೆಕ್ಟೇರ್ವರೆಗೆ ಶೇ.90ರಷ್ಟು ಸಹಾಯಧನ ನೀಡಲು ಅವಕಾಶವಿರುತ್ತದೆ.”2 हेक्टेयर से ऊपर 5 हेक्टेयर तक के रकबे के लिए स्वीकृत लागत का 45% (सब्ज़ी और फूल: केवल 2 हेक्टेयर तक)।
“2.00 ಹೆಕ್ಟೇರ್ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟು ಸಹಾಯಧನ [2.00 ಹೆಕ್ಟೇರ್ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟು 5.00 ಹೆಕ್ಟೇರ್ವರೆಗೂ] — ಎಲ್ಲಾ ವರ್ಗದ ರೈತರಿಗೆ: ಕೇಂದ್ರ ಪಾಲು 27, ರಾಜ್ಯ ಪಾಲು 18, ಒಟ್ಟು 45 (%).”नारियल बाग़ में ड्रिप या स्प्रिंकलर की योग्य लागत का 30% तक, केंद्र की “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” सब्सिडी के ऊपर; दोनों मिलाकर 85% (छोटे और सीमांत) या 75% (बाक़ी) से ज़्यादा नहीं।
केवल स्वीकृत BoQ के सूक्ष्म सिंचाई/फ़र्टिगेशन घटक गिने जाते हैं; PDMC के दूसरे काम शामिल नहीं। वर्षा-आधारित, पानी की कमी वाले और गंभीर भूजल क्षेत्रों को प्राथमिकता (पैरा 8)।
“A State Top-Up Subsidy of up to 30% of the admissible eligible cost shall be provided to eligible coconut farmers in convergence with the assistance available under PDMC. The combined assistance under PDMC and the State Top-Up Subsidy shall be limited to 85% of the admissible eligible cost in the case of Small and Marginal Farmers and 75% in the case of other farmers”